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  "type": "article",
  "title": "अब बिना सर्जरी दिमाग के सिग्नल बनेंगे शब्द, मेटा ने पेश किया Brain2Qwerty v2",
  "summary": "मेटा ने एक नया AI सिस्टम पेश किया है जो बिना किसी सर्जरी के दिमाग की गतिविधि को सीधे टेक्स्ट में बदल देता है, और इसकी औसत शब्द सटीकता 61% तक पहुंच गई है।",
  "content": "सोचिए, बोलने या लिखने की क्षमता खो चुका कोई इंसान बस अपने दिमाग के संकेतों से शब्द टाइप कर पाए, वो भी बिना किसी ऑपरेशन के। मेटा ने सोमवार को ऐसा ही एक AI सिस्टम Brain2Qwerty v2 सामने रखा है, जो बिना सर्जरी वाली दिमागी रिकॉर्डिंग की मदद से दिमाग की गतिविधि को टेक्स्ट में बदल देता है। कंपनी का कहना है कि यह रिसर्च खास तौर पर उन लोगों के लिए है, जो दिमागी चोट या घाव (ब्रेन लीजन) की वजह से बातचीत करने की क्षमता गंवा चुके हैं।\n\nयह तकनीक काम कैसे करती है, यह समझना दिलचस्प है। सिस्टम दिमाग की गतिविधि को एक हेलमेट जैसे मैग्नेटोएन्सेफैलोग्राफी (MEG) स्कैनर से रिकॉर्ड करता है। यह न्यूरोसाइंस रिसर्च में इस्तेमाल होने वाला एक आम, बिना चीरफाड़ वाला इमेजिंग उपकरण है। इसके बाद इन कच्चे न्यूरल सिग्नल को एक एंड-टू-एंड AI मॉडल में डाला जाता है, जो उन वाक्यों को दोबारा तैयार करता है जिन्हें इंसान टाइप करने की कोशिश कर रहा होता है।\n\nसटीकता बढ़ाने का तरीका\nमेटा के मुताबिक, शोरगुल भरी दिमागी रिकॉर्डिंग को समझते वक्त सही अर्थ पकड़ने के लिए सिस्टम बड़े लैंग्वेज मॉडल (LLM) को न्यूरल डेटा पर ट्यून करता है, ताकि वह संदर्भ के हिसाब से बेहतर अंदाजा लगा सके। कंपनी ने बताया, \"हमने Brain2Qwerty v2 को नौ स्वयंसेवकों के करीब 22,000 वाक्यों पर ट्रेन किया, जिनमें से हर एक को MEG उपकरण पहनकर सक्रिय रूप से टाइप करते हुए 10 घंटे तक रिकॉर्ड किया गया। न्यूरल घटनाओं को पकड़ने के लिए हाथ से बनाई गई पाइपलाइन पर भरोसा करने के बजाय, हम सीधे कच्चे दिमागी सिग्नल से डिकोड करने के लिए एंड-टू-एंड डीप लर्निंग का इस्तेमाल करते हैं।\"\n\nनतीजे चौंकाने वाले हैं। Brain2Qwerty ने औसतन 61% शब्द सटीकता हासिल की, जबकि बिना सर्जरी वाले पुराने तरीकों की सटीकता महज करीब 8% थी। मेटा अपने डिजिटल ब्रेन प्रोजेक्ट के तहत इस सिस्टम का कोड और डेटासेट जारी कर रही है। इसी प्रोजेक्ट में ओपन न्यूरोसाइंस डेटासेट को सहारा देने के लिए 5 मिलियन डॉलर का एक फंड भी शामिल है।\n\nकंपनी ने यह भी बताया कि जैसे-जैसे ट्रेनिंग डेटा बढ़ता गया, डिकोडिंग की सटीकता बेहतर होती गई। इसका मतलब है कि और ज्यादा डेटा से नतीजे और भी सुधर सकते हैं। मेटा के अनुसार, इंजीनियरों के आखिरी ट्रेनिंग कॉन्फिगरेशन चुनने से पहले AI एजेंट्स ने डिकोडिंग पाइपलाइन के लिए संभावित सुधारों की पड़ताल की।\n\nसर्जरी की सीमा को चुनौती\nनेचर न्यूरोसाइंस में छपे एक साथी रिसर्च पेपर में मेटा के शोधकर्ताओं ने तर्क दिया कि भले ही AI ने ब्रेन-टू-टेक्स्ट डिकोडिंग को काफी आगे बढ़ाया है, फिर भी ज्यादातर बेहतरीन ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस आज भी सर्जरी से लगाए गए इलेक्ट्रोड पर निर्भर हैं। दिमागी सर्जरी के खतरों और इम्प्लांट को लंबे समय तक संभालने की चुनौतियों की वजह से इन्हें बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना मुश्किल है।