मेडिकल दाखिले में दोहरे निवास प्रमाण पत्र पर विवाद, छत्तीसगढ़ और कई राज्यों की कोटा सीटों पर धांधली के आरोप छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस काउंसलिंग के दौरान अभ्यर्थियों द्वारा एक से अधिक राज्यों का डोमिसाइल लगाकर स्टेट कोटा सीटें हासिल करने का भंडाफोड़ हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। देशभर में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के पेपर लीक विवाद के बीच अब छत्तीसगढ़ राज्य में एमबीबीएस (MBBS) दाखिले की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रायपुर में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा संचालित की जा रही काउंसलिंग में एक से अधिक राज्यों के निवास प्रमाण पत्र (डोमिसाइल) का इस्तेमाल कर मेडिकल कॉलेजों में सीटें हासिल करने का मामला उजागर हुआ है। प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर यह दावा किया गया है कि कई अभ्यर्थियों ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर छत्तीसगढ़ के अलावा मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, तमिलनाडु और राजस्थान जैसे राज्यों के स्टेट कोटे में भी एमबीबीएस सीट पाई है। इस खुलासे के बाद राज्य की पूरी मेडिकल प्रवेश व्यवस्था की निष्पक्षता और काउंसलिंग की पारदर्शिता जांच के दायरे में आ गई है। संदिग्ध दस्तावेजों और जाति प्रमाण पत्रों की व्यापक जांच काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि अभ्यर्थियों ने एक ही समय पर दो अलग-अलग राज्यों के स्थायी निवासी होने के प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए हैं। इसके साथ ही कुछ मामलों में जमा किए गए जाति प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठे हैं। नियमों के मुताबिक कोई भी अभ्यर्थी एक ही सत्र में दो राज्यों के राज्य स्तरीय कोटे का लाभ नहीं ले सकता, लेकिन इस नियम की अनदेखी कर सीटें हासिल की गईं। पांच प्रमुख मामलों में उजागर हुई गड़बड़ी काउंसलिंग की प्राथमिक सूची में उजागर हुए पांच विशिष्ट मामले इस कथित फर्जीवाड़े की पूरी कार्यप्रणाली को दर्शाते हैं • मामला 1 (ऋद्धि, AIR 453054): ऑल इंडिया रैंक 453054 हासिल करने वाली अभ्यर्थी ऋद्धि का चयन छत्तीसगढ़ के साथ-साथ ओडिशा राज्य के स्टेट कोटे में भी हुआ है। • मामला 2 (नेविता, AIR 451234): ऑल इंडिया रैंक 451234 वाली अभ्यर्थी नेविता का नाम छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों की स्टेट कोटा मेरिट सूची में शामिल है। • मामला 3 (आहाना, AIR 643603): ऑल इंडिया रैंक 643603 वाली अभ्यर्थी आहाना को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में डोमिसाइल के आधार पर सीटें मिली हैं। यह अभ्यर्थी एक राज्य के दस्तावेज में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और दूसरे राज्य में अनुसूचित जाति (SC) के रूप में दर्ज है। • मामला 4 (लक्ष्य, AIR 762615): ऑल इंडिया रैंक 762615 वाले अभ्यर्थी लक्ष्य ने मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी से सीट पाई है, जबकि छत्तीसगढ़ में सामान्य (General) श्रेणी से सीट हासिल की है। इनके पास भी दोनों राज्यों के डोमिसाइल हैं। • मामला 5 (आकांक्षा, AIR 1162810): ऑल इंडिया रैंक 1162810 हासिल करने वाली अभ्यर्थी आकांक्षा ने छत्तीसगढ़ और झारखंड दोनों राज्यों का डोमिसाइल लगाकर दोनों जगह स्टेट कोटे में चयन प्राप्त किया है। स्वास्थ्य मंत्री का बयान और जांच की घोषणा मामला तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वीकार किया है कि काउंसलिंग में दोहरे डोमिसाइल से जुड़े 10 मामले ट्रेस किए