# आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ब्रिटिश संसद में बंटे टेक दिग्गज: ओपनएआई और एंथ्रोपिक ने की सख्त कानूनों की मांग, गूगल डीपमाइंड और मेटा असहमत

> ब्रिटेन की संसदीय समिति के सामने एंथ्रोपिक और ओपनएआई ने एआई सुरक्षा के लिए बाध्यकारी सरकारी कानून बनाने का समर्थन किया, जबकि गूगल डीपमाइंड और मेटा ने नए नियमों का विरोध किया।

**Type:** article · **Category:** एआई · **Published:** 2026-10-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/ai/british-parliament-me-bante-tech-diggaj-openai-aur-anthropic-ne-ki-sakht-kanoonon-ki-mang-google-deepmind-aur-meta-asahamat-47488 · **Language:** Hindi
**Tags:** आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्रिटिश संसद, ओपनएआई, एंथ्रोपिक, गूगल डीपमाइंड, मेटा, एआई सुरक्षा, कानूनी नियम

लंदन में संसद के भीतर एआई सुरक्षा को लेकर दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी कंपनियों के बीच सीधा मतभेद खुलकर सामने आ गया है। हाउस ऑफ कॉमन्स की बिजनेस, इनोवेशन, साइंस एंड ट्रेड कमेटी के समक्ष आयोजित गवाही सत्र में प्रमुख एआई कंपनियों के प्रतिनिधि, उनके पूर्व शोधकर्ता और ब्रिटेन के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी आमने-सामने आए। इस दौरान तकनीकी जगत में इस बात को लेकर गहरी दरार दिखी कि सबसे आधुनिक मॉडल्स के विकास को कानूनी दायरों में कसा जाए या फिर पुरानी स्वैच्छिक व्यवस्था पर ही छोड़ दिया जाए।

## बाध्यकारी नियमों के पक्ष में खड़े हुए एंथ्रोपिक और ओपनएआई
संसदीय समिति की सुनवाई के दौरान एंथ्रोपिक के यूरोप प्रमुख लियाम बूथ-स्मिथ ने दो टूक शब्दों में कहा कि तकनीकी कंपनियों के लिए नियम पूरी तरह बाध्यकारी होने चाहिए। समिति के सदस्यों ने जब उनसे पूछा कि क्या एआई सुरक्षा को एक वैधानिक कानूनी ढांचे की जरूरत है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी कंपनी हमेशा से यह मानती आई है कि केवल स्वैच्छिक वादों के सहारे इस तकनीक के खतरों को नहीं संभाला जा सकता। उनके अनुसार सरकारों को कंपनियों पर कानूनी रूप से लागू होने वाले कड़े मानक तय करने होंगे।

दूसरी ओर, ओपनएआई के उपाध्यक्ष टॉम डफ गॉर्डन ने अधिक सतर्कता बरतते हुए भी वैधानिक व्यवस्था और एक अंतरराष्ट्रीय समझौते का समर्थन किया। उन्होंने सांसदों के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि कुछ बुनियादी चीजों को तुरंत अनिवार्य बनाया जाना चाहिए, जिसकी शुरुआत सुरक्षा संबंधी घटनाओं की जानकारी सार्वजनिक करने से होनी चाहिए। डफ गॉर्डन का मानना था कि अत्याधुनिक एआई जोखिमों के प्रबंधन के लिए पूरी व्यवस्था को केवल कंपनियों के स्वैच्छिक समझौतों पर टिकाए रखना कोई दीर्घकालिक या सुरक्षित योजना नहीं है।

## गूगल डीपमाइंड और मेटा का कड़े कानूनों से परहेज
ओपनएआई और एंथ्रोपिक के इस रुख से उनके मुख्य प्रतिस्पर्धी सहमत नजर नहीं आए। जब गूगल डीपमाइंड के ओवेन लार्टर से सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या वे वैधानिक कानूनी ढांचे का समर्थन करते हैं, तो उन्होंने नए कानूनों की जगह मौजूदा तकनीकी मानकों पर ध्यान केंद्रित करने की वकालत की।

