आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटरों के खिलाफ क्यों लामबंद हो रहे हैं स्थानीय निवासी डेटा एंड सोसाइटी के एक नए शोध में सामने आया है कि भारी बिजली खपत, गोपनीयता समझौतों और ऐतिहासिक कड़वे अनुभवों के चलते पेंसिल्वेनिया में लोग एआई डेटा सेंटरों का जमकर विरोध कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख प्रयोगशालाएं गणना क्षमता यानी कंप्यूटिंग पावर को लगातार बढ़ाने में जुटी हैं। टेक कंपनियों का मानना है कि आधुनिक एआई प्रणालियों को बेहतर बनाने का यही एकमात्र प्रभावी रास्ता है। इसी सोच के तहत वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर की लागत वाले विशाल डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके बावजूद इन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को कई इलाकों में स्थानीय आबादी के भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। टेक जगत और निवेशकों के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि उनके उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच इन बुनियादी केंद्रों को लेकर इतना कड़ा प्रतिरोध क्यों खड़ा हो रहा है। कुछ उद्योग प्रतिनिधि इस विरोध को विदेशी या चीनी हस्तक्षेप का परिणाम बताते हैं, हालांकि जमीनी हकीकत इससे काफी अलग नजर आती है। पेंसिल्वेनिया में अठारह महीने का विस्तृत अध्ययन गैर लाभकारी शोध संस्थान डेटा एंड सोसाइटी के एक नए अध्ययन ने इस विरोध की मूल वजहों को उजागर किया है। शोधकर्ताओं के एक दल ने वर्ष 2024 से 2026 के बीच अमेरिकी राज्य पेंसिल्वेनिया में कुल 44 स्थानीय नागरिकों के साक्षात्कार लिए। इस 18 महीने के नृवंशविज्ञान कार्य का मकसद डेटा सेंटरों के केवल तकनीकी या पर्यावरणीय आंकड़े जुटाना नहीं था, बल्कि यह समझना था कि आम लोग अपने पड़ोस में होने वाले इस निर्माण को किस नजरिए से देखते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय तक धरातल पर रहकर काम करने से प्रचार के दावों से अलग वास्तविक स्थिति का पता चलता है, जहां लोग एआई को अगली अपरिहार्य औद्योगिक क्रांति बताए जाने और अपने रोजमर्रा के भय के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहे हैं। सरकारी रुख में बदलाव और ऐतिहासिक औद्योगिक अनुभवों की छाया शुरुआत में डेटा सेंटरों को बड़े आर्थिक विकास के इंजन के रूप में प्रचारित किया गया था। जुलाई 2025 में एक शिखर सम्मेलन के दौरान पेंसिल्वेनिया के गवर्नर जोश शापिरो ने डेटा सेंटर और एआई अवसंरचना में 90 अरब डॉलर के प्रस्तावित निवेश का स्वागत किया था। इसके ठीक एक साल बाद माहौल पूरी तरह बदल गया, जब गवर्नर शापिरो ने डेटा सेंटर परियोजनाओं पर कड़ी शर्तें लागू करने और उन्हें नियामक फास्ट ट्रैक प्रक्रिया से बाहर करने वाले आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए। शोध के अनुसार, टेक कंपनियों का यह दावा कि एआई का प्रसार रोका नहीं जा सकता, पेंसिल्वेनिया के लोगों को बिल्कुल रास नहीं आया। इस राज्य का इतिहास कोयला खनन, शुरुआती तेल उद्योग, इस्पात निर्माण और शेल गैस के लिए फ्रैकिंग जैसी कई औद्योगिक लहरों से जुड़ा रहा है। इन पुराने अनुभवों और औद्योगिक बदलावों की वजह से स्थानीय निवासियों में बड़े औद्योगिक वादों को लेकर गहरा संदेह बना रहता है। डेटा एंड सोसाइटी की कार्यक्रम निदेशक और अध्ययन की सह लेखिका माइया वोलुकेम ने कहा कि पेंसिल्वेनिया के लोग औद्योगिक बदलावों और उनसे जुड़ी मुश्किलों का लंबा अनुभव रखते हैं, जिससे वे आसानी से भांप लेते हैं कि कब चीजें सही दिशा में नहीं जा रही हैं। मजदूर संगठनों का समर्थन और लॉबिंग का सहारा विरोध के इस माहौल के बीच निर्माण कार्य से जुड़े ट्रेड यूनियन इन डेटा सेंटर परियोजनाओं के सबसे मजबूत समर्थक बनकर उभरे हैं। यूनियन इस बात को स्वीकार करते हैं कि निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद इन डेटा सेंटरों में बहुत अधिक