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  "type": "article",
  "title": "अस्पतालों में एआई शिफ्ट रोस्टर बना तनाव की वजह, नर्सों ने पेलेंटिर के सॉफ्टवेयर पर खड़े किए सवाल",
  "summary": "अमेरिका की सबसे बड़ी निजी अस्पताल श्रृंखला एचसीए हेल्थकेयर में पेलेंटिर के एआई रोस्टर टूल टिमपनी को लेकर नर्सों का असंतोष बढ़ गया है, जहां शिफ्ट की कमी और कार्यस्थल पर तनाव के आरोप लग रहे हैं।",
  "content": "अमेरिका के निजी चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दखल बढ़ने के साथ ही अस्पतालों के भीतर काम करने वाले मेडिकल स्टाफ के सामने नई चुनौतियां खड़ी होने लगी हैं। देश की सबसे बड़ी अस्पताल श्रृंखला एचसीए हेल्थकेयर ने करीब 190 में से लगभग 130 चिकित्सा केंद्रों पर शिफ्ट आवंटन का जिम्मा ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर को सौंप रखा है। टिमपनी नाम के इस एआई शेड्यूलिंग टूल को डेटा एनालिटिक्स कंपनी पेलेंटिर के साथ मिलकर 2023 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया था। हालांकि, वार्डों में चौबीसों घंटे मरीजों की देखभाल में जुटी नर्सों का कहना है कि इस प्रणाली ने काम को आसान बनाने के बजाय कार्यस्थल के संतुलन को बिगाड़ दिया है।\n\nदस साल के क्लिनिकल अनुभव वाली और नेशनल नर्सेज यूनाइटेड यूनियन से जुड़ी 34 वर्षीय रेत्ज़लॉफ बताती हैं कि अस्पताल प्रबंधन ने जिस तकनीक को दक्षता बढ़ाने के दावे के साथ पेश किया था, वह जमीन पर गंभीर परेशानियां खड़ी कर रही है। उनके अपने अस्पताल में यह टूल करीब दो साल पहले शुरू किया गया था। उनका कहना है कि इस नए सिस्टम से कोई खुश नहीं है और सहयोगियों के बीच लगातार नाराजगी बनी रहती है। विभिन्न चिकित्सा इकाइयों में तैनात कई नर्सों का आरोप है कि टिमपनी के कारण रोस्टर में अनुभव और स्टाफ की संख्या का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे काम का अत्यधिक बोझ सीधे तौर पर मरीजों की देखभाल को प्रभावित कर रहा है। इंटरनेट चर्चा मंच रेडिट पर भी इसी तरह की शिकायतें कर्मचारियों द्वारा साझा की गई हैं।\n\nकम स्टाफ और अनुभवहीन शिफ्टों से बढ़ता दबाव\nस्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार यह सॉफ्टवेयर अक्सर शिफ्टों में पर्याप्त संख्या में नर्सों की तैनाती करने में चूक जाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत रविवार और सप्ताहांत के दौरान सामने आती है, जब वरिष्ठ और अनुभवी स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी बेहद जरूरी होती है। रेत्ज़लॉफ ने हाल ही की अपनी ऐसी शिफ्टों का जिक्र किया जहां उनके साथ काम करने वाली सभी चारों सहकर्मी जूनियर स्तर की थीं। पूरे वार्ड में इकलौती वरिष्ठ नर्स होने के चलते उन्हें बेहद गंभीर मरीजों के इलाज में जरूरी ध्यान देने के बजाय नए कर्मियों को सामान्य प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन देने के लिए समय निकालना पड़ा। उनका कहना है कि अस्पताल का यह रवैया मानवीय निर्णय और क्लिनिकल समझ पर एक कंप्यूटर एप्लीकेशन को तरजीह देने जैसा है।