वहीं सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मेटा के प्रतिनिधि रॉब शर्मन ने ब्रिटेन के मौजूदा नियामकीय ढांचे की ओर इशारा किया। उन्होंने सांसदों से कहा कि देश में पहले से ही नियामक काम कर रहे हैं और नीति निर्माता किसी कोरे कागज पर नए सिरे से नियम नहीं लिख रहे हैं। इस तरह उन्होंने नए वैधानिक प्रतिबंध थोपने के विचार से किनारा कर लिया।

## संसदीय समिति ने उजागर किया कंपनियों का आपसी टकराव
इस सुनवाई ने साफ कर दिया कि दुनिया की सबसे ताकतवर टेक कंपनियों के बीच सुरक्षा को लेकर एक राय नहीं है। समिति के अध्यक्ष लियाम बायरन ने कहा कि सांसदों का मुख्य उद्देश्य ही यह था कि धरती की कुछ सबसे अमीर कंपनियों के बीच नीतिगत मतभेदों को सार्वजनिक रिकॉर्ड पर दर्ज किया जाए। उनका कहना था कि इस सत्र से यह स्पष्ट हो गया है कि जनता की सुरक्षा को कंपनियों के अपने स्वैच्छिक आत्म-नियमन के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

संसद में जब यह बहस चल रही थी, उसी समय कुछ ही दूरी पर ब्रिटेन की सुरक्षा सेवा एमआई5 के महानिदेशक केन मैक्कलम ने अपने वार्षिक सुरक्षा संबोधन में एआई के विनाशकारी दुरुपयोग की चेतावनी जारी की। मैक्कलम ने विशेष रूप से आगाह किया कि भले ही अभी यह पूरी तरह सामने न आया हो, लेकिन जैविक हथियारों के संदर्भ में एआई का दुरुपयोग सबसे गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना था कि यह तकनीक मौजूदा या नए जैविक हथियारों के स्तर को कहीं अधिक खतरनाक बना सकती है। इस चेतावनी का हवाला देते हुए लियाम बायरन ने टिप्पणी की कि सरकार के एक हिस्से में खुफिया प्रमुख बायो-टेररिज्म की चेतावनी दे रहे हैं, जबकि दूसरे हिस्से में कैबिनेट कार्यालय यह मान रहा है कि मौजूदा नियम केवल स्वैच्छिक हैं।

## ब्रिटिश एआई सुरक्षा संस्थान के सीमित अधिकार
संसदीय सत्र के अंतिम चरण में ब्रिटिश नौकरशाहों ने स्वीकार किया कि मौजूदा सरकारी व्यवस्था कंपनियों पर कोई सीधा दबाव नहीं डाल सकती। देश का एआई सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट (एआईएसआई) मॉडल्स को सार्वजनिक किए जाने से पहले उनका परीक्षण जरूर करता है, लेकिन यह तभी संभव होता है जब कंपनियां स्वेच्छा से अपने मॉडल सौंपने को तैयार हों।

एआईएसआई के निदेशक हेनरी डी ज़ोएटे ने समिति को बताया कि उनका संस्थान विदेशी सरकारों और कंपनियों के सहयोग पर पूरी तरह निर्भर है। कैबिनेट कार्यालय की शीर्ष अधिकारी कैट लिटिल से जब पूछा गया कि क्या पूरा ढांचा केवल स्वैच्छिक है, तो उन्होंने हामी भरते हुए कहा कि फिलहाल यह पूरी तरह कंपनियों की मर्जी पर ही टिका है।

हेनरी डी ज़ोएटे ने यह भी स्वीकार किया कि यदि एआईएसआई किसी मॉडल को बेहद खतरनाक भी घोषित कर दे, फिर भी कंपनी द्वारा उसे बाजार में उतारने से रोकने का उनके पास कोई कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने ब्रिटिश सुरक्षा प्रमाणन का जिक्र करते हुए कहा कि वे कोई पतंग छाप सुरक्षा मुहर जारी नहीं कर रहे हैं और न ही किसी मॉडल को बाजार में जाने से रोक सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तकनीक की सीमा पर काम करने वाली कंपनियां मुख्य रूप से अमेरिकी या चीनी हैं, इसलिए ब्रिटेन एक अकेले देश के रूप में बहुत सीमित कदम ही उठा सकता है।

