# छात्रों पर एआई ओवरव्यू थोपने के फैसले से भड़के अमेरिकी स्कूल, गूगल ने टॉगल देने से किया इनकार

> गूगल ने स्कूलों के सर्च रिजल्ट्स से एआई ओवरव्यू बंद करने का विकल्प देने से मना कर दिया है, जिसके बाद शिक्षकों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। अब शिक्षण संस्थानों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बचने के लिए सर्च इंजन ही ब्लॉक करना पड़ेगा या नए विकल्प तलाशने होंगे।

**Type:** article · **Category:** एआई · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/ai/chhatron-para-ai-overviews-thopane-ke-phaisale-se-bharake-ameriki-skula-google-ne-togala-dene-se-kiya-inakara-56721 · **Language:** Hindi
**Tags:** गूगल, एआई ओवरव्यू, शिक्षा, अल्फाबेट, स्कूल, जेमिनी, सर्च इंजन

कक्षाओं में इंटरनेट सर्च का पारंपरिक स्वरूप तेजी से बदल रहा है और तकनीकी दिग्गज गूगल द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सर्च का अभिन्न हिस्सा बनाए जाने के फैसले ने शैक्षणिक जगत में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के प्रशासक लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि छात्रों के लिए सर्च नतीजों के शीर्ष पर दिखाई देने वाले एआई ओवरव्यू को निष्क्रिय करने की सुविधा दी जाए। गूगल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसा कोई अलग टॉगल या स्विच प्रदान नहीं करेगा। इसका सीधा असर यह होगा कि अगले वर्ष से यदि किसी शैक्षणिक संस्थान को अपने विद्यार्थियों को इन चैटबॉट-आधारित संक्षेपों से दूर रखना है, तो उसे पूरे सर्च इंजन तक पहुंच को ही बंद करना पड़ेगा। इस रुख ने अमेरिका भर के शिक्षकों, अभिभावकों और नीति विशेषज्ञों को अचरज में डाल दिया है।

 

## कक्षाओं में मौलिक सोच पर मंडराता खतरा

शिक्षण समुदाय का मुख्य सरोकार यह है कि सर्च नतीजों के सबसे ऊपर एआई द्वारा तैयार किया गया तैयार उत्तर परोस देने से बच्चों की सीखने की नैसर्गिक प्रक्रिया बाधित हो रही है। दो सप्ताह पूर्व एक प्राथमिक-माध्यमिक स्कूल के आईटी प्रशासक ने गूगल के सहायता मंच पर अपनी चिंता साझा करते हुए लिखा था कि यह कदम उनके अध्यापन के मूल उद्देश्यों के विपरीत जाता है। प्रशासक के अनुसार विद्यार्थियों को विभिन्न वेब स्रोतों की पड़ताल करने, अलग-अलग कड़ियों को खोजने और स्वयं अपने निष्कर्ष निकालने का अवसर मिलना आवश्यक है, न कि खोज शुरू होने से पहले ही मशीन द्वारा संकलित निष्कर्ष उनके सामने रख दिया जाए। तीन अलग-अलग जिलों के तकनीकी प्रतिनिधियों ने भी इसी प्रकार की हताशा व्यक्त की थी और बताया था कि आधिकारिक समाधान न होने के कारण वे स्वयं के जुगाड़ तलाश रहे हैं।

 लेक ओस्वेगो पेरेंट्स फॉर रिस्पॉन्सिबल टेक्नोलॉजी नामक ओरेगन समुदाय समूह से जुड़ी डोमिनिक जॉनसन ने इस कदम पर तीव्र असंतोष जाहिर किया। डोमिनिक जॉनसन के अनुसार, "हम हैरान रह गए।" उन्होंने रेखांकित किया कि यह नीति उन स्कूल जिलों के लिए राह और भी कठिन बना देती है जिन्होंने पहले ही यह माना है कि एआई का अनियंत्रित उपयोग बुनियादी शिक्षा को नुकसान पहुंचाता है। बच्चों में तत्काल उत्तर पाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जहां वे मेहनत से बचने के लिए गणित के त्वरित समाधान खोज रहे हैं और निबंध लेखन का कार्य स्वचालित प्रणालियों पर छोड़ रहे हैं। इसके अतिरिक्त एक अन्य गंभीर पहलू इन सारांशों में तथ्यात्मक गलतियां होना है, जिन्हें कम उम्र के छात्र पूर्ण सत्य मानकर स्वीकार कर लेते हैं।

 

## गूगल का तर्क और डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स में बदलाव

गूगल ने विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए यह दावा किया कि नए नियमों से स्कूलों को पहले से अधिक विकल्प प्राप्त होंगे। कंपनी का कहना है कि अगले वर्ष से सर्च, उसका जेमिनी चैटबॉट और जेमिनी नोटबुक टूल डिफ़ॉल्ट रूप से बंद रहेंगे। इसके बाद स्कूल प्रशासक अपनी आवश्यकतानुसार इनमें से किसी एक, दो या तीनों सेवाओं को सक्रिय करने का स्वतंत्र निर्णय ले सकेंगे। कंपनी का मानना है कि वर्ष 2023 में शुरू किया गया एआई ओवरव्यू और पिछले साल पेश किया गया एआई मोड अब पारंपरिक खोज प्रणाली से पूरी तरह जुड़ चुके हैं और इन्हें अलग नहीं किया जा सकता।

 यह दृष्टिकोण उन अभिभावकों और शिक्षकों के गले नहीं उतर रहा है जो यह चाहते हैं कि बच्चे इंटरनेट पर सामान्य सूचनाएं तो खोज सकें लेकिन एