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  "type": "article",
  "title": "एंथ्रोपिक के आईपीओ से ठीक पहले एआई खर्च में आई सुस्ती, रैंप की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा",
  "summary": "एआई के इस्तेमाल में भारी तेजी आने के बावजूद कंपनियों का इस पर खर्च स्थिर हो गया है। एंथ्रोपिक के संभावित आईपीओ से पहले सामने आई रैंप की रिपोर्ट से बाजार में चिंता बढ़ गई है।",
  "content": "कंपनियां पहले से कहीं अधिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर रही हैं, लेकिन इस तकनीक पर उनका खर्च बढ़ नहीं रहा है। रैंप की एक नई रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि गर्मियों के अंतिम महीनों में एआई पर होने वाला खर्च लगभग स्थिर हो गया है, जबकि इसके टोकन वॉल्यूम में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह इस बात का संकेत है कि मूल्य प्रतिस्पर्धा और अधिक समझदार ग्राहक ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी दिग्गज कंपनियों के रेवेन्यू पर लगाम लगा रहे हैं। रैंप के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त और सितंबर के महीनों के दौरान टोकन खर्च में केवल 1.5 प्रतिशत की ही वृद्धि हुई। इसकी तुलना में जुलाई के महीने में यह आंकड़ा पिछले महीने की तुलना में 42 प्रतिशत बढ़ा था।\n\n \n\nआईपीओ की तैयारियों के बीच निवेशकों की चिंताएं\n जैसे-जैसे एंथ्रोपिक अपने आईपीओ की तैयारी कर रहा है, ये आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों का यह सोचना गलत साबित हो सकता है कि एआई कंपनियां इसी रफ्तार से लगातार आगे बढ़ती रहेंगी। एंथ्रोपिक के आईपीओ से ठीक पहले इस तरह की रिपोर्ट आने से बाजार में हलचल तेज हो गई है।\n\n \n रैंप के प्रमुख अर्थशास्त्री आरा खराजियन ने बताया कि एआई पर होने वाले कुल खर्च का लगभग पूरा हिस्सा वेंचर समर्थित और उच्च वृद्धि वाली तकनीकी कंपनियों की ओर से आता है। जब तक एआई पर खर्च लगातार बढ़ता रहता है, तब तक यह स्थिति ठीक है। लेकिन यदि बाजार की किसी स्थिति या अन्य कारक के कारण इसमें सुस्ती आती है, तो ये सभी कंपनियां एक साथ धीमी हो सकती हैं, जिससे अन्य क्षेत्रों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।\n\n \n\nशीर्ष कंपनियों के खर्च में आई मामूली गिरावट\n खराजियन ने कहा कि उन्हें इस बात के पहले से ही संकेत मिल रहे हैं कि शीर्ष 1 प्रतिशत फर्में, जिन्हें सबसे अधिक एआई-पिल्ड माना जाता है, अगस्त और सितंबर के दौरान अपने खर्च के मामले में थोड़ी लड़खड़ाई हैं। गर्मियों के पीक समय के दौरान ये कंपनियां प्रति कर्मचारी 10,000 डॉलर के आंकड़े के करीब पहुंच रही थीं, लेकिन अब यह खर्च उससे थोड़ा नीचे आ गया है। उन्होंने बताया कि इस खास वर्ग में आई यह सुस्ती इस बात के लिए पर्याप्त है कि टोकन वॉल्यूम बढ़ने के बावजूद कुल रेवेन्यू की रफ्तार धीमी हो जाए।\n\n रैंप के आंकड़ों से पता चलता है कि मध्यम और शीर्ष 10 प्रतिशत कंपनियों के खर्च में वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन यह अंतर को पाटने के लिए नाकाफी है। मध्यम श्रेणी की फर्में प्रति कर्मचारी प्रति माह 12 से 15 डॉलर खर्च करती हैं, जबकि शीर्ष 10 प्रतिशत कंपनियां 600 से 1,000 डॉलर तक खर्च कर रही हैं।\n\n खराजियन का कहना है कि आज के समय में उपलब्ध उपयोग के मामलों को देखते हुए यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं है कि अन्य कंपनियां उस 10,000 डॉलर प्रति कर्मचारी प्रति माह के उस आंकड़े तक पहुंच पाएंगी या नहीं, जिस पर शीर्ष 1 प्रतिशत फर्में टिकी हुई हैं। सॉफ्टवेयर और वित्त जैसे उद्योगों में एआई कोडिंग एजेंटों की भारी मांग है, लेकिन डॉक्टर के क्लिनिक या कार डीलरशिप को एआई पर इतना अधिक खर्च करने की कोई आवश्यकता नहीं है।