बिना मानवीय नियंत्रण के फैसले लेने वाले मैलवेयर का खुलासा, चार एआई मॉडल्स की मदद से चलाता है साइबर अटैक सिस्को टालोस के शोधकर्ताओं ने केयर्न फ्रेमवर्क के जरिए क्लोज्डकोरम नामक स्वायत्त मैलवेयर की पहचान की है, जो चार अलग-अलग एआई मॉडल्स की सर्वसम्मति से हमले की रणनीति तय करता है। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व और खतरनाक बदलाव सामने आया है, जहाँ मैलवेयर हमलों को अंजाम देने के लिए अब इंसानी ऑपरेटरों की सीधी निगरानी की जरूरत खत्म होती जा रही है। सुरक्षा विश्लेषकों ने एक नए निगरानी फ्रेमवर्क के जरिए ऐसे स्वायत्त हैकिंग टूल का पता लगाया है, जो किसी भी लक्षित सिस्टम में घुसपैठ के बाद अपने अगले कदम खुद तय करता है। इस टूल को क्लोज्डकोरम नाम दिया गया है, जो किसी भी निर्देश के लिए इंसानी हैंडलर के बजाय चार अलग-अलग बड़े भाषा मॉडल्स से संपर्क साधता है और उनसे मिली सर्वसम्मति के आधार पर आगे बढ़ता है। इस मैलवेयर का विश्लेषण करने के लिए विशेषज्ञों ने एक खास विश्लेषण ढांचा तैयार किया है जिसे कॉग्निटिव आर्टिफैक्ट इंटेलिजेंस रिसर्च नेटवर्क या केयर्न नाम दिया गया है। केयर्न फ्रेमवर्क और तकनीकी सुरागों की पहचान केयर्न नाम पर्वतारोहियों और ट्रेकर्स द्वारा रास्तों पर पत्थरों के बनाए गए उस ढेर से प्रेरित है, जिसका उपयोग सही दिशा दर्शाने के लिए किया जाता है। सिस्को टालोस में सुरक्षा शोधकर्ता और केयर्न के विकास का नेतृत्व करने वाले रयान फेटरमैन के अनुसार, जब कोई साइबर हमलावर सॉफ्टवेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जोड़ता है, तो उसके कुछ तकनीकी अवशेष या डिजिटल फिंगरप्रिंट पीछे छूट जाते हैं। यह फ्रेमवर्क फाइलों के मेटाडेटा से एआई एकीकरण के विशिष्ट लक्षणों को पहचानता है और प्रत्येक संदिग्ध नमूने को एक यूनिक आईडी देकर वर्गीकृत करता है। फेटरमैन का मानना है कि ऐसे संकेतों से सुरक्षा समुदाय को यह समझने में भारी मदद मिलती है कि हमलावर किस तरह के नए प्रयोग कर रहे हैं। रक्षात्मक नेटवर्क के लिए यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि एआई सिस्टम के जरिए किस तरह के अप्रत्याशित व्यवहार उभर रहे हैं, खासकर तब जब ये तकनीकें मुख्यधारा के हमलों का हिस्सा बनने लगी हैं। इस सिस्टम की मदद से पिछले कुछ महीनों में लगभग 20 अतिरिक्त ऐसे मैलवेयर नमूनों की पहचान की गई है जिनमें एआई घटकों को शामिल किया गया था। लैमहग से लेकर क्लोज्डकोरम तक का सफर मैलवेयर में एआई के उपयोग का यह सिलसिला बिल्कुल नया नहीं है। जुलाई 2025 में यूक्रेन की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा प्रतिक्रिया इकाई सीईआरटी-यूए ने लैमहग नामक मैलवेयर का उपयोग करने वाले एक फिशिंग अभियान की चेतावनी जारी की थी। वह विशेष मैलवेयर हगिंग फेस एपीआई के माध्यम से क्वेन2.5-कोडर-32बी-इंस्ट्रक्ट नामक एलएलएम से निर्देश प्राप्त करता था। उस समय सुरक्षा विशेषज्ञों को यह अंदेशा था कि बहुत जल्द एआई संचालित मैलवेयर की एक बड़ी बाढ़ देखने को मिलेगी और साइबर हमलों का पूरा परिदृश्य ही बदल जाएगा। हालांकि, एक साल बाद इस गर्मी में जब फेटरमैन ने एआई युक्त मैलवेयर का अध्ययन किया, तो उन्हें केवल नौ नामित मैलवेयर परिवार ही मिले, जिनमें से कुछ केवल अनुसंधान