संख्या में स्थायी नौकरियां नहीं बचेंगी। इसके बावजूद भारी निर्माण गतिविधियों से मिलने वाले तात्कालिक काम को वे अपने संगठन और सदस्यों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारे के रूप में देखते हैं। दूसरी तरफ, टेक उद्योग ने अपनी छवि सुधारने और परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए सुनियोजित अभियान चलाए हैं। डेटा सेंटर कोएलिशन नामक ट्रेड समूह ने आम जनता का समर्थन जुटाने के लिए 'पेंसिल्वेनिया कनेक्ट्स' जैसी वेबसाइट्स बनाई हैं। इसके अलावा इस समूह ने राज्य सरकार के भीतर अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए पिछले साल कम से कम 19,000 डॉलर की लॉबिंग राशि भी खर्च की थी। दलों से परे स्थानीय लामबंदी और बिजली बिलों की चिंता कंपनियों के व्यापक प्रचार के बावजूद डेटा सेंटरों के खिलाफ असंतोष लगातार गहरा होता गया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि विरोध करने वालों का यह समूह किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर वर्ग के लोगों को एक साथ ला रहा है। माइया वोलुकेम के अनुसार, यह कोई औपचारिक समझौता नहीं है, बल्कि लोग अपनी वर्तमान स्थिति और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए स्वाभाविक रूप से एकजुट हो रहे हैं। इस मोर्चे में वे लोग शामिल हैं जो सामान्य तौर पर बड़े निर्माण के खिलाफ रहते हैं, साथ ही वे नागरिक भी हैं जो बड़ी टेक कंपनियों के प्रभुत्व को नापसंद करते हैं। इनके साथ ऊर्जा खपत, जल उपयोग, प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर चिंतित पर्यावरण समूह भी खड़े हैं। सबसे बड़ा मसला लोगों के अपने आर्थिक हितों से जुड़ा हुआ है। स्थानीय निवासियों को डर है कि डेटा सेंटरों की अत्यधिक बिजली खपत के कारण उनके अपने घरेलू बिजली बिलों में भारी बढ़ोतरी हो जाएगी। लोगों को यह भी चिंता है कि इन भारी संयंत्रों के बनने से उनके घरों और जमीन के दाम घट जाएंगे। इसके अलावा स्थानीय निकायों के बैठकों में कंपनियों की गुप्त कार्यशैली, जैसे अधिकारियों से गैर प्रकटीकरण समझौते यानी नॉन डिस्क्लोजर एग्रीमेंट करवाना, लोगों के गुस्से को और भड़का रहा है। पारदर्शिता की कमी और भरोसे का गहराता संकट अध्ययन में बताया गया है कि जब अमेज़न, मेटा या माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधि या डेटा सेंटर डेवलपर अचानक स्थानीय परिषदों की बैठकों में नजर आने लगते हैं, तो लोगों का चौंकना स्वाभाविक होता है। कई बार स्थानीय पार्षद, जिनके साथ नागरिकों के सामान्य रिश्ते थे, ऐसे समझौतों के बाद इस विषय पर खुलकर बात करने से कतराने लगते हैं। डेटा सेंटर विरोधियों के अलग-अलग कारणों की वजह से टेक उद्योग के सामने एक जटिल चुनौती खड़ी हो गई है। उनके पास इस बहुआयामी असंतोष को शांत करने का कोई सीधा समाधान नहीं है। शोधकर्ता लीविया गारोफालो के मुताबिक, असली संकट भरोसे की कमी का है। यह एक ऐसा व्यक्तिगत रिश्ता बन चुका है जहां कोई व्यक्ति अपने घर में अकेले बैठकर चैटबॉट से बात करते हुए जुड़ाव महसूस करता है, लेकिन साथ ही उसे इस बात का भी अहसास रहता है कि यह सिर्फ एक व्यावसायिक वस्तु है और उसके संसाधनों का दोहन किया जा रहा है। इसका आप पर असर डेटा सेंटरों के तेजी से होते निर्माण का सीधा असर आम नागरिकों के मासिक खर्च और स्थानीय पर्यावरण पर पड़ रहा है। • बिजली बिलों पर असर: विशाल डेटा सेंटरों की अत्यधिक ऊर्जा खपत से ग्रिड पर भारी दबाव पड़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप कई इलाकों में घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिलों में बढ़ोतरी होने का खतरा पैदा हो गया है। • संपत्ति के मूल्य: रिहायशी इलाकों के नजदीक भारी औद्योगिक संयंत्र और सबस्टेशन बनने से आसपास के मकानों की मांग घट सकती है। इससे आम गृहस्वामियों की संपत्ति के बाजार मूल्य पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। • पर्यावरण और जल संसाधन: सर्वरों को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। इससे स्थानीय भूजल स्तर और प्राकृतिक जल स्रोतों पर दबाव बढ़ता है, जिससे आम जनता के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। • रोजगार की वास्तविकता: निर्माण के दौरान जरूर कुछ लोगों को अस्थायी मजदूरी मिलती है, लेकिन केंद्र बनने के बाद बहुत कम नौकरियां रह जाती हैं। इसलिए स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार मिलने की उम्मीदें काफी सीमित हैं। • स्थानीय प्रशासन में पारदर्शिता: कंपनियों द्वारा गोपनीयता समझौतों के इस्तेमाल से नगर निकायों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। इससे आम नागरिकों के लिए अपने क्षेत्र के विकास निर्णयों में सीधी भागीदारी करना कठिन हो जाता है। ऐसा क्यों हुआ एआई डेटा सेंटरों के खिलाफ बढ़ता जनाक्रोश अचानक नहीं उपजा है, बल्कि यह आर्थिक असुरक्षा, पर्यावरणीय चिंताओं और कंपनियों की अपारदर्शी नीतियों का सीधा नतीजा है। • अत्यधिक ऊर्जा और संसाधन खपत: आधुनिक एआई मॉडलों को चलाने और प्रशिक्षित करने के लिए भारी मात्रा में बिजली और कूलिंग के लिए पानी की दरकार होती है। स्थानीय नागरिकों को लगता है कि इन विशाल संयंत्रों के कारण उनके अपने बुनियादी संसाधन कम पड़ जाएंगे और बिजली बिल महंगे हो जाएंगे। • ऐतिहासिक औद्योगिक शोषण की यादें: पेंसिल्वेनिया जैसे क्षेत्रों ने कोयला खनन, इस्पात निर्माण और फ्रैकिंग के दौर में भारी प्रदूषण और सामाजिक नुकसान झेला है। इन कटु अनुभवों के कारण स्थानीय लोग टेक कंपनियों के विकास के दावों पर आसानी से भरोसा नहीं करते। • कंपनियों की गोपनीय कार्यशैली: टेक डेवलपर्स अक्सर स्थानीय जन प्रतिनिधियों और नगर परिषदों से गैर प्रकटीकरण समझौते करा लेते हैं। जब चुने हुए प्रतिनिधि जनता से सीधी बात करने से बचते हैं, तो लोगों में संदेह और विरोध की भावना और तीव्र हो जाती है। • स्थायी रोजगार का अभाव: प्रचार के विपरीत इन केंद्रों में निर्माण पूरा होने के बाद केवल सीमित तकनीकी कर्मियों की ही जरूरत होती है। स्थानीय जनता महसूस करती है कि संसाधनों का दोहन उनका हो रहा है जबकि दीर्घकालिक आर्थिक लाभ उन्हें नहीं मिल रहा। सवाल-जवाब 1. डेटा सेंटरों के विरोध पर यह अध्ययन किसने किया है? यह अध्ययन गैर लाभकारी शोध संस्थान डेटा एंड सोसाइटी ने 2024 से 2026 के बीच पेंसिल्वेनिया के 44 निवासियों से बातचीत करके तैयार किया है। 2. स्थानीय नागरिक एआई डेटा सेंटरों का विरोध क्यों कर रहे हैं? लोग घरेलू बिजली बिलों में बढ़ोतरी, जमीन की कीमतों में गिरावट, अत्यधिक पानी की खपत और कंपनियों की गोपनीय कार्यशैली के कारण विरोध कर रहे हैं। 3. पेंसिल्वेनिया के गवर्नर जोश शापिरो ने क्या कदम उठाया? शुरुआत में 90 अरब डॉलर के निवेश का स्वागत करने के एक साल बाद गवर्नर शापिरो ने डेटा सेंटर परियोजनाओं पर सख्त शर्तें लगाईं और उन्हें फास्ट ट्रैक मंजूरी से हटा दिया। 4. क्या ट्रेड यूनियन इन डेटा सेंटर परियोजनाओं का समर्थन कर रहे हैं? हां, निर्माण से जुड़े ट्रेड यूनियन इन परियोजनाओं का समर्थन कर रहे हैं क्योंकि इससे उनके सदस्यों को निर्माण कार्य के दौरान भारी संख्या में रोजगार मिलता है। 5. टेक उद्योग विरोध को शांत करने के लिए क्या प्रयास कर रहा है? डेटा सेंटर कोएलिशन जैसे व्यापारिक समूहों ने 'पेंसिल्वेनिया कनेक्ट्स' जैसी प्रचार वेबसाइट्स बनाई हैं और पिछले साल लॉबिंग पर कम से कम 19,000 डॉलर खर्च किए हैं। 6. कंपनियों द्वारा एनडीए कराने से लोगों में क्या नाराजगी है? कंपनियां स्थानीय अधिकारियों से गैर प्रकटीकरण समझौते करा लेती हैं, जिसके चलते जनता के चुने हुए प्रतिनिधि अपने नागरिकों से परियोजनाओं पर खुलकर बात नहीं कर पाते। https://trendkia.com/ai/artiphishiyala-intelijensa-data-center-ke-khilapha-kyon-lamabnda-ho-rahe-hain-sthaniya-nivasi-36598 TrendKia — Har trend, sabse pehle.