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  "type": "article",
  "title": "एंथ्रोपिक की पाबंदियों के जवाब में चीन ने उतारे दो एआई हैकिंग एजेंट, एक तो पूरी दुनिया के लिए मुफ्त",
  "summary": "अमेरिका द्वारा एंथ्रोपिक के क्लॉड मायथोस को निर्यात पाबंदियों के पीछे बंद करने के बाद क्यूहू 360 के संस्थापक झोउ होंगयी ने चीन के अपने वल्नरेबिलिटी खोजने वाले एआई एजेंट पेश किए, वहीं ज़ेड.एआई ने मुफ्त मॉडल GLM-5.2 जारी कर दिया।",
  "content": "अमेरिका ने एंथ्रोपिक के साइबर सुरक्षा मॉडल क्लॉड मायथोस को निर्यात पाबंदियों और सावधानी से चुने गए साझेदारों के एक खास गठबंधन के पीछे बंद कर दिया। इसका जवाब चीन की तरफ से दो मोर्चों पर एक साथ आया। एक तरफ एक बड़े उद्योग सम्मेलन में एक चर्चित संस्थापक ने ऐलान किया कि देश के पास पहले से ही इसके बराबर की तकनीक मौजूद है, तो दूसरी तरफ एक अलग लैब ने मिलती-जुलती क्षमता वाला मॉडल बिना किसी कीमत के इंटरनेट पर सबके लिए डाल दिया।\n\nबीजिंग के मंच से क्यूहू 360 का दांव\n24 जून को बीजिंग में ISC.AI 2026 के मंच पर क्यूहू 360 के संस्थापक झोउ होंगयी ने साफ शब्दों में कहा, \"चीन के साइबर सुरक्षा उद्योग के पास अपना खुद का मायथोस होना ही चाहिए।\" इसी मंच पर उन्होंने तुलोंग फेंग नाम का एआई वल्नरेबिलिटी एजेंट पेश किया, जिसे 360 देश के अपने संस्करण के तौर पर बता रहा है। साथ ही उन्होंने यितियान झेन नाम का एक ऑटोमेटेड डिफेंस प्लेटफॉर्म और पानशी झिदुन यानी \"शील्ड ऑफ बेडरॉक\" नाम का एक नया घरेलू सुरक्षा गठबंधन भी सामने रखा।\n\n \n\nमायथोस को 'साइबर परमाणु हथियार' क्यों कहा\nझोउ का अंदाज जानबूझकर तीखा था। उनके मुताबिक एआई के इस दौर में मायथोस \"साइबर परमाणु हथियारों\" जैसा है, एक ऐसा खुद-ब-खुद चलने वाला सिस्टम जो बिना किसी इंसानी निर्देश के कमजोरियां ढूंढ सकता है, उनका विश्लेषण कर सकता है और पूरी हमले की कड़ी तैयार कर सकता है। उन्होंने कहा, \"अमेरिकी संगठन मायथोस का इस्तेमाल करके आपकी कमजोरियां स्कैन कर सकते हैं, लेकिन आपको तो मायथोस को देखने तक का हक नहीं है।\" उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि चीनी कंपनियों को ग्लासविंग से बाहर रखा गया है, जो एंथ्रोपिक का जांचा-परखा साझेदार कार्यक्रम है और जिसमें माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल और दूसरी बड़ी टेक कंपनियां शामिल हैं।\n\nतुलोंग फेंग का दावा किया गया रिकॉर्ड\nझोउ के मुताबिक तुलोंग फेंग अब तक कुल 3,432 कमजोरियां खोज चुका है। इनमें से 105 की पुष्टि चीनी नियामक संस्थाओं ने की है और कई को राष्ट्रीय वल्नरेबिलिटी डेटाबेस ने हाई-सीवियरिटी यानी बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि किसी एक बड़े फ्रंटियर सिस्टम पर दांव लगाने के बजाय कई खास मॉडलों को मिलाकर चलाने वाली एजेंट-फर्स्ट रणनीति उस फासले की भरपाई कर देती है जो अब भी चीन के बेस मॉडलों और सबसे बेहतरीन अमेरिकी मॉडलों के बीच बचा है। उन्होंने सभा से कहा, \"अमेरिका के पास मायथोस है। चीन के पास भी अपनी 'हेवन-स्वोर्ड ड्रैगन-सेबर' है।\"\n\nज़ेड.एआई ने मुफ्त देकर साबित किया\nबीजिंग की ज़ेड.एआई, जिसे ज़िपु एआई के नाम से भी जाना जाता है, ने बिल्कुल अलग रास्ता चुना और अपनी बात एक प्रोडक्ट उतारकर साबित कर दी। अमेरिकी सरकार द्वारा विदेशी नागरिकों के लिए मायथोस 5 और फेबल 5 को हटाए जाने के तुरंत बाद इस लैब ने GLM-5.2 जारी कर दिया। GLM-5.2 एमआईटी लाइसेंस के तहत उपलब्ध है, यानी न कोई सब्सक्रिप्शन की दीवार, न कोई भौगोलिक पाबंदी, और कोई भी इसे अपने हिसाब से बदल सकता है।\n\nसुरक्षा टेस्ट में GLM-5.2 का प्रदर्शन\nसुरक्षा से जुड़े बेंचमार्क ने खासा ध्यान खींचा। सेमग्रेप के इनसिक्योर डायरेक्ट ऑब्जेक्ट रेफरेंस डिटेक्शन वाले टेस्ट में GLM-5.2 ने 39% का स्कोर हासिल किया और इसी टेस्ट में क्लॉड कोड से आगे रहा। यह टेस्ट जांचता है कि कोई मॉडल कोड में बिना इजाजत ऑब्जेक्ट तक पहुंच वाली खामियों को पकड़ पाता है या नहीं, और इसका स्कोर F1 मेट्रिक से निकाला जाता है जो प्रिसीजन और रिकॉल के बीच संतुलन बनाता है। ग्राफिस्ट्री के एक अलग मूल्यांकन में यह एक कैप्चर-द-फ्लैग चुनौती में क्लॉड ओपस 4.8 के बराबर पाया गया। हर खोज पर खर्च करीब 0.17 डॉलर बैठा, जबकि क्लॉड आधारित तरीकों में यह 1 डॉलर से भी ज्यादा था।\n\nमस्क की भविष्यवाणी पर सीधा जवाब\nज़ेड.एआई के सह-संस्थापक तांग जी ने एंथ्रोपिक के इस कदम को \"बेहद अफसोसनाक\" बताया, वहीं कंपनी के तकनीकी प्रमुख किनकाई झेंग ने और भी दो टूक कहा, \"हम चाहते हैं कि यह मॉडल हर किसी के लिए उपलब्ध हो।\" जब एलन मस्क ने भविष्यवाणी की कि चीन 2027 की पहली तिमाही से पहले फेबल जैसी क्षमता तक नहीं पहुंच पाएगा, तो तांग का जवाब छोटा सा था, \"इतना वक्त नहीं लगेगा।\"\n\nइसका आप पर असर\nअगर आप सॉफ्टवेयर बनाते हैं या साइबर सुरक्षा से जुड़े हैं, तो यह खबर आपके टूल और बजट दोनों के लिए मायने रखती है।\n\n• डेवलपर्स और सुरक्षा टीमों के लिए: GLM-5.2 जैसा खुले लाइसेंस वाला सक्षम मॉडल मतलब कि कमजोरियां पकड़ने वाले ताकतवर टूल अब निर्यात पाबंदियों या चुनिंदा साझेदार कार्यक्रमों के पीछे बंद नहीं रहे, इन्हें खुद होस्ट और मनमुताबिक बदला जा सकता है।\n• खर्च बचाने वाली टीमों के लिए: हर खोज पर करीब 0.17 डॉलर बनाम क्लॉड आधारित तरीकों के 1 डॉलर से ज्यादा, यानी बड़े पैमाने पर वही सुरक्षा काम कहीं सस्ता पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. क्यूहू 360 ने क्या पेश किया?\nतुलोंग फेंग नाम का एआई वल्नरेबिलिटी एजेंट, यितियान झेन नाम का ऑटोमेटेड डिफेंस प्लेटफॉर्म और पानशी झिदुन यानी शील्ड ऑफ बेडरॉक नाम का नया घरेलू सुरक्षा गठबंधन।\n\n2. चीन अपना मायथोस क्यों बनाना चाहता है?\nक्योंकि चीनी कंपनियों को एंथ्रोपिक के ग्लासविंग साझेदार कार्यक्रम से बाहर रखा गया है और वे मायथोस तक नहीं पहुंच सकतीं, जबकि अमेरिकी संगठन उससे उनकी कमजोरियां स्कैन कर सकते हैं।\n\n3. GLM-5.2 क्या है और इसकी कीमत क्या है?\nयह ज़ेड.एआई का मॉडल है जो एमआईटी लाइसेंस के तहत मुफ्त और बिना भौगोलिक पाबंदी के उपलब्ध है, और इसमें हर खोज पर करीब 0.17 डॉलर खर्च आता है।\n\n4. GLM-5.2 क्लॉड के मुकाबले कैसा रहा?\nसेमग्रेप के टेस्ट में इसने 39% स्कोर के साथ क्लॉड कोड को पीछे छोड़ा और ग्राफिस्ट्री के कैप्चर-द-फ्लैग मूल्यांकन में यह क्लॉड ओपस 4.8 के बराबर रहा।\n\n5. तुलोंग फेंग ने अब तक कितनी कमजोरियां खोजीं?\nदावे के मुताबिक कुल 3,432 कमजोरियां, जिनमें से 105 की पुष्टि चीनी नियामक संस्थाओं ने की और कई को बेहद गंभीर बताया गया।\n\n6. एलन मस्क ने क्या भविष्यवाणी की और जवाब क्या मिला?\nमस्क ने कहा कि चीन 2027 की पहली तिमाही से पहले फेबल जैसी क्षमता तक नहीं पहुंचेगा, जिस पर तांग जी ने कहा कि इतना वक्त नहीं लगेगा।",
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  "category": "एआई",
  "publishedAt": "2026-06-29",
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    "क्लॉड मायथोस",
    "क्यूहू 360",
    "GLM-5.2",
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    "चीन एआई साइबर सुरक्षा",
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    "एंथ्रोपिक निर्यात पाबंदी",
    "ओपन सोर्स एआई मॉडल"
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