\n\nसॉफ्टवेयर पर यह भी आरोप है कि वह नर्सों द्वारा दी गई व्यक्तिगत प्राथमिकताओं की लगातार अनदेखी करता है। रात की शिफ्ट, सप्ताहांत का काम, लगातार कार्य दिवसों के बीच विश्राम का अंतर या पहले से मांगे गए जरूरी अवकाश जैसे विकल्पों को दरकिनार कर दिया जाता है। इसका नतीजा यह हुआ है कि नर्सों को अपनी ड्यूटी बदलने या तय समय सारिणी को ठीक करवाने के लिए पहले से कहीं अधिक मशक्कत करनी पड़ती है। कई कर्मी मानसिक तनाव और थकान के चलते अघोषित छुट्टियां लेने को मजबूर हो रहे हैं, जबकि एक साल में कुछ ही बार ऐसा करने पर नौकरी जाने का जोखिम बना रहता है।\n\nपारंपरिक प्रबंधन बनाम केंद्रीयकृत एआई रोस्टर\nटिमपनी के लागू होने से पहले अस्पतालों में स्थानीय वार्ड प्रबंधक और सुपरवाइजर खुद रोस्टर तैयार करते थे। उस समय यदि किसी कर्मी की छुट्टी या शिफ्ट में बदलाव करना होता था, तो उनसे बातचीत कर आपसी सहमति बनाई जाती थी। टेक्सास में कार्यरत एक गैर-यूनियन नर्स, जिन्होंने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर बात की, का कहना है कि पहले सब कुछ समय पर तय हो जाता था और कभी कोई बड़ा संकट पैदा नहीं हुआ। अब टूल लागू होने के बाद नर्सों को अचानक दूसरी टीमों में भेज दिया जाता है या बहुत कम समय के नोटिस पर बदलाव झेलने पड़ते हैं।\n\nशुरुआती दौर में स्थानीय प्रबंधकों के पास सॉफ्टवेयर द्वारा बनाई गई सूचियों में संशोधन का अधिकार था। लेकिन बाद में प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया गया। अब प्रभावित कर्मियों को नैशविले स्थित एचसीए के केंद्रीय मुख्यालय में एक विशेष टीम के पास ऑनलाइन अपील दर्ज करानी पड़ती है। नर्सों के मुताबिक इस नई व्यवस्था में आमने-सामने संवाद या अपनी स्थिति समझाने का कोई विकल्प नहीं होता। यदि मुख्यालय की टीम अपील खारिज कर दे, तो आपस में शिफ्ट बदलने की संभावना महज 50 प्रतिशत ही रह जाती है।\n\nप्रबंधन का पक्ष और रेड डेज का गणित\nएचसीए के प्रवक्ता हार्लो सुमरफोर्ड ने इन चिंताओं पर कंपनी का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय टिमपनी नहीं बल्कि नर्सिंग लीडर्स ही लेते हैं। उन्होंने इन दावों को भ्रामक बताया कि यह टूल मरीजों की देखरेख की कीमत पर स्टाफ की कटौती के लिए बनाया गया है। सुमरफोर्ड का कहना है कि कंपनी का लक्ष्य हमेशा ऐसा रोस्टर तैयार करना रहा है जिसमें मरीजों की जरूरतों के अनुरूप सही कौशल और अनुभव वाले कर्मचारी उपलब्ध हों, साथ ही सहकर्मियों की पसंद का भी ख्याल रखा जाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्टाफ से मिले फीडबैक के आधार पर सॉफ्टवेयर को लगातार सुधारा जा रहा है।\n\nकंपनी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार टिमपनी नर्सों को उनके मांगे गए अवकाश, जिन्हें रेड डेज कहा जाता है, में से औसतन केवल 1 प्रतिशत दिनों में ही ड्यूटी पर बुलाता है। हालांकि, मिसौरी में एचसीए के एक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत ली बार्कर का कहना है कि कागज पर यह आंकड़ा मामूली लग सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। बार्कर के अनुसार उनके केंद्र में पहले कभी किसी कर्मचारी को रेड डेज पर जबरन ड्यूटी नहीं दी जाती थी, जबकि अब लगभग हर नर्स को उसकी छुट्टी के दिन काम पर लगा दिया गया है। बार्कर को अपनी एक पुरानी बीमारी के तय डॉक्टर परामर्श को इसलिए टालना पड़ा क्योंकि वह अपनी शिफ्ट किसी और से बदल नहीं सकीं।