## वाशिंगटन की मंजूरी और पूर्व कर्मचारियों की गवाही
सुनवाई के दौरान यह हकीकत भी सामने आई कि ब्रिटिश अधिकारियों को किसी भी नए मॉडल तक पहुंच अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन के रास्ते ही मिलती है। ओपनएआई के डफ गॉर्डन ने बताया कि वे रिलीज से पहले अपने मॉडल अमेरिकी संस्थान सीएआईएसआई को उपलब्ध कराते हैं, और जब तक अमेरिकी सरकार की अनुमति रहेगी, वे ब्रिटेन के एआईएसआई को भी मॉडल देना जारी रखेंगे।

एंथ्रोपिक के बूथ-स्मिथ ने भी इस प्रशासनिक तनाव को उजागर करते हुए बताया कि एक समय वे अपने माइथोस 5.1 मॉडल तक ब्रिटिश अधिकारियों को पूरी तरह पहुंच नहीं दे पाए थे, क्योंकि वह मामला सीधे अमेरिकी सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा था। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब संस्थान को इसकी पहुंच हासिल हो चुकी है।

सुनवाई में इन प्रयोगशालाओं के चार पूर्व शोधकर्ता भी उपस्थित हुए जो अब व्हिसलब्लोअर बन चुके हैं। पूर्व ओपनएआई कर्मचारी डैनियल कोकोटाजलो ने सांसदों से कहा कि कंपनियों पर खुद पर नियम लागू करने का भरोसा नहीं किया जा सकता। वहीं 2024 के अंत में ओपनएआई छोड़ने वाले स्टीवन एडलर ने कहा कि उन्हें पूरे उद्योग के भीतर सुरक्षा संस्कृति को लेकर कोई भरोसा नहीं है। शोधकर्ता ज्योफ्री इरविंग ने स्पष्ट किया कि लैब के लोग ऐसा मानते हैं कि वे एक ऐसी दौड़ में फंसे हैं जिसे सरकारें नहीं रोकेंगी और जिसे वे खुद छोड़ नहीं सकते, जबकि असलियत यह है कि कंपनियां चाहें तो इस अंधी दौड़ को तुरंत रोक सकती हैं।

## भविष्य की वैश्विक नीति और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की योजना
संसदीय समिति के अध्यक्ष लियाम बायरन ने कहा कि अब उनकी समिति ब्रिटेन के मध्यम शक्ति वाले दर्जे और उसकी भावी भूमिका पर गहराई से विचार करेगी। वे चाहते हैं कि ब्रिटिश मंत्री आगामी जी20 अध्यक्षता का इस्तेमाल दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर करें, जो इसके बाद कमान संभालेगा, ताकि एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय समझौता तैयार किया जा सके जो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के वर्तमान प्रशासन पर निर्भर न रहे। उनका कहना था कि जी20 की व्यवस्था ट्रंप के कार्यकाल के बाद भी बनी रहेगी, जबकि एआई से जुड़े जोखिम मौजूदा सुरक्षा तंत्र की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहे हैं।

## इसका आप पर असर
एआई सुरक्षा पर बनने वाले नए नियम और वैश्विक कंपनियों का रुख आम जनता के दैनिक तकनीकी उपयोग और डिजिटल सुरक्षा को सीधे प्रभावित करते हैं।

- **भारत में प्रभाव:** भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए यह बहस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि घरेलू कंपनियां अक्सर विदेशी बुनियादी एआई मॉडल्स पर ही अपनी सेवाएं तैयार करती हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा जांच अनिवार्य होती है तो भारतीय उपभोक्ताओं को साइबर हमलों और भ्रामक सामग्री से अधिक सुरक्षा मिलेगी।
- **सुरक्षा और बायो-थ्रेट्स:** आम नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए एआई सुरक्षा के नियम बेहद आवश्यक हैं। खुफिया एजेंसियों द्वारा जैविक हथियारों के दुरुपयोग की दी गई चेतावनी यह दर्शाती है कि बिना जांचे-परखे मॉडल जारी होने पर जनसुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।
- **उपभोक्ता अधिकार:** अनिवार्य नियमों के लागू होने पर कंपनियों को यह बताना होगा कि उनके एआई सिस्टम में क्या कमियां हैं। इससे उपयोगकर्ताओं को यह स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि वे किस स्तर के जोखिम वाले सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं।
- **वैश्विक नीतियां:** इस बहस का असर दुनिया भर के आगामी राष्ट्रीय कानूनों पर पड़ेगा। यदि बड़े देश कड़े वैधानिक मानक तय करते हैं तो तकनीकी कंपनियों को दुनिया के हर कोने में अधिक सुरक्षित उत्पाद पेश करने होंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
ब्रिटिश संसद में यह विशेष सुनवाई इसलिए बुलाई गई क्योंकि दुनिया भर में एआई के बढ़ते खतरे और कंपनियों के अनियंत्रित विकास पर चिंताएं बढ़ रही थीं। समिति यह देखना चाहती थी कि क्या तकनीकी दिग्गज खुद पर नियंत्रण रख सकते हैं या उन पर सरकारी अंकुश जरूरी है।

- **सुरक्षा जोखिमों की गंभीरता:** खुफिया एजेंसियों और शोधकर्ताओं ने चेताया है कि फ्रंटियर एआई मॉडल्स का दुरुपयोग जैविक हथियारों के निर्माण और बड़े स्तर पर तबाही के लिए किया जा सकता है। इसी गंभीर खतरे ने नीति निर्माताओं को कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए मजबूर किया।
- **स्वैच्छिक व्यवस्था की विफलता:** अब तक सरकारी एजेंसियां कंपनियों की अपनी इच्छा पर निर्भर थीं कि वे जांच के लिए अपने मॉडल्स सौंपें। ब्रिटेन के सरकारी संस्थानों के पास कंपनियों को रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं होने के कारण सांसदों को वैधानिक ढांचे की जरूरत महसूस हुई।
- **उद्योग के भीतर व्यावसायिक होड़:** कंपनियों के पूर्व शोधकर्ताओं ने खुलासा किया कि तकनीकी फर्म्स एक ऐसी अंधी दौड़ में लगी हैं जिसे वे बाजार के दबाव के कारण खुद नहीं रोक सकती हैं। इस अनियंत्रित व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा को थामने के लिए ही सरकारी हस्तक्षेप की मांग उठी।
- **वैश्विक नेतृत्व की खोज:** अमेरिका और चीन के प्रभुत्व के बीच ब्रिटेन खुद को एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में स्थापित करना चाहता है। जी20 जैसे वैश्विक मंचों का उपयोग करके एक अंतरराष्ट्रीय समझौता तैयार करने के उद्देश्य से भी यह सुनवाई आयोजित की गई।

## सवाल-जवाब

### 1. ब्रिटिश संसदीय समिति के सामने किन कंपनियों ने गवाही दी?
इस सुनवाई में एंथ्रोपिक, ओपनएआई, गूगल डीपमाइंड और मेटा के प्रतिनिधियों ने गवाही दी।

### 2. एंथ्रोपिक और ओपनएआई का एआई नियमों पर क्या रुख है?
दोनों कंपनियों ने सुरक्षा के लिए बाध्यकारी कानूनी नियम बनाने और स्वैच्छिक व्यवस्था से आगे बढ़ने की मांग की है।

### 3. गूगल डीपमाइंड और मेटा ने कड़े नियमों का विरोध क्यों किया?
गूगल डीपमाइंड ने नए कानूनों के बजाय मानकों पर जोर दिया, जबकि मेटा ने कहा कि ब्रिटेन में पहले से नियामक मौजूद हैं।

### 4. एमआई5 के निदेशक केन मैक्कलम ने क्या चेतावनी दी?
उन्होंने आगाह किया कि एआई का दुरुपयोग जैविक हथियारों के खतरे को बहुत तेजी से बढ़ा सकता है।

### 5. क्या ब्रिटिश एआई सुरक्षा संस्थान खतरनाक मॉडल को रोक सकता है?
नहीं, संस्थान के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि उनके पास किसी मॉडल को बाजार में जाने से रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

### 6. संसदीय समिति के अध्यक्ष लियाम बायरन की क्या योजना है?
वे जी20 की अध्यक्षता का इस्तेमाल करके एआई सुरक्षा पर एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय समझौता तैयार करवाना चाहते हैं।

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