के लिए बनाए गए कॉन्सेप्ट प्रोटोटाइप थे। इस अप्रत्याशित कमी ने उन्हें और अधिक गहराई से पड़ताल करने के लिए प्रेरित किया। केयर्न के विस्तृत विश्लेषण ने साबित कर दिया कि पर्दे के पीछे साइबर हमलावरों की गतिविधियां सार्वजनिक चर्चाओं की तुलना में कहीं अधिक जटिल और व्यापक हैं। चार एआई मॉडल्स की सर्वसम्मति पर आधारित हमला हाल ही में पहचाना गया क्लोज्डकोरम विशेष रूप से विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम को निशाना बनाने वाला मैलवेयर है। किसी भी सिस्टम में प्रवेश करने के बाद यह सॉफ्टवेयर डीपसीक, क्वेन, मिस्ट्रल और गूगल जेमिनी जैसे चार प्रमुख मॉडल्स से लगातार राय लेता है। यह प्रणाली इन सभी प्लेटफॉर्म्स से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं का मिलान करती है और जब मॉडल्स के बीच सहमति बन जाती है, तभी आगे की कार्रवाई शुरू करती है। यदि इनमें से कोई एक मॉडल या सेवा अस्थायी रूप से बंद भी हो जाए, तो भी यह बाकी सक्रिय सेवाओं से तालमेल बनाए रखता है। इस बहु-स्तरीय बैकअप के कारण मैलवेयर का कमांड-एंड-कंट्रोल पूरी तरह स्वायत्त और बंद व्यवस्था बन जाता है, जहाँ इंसानी हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं बचती। जांचकर्ताओं ने पाया कि इस कोड के तार 2025 से क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी से जुड़े साइबर अपराध मंचों से जुड़े हुए हैं। इस सॉफ्टवेयर का मुख्य उद्देश्य उपयोगकर्ताओं के लॉगिन क्रेडेंशियल्स और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े डेटा की चोरी करना है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह स्पष्ट किया है कि वे इस बात की पुष्टि नहीं कर सके हैं कि इसे किसने विकसित किया है या वास्तविक हमलों में इसका वास्तविक उपयोग हुआ है या नहीं। साइबर हमलों के संचालन का नया युग सिस्को टालोस में थ्रेट इंटेलिजेंस के वरिष्ठ निदेशक मैट ओल्नी ने इस तकनीकी विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शुरुआत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल एक उत्पादकता उपकरण के रूप में देखा गया था, लेकिन अब इसका उपयोग साइबर हमलों के बुनियादी ढांचे को सक्रिय रूप से चलाने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह बदलाव हमलावरों को एक साथ कई मोर्चों पर हमले करने, अधिक सिस्टम्स को निशाना बनाने और विभिन्न प्रकार के कंप्यूटर्स को नियंत्रित करने की शक्ति देता है, क्योंकि उनके बैकएंड में एक बुद्धिमान प्रणाली लगातार सवालों का विश्लेषण कर सटीक जवाब दे रही होती है। इसका आप पर असर यह नई खोज दर्शाती है कि भविष्य के साइबर हमले इंसानों के बजाए पूरी तरह ऑटोमेटेड एआई सिस्टम द्वारा संचालित होंगे, जिससे आम इंटरनेट यूजर्स और संस्थाओं के डिजिटल डेटा की सुरक्षा को लेकर खतरे बढ़ रहे हैं। • क्रिप्टोकरेंसी और वित्तीय संपत्तियां: यह मैलवेयर सीधे तौर पर क्रिप्टो वॉलेट और वित्तीय क्रेडेंशियल्स की चोरी के लिए डिजाइन किया गया है। डिजिटल संपत्ति रखने वाले यूजर्स को मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और कोल्ड स्टोरेज जैसे सुरक्षा उपाय तुरंत मजबूत करने चाहिए। • लॉगिन पासवर्ड और सुरक्षा: सिस्टम में घुसने के बाद यह सॉफ्टवेयर गोपनीय