\n\n \n\nमूल्य युद्ध और खरीदार के पक्ष में बाजार\n अक्टूबर के आंकड़ों में कुछ सुधार जरूर देखा गया और 23 सितंबर से 23 अक्टूबर के बीच टोकन खर्च में 8.9 प्रतिशत की तेजी आई, लेकिन खराजियन का मानना है कि खर्च की वृद्धि पर दबाव डालने वाले कारक अभी भी मजबूत बने हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मंदी की वजह मांग में कमी नहीं है, क्योंकि एआई का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। इसके बजाय उन्होंने बाजार की अत्यधिक प्रतिस्पर्धी प्रकृति को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।\n\n उन्होंने बताया कि ओपनएआई और एंथ्रोपिक द्वारा कीमतों में की गई कटौती ने एआई का उपयोग करना और अधिक सस्ता बना दिया है। सितंबर के महीने में ओपनएआई ने जीपीटी-6 सोल और जीपीटी-6 लूना के एपीआई मूल्यों को आधा कर दिया था। इस मूल्य युद्ध का जवाब देते हुए एंथ्रोपिक ने भी फेबल 5.1 और ओपस 5.5 की कीमतों में भारी कमी की है। कंपनी ने अपनी एक हालिया फाइलिंग में यह स्वीकार किया था कि इस फैसले की वजह से उसके रेवेन्यू में लगभग 60 करोड़ डॉलर की गिरावट आई है।\n\n बड़ी तकनीकी कंपनियों द्वारा ग्राहकों को अपने पाले में बांधे रखने के लिए महंगी तकनीक के उपयोग को सब्सिडी देना हमेशा से एक पुरानी रणनीति रही है। खराजियन का कहना है कि एआई की दुनिया में ये नियम काम नहीं करते क्योंकि यहां प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा है। मेटा और एनवीडिया जैसी कंपनियां भी बहुत सस्ते और ओपन सोर्स मॉडल के साथ बाजार में उतर रही हैं। इसके अलावा चीन और अमेरिका के अन्य ओपन मॉडल तथा जेव नामक एक नए टूल का भी दबदबा बढ़ रहा है, जिसे वर्सेल पर सबसे तेजी से अपनाया गया एआई मॉडल माना जा रहा है।\n\n \n\nबचत करने की कला और लागत पर नियंत्रण\n कार्यभार को कम लागत में पूरा करने की क्षमता भी खर्च में आ रही सुस्ती का एक अन्य प्रमुख कारण है। यह आंशिक रूप से एआई कंपनियों की छूट के कारण है, और साथ ही इसलिए भी क्योंकि कंपनियां अब बजट और खर्चों को नियंत्रित करने में अधिक समझदार हो गई हैं। खराजियन ने बताया कि जैसे-जैसे कोई कंपनी एआई के उपयोग में उन्नत होती जाती है, वह इसे नियंत्रित करने के बेहतर तरीके सीख जाती है। कर्मचारी लंबे समय तक चलने वाले कार्यों के लिए महंगे मॉडल के उपयोग को रोकने वाले डिफॉल्ट विकल्पों का उपयोग करते हैं और कर्मचारियों के लिए बजट की सीमाएं तय कर देते हैं।\n\n नोटियन के सह-संस्थापक अक्षय कोठारी ने हाल ही में रैंप के इन निष्कर्षों से मेल खाते हुए अपने आंतरिक आंकड़े साझा किए थे। उन्होंने संक्षेप में लिखा था कि टोकन तेजी से आगे बढ़ रहे हैं जबकि लागत बढ़ने पर परेशानी हो रही है। खराजियन का मानना है कि एआई खर्च की दिशा को लेकर हमारे जो भी अनुमान थे, वे अब टूटने लगे हैं। ग्राहक एआई का उपयोग तो अधिक कर रहे हैं लेकिन इसके लिए कम पैसे खर्च कर रहे हैं, जो उपभोक्ताओं के लिए तो बहुत अच्छा है लेकिन मॉडल बनाने वाली कंपनियों के रेवेन्यू के लिए यह चिंता का विषय है।\n\n \n\nकंपनियों के मूल्यांकन पर दबाव और भविष्य की उम्मीदें\n ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती अक्टूबर में अनुमानित 2 ट्रिलियन डॉलर के मुकाबले एंथ्रोपिक का संभावित मूल्यांकन गिरकर 1.2 से 1.3 ट्रिलियन डॉलर के बीच रह गया है। कंपनी को क्रेडिट एजेंसियों द्वारा हाई जंक रेटिंग मिलने की भी उम्मीद जताई जा रही है। ओपनएआई ने भी अपने प्रस्तावित मूल्यांकन को 1.4 ट्रिलियन डॉलर से घटाकर 1.25 ट्रिलियन डॉलर कर दिया है और अपने धन जुटाने के लक्ष्यों में लगभग 10 अरब डॉलर की कटौती की है।\n\n हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में कोई नई क्रांति आती है तो खर्च के आंकड़े फिर से पटरी पर आ सकते हैं। ओपनएआई, स्पेसएक्सएआई और मेटा जैसी कंपनियों ने अपने पर्सनल असिस्टेंट बाजार में उतारे हैं, लेकिन खराजियन को संदेह है कि पर्सनल असिस्टेंट वह जरूरी बढ़ावा दे पाएंगे जिसकी इस उद्योग को निरंतर वृद्धि के लिए आवश्यकता है।