# आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की आवाज सुनाने वाला अनोखा खिलौना बेजी लाएगा डेटा सेंटरों का भारी शोर आपके घर

> न्यूयॉर्क के बासुरा स्टूडियो और म्यूजिक प्रोजेक्ट बिग डेटा ने बेजी नाम का एक अनोखा खिलौना बनाया है, जो दबाने पर डेटा सेंटर का असहनीय शोर निकालता है। इस व्यंग्यात्मक अभियान का मकसद एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते पर्यावरण और ध्वनि संकट पर लोगों का ध्यान खींचना है।

**Type:** article · **Category:** एआई · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/ai/artiphishiyala-intelijensa-ki-avaja-sunane-vala-anokha-khilauna-bezzy-laega-deta-sentaron-ka-bhari-shora-apake-ghara-34007 · **Language:** Hindi
**Tags:** डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ध्वनि प्रदूषण, बासुरा, बिग डेटा, एलन विल्किस, राजीव बसु, बिजली ग्रिड

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की तेज तरक्की के बीच सर्वर और बिजली की विशालकाय बुनियादी संरचना आम जिंदगी को किस तरह प्रभावित कर रही है, इसे समझाने के लिए एक अनोखा प्रयोग सामने आया है। न्यूयॉर्क के रचनात्मक स्टूडियो बासुरा और संगीत निर्माता एलन विल्किस के म्यूजिक प्रोजेक्ट बिग डेटा ने मिलकर बेजी नाम का एक व्यंग्यात्मक भरवां खिलौना तैयार किया है। एलन विल्किस को 2013 में जॉयवेव बैंड के साथ मिलकर बनाए गए चर्चित गीत 'डेंजरस' के लिए जाना जाता है। बिग डेटा के एक नए एकल गीत के रिलीज के दिन ही शुरू की गई इस साझी पहल का नाम 'एडॉप्ट अ डेटा सेंटर' रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य आम लोगों को एक बेहद प्यारे और गुदगुदाने वाले अंदाज में यह दिखाना है कि एक असली डेटा सेंटर के साथ पड़ोस में रहना कैसा अनुभव कराता है।

## सर्वर रैक जैसा दिखने वाला खिलौना और उसकी तीखी चीख
इस समय डेटा सेंटर भारी बहस और आलोचना के केंद्र में बने हुए हैं। तमाम बड़ी एआई कंपनियां अपने अत्यधिक बिजली खपाने वाले उपकरणों को चलाने के लिए अमेरिका में हजारों एकड़ जमीन पर लगातार नए केंद्र खड़े कर रही हैं। इन केंद्रों की भारी ऊर्जा खपत और गैस आधारित बिजली उत्पादन के विस्तार को लेकर पर्यावरण जगत में तीखा विरोध देखा जा रहा है। इसके अलावा, इन इमारतों के आसपास रहने वाले स्थानीय लोग दिन-रात गूंजने वाले गंभीर ध्वनि प्रदूषण से बेहद परेशान हैं। इस पूरे परिदृश्य को सामने लाने के लिए बनाया गया बेजी खिलौना देखने में डेटा सेंटर के किसी सर्वर रैक जैसा लगता है, जिसमें लंबे हाथ-पैर और गोल-मटोल आंखें लगाई गई हैं। इसका लुक कुछ-कुछ चर्चित वेब सीरीज 'डोंट हग मी आई एम स्केयर्ड' के किरदारों जैसा दिखता है।

जब कोई इस खिलौने के पेट को दबाता है, तो इसमें से कुछ सेकंड की बेहद तेज और कर्कश चीख निकलती है। यह आवाज वर्जीनिया में स्थित एक वास्तविक डेटा सेंटर के पास रहने वाले पड़ोसी द्वारा रिकॉर्ड की गई असली ऑडियो क्लिप है। इस खिलौने पर लगे टैग पर लिखा है कि इसे कान फोड़ देने वाली कभी न खत्म होने वाली गुनगुनाहट के लिए गले लगाएं। बासुरा के संस्थापक राजीव बसु ने बताया कि उन्होंने इस खास रिकॉर्डिंग को इसलिए चुना क्योंकि यह सबसे स्पष्ट थी और सुनने में सबसे ज्यादा परेशान करने वाली थी। जिस व्यक्ति ने इस आवाज को रिकॉर्ड किया था, उसने इसका विवरण देते हुए कहा कि यह ऐसा महसूस होता है जैसे बिना रुके लगातार किसी कार का अलार्म बज रहा हो। यह इतनी तीखी आवाज है कि आपका पूरा ध्यान केवल इसी पर अटक कर रह जाता है।

## कलात्मक व्यंग्य और जमीनी हकीकत का मेल
बासुरा स्टूडियो इससे पहले भी कई अनूठे अभियानों पर काम कर चुका है, जिनमें कुत्तों के लिए लग्जरी पोशाकें तैयार करना और येरबा माद्रे के साथ मिलकर मिट्टी के ऐसे जूते बनाना शामिल था जो टहलते समय टूटकर जंगली फूलों के बीज बिखेरते हैं। अपने नए प्रोजेक्ट में बेजी गुड़िया के अलावा स्टिकर का एक संग्रह भी पेश किया गया है। इन स्टिकरों पर व्यंग्य करते हुए लिखा गया है कि हर डेटा सेंटर को एक स्थायी आशियाना मिलना चाहिए और अपने दिल के साथ-साथ अपने पावर ग्रिड को भी खोलिए। अभियान की आधिकारिक वेबसाइट पर संदेश दिया गया है कि एक डेटा सेंटर को गोद लें, क्योंकि वे सिर्फ सब कुछ ही तो मांगते हैं। राजीव बसु के अनुसार, यह पूरी परियोजना अमेरिका में डेटा सेंटरों के पास रहने वाले दर्जनों लोगों के साक्षात्कारों पर आधारित है।

बिग डेटा के निर्माता एलन विल्किस ने बताया कि डेटा सेंटर विवाद का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि इसके खिलाफ उठने वाला विरोध पूरी तरह से द्विदलीय है और इसमें दोनों राजनीतिक पक्षों के लोग एकजुट हैं। विल्किस का कहना है कि अमेरिका में दशकों से बढ़ती संपत्ति की असमानता का प्रत्यक्ष माध्यम अब एआई बन चुका है, और डेटा सेंटर इसी असमानता का भौतिक रूप हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि शेयर बाजार के कुल मूल्य का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ मुट्ठी भर तकनीकी कंपनियों पर निर्भर है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पहले ही एआई की सफलता पर एक बड़ा दांव बन चुकी है।

## सीमित संख्या और समाज के लिए बड़ा संदेश
हाथ से अमेरिका में तैयार किए गए इन बेजी खिलौनों की केवल 20 प्रतियां ही बनाई गई हैं, जिनकी कीमत 99 डॉलर रखी गई है। इन्हें आधिकारिक वेबसाइट और बिग डेटा के ऑनलाइन स्टोर से खरीदा जा सकता है। हालांकि, निर्माताओं का कहना है कि सिर्फ एक खिलौना बेचना इस अभियान का मकसद नहीं है। इस व्यंग्य का असली उद्देश्य लोगों को डेटा सेंटर से जुड़े वास्तविक तथ्यों को खुद जांचने के लिए प्रेरित करना है। जब कोई वेबसाइट पर 'एडॉप्ट नाउ' बटन पर क्लिक करता है, तो उसे एक ऐसे बयान पर ले जाया जाता है जहां डेटा सेंटरों के प्रभाव से जुड़े शोध और रिपोर्टों के लिंक दिए गए हैं। राजीव बसु ने स्पष्ट किया कि सवाल यह नहीं है कि एआई डेटा केंद्र होने चाहिए या नहीं, बल्कि असली सवाल यह है कि यह तय कौन करेगा कि वे कहां बनाए जाएं, वे किन संसाधनों का उपभोग करें और क्या उनके पास रहने वाले स्थानीय समुदायों को वाकई उनसे कोई लाभ मिल रहा है।

## इसका आप पर असर
यह व्यंग्यात्मक अभियान सीधे तौर पर यह उजागर करता है कि एआई तकनीक के विस्तार से आम नागरिकों के आवासीय इलाकों, बिजली के बिल और मानसिक शांति पर क्या असर पड़ रहा है।

