आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार धीमी करने की उठी मांग, अमेरिकी प्रशासन ने कंपनियों पर ही फोड़ा ठीकरा एंथ्रोपिक, ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुखों ने एआई सुरक्षा को लेकर नियमन की वकालत की, जबकि ट्रंप प्रशासन ने इसे खुद कंपनियों की जिम्मेदारी बताते हुए चीन से पिछड़ने की चिंता जताई है। प्रमुख तकनीकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास की गति को नियंत्रित करने और कड़े सरकारी नियम लागू करने की जोरदार मांग उठाई है। एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी डारियो अमोदेई ने शनिवार को प्रकाशित अपने एक लेख में अमेरिकी सरकार से एआई कंपनियों के लिए कड़े नियम तय करने का आग्रह किया। उनका तर्क है कि इंसानी सुरक्षा के जोखिमों को देखते हुए इस तकनीक के अनियंत्रित विस्तार पर लगाम लगाना जरूरी हो चुका है। इस विचार को ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी सैम ऑल्टमैन और ग्रोक चैटबॉट के मालिक एलन मस्क का भी दुर्लभ समर्थन मिला है। इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्या नडेला ने भी तकनीक के संतुलित और धीमे विकास की पैरवी की है। प्रशासन की दो टूक: अनुमति की आड़ लेना बंद करें टेक दिग्गज टेक उद्योग की इन दलीलों पर अमेरिकी प्रशासन के शीर्ष सलाहकारों ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रेसिडेंट्स काउंसिल ऑफ एडवाइजर्स ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सह-अध्यक्ष डेविड सैक्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कंपनियों के इस रुख की कड़ी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि यदि अप्रकाशित मॉडल इतने खतरनाक हैं कि कंपनियों को रफ्तार धीमी करना जरूरी लगता है, तो वे जिम्मेदारी से स्वयं यह कदम उठाएं। उन्होंने दो टूक कहा कि कंपनियों को किसी अन्य की मंजूरी का ढोंग रचना बंद करना चाहिए। सैक्स ने यह आरोप भी लगाया कि कंपनियां एंटीट्रस्ट कानूनों से राहत लेकर एक तरह का कार्टेल बनाने की कोशिश कर रही हैं और यह दावा बिल्कुल गलत है कि उनकी मंशा पूरी तरह निस्वार्थ या जनहितकारी है। चीन के साथ वैश्विक तालमेल और एंटीट्रस्ट छूट की मांग डारियो अमोदेई ने अपने प्रस्ताव में अमेरिकी सरकार से विशेष हस्तक्षेप की अपील की थी। उन्होंने मांग रखी थी कि सुरक्षा मानकों को संयुक्त रूप से तय करने के लिए प्रतिस्पर्धी कंपनियों को साथ आने की अनुमति दी जाए, जिसके लिए एंटीट्रस्ट नियमों में छूट या सरकारी सहभागिता आवश्यक होगी। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक स्तर पर नियमन बनाने की बात कही, जिसमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को भी शामिल करने का सुझाव दिया गया था। हालांकि इस विचार की व्यवहार्यता पर कई विश्लेषकों ने सवाल उठाए हैं। डेविड सैक्स ने भी चीन को लेकर अमोदेई के सुझाव को सिरे से खारिज करते हुए X पर लिखा कि इस बात की बिल्कुल संभावना नहीं है कि चीन किसी ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौते में शामिल होगा। चीन से बढ़त गंवाने की आशंका और व्हाइट हाउस का रुख अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि यदि तकनीक के विकास की रफ्तार रोकी गई, तो अमेरिका इस रणनीतिक दौड़ में चीन से पिछड़ सकता है। आयरलैंड यात्रा के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे विवाद पर कहा कि बहुत सी नकारात्मक ताकतें ऐसे मुद्दे उठा रही हैं जिन्हें नहीं उठाया जाना चाहिए, और वे ऐसी बातें कह रहे हैं जो कभी घटित नहीं होंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका एआई के क्षेत्र में चीन से आगे चल रहा है और वे इस बढ़त को हर हाल में बनाए रखना चाहते हैं, क्योंकि जो भी इस तकनीक की बाजी जीतेगा, वही वैश्विक स्तर पर विजेता बनेगा। अमेरिका में चीन के बढ़ते तकनीकी प्रभाव को आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों स्तरों पर बड़ी चुनौती माना जाता है। संसद में जल्दबाजी से नुकसान की चेतावनी तकनीकी दौड़ में पिछड़ने का डर अमेरिकी संसद तक भी साफ देखा जा सकता है। हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने सीएनएन से बातचीत में आगाह किया कि जल्दबाजी में कानून बनाना उल्टा भारी पड़ सकता है। जॉनसन ने स्पष्ट किया कि यदि कांग्रेस बिना सोचे-समझे आपातकालीन सत्र बुलाकर नियम थोपने की कोशिश करती है, तो अमेरिका चीन के सामने यह तकनीकी मुकाबला हार जाएगा। उन्होंने कहा कि यह स्थिति प्रत्येक अमेरिकी नागरिक की सुरक्षा के लिए खतरा बनेगी, इसलिए प्रशासन को जल्दबाजी के बजाय संतुलन और स्थिर नेतृत्व के साथ आगे बढ़ना होगा। कंपनियों की स्वैच्छिक पहल और स्वतंत्र जांच की तैयारी सरकारी स्तर पर सहमति न बनने के बीच टेक कंपनियों ने जनता का भरोसा जीतने के लिए खुद से कदम उठाने का फैसला किया है। ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन ने डारियो अमोदेई के उस सुझाव का समर्थन किया है जिसके तहत स्वतंत्र बाहरी निरीक्षकों को कंपनी के कर्मचारियों जैसे अधिकार दिए जाएंगे। ये बाहरी समीक्षक कंपनियों के भीतर जाकर सुरक्षा प्रक्रियाओं और उत्पादों की गहन जांच कर सकेंगे और किसी भी खतरे की रिपोर्ट दर्ज करा सकेंगे। ऑल्टमैन ने X पर स्वीकार किया कि इन सुरक्षा उपायों को लागू करने में भारी खर्च आएगा। उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए लिखा कि रफ्तार को नियंत्रित करना इस भारी लागत के मुकाबले कहीं अधिक मूल्यवान साबित होगा, और अमेरिकी प्रतिस्पर्धा का कोई भी दबाव तकनीक के मामले में लापरवाही बरतने को जायज नहीं ठहरा सकता। इसका आप पर असर यह बहस तय करेगी कि आने वाले समय में आम लोगों को मिलने वाले एआई टूल्स कितनी तेजी से विकसित होंगे और वे कितने सुरक्षित रहेंगे। • तकनीकी सुरक्षा: कंपनियों द्वारा स्वतंत्र निरीक्षकों को आंतरिक पहुंच देने से एआई टूल्स में सुरक्षा खामियों और जोखिमों की पहले ही पहचान हो सकेगी। इससे उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा और गोपनीयता पर होने वाले खतरों को कम करने में मदद मिलेगी। • टूल रिलीज की गति: यदि कंपनियां स्वेच्छा से रफ्तार धीमी करती हैं, तो नए अत्याधुनिक फीचर्स और बड़े मॉडल्स के रोलआउट में देरी देखने को मिल सकती है। उपभोक्ताओं को हर महीने आने वाले बड़े तकनीकी बदलावों के बजाय अधिक परिपक्व और जांची-परखी सेवाएं मिलेंगी। • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी होड़ जारी रहने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एआई टूल्स के मानकीकरण में रुकावट आ सकती है। इसके कारण अलग-अलग देशों के उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल नियम और सेवाएं खंडित हो सकती हैं। • लागत और कीमतें: सुरक्षा और ऑडिटिंग पर आने वाले भारी खर्च का बोझ अंततः कॉर्पोरेट ग्राहकों और आम उपभोक्ताओं की प्रीमियम सब्सक्रिप्शन दरों पर पड़ सकता है। सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए कंपनियां अपनी एआई सेवाओं के दाम बढ़ा सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ यह गतिरोध तब पैदा हुआ जब एआई क्षेत्र के अग्रणी वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने अगली पीढ़ी के मॉडल्स से जुड़े संभावित खतरों पर अलार्म बजाया, जबकि सरकार ने इसे रणनीतिक दौड़ के तौर पर देखा। • इंसानी सुरक्षा की चिंताएं: एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई सहित कई तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रकाशित शक्तिशाली मॉडल्स के अनियंत्रित प्रसार से गंभीर जोखिम पैदा हो सकते हैं। इसी खतरे को कम करने के लिए उन्होंने सरकार से मानक तय करने और रफ्तार थामने की गुहार लगाई। • चीन से पिछड़ने का खतरा: अमेरिकी नीति निर्माताओं और डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि गति धीमी करने से चीन को बढ़त हासिल हो जाएगी। वाशिंगटन चीन की तकनीकी तरक्की को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखता है। • एंटीट्रस्ट कानून की अड़चनें: प्रतिस्पर्धी कंपनियों का एक साथ मिलकर नियम तय करना कानूनन कार्टेल माना जा सकता है। इसी कानूनी झंझट से बचने के लिए कंपनियों ने सरकार से विशेष छूट और सहभागिता की मांग की थी, जिसे प्रशासन ने खारिज कर दिया। सवाल-जवाब 1. डारियो अमोदेई ने सरकार से क्या मांग की थी? अमोदेई ने एआई विकास की रफ्तार को धीमा करने, कड़े नियम लागू करने और कंपनियों को एंटीट्रस्ट छूट देकर मिलकर सुरक्षा मानक तय करने की मांग की थी। 2. इस मांग का किन टेक लीडर्स ने समर्थन किया? ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, ग्रोक के मालिक एलन मस्क और माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला ने एआई की रफ्तार नियंत्रित करने का समर्थन किया। 3. डेविड सैक्स ने टेक कंपनियों की मांग पर क्या प्रतिक्रिया दी? सैक्स ने कहा कि कंपनियों को खुद जिम्मेदारी से रफ्तार धीमी करनी चाहिए, न कि सरकारी अनुमति का नाटक करके कार्टेल बनाने की कोशिश करनी चाहिए। 4. डोनाल्ड ट्रंप का इस मुद्दे पर क्या रुख है? ट्रंप ने रफ्तार धीमी करने के विचार को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका एआई में चीन से आगे है और इस रणनीतिक बढ़त को बनाए रखना जरूरी है। 5. माइक जॉनसन ने क्या चेतावनी दी? माइक जॉनसन ने कहा कि जल्दबाजी में आपातकालीन सत्र बुलाकर नियम बनाने से अमेरिका चीन के मुकाबले तकनीकी दौड़ हार सकता है। 6. कंपनियों ने स्वेच्छा से क्या कदम उठाने का फैसला किया है? कंपनियों ने स्वतंत्र बाहरी निरीक्षकों को कर्मचारियों जैसी पहुंच देने का प्रस्ताव स्वीकार किया है ताकि सुरक्षा की आंतरिक जांच की जा सके। https://trendkia.com/ai/ai-ki-raphtara-dhimi-karane-ki-uthi-manga-donald-trump-prashasana-ne-knpaniyon-para-hi-phora-thikara-34298 TrendKia — Har trend, sabse pehle.