मेडिकल दाखिले में बड़ी राहत, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बदल दिए नीट यूजी सीट अपग्रेड और वेरिफिकेशन के नियम स्वास्थ्य मंत्रालय ने नीट यूजी काउंसलिंग नियमों में बड़े बदलावों की घोषणा की है, जिससे उम्मीदवारों को अब सीट अपग्रेडेशन और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए मेडिकल कॉलेजों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी राहत भरी घोषणा की है। नीट यूजी काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों को अब मेडिकल दाखिले के दौरान बार-बार अलग-अलग शहरों और कॉलेजों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी, सरल और तनावमुक्त बनाने के उद्देश्य से काउंसलिंग के नियमों में व्यापक बदलाव किए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद इन नए दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप दिया गया है। इन ऐतिहासिक सुधारों में मुख्य रूप से 'वन-टाइम फिजिकल रिपोर्टिंग' और 'ऑनलाइन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन' की व्यवस्था शामिल की गई है, जिससे अभ्यर्थियों का समय, पैसा और अनावश्यक भागदौड़ बचेगी। वन-टाइम फिजिकल रिपोर्टिंग से खत्म हुई अभ्यर्थियों की भागदौड़ काउंसलिंग के पुराने नियमों के कारण अभ्यर्थियों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। यदि किसी छात्र को पहले दौर की काउंसलिंग में कोई कॉलेज आवंटित होता था, तो उसे अपनी सीट सुरक्षित करने और दस्तावेज जमा करने के लिए उस कॉलेज में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य था। भले ही छात्र दूसरे दौर में बेहतर कॉलेज पाने के लिए सीट अपग्रेड का विकल्प चुनता था, फिर भी उसे पहले आवंटित संस्थान में जाकर कागजी कार्रवाई पूरी करनी होती थी। नए संशोधित नियमों के तहत इस बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। अब पहले या दूसरे दौर में सीट आवंटित होने पर अभ्यर्थी अपने घर से ही मोबाइल या लैपटॉप के जरिए ऑनलाइन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे और प्रोविजनल एडमिशन ले सकेंगे। सीट अलॉटमेंट में 'फ्लोट' और 'फ्रीज' विकल्पों का पूरा गणित मेडिकल काउंसलिंग प्रक्रिया को डिजिटल और सुगम बनाने के लिए मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) ने काउंसलिंग पोर्टल पर दो प्रमुख विकल्प उपलब्ध कराए हैं। पहला विकल्प है 'फ्लोट' (Float)। यदि किसी अभ्यर्थी को पहले या दूसरे चरण में सीट मिल जाती है, लेकिन वह अगले चरण की काउंसलिंग में इससे बेहतर मेडिकल कॉलेज में दाखिला चाहता है, तो उसे 'फ्लोट' विकल्प चुनना होगा। यह विकल्प चुनने पर छात्र की वर्तमान सीट सुरक्षित रहती है और उसके दस्तावेजों का सत्यापन ऑनलाइन माध्यम से हो जाता है। यदि अगले दौर में छात्र को उसकी पसंद का बेहतर कॉलेज आवंटित हो जाता है, तो उसकी पुरानी सीट स्वतः ही किसी अन्य पात्र अभ्यर्थी को हस्तांतरित हो जाएगी। दूसरा प्रमुख विकल्प है 'फ्रीज' (Freeze)। यदि कोई छात्र अपनी आवंटित सीट और मेडिकल कॉलेज से पूरी तरह संतुष्ट है, या फिर तीसरे दौर की काउंसलिंग के बाद अपनी सीट बरकरार रखना चाहता है, तो उसे 'फ्रीज' विकल्प का चयन करना होगा। इस विकल्प का चयन करने के बाद अभ्यर्थी को निर्धारित समयसीमा के भीतर संबंधित मेडिकल कॉलेज में जाकर भौतिक रूप से उपस्थिति दर्ज करानी होगी, अपने मूल दस्तावेज जमा करने होंगे और प्रवेश शुल्क का भुगतान करके दाखिला प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऑनलाइन सीट रेजिग्नेशन और एनआरआई कोटे के लिए नया पोर्टल नीट यूजी काउंसलिंग को और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए एमसीसी ने दो अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार भी किए हैं। पहला बदलाव सीट छोड़ने की प्रक्रिया में किया गया है। यदि कोई अभ्यर्थी किसी कारणवश अपनी आवंटित सीट त्यागना चाहता है या इस्तीफा देना चाहता है, तो उसे इसके लिए कॉलेज जाने की आवश्यकता नहीं होगी। अभ्यर्थी अब एमसीसी