जा चुके हैं। उन्होंने मामलों का ब्योरा देते हुए बताया कि इनमें झारखंड के 4, मध्य प्रदेश के 4, कर्नाटक के 4, तथा तमिलनाडु और राजस्थान के 1-1 प्रकरण शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि अंतिम एडमिशन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले सभी अभ्यर्थियों के जाति और निवास प्रमाण पत्रों की गहन छानबीन की जाएगी। चिकित्सा संघ के गंभीर आरोप और सीटों का आवंटन जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर आयुष श्रीवास्तव ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, "नीट यूजी काउंसलिंग बेहद संदेहास्पद तरीके से चल रही है और फर्जी डोमिसाइल के आधार पर प्रवेश दिया जा रहा है।" उन्होंने इस मामले में शामिल जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। छत्तीसगढ़ में इस समय कुल 3025 एमबीबीएस सीटों के लिए पहले चरण की काउंसलिंग चल रही है। इन कुल सीटों में 1984 स्टेट कोटे की सीटें, 553 मैनेजमेंट कोटे की सीटें, 252 ऑल इंडिया कोटे की सीटें, 192 एनआरआई कोटे की सीटें और 44 सेंट्रल पूल की सीटें शामिल हैं। मेडिकल सूची में इस फर्जीवाड़े की खबर आने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली विवादों में घिर गई है। इसका आप पर असर यह मामला मेडिकल उम्मीदवारों और अभिभावकों के लिए पारदर्शी काउंसलिंग सुनिश्चित करने की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। • भारत में: राज्य कोटे की सीटों के दुरुपयोग से अन्य राज्यों के मेधावी उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। सत्यापन सख्त होने से काउंसलिंग प्रक्रियाओं में डेटा शेयरिंग प्रणाली मजबूत होगी। • छत्तीसगढ़ में: मूल निवासी अभ्यर्थियों को उनके वैध अधिकार की सीटें वापस मिलने का रास्ता साफ होगा। फर्जी दस्तावेज जमा करने वाले उम्मीदवारों का एडमिशन रद्द हो सकता है। • छात्रों के लिए: अभ्यर्थियों को अपने जाति एवं निवास प्रमाण पत्र अंतिम एडमिशन से पहले पूरी तरह सही और तैयार रखने होंगे। किसी भी प्रकार की दोहरी उम्मीदवारी पाए जाने पर उम्मीदवारी निरस्त की जाएगी। • अभिभावकों के लिए: काउंसलिंग के दौरान आधिकारिक नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है। फर्जी प्रमाण पत्रों पर प्रवेश लेने का प्रयास विधिक और प्रशासनिक कार्रवाई को आमंत्रित कर सकता है। सवाल-जवाब 1. छत्तीसगढ़ एमबीबीएस काउंसलिंग में क्या विवाद सामने आया है? काउंसलिंग के दौरान अभ्यर्थियों द्वारा दो अलग-अलग राज्यों के डोमिसाइल का इस्तेमाल कर स्टेट कोटे की सीटें हासिल करने का मामला सामने आया है। 2. स्वास्थ्य मंत्री ने कितने मामलों की पुष्टि की है? स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दोहरे डोमिसाइल से जुड़े 10 मामलों की पुष्टि की है। 3. छत्तीसगढ़ में कुल कितनी एमबीबीएस सीटें हैं? छत्तीसगढ़ में कुल 3025 एमबीबीएस सीटें हैं, जिनमें से 1984 सीटें राज्य कोटे की हैं। 4. जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने क्या मांग की है? अध्यक्ष डॉक्टर आयुष श्रीवास्तव ने काउंसलिंग में संदेहास्पद प्रवेश प्रक्रिया की जांच और फर्जी डोमिसाइल पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। 5. अंतिम प्रवेश प्रक्रिया में सरकार क्या कदम उठाएगी? सरकार अंतिम एडमिशन से पहले सभी संदिग्ध अभ्यर्थियों के जाति एवं निवास प्रमाण पत्रों की कड़ाई से छानबीन करेगी। https://trendkia.com/admission/medikala-dakhile-men-dohare-nivasa-pramana-patra-para-vivada-chhattisgarh-aura-kai-rajyon-ki-kota-siton-para-dhandhali-ke-aropa-23117 TrendKia — Har trend, sabse pehle.