यूजरनेम और पासवर्ड चुराने की क्षमता रखता है। आम यूजर्स को सभी महत्वपूर्ण खातों के लिए मजबूत और अलग पासवर्ड रखने की आदत डालनी होगी। • विंडोज यूजर्स के लिए सतर्कता: यह मैलवेयर मुख्य रूप से विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले कंप्यूटरों को निशाना बनाता है। नियमित सिस्टम अपडेट और भरोसेमंद एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके ऐसे जोखिमों को कम किया जा सकता है। • स्वचालित हमलों का बढ़ता खतरा: इंसानी कमांड के बिना चलने वाले ये टूल्स पारंपरिक सुरक्षा नियमों को आसानी से चकमा दे सकते हैं। आईटी सुरक्षा टीमों को अपने नेटवर्क मॉनिटरिंग सिस्टम में एआई जनरेटेड ट्रैफिक की पहचान करने वाले नए टूल्स जोड़ने होंगे। ऐसा क्यों हुआ साइबर हमलावर अपने हमलों की गति, मारक क्षमता और पहुंच बढ़ाने के लिए इंसानी सीमाओं को पार करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा ले रहे हैं। पारंपरिक मैलवेयर को नियंत्रित करने के लिए हमलावरों को खुद ऑनलाइन रहकर निर्देश देने पड़ते थे, जिसे एआई के जरिए पूरी तरह स्वचालित कर दिया गया है। • इंसानी निर्भरता खत्म करना: पारंपरिक कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम में पकड़े जाने का खतरा अधिक रहता था और इंसानी ऑपरेटर की मौजूदगी जरूरी थी। क्लोज्डकोरम में चार एआई मॉडल्स को जोड़कर हमलावरों ने एक ऐसा स्वायत्त नेटवर्क तैयार किया जो बिना किसी इंसानी इनपुट के फैसले ले सकता है। • बैकअप और निरंतरता सुनिश्चित करना: किसी एक एआई मॉडल पर निर्भर रहने के बजाय हमलावरों ने चार अलग-अलग सेवाओं का उपयोग किया। इसका सीधा कारण यह है कि यदि कोई एक सेवा बंद हो जाए या अनुरोध ब्लॉक कर दे, तो भी अन्य मॉडल्स के जरिए सर्वसम्मति बनाकर हमला जारी रखा जा सके। • वित्तीय लाभ की मंशा: इस मैलवेयर के लिंक 2025 से सक्रिय क्रेडिट कार्ड फ्रॉड फोरम से जुड़े पाए गए हैं। इसका प्राथमिक मकसद लोगों के बैंक लॉगिन और क्रिप्टो संपत्तियों को तेजी से चुराना है, जिसमें एआई ऑटोमेशन से उन्हें भारी बढ़त मिलती है। सवाल-जवाब 1. क्लोज्डकोरम क्या है? यह विंडोज आधारित मैलवेयर है जो इंसानी निर्देश के बिना चार अलग-अलग एआई मॉडल्स से सलाह लेकर अपने अगले कदम तय करता है। 2. यह मैलवेयर किन चार एआई मॉडल्स की मदद लेता है? यह मैलवेयर अपने निर्णय लेने के लिए डीपसीक, क्वेन, मिस्ट्रल और गूगल जेमिनी से राय मांगता है। 3. केयर्न फ्रेमवर्क क्या काम करता है? केयर्न फाइलों के मेटाडेटा से एआई एकीकरण के तकनीकी लक्षणों को पहचानकर संदिग्ध मैलवेयर नमूनों को ट्रैक और वर्गीकृत करता है। 4. क्लोज्डकोरम का मुख्य मकसद क्या है? इस मैलवेयर का मुख्य उद्देश्य सिस्टम से लॉगिन क्रेडेंशियल्स और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा डेटा चुराना है। 5. क्या इस मैलवेयर के पीछे के डेवलपर की पहचान हो सकी है? शोधकर्ताओं ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि इसे किसने विकसित किया है या इसका वास्तविक हमलों में उपयोग हुआ है। https://trendkia.com/ai/bina-manaviya-niyntrana-ke-phaisale-lene-vale-mailaveyara-ka-khulasa-chara-ai-models-ki-madada-se-chalata-hai-saibara-ataika-36414 TrendKia — Har trend, sabse pehle.