के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से सीधे ऑनलाइन मोड में अपनी सीट से रेजिग्नेशन दे सकता है। इसके अलावा, एनआरआई कोटे के तहत आवेदन करने वाले छात्रों की सुविधा के लिए एक अलग समर्पित पोर्टल विकसित किया गया है। पूर्व में एनआरआई श्रेणी के दस्तावेज ईमेल के माध्यम से भेजे जाते थे, जिसके कारण कई बार महत्वपूर्ण ईमेल स्पैम फोल्डर में चले जाते थे या तकनीकी कारणों से गुम हो जाते थे। नए सिंगल-विंडो पोर्टल के जरिए अब एनआरआई अभ्यर्थियों के सभी कागजातों की जांच और सत्यापन सीधे ऑनलाइन माध्यम से पारदर्शी तरीके से की जाएगी। साइबर सुरक्षा, ऑटो-डेटा फेच और दिव्यांग छात्रों को विशेष सुविधाएं काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की धांधली या तकनीकी गड़बड़ी को रोकने के लिए व्यापक साइबर सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के सहयोग से एक बेहद सुरक्षित डिजिटल ढांचा तैयार किया है। इस नए सिस्टम में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) का डेटा स्वतः ही पोर्टल पर उपलब्ध (प्री-पॉपुलेट) हो जाएगा, जिससे फॉर्म भरते समय अभ्यर्थियों द्वारा गलत जानकारी दर्ज होने की संभावना न के बराबर रहेगी। विशेष रूप से दिव्यांग अभ्यर्थियों (PwBD) को राहत देते हुए सरकार ने शारीरिक मूल्यांकन केंद्रों (असेसमेंट सेंटर्स) की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी की है। दिव्यांग छात्रों की सुविधा के लिए इन केंद्रों की संख्या 16 से बढ़ाकर 61 कर दी गई है, ताकि उन्हें अपने नजदीकी केंद्र पर जांच कराने में आसानी हो। इसके अतिरिक्त, काउंसलिंग के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की शिकायत या विवाद के त्वरित समाधान के लिए संशोधित नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) गाइडलाइंस के तहत एक समर्पित अपीलेट बोर्ड का भी गठन किया गया है। इसका आप पर असर भारत भर के मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए: काउंसलिंग के दौरान अलग-अलग शहरों के चक्कर लगाने की भागदौड़ खत्म होगी, जिससे यात्रा और ठहरने का समय और खर्च बचेगा। प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता: ऑनलाइन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, एमसीसी पोर्टल से सीट रेजिग्नेशन और 61 दिव्यांग सहायता केंद्रों के कारण पूरी दाखिला प्रणाली अधिक सुगम और सुरक्षित होगी। सवाल-जवाब 1. क्या नीट यूजी सीट अपग्रेड कराने के लिए आवंटित मेडिकल कॉलेज जाना जरूरी होगा? नहीं, नए नियमों के तहत अब पहले और दूसरे दौर में सीट अपग्रेड के लिए ऑनलाइन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के जरिए घर बैठे प्रोविजनल एडमिशन लिया जा सकता है। 2. नीट यूजी काउंसलिंग में 'फ्लोट' विकल्प का क्या मतलब है? 'फ्लोट' विकल्प चुनने पर उम्मीदवार की मौजूदा सीट सुरक्षित रहती है और अगली काउंसलिंग में बेहतर कॉलेज मिलने पर पुरानी सीट स्वतः ही दूसरे अभ्यर्थी को ट्रांसफर हो जाती है। 3. उम्मीदवार को मेडिकल कॉलेज जाकर फीस कब जमा करनी होगी? जब उम्मीदवार अपनी आवंटित सीट से संतुष्ट होकर 'फ्रीज' विकल्प चुनेगा, तब उसे निर्धारित कॉलेज में जाकर ओरिजिनल डाक्यूमेंट्स जमा करने होंगे और फीस भरनी होगी। 4. अगर कोई छात्र अपनी आवंटित सीट छोड़ना चाहता है तो उसकी क्या प्रक्रिया है? सीट छोड़ने या इस्तीफा देने के लिए अब कॉलेज जाने की आवश्यकता नहीं है, उम्मीदवार एमसीसी के आधिकारिक पोर्टल के जरिए ऑनलाइन रेजिग्नेशन दे सकते हैं। 5. दिव्यांग (PwBD) अभ्यर्थियों के लिए काउंसलिंग में क्या खास सुविधा दी गई है? दिव्यांग अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए असेसमेंट सेंटर्स की संख्या 16 से बढ़ाकर 61 कर दी गई है और एनएमसी दिशा-निर्देशों के तहत अपीलेट बोर्ड भी बनाया गया है। https://trendkia.com/admission/medikala-dakhile-men-bari-rahata-svasthya-mntralaya-ne-badala-die-neet-ug-sita-apagreda-aura-veriphikeshana-ke-niyama-12093 TrendKia — Har trend, sabse pehle.