\n\nइसका आप पर असर\nएआई खर्च में आ रही सुस्ती का असर तकनीक क्षेत्र और निवेशकों की रणनीतियों पर सीधा पड़ेगा।\n\n• कंपनियां और स्टार्टअप: सस्ती दरों पर उन्नत एआई सेवाओं का लाभ उठाने का यह सबसे सही समय है। उद्यमों को अपने आंतरिक बजट और राउटिंग टूल्स के जरिए लागत को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिल रही है।\n• निवेशक और बाजार: एआई कंपनियों के मूल्यांकन में भारी गिरावट और सख्त रेटिंग का दौर शुरू हो गया है। निवेशकों को अब अवास्तविक विकास अनुमानों के बजाय वास्तविक रेवेन्यू और मुनाफे पर ध्यान देना होगा।\n• साफ्टवेयर और वित्त क्षेत्र: कोडिंग एजेंटों की निरंतर मांग के कारण व्यावसायिक उपयोग का दायरा सीमित हो गया है। अन्य पारंपरिक उद्योगों को अपनी वास्तविक जरूरतों के हिसाब से ही तकनीक पर निवेश करना चाहिए।\n• उपभोक्ता बाजार: प्रतिस्पर्धा बढ़ने से एआई उपकरणों की कीमतें लगातार कम हो रही हैं। खरीदार अब कम लागत में बेहतर और हल्के मॉडलों का उपयोग करने में सक्षम हो गए हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nएआई पर खर्च में आई अचानक सुस्ती के पीछे मुख्य रूप से बाजार की तीव्र प्रतिस्पर्धा और कंपनियों की बढ़ती तकनीकी दक्षता जिम्मेदार है।\n\n• मूल्य युद्ध और छूट: ओपनएआई और एंथ्रोपिक द्वारा एपीआई की कीमतें आधी करने से खर्च में कमी आई है। कंपनियों द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट और एंटरप्राइज छूट ने रेवेन्यू लक्ष्यों को प्रभावित किया है।\n• खर्च करने की दक्षता: कंपनियां अब उन्नत तरीकों से अपने एआई उपयोग को नियंत्रित करना सीख गई हैं। वे महंगे मॉडलों के बजाय हल्के राउटर्स और बजट नियंत्रण के जरिए लागत घटा रही हैं।\n• शीर्ष कंपनियों में ठहराव: सबसे अधिक एआई का उपयोग करने वाले शीर्ष 1 प्रतिशत उद्यमों के खर्च में मामूली गिरावट आई है। गर्मियों के पीक स्तर के मुकाबले प्रति कर्मचारी खर्च 10,000 डॉलर के आंकड़े से नीचे आ गया है।\n• प्रतिस्पर्धी बाजार का विस्तार: मेटा, एनवीडिया और चीन के नए ओपन सोर्स मॉडलों ने विकल्प बढ़ा दिए हैं। जेव जैसे हल्के टूल ने उपयोगकर्ताओं को और भी सस्ते विकल्पों की ओर मोड़ दिया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रैंप की रिपोर्ट के अनुसार एआई खर्च में क्या बदलाव आया है?\nरैंप के आंकड़ों से पता चलता है कि टोकन वॉल्यूम बढ़ने के बावजूद अगस्त और सितंबर के दौरान एआई पर होने वाला खर्च केवल 1.5 प्रतिशत ही बढ़ा।\n\n2. एआई खर्च में सुस्ती आने का मुख्य कारण क्या है?\nओपनएआई और एंथ्रोपिक द्वारा की गई मूल्य कटौती, बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा और कंपनियों द्वारा लागत नियंत्रण के बेहतर उपाय अपनाना इसका मुख्य कारण है।\n\n3. एंथ्रोपिक के संभावित मूल्यांकन पर इसका क्या असर पड़ा है?\nएंथ्रोपिक का संभावित मूल्यांकन शुरुआती अक्टूबर के 2 ट्रिलियन डॉलर से घटकर 1.2 से 1.3 ट्रिलियन डॉलर के बीच रह गया है।\n\n4. शीर्ष 1 प्रतिशत कंपनियां एआई पर कितना खर्च कर रही थीं?\nगर्मियों के पीक समय के दौरान ये शीर्ष कंपनियां प्रति कर्मचारी लगभग 10,000 डॉलर प्रति माह खर्च कर रही थीं, जिसमें बाद में थोड़ी गिरावट आई।\n\n5. जेव (Jev) क्या है और यह क्यों चर्चा में है?\nजेव पूर्व निर्धारित आउटपुट के बीच चयन करने के लिए एक हल्का और तेज एआई टूल है, जिसे रैंप पर सबसे तेजी से अपनाया जा रहा है।\n\n6. ओपनएआई ने अपनी कीमतों में कब और कैसे बदलाव किया?\nसितंबर में ओपनएआई ने जीपीटी-6 सोल और जीपीटी-6 लूना के एपीआई मूल्यों को आधा कर दिया था।\n\n7. अक्टूबर के महीने में एआई खर्च की क्या स्थिति रही?\nअक्टूबर के महीने में बाजार में दोबारा तेजी आई और 23 सितंबर से 23 अक्टूबर के बीच टोकन खर्च में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की 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