- **ध्वनि और मानसिक स्वास्थ्य पर असर:** डेटा सेंटरों के विशाल कूलिंग पंखे और जनरेटर 24 घंटे लगातार तेज सीटी जैसा शोर पैदा करते हैं। आसपास रहने वाले परिवारों को अनिद्रा, लगातार तनाव और अपने घरों में खिड़कियां बंद रखने की मजबूरी का सामना करना पड़ता है।
- **ऊर्जा संकट और बिजली का बिल:** ये विशाल सर्वर परिसर स्थानीय पावर ग्रिड से भारी मात्रा में बिजली खींचते हैं। जब ग्रिड पर भारी दबाव पड़ता है तो आम उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें बढ़ सकती हैं और पीक समय में कटौती का जोखिम रहता है।
- **गैस संयंत्रों और पर्यावरण का दबाव:** बिजली की भारी मांग पूरी करने के लिए गैस आधारित संयंत्रों का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इसका सीधा नुकसान स्थानीय हवा की गुणवत्ता और वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन के रूप में आम लोगों को भुगतना पड़ता है।
- **जमीन और बुनियादी सुविधाओं का बंटवारा:** हजारों एकड़ भूमि पर डेटा सेंटर बनने से रिहायशी इलाकों की जमीन महंगी और दुर्लभ हो रही है। स्थानीय नगर पालिकाओं को कंपनियों को सब्सिडी देने के बजाय अपने निवासियों की सुविधाओं पर पहले ध्यान देने की जरूरत है।

## ऐसा क्यों हुआ
डेटा सेंटरों के खिलाफ बढ़ते जन आक्रोश और इस अनूठे खिलौने के निर्माण के पीछे एआई तकनीक की अत्यधिक ऊर्जा खपत और रिहायशी इलाकों में उसका अनियंत्रित विस्तार है।

- **एआई मॉडलों की बेतहाशा बिजली मांग:** आधुनिक एआई टूल्स को चलाने और प्रोसेस करने के लिए लाखों सर्वरों को लगातार चालू और ठंडा रखना पड़ता है। इस भारी जरूरत को पूरा करने के लिए तकनीकी कंपनियों ने रिहायशी बस्तियों के नजदीक विशाल केंद्र स्थापित करना शुरू कर दिया है।
- **वर्जीनिया जैसे राज्यों में अनियंत्रित निर्माण:** अमेरिका के कई इलाकों में बिना उचित ध्वनि अवरोधक उपायों के हजारों एकड़ में डेटा सेंटर खड़े कर दिए गए। इसके परिणामस्वरूप वहां रहने वाले लोगों के लिए लगातार बजने वाले कार अलार्म जैसा असहनीय शोर रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया।
- **तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही पर सवाल:** शेयर बाजार की लगभग 40 प्रतिशत वैल्यू मुट्ठी भर तकनीकी कंपनियों पर टिकी है, जिससे नीतियां उनके पक्ष में झुकती दिख रही हैं। बासुरा और बिग डेटा ने कला और व्यंग्य का सहारा इसलिए लिया ताकि आम लोग इस असंतुलन और अपने संसाधनों के दोहन पर सवाल उठा सकें।

## सवाल-जवाब

### 1. बेजी खिलौना क्या है और इसे किसने तैयार किया है?
बेजी सर्वर रैक जैसा दिखने वाला एक भरवां खिलौना है, जिसे न्यूयॉर्क के बासुरा स्टूडियो और संगीतकार एलन विल्किस के प्रोजेक्ट बिग डेटा ने मिलकर बनाया है।

### 2. इस खिलौने को दबाने पर किस तरह की आवाज निकलती है?
खिलौने को दबाने पर कुछ सेकंड की कान फोड़ देने वाली तेज आवाज आती है, जो वर्जीनिया में एक असली डेटा सेंटर के पड़ोस से रिकॉर्ड की गई थी।

### 3. कुल कितनी बेजी गुड़िया बिक्री के लिए उपलब्ध हैं और उनकी कीमत क्या है?
हाथ से तैयार की गई केवल 20 बेजी गुड़िया बनाई गई हैं और इनमें से प्रत्येक की कीमत 99 डॉलर रखी गई है।

### 4. 'एडॉप्ट अ डेटा सेंटर' अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य व्यंग्य और कला के जरिए लोगों को डेटा सेंटरों की भारी बिजली खपत, गैस संयंत्रों के विस्तार और ध्वनि प्रदूषण के प्रति जागरूक करना है।

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