\n\nमेटा का दावा है कि Brain2Qwerty v2 उस सटीकता के स्तर के करीब पहुंच रहा है, जो पहले सिर्फ दिमागी सर्जरी वाली तकनीकों से ही मुमकिन था। कंपनी का कहना है कि उसका बिना सर्जरी वाला तरीका सर्जरी पर आधारित न्यूरोप्रोस्थेटिक्स और बिना ऑपरेशन वाले कम्युनिकेशन सिस्टम के बीच की खाई को पाट सकता है। मेटा ने लिखा, \"हमारी उम्मीद है कि खुले तौर पर किया गया यह काम न्यूरोसाइंस को आगे बढ़ाएगा, ताकि न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की पहचान, जांच और इलाज अलग-अलग खानों में बंटकर काम करने के मुकाबले ज्यादा तेजी से हो सके।\"\n\nतेज होती ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस की दौड़\nयह घोषणा ऐसे समय आई है जब ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस पर रिसर्च तेजी पकड़ रही है। इसमें एलन मस्क की न्यूरालिंक और ओपनएआई के CEO सैम ऑल्टमैन के समर्थन वाली मर्ज लैब्स भी शामिल हैं, जो न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से जूझ रहे लोगों की बातचीत की क्षमता लौटाने वाली तकनीक पर काम कर रही हैं।\n\nन्यूरालिंक और सिंक्रोन जैसी कंपनियां जहां सर्जरी वाले इम्प्लांटेड इंटरफेस पर दांव लगा रही हैं, वहीं बहुत से शोधकर्ता और स्टार्टअप बिना सर्जरी वाले सिस्टम का प्रदर्शन सुधारने के लिए AI का सहारा ले रहे हैं। सितंबर 2024 में स्टार्टअप न्यूरेबल ने AI से लैस EEG हेडफोन पेश किए थे, जो फोकस और मानसिक थकान पर नजर रखने के लिए बनाए गए थे। ठीक एक साल बाद, MIT से निकले स्टार्टअप ऑल्टरईगो ने एक पहनने वाला उपकरण सामने रखा, जो चेहरे और गले की खामोश न्यूरोमस्कुलर हलचल को टेक्स्ट और कमांड में बदल देता है। इसे इम्प्लांटेड ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस के एक व्यावहारिक विकल्प के तौर पर पेश किया गया।\n\nइसका आप पर असर\nआपके लिए इसका क्या मतलब है:\n\n• दिमागी चोट की वजह से बोलने या लिखने की क्षमता खो चुके मरीजों के लिए यह बिना सर्जरी वाला तरीका भविष्य में बातचीत का नया रास्ता खोल सकता है।\n• कोड और डेटासेट खुले तौर पर जारी होने से दुनिया भर के शोधकर्ता इस तकनीक पर तेजी से काम कर पाएंगे, जिससे इलाज जल्दी पहुंचने की उम्मीद बढ़ती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. Brain2Qwerty v2 क्या है?\nयह मेटा का एक AI सिस्टम है जो बिना सर्जरी वाली दिमागी रिकॉर्डिंग की मदद से दिमाग की गतिविधि को टेक्स्ट में बदल देता है।\n\n2. इसकी सटीकता कितनी है?\nइसने औसतन 61% शब्द सटीकता हासिल की, जबकि बिना सर्जरी वाले पुराने तरीकों की सटीकता करीब 8% थी।\n\n3. यह सिस्टम दिमाग की गतिविधि कैसे रिकॉर्ड करता है?\nयह हेलमेट जैसे मैग्नेटोएन्सेफैलोग्राफी (MEG) स्कैनर का इस्तेमाल करता है, जो बिना चीरफाड़ वाला इमेजिंग उपकरण है।\n\n4. इसे किस पर ट्रेन किया गया?\nइसे नौ स्वयंसेवकों के करीब 22,000 वाक्यों पर ट्रेन किया गया, और हर एक को MEG पहनकर टाइप करते हुए 10 घंटे रिकॉर्ड किया गया।\n\n5. यह तकनीक किसके लिए बनाई गई है?\nयह खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो दिमागी चोट या घाव की वजह से बातचीत करने की क्षमता खो चुके हैं।\n\n6. क्या मेटा यह तकनीक सबके लिए उपलब्ध करा रही है?\nहां, मेटा अपने डिजिटल ब्रेन प्रोजेक्ट के तहत इसका कोड और डेटासेट जारी कर रही है, जिसमें 5 मिलियन डॉलर का फंड भी शामिल है।",
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  "category": "एआई",
  "publishedAt": "2026-06-29",
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    "ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस",
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