\n\nडेटा डिलीट करने के आरोप और कानूनी खींचतान\nइस सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल केवल वार्डों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह मामला अदालत तक पहुंच चुका है। जुलाई में एचसीए की पूर्व डेटा साइंस मैनेजर एंजेलिक रसेल ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया। रसेल ने आरोप लगाया कि टिमपनी की कमियों पर सवाल उठाने के कारण उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। मुकदमे में कहा गया है कि एचसीए नियमित रूप से उस डेटा को मिटा देता है जिसका उपयोग यह टूल रोस्टर बनाने के लिए करता है। रसेल का दावा है कि इस डेटा विलोपन के कारण स्वतंत्र ऑडिट असंभव हो गया कि सॉफ्टवेयर वास्तव में कितना प्रभावी है, जो संभवतः स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कई कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन भी है। अदालत में कंपनी का औपचारिक जवाब आना बाकी है।\n\nलगभग 1,00,000 नर्सों में से करीब 10,000 कर्मियों का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनियन नेशनल नर्सेज यूनाइटेड का कहना है कि एचसीए ने इस तकनीक से जुड़ी बुनियादी जानकारियां साझा करने के उनके अनुरोधों को ठुकरा दिया है। मिसौरी में करीब 500 नर्सों की अगुवाई करने वाले ली बार्कर ने बताया कि कर्मचारियों की प्राथमिकताओं का सम्मान न करने को लेकर प्रबंधन के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है, जो अब मध्यस्थता की ओर बढ़ रही है। बार्कर का दावा है कि टूल आने के पहले 12 महीनों में कार्यस्थल पर चोट लगने की घटनाओं में वृद्धि हुई है और कई कर्मियों ने तनाव के चलते इस्तीफे दे दिए हैं।\n\nपेलेंटिर फाउंड्री की तकनीक और दक्षता के दावे\nटिमपनी को पेलेंटिर के प्रमुख प्लेटफॉर्म फाउंड्री पर तैयार किया गया है। यह प्लेटफॉर्म किसी भी संगठन के विभिन्न परिचालनों से डेटा जुटाकर उसका विश्लेषण करता है। संगीत के ताल वाद्य के नाम पर रखे गए इस टूल का मुख्य काम मरीजों की संभावित संख्या और स्टाफ की जरूरतों का गणितीय पूर्वानुमान लगाकर स्वचालित शेड्यूल बनाना है। जब 2023 में इसकी शुरुआत हुई थी, तब एचसीए के शीर्ष नवाचार अधिकारी माइकल श्लोसर ने कहा था कि इससे प्रबंधन का समय और पैसा बचेगा तथा शिफ्ट आवंटन में पक्षपात पूरी तरह खत्म होगा।\n\nश्लोसर ने इसी वर्ष जुलाई में जारी एक रिसर्च पेपर में दावा किया कि टिमपनी ने प्रबंधकों द्वारा हर महीने शेड्यूलिंग पर खर्च होने वाले घंटों में भारी कटौती की है, महंगी कॉन्ट्रैक्ट नर्सों पर निर्भरता घटाई है और स्टाफ के टिके रहने की दर में सुधार किया है। उनके अनुसार 98 प्रतिशत से अधिक शेड्यूल में कौशल और कार्य अनुभव का संतुलित मिश्रण मौजूद रहता है। एचसीए की जिम्मेदार एआई नीति भी कागजों पर कर्मियों को शारीरिक और भावनात्मक नुकसान से बचाने की बात कहती है। कंपनी के प्रचार विज्ञापनों में कुछ नर्सें इस टूल को सरल और समय बचाने वाला बताकर इसकी तारीफ करती दिखती हैं।\n\nरेयस रेडियोलॉजी और स्वास्थ्य क्षेत्र में पेलेंटिर का विस्तार\nपेलेंटिर की तकनीक को लेकर केवल एचसीए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र के अन्य संस्थान भी असहज स्थिति का सामना कर चुके हैं। अमेरिका की बड़ी इमेजिंग श्रृंखला रेयस रेडियोलॉजी ने इस साल की शुरुआत में जब पेलेंटिर फाउंड्री पर आधारित एक शेड्यूलिंग टूल पेश किया, तो वहां भी कई गंभीर त्रुटियां सामने आईं। इस सॉफ्टवेयर को डॉक्टरों के पर्चियों से विवरण उठाकर शेड्यूलिंग फॉर्म भरने का काम दिया गया था। लेकिन आंतरिक दस्तावेजों से पता चला कि कई मौकों पर सिस्टम ने डॉक्टर के ऑर्डर को किसी गलत मरीज की प्रोफाइल से जोड़ दिया, ऐसे टेस्ट दर्ज कर दिए जो मांगे ही नहीं गए थे, या मरीजों के व्यक्तिगत विवरण में मनगढ़ंत प्रविष्टियां कर दीं। वहां के कर्मियों का मानना था कि गैर-मानक फॉर्म और मानवीय निगरानी के अभाव ने यह संकट खड़ा किया।\n\nरेयस के प्रवक्ता किट क्रैंसर ने कहा कि कंपनी की प्रक्रियाओं को गलत तरीके से पेश किया गया है और वे तकनीक का इस्तेमाल इंसानी सूझबूझ के विकल्प के तौर पर नहीं बल्कि सहयोग के लिए करते हैं। वहीं पेलेंटिर के प्रवक्ता ने नाम दिए बिना कहा कि उनका सॉफ्टवेयर केवल जानकारियों को उपयोगी तरीके से प्रस्तुत करता है, जबकि नीतियों, डेटा और निर्णयों की पूरी जिम्मेदारी संबंधित ग्राहक संस्थान की होती है। इसके बावजूद पेलेंटिर की विकास दर तेज रही है और उसका तिमाही राजस्व लगभग 2 अरब डॉलर के करीब पहुंच चुका है। क्लीवलैंड क्लिनिक जैसे संस्थानों ने इमरजेंसी वार्डों में डिस्चार्ज का पूर्वानुमान लगाने के लिए इस तकनीक की सराहना की है।\n\nराजनीतिक विवाद और ब्रिटेन का एनएचएस करार\nव्यावसायिक सफलता के साथ-साथ पेलेंटिर का विवादों से भी पुराना नाता रहा है। कंपनी के सह-संस्थापक पीटर थील और एलेक्स कार्प के राजनीतिक विचारों तथा कंपनी द्वारा रक्षा व आव्रजन एजेंसियों को दी जाने वाली सेवाओं को लेकर नागरिक अधिकार समूह लगातार मुखर रहे हैं। ब्रिटेन में नेशनल हेल्थ सर्विस द्वारा पेलेंटिर को दिया गया 440 मिलियन डॉलर का अनुबंध व्यापक विरोध का सामना कर रहा है, जहां मरीजों के डेटा की प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर नर्सों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे रद्द करने की मांग उठाई है।\n\nएचसीए के अस्पतालों में भी कई स्वास्थ्य कर्मी चाहते हैं कि इस तकनीक को तुरंत हटाया जाए। हालांकि अकादमिक अध्ययनों में एआई शेड्यूलिंग को कारगर बताया जाता रहा है, लेकिन अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के लिए यह मासिक तनाव का सबब बन चुका है। बार्कर कहते हैं कि रोस्टर जारी होते ही हर कोई चिंता में पड़ जाता है। तीन साल पहले जब यह प्रयोग शुरू हुआ था, तब अधिकारियों ने उम्मीद जताई थी कि नर्सें खुद आगे आकर नए तकनीकी टूल्स की मांग करेंगी और काम आनंददायक बनेगा, लेकिन मौजूदा जमीनी हालात इस उम्मीद के बिल्कुल विपरीत खड़े नजर आ रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nअस्पतालों में एआई आधारित शिफ्ट शेड्यूलिंग टूल के इस्तेमाल से स्वास्थ्य कर्मियों की कार्यशैली और मरीजों की प्रत्यक्ष देखभाल व्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है।\n\n• कार्यस्थल पर तनाव: स्वचालित रोस्टर के कारण कर्मचारियों को अपनी मर्जी के खिलाफ विषम समय और छुट्टियों के दिन ड्यूटी करनी पड़ रही है। इससे नर्सिंग स्टाफ में मानसिक थकान बढ़ रही है और कई अनुभवी कर्मचारी नौकरी छोड़ने का फैसला ले रहे हैं।\n• मरीजों की देखभाल पर असर: वार्डों में वरिष्ठ और कनिष्ठ कर्मियों का सही तालमेल न होने से गंभीर मरीजों के उपचार में देरी का जोखिम बढ़ जाता है। अनुभवी नर्सों को नए स्टाफ को सिखाने में समय लगाना पड़ता है जिससे आपातकालीन ध्यान बंट जाता है।\n• पारदर्शिता की कमी: रोस्टर संबंधी आपत्तियों को स्थानीय स्तर पर सुलझाने के बजाय दूरस्थ मुख्यालय को सौंपने से संवाद बाधित हुआ है। कर्मियों के लिए अपनी शिफ्ट बदलना या जरूरी व्यक्तिगत काम के लिए छुट्टी लेना बेहद कठिन हो गया है।\n• स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक का पैमाना: कॉरपोरेट अस्पतालों द्वारा लागत घटाने के लिए एआई पर अत्यधिक निर्भरता पूरे चिकित्सा क्षेत्र के कामकाजी मानकों को प्रभावित कर सकती है। अन्य अस्पताल श्रृंखलाएं भी इस तरह के प्रयोगों के परिणामों को देखकर अपनी नीतियां तय करेंगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nएचसीए हेल्थकेयर में पेलेंटिर के शेड्यूलिंग टूल को लेकर यह विवाद लागत घटाने की कॉरपोरेट रणनीति और वार्डों की जमीनी वास्तविकताओं के बीच टकराव के कारण पैदा हुआ है।\n\n• लागत और कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ में कटौती: अस्पताल प्रबंधन ने महंगे कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों पर निर्भरता घटाने और रोस्टर बनाने में प्रबंधकों का समय बचाने के उद्देश्य से इस एआई टूल को पेश किया था। प्रशासन का ध्यान वित्तीय बचत और परिचालन दक्षता पर था।\n• नैदानिक अनुभव की एल्गोरिदम द्वारा अनदेखी: टिमपनी सॉफ्टवेयर केवल संख्याओं और पूर्वानुमानों पर ध्यान देता है, जिससे वह वार्डों में वरिष्ठ व कनिष्ठ कर्मियों के व्यावहारिक संतुलन को समझ नहीं पाता। इसके कारण जटिल मरीजों की देखभाल के लिए पर्याप्त अनुभवी स्टाफ मौजूद नहीं रह पाता।\n• केंद्रीकरण और स्थानीय नियंत्रण की समाप्ति: स्थानीय प्रबंधकों से शेड्यूल बदलने के अधिकार छीनकर मुख्यालय की केंद्रीय टीम को सौंपे जाने से कर्मियों की समस्याएं अनसुनी रह गईं। डेटा मिटाए जाने के आरोपों ने कंपनी के भीतर प्रणालीगत पारदर्शिता को भी कमजोर किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. टिमपनी क्या है और इसे किसने विकसित किया है?\nटिमपनी एक एआई शेड्यूलिंग सॉफ्टवेयर है जिसे एचसीए हेल्थकेयर और डेटा एनालिटिक्स कंपनी पेलेंटिर ने संयुक्त रूप से तैयार किया है।\n\n2. नर्सें इस सॉफ्टवेयर का विरोध क्यों कर रही हैं?\nनर्सों का आरोप है कि यह टूल शिफ्टों में कम स्टाफ रखता है, छुट्टियों के दिन काम पर लगाता है और वरिष्ठ कर्मियों की कमी से मरीजों की देखभाल प्रभावित होती है।\n\n3. एचसीए प्रबंधन का इस विवाद पर क्या कहना है?\nप्रबंधन के अनुसार अंतिम शेड्यूलिंग निर्णय नर्सिंग लीडर्स लेते हैं और यह टूल केवल एक प्रतिशत रेड डेज पर ही कर्मियों को काम पर बुलाता है।\n\n4. पूर्व डेटा साइंस मैनेजर एंजेलिक रसेल ने क्या कानूनी आरोप लगाए हैं?\nरसेल का आरोप है कि टूल की कमियों पर सवाल उठाने के कारण उन्हें निकाला गया और कंपनी ने ऑडिट रोकने के लिए शेड्यूलिंग डेटा डिलीट किया था।\n\n5. रेयस रेडियोलॉजी में पेलेंटिर के सॉफ्टवेयर से क्या दिक्कतें आईं?\nवहां सॉफ्टवेयर ने डॉक्टरों के पर्चों को गलत मरीजों की प्रोफाइल से जोड़ दिया और बिना आदेश वाले स्कैन दर्ज कर दिए थे।\n\n6. ब्रिटेन में पेलेंटिर को लेकर क्या विवाद चल रहा है?\nब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस के 440 मिलियन डॉलर के अनुबंध का स्वास्थ्य कर्मी और कार्यकर्ता प्राइवेसी चिंताओं के कारण विरोध कर रहे हैं।",
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  "category": "एआई",
  "publishedAt": "2026-10-02",
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