आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर मुट्ठी भर टेक कंपनियों का कब्जा बनने लगा है कार्टेल, वेटिकन सलाहकार पाओलो बेनांती ने चेताया कैथोलिक चर्च को तकनीक पर सलाह देने वाले पादरी पाओलो बेनांती ने आगाह किया है कि फ्रंटियर टेक कंपनियां सुपरइंटेलिजेंस का हौव्वा खड़ा कर लोकतांत्रिक नियमों को दरकिनार करने की कोशिश कर रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को लेकर दुनिया भर में चल रही बहस के बीच एक बेहद गंभीर चेतावनी सामने आई है। कैथोलिक चर्च को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक पहलुओं पर परामर्श देने वाले पादरी पाओलो बेनांती का मानना है कि सुपरइंटेलिजेंस को लेकर खड़ा किया जा रहा भारी भरकम शोर दरअसल एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। बड़ी प्रयोगशालाएं और तकनीकी संस्थान इस समस्या को इतना उलझा हुआ और जटिल बता रहे हैं मानो इसका समाधान केवल वही निकाल सकते हों। इस तरह के आख्यान से आम नागरिकों, नीति निर्माताओं और समाज के अन्य वर्गों को तकनीकी नियम तय करने की खुली लोकतांत्रिक चर्चा से पूरी तरह बाहर धकेला जा रहा है। कॉर्पोरेट बोर्डरूम बनाम लोकतांत्रिक नियंत्रण तकनीकी विकास की मौजूदा दिशा पर गंभीर ऐतराज जताते हुए पाओलो बेनांती ने स्पष्ट किया कि नैतिकता किसी निजी कंपनी के ट्रस्टी बोर्ड या चंद अधिकारियों की जागीर नहीं हो सकती। नैतिक पैमानों को सार्वजनिक मंचों पर खुली बहस, संतुलन और जनभागीदारी के जरिए ही तय किया जाना चाहिए। जब मुट्ठी भर तकनीकी कंपनियां खुद ही पूरे उद्योग के नियम कायदे तय करने लगती हैं, तो बाजार की भाषा में इसे सीधे तौर पर एक कार्टेल कहा जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में निष्पक्ष और लोकतांत्रिक नियामक व्यवस्था की तत्काल दरकार है, न कि कंपनियों द्वारा खुद के लिए बनाए गए मनमाने नियमों की। सुरक्षा चेतावनियों के दौर में ही एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने एक लेख के जरिए मांग रखी थी कि नए एआई मॉडल्स को बाजार में उतारने से पहले अनिवार्य तीसरे पक्ष के मूल्यांकन से गुजरना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने आसवन यानी डिस्टिलेशन की प्रक्रिया पर सख्ती की वकालत की, जिसके तहत प्रतिद्वंद्वी प्रयोगशालाएं किसी स्वामित्व वाले मॉडल के आउटपुट का इस्तेमाल करके अपने खुद के मॉडल को प्रशिक्षित करती हैं। दूसरी तरफ कई विशेषज्ञ रिकर्सिव सेल्फ इम्प्रूवमेंट पर मुकम्मल रोक लगाने की मांग कर रहे हैं, जहां मशीनें अपनी उन्नत कोडिंग क्षमताओं का उपयोग करके खुद के नए और अधिक ताकतवर संस्करण तैयार करने लगती हैं। नवाचार की आजादी और नियंत्रण के मजबूत पहिए पाओलो बेनांती विकास के तरीकों पर एकतरफा बंदिशें लगाने के ज्यादा पक्षधर नहीं हैं, क्योंकि उनका मानना है कि कठोर पाबंदियां नवाचार के पहिए को पूरी तरह रोक सकती हैं। इसके बजाय उनका मुख्य जोर ऐसे सुरक्षा मानक तैयार करने पर है जो यह पक्का करें कि मशीनें कभी भी इंसानी नियंत्रण के दायरे से बाहर न निकलें। सबसे अहम बात यह है कि ये मानक खुद उन तकनीकी प्रयोगशालाओं द्वारा तैयार नहीं किए जाने चाहिए जो इन मॉडल्स को बनाकर मुनाफा कमा रही हैं। फ्रंटियर लैब्स द्वारा गढ़ी जा रही कहानियों के पीछे उनका अपना व्यावसायिक हित छिपा है, जिसका मकसद बाजार में अपना दबदबा कायम करना या उसे बनाए रखना है। मौजूदा दौर में मॉडल्स की भविष्य की क्षमताओं को लेकर किए जा रहे दावों की जमीनी हकीकत परखना बेहद मुश्किल हो गया है। इसके पीछे भारी भरकम आर्थिक, राजनीतिक और निजी प्रोत्साहन काम कर रहे हैं। ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां एक तरफ विकास की रफ्तार धीमी करने की वकालत करती दिखती हैं, वहीं दूसरी तरफ वे सार्वजनिक शेयर बाजार में उतरने की तैयारियां भी कर रही हैं। जो भी पक्ष इस बाजार पर कब्जा जमाएगा, उसके लिए अरबों डॉलर का दांव लगा हुआ है। इसके साथ ही अमेरिका और चीन के बीच की भू-राजनीतिक तनातनी ने हालात को और अधिक उलझा दिया है, क्योंकि सबसे उन्नत एआई मॉडल्स इन्हीं दोनों मुल्कों में विकसित किए जा रहे हैं। मशीन को ईश्वर मानने का भ्रम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को कुछ हलकों में अलौकिक शक्ति या ईश्वर की तरह पेश किए जाने के चलन पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने एक बार आसमान में जादुई बुद्धिमत्ता तैयार करने की अपनी महत्वाकांक्षा जाहिर की थी। पाओलो बेनांती के अनुसार तकनीक को सर्वशक्तिमान या मानवीय समझ से परे बताकर पेश करना विमर्श की दिशा को भटका देता है। हकीकत में यह मसला किसी आस्था का नहीं बल्कि विशुद्ध गणित और सांख्यिकी का है। इंसान किसी नई दिव्यता का निर्माण नहीं कर रहा है, बल्कि यह केवल आंकड़ों और सांख्यिकीय गणना की जटिल प्रक्रिया है जिसे जरूरत से ज्यादा रहस्यमयी बनाकर पेश किया जा रहा है। बुनियादी सवाल यही है कि हम किसी वस्तु की बात कर रहे हैं या किसी चेतना युक्त व्यक्ति की। इंसान और मशीन के इसी अंतर को स्पष्ट रखना बेहद आवश्यक है। पोप लियो चौदहवें का विश्वपत्र और चर्च की भूमिका कैथोलिक चर्च के भीतर दर्शनशास्त्र, धर्मशास्त्र और प्रौद्योगिकी के विद्वान के तौर पर सेवाएं देने वाले बेनांती मानते हैं कि इस तकनीक के उभार ने सार्वजनिक विमर्श में धार्मिक और नैतिक संस्थाओं के लिए एक नई जिम्मेदारी तय कर दी है। समय की चुनौतियों से जूझना और आने वाली पीढ़ियों को तकनीकी दुष्प्रभावों से बचाना इस विमर्श का प्रमुख हिस्सा है। बेनांती विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए अध्ययन सामग्री और उपकरण बनाने में एआई का उपयोग करते हैं, हालांकि पोप लियो चौदहवें इस तकनीक का इस्तेमाल किस प्रकार करते हैं, इस पर गोपनीयता की शपथ के चलते उन्होंने कोई ब्योरा नहीं दिया। मई के महीने में पोप लियो ने अपने कार्यकाल का पहला विश्वपत्र जारी किया था, जिसका केंद्रीय विषय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही था। उस पत्र में पोप ने उद्योग की उस सोच पर आगाह किया था जो केवल दक्षता को ही परम मूल्य मानती है और इंसानी वजूद को महज अनुकूलित किए जाने वाले एक प्रोजेक्ट की तरह देखती है। पोप ने महाशक्तियों और तकनीकी दिग्गजों से अपील की थी कि वे वाणिज्यिक या भू-राजनीतिक वर्चस्व की होड़ छोड़कर साझा लोककल्याण के लिए मिलकर काम करें, ताकि इंसानियत अपनी ही उपलब्धियों का शिकार न बन जाए। सुपरइंटेलिजेंस को लेकर मचाया जा रहा मौजूदा बवेला आम जनता के अधिकारों को छीनने का जोखिम पैदा करता है, जिससे पूरी तकनीक की दिशा केवल कुछ गणितज्ञों, कंप्यूटर वैज्ञानिकों और कॉर्पोरेट अधिकारियों के हाथों में सिमट सकती है। सबसे पहली और अनिवार्य जरूरत इस बात की है कि तकनीक के पास मजबूत ब्रेक और स्टीयरिंग व्हील मौजूद हों, ताकि हर सूरत में मशीन पर इंसान का मजबूत नियंत्रण बना रहे। इसका आप पर असर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नियम तय करने में आम जनता और सरकारों की भागीदारी न होने से भविष्य की तकनीक केवल कुछ मुनाफा कमाने वाली कंपनियों के हाथ का खिलौना बन सकती है। • उपभोक्ता अधिकारों पर असर: अगर चुनिंदा कंपनियां ही मानक तय करेंगी तो बाजार में एकाधिकार बढ़ेगा। इसका सीधा असर भविष्य में एआई टूल्स की कीमतों और सेवाओं के विकल्पों पर पड़ेगा। • गोपनीयता और डेटा सुरक्षा: निजी कंपनियों के बनाए नियमों में सार्वजनिक हित के बजाय व्यावसायिक लाभ सर्वोपरि रहता है। उपयोगकर्ताओं का व्यक्तिगत डेटा कैसे इस्तेमाल होगा, इस पर पारदर्शी नियंत्रण कमजोर हो सकता है। • वैश्विक नीतियों की दिशा: विभिन्न देशों की सरकारों पर स्वतंत्र और कड़े कानून बनाने का दबाव बढ़ेगा। नागरिकों को यह तय करने का अधिकार मिलना चाहिए कि तकनीक का इस्तेमाल किस हद तक सुरक्षित है। • रोजगार और कार्यस्थल: दक्षता के नाम पर इंसानों को रिप्लेस करने की कॉरपोरेट होड़ पर लगाम लग सकती है। यदि लोकतांत्रिक नियंत्रण स्थापित होता है तो कार्यस्थलों पर कर्मचारियों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी। ऐसा क्यों हुआ तकनीकी उद्योग में सुपरइंटेलिजेंस की बहस और नियमों पर कब्जे की कोशिशें मुख्य रूप से भारी वित्तीय हितों और बाजार में एकाधिकार स्थापित करने की होड़ से प्रेरित हैं। • वित्तीय और बाजार प्रोत्साहन: ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी अग्रणी कंपनियां सार्वजनिक शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही हैं। निवेशकों को आकर्षित करने और अरबों डॉलर का बाजार मूल्य हासिल करने के लिए अपनी तकनीक को बेजोड़ दिखाना अनिवार्य बन चुका है। • प्रतिद्वंद्विता को बाहर रखने की रणनीति: सुरक्षा और जटिलता का हौव्वा खड़ा करके बड़ी कंपनियां ऐसे कड़े नियम बनवाना चाहती हैं जिन्हें छोटे स्टार्टअप्स पूरा न कर सकें। इससे बाजार में उनका दबदबा लंबे समय तक सुरक्षित रहता है। • भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा: उन्नत एआई के विकास में अमेरिका और चीन के बीच सीधी होड़ मची हुई है। इस वैश्विक दौड़ के कारण कंपनियां राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी वर्चस्व का तर्क देकर लोकतांत्रिक नियमों से छूट पाने की कोशिश करती हैं। • दार्शनिक और नैतिक शून्यता: तकनीकी विकास की अंधाधुंध रफ्तार में मानवीय मूल्यों और नियंत्रण के मूलभूत सिद्धांतों की अनदेखी की गई है। यही वजह है कि चर्च और दार्शनिकों को इस विषय में दखल देकर मानवीय नियंत्रण की वकालत करनी पड़ रही है। सवाल-जवाब 1. पाओलो बेनांती कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है? पाओलो बेनांती एक पादरी हैं जो दर्शनशास्त्र, धर्मशास्त्र और प्रौद्योगिकी के विद्वान के रूप में कैथोलिक चर्च को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर सलाह देते हैं। 2. बेनांती ने बड़ी टेक प्रयोगशालाओं पर क्या आरोप लगाया है? उन्होंने आरोप लगाया है कि बड़ी प्रयोगशालाएं सुपरइंटेलिजेंस की जटिलता का बहाना बनाकर नियमों को खुद तय कर रही हैं, जो वास्तव में एक कार्टेल की तरह व्यवहार करना है। 3. एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने क्या प्रस्ताव दिया था? उन्होंने नए मॉडल्स के लिए रिलीज से पहले अनिवार्य तीसरे पक्ष के मूल्यांकन और डिस्टिलेशन तकनीक पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी। 4. सुपरइंटेलिजेंस की भाषा पर बेनांती का क्या दृष्टिकोण है? उनका कहना है कि एआई कोई दिव्यता या रहस्यमयी ताकत नहीं है, बल्कि सांख्यिकीय गणना और गणितीय प्रक्रिया है जिसे जादुई बनाकर पेश किया जा रहा है। 5. पोप लियो चौदहवें ने अपने विश्वपत्र में क्या चेतावनी दी थी? पोप ने दक्षता को परम मूल्य मानने वाली मानसिकता और इंसानों को केवल अनुकूलित किए जाने वाले प्रोजेक्ट की तरह देखने की सोच के खिलाफ आगाह किया था। 6. बेनांती तकनीक पर किस प्रकार के नियंत्रण की मांग करते हैं? वे तकनीक पर ऐसी रोक चाहते हैं जिसमें मजबूत ब्रेक और स्टीयरिंग पहिया हो, ताकि मशीनों पर इंसानों का वास्तविक नियंत्रण बना रहे। https://trendkia.com/ai/artificial-intelligence-para-mutthi-bhara-teka-knpaniyon-ka-kabja-banane-laga-hai-cartel-vatican-salahakara-paolo-benanti-ne-cheta-37353 TrendKia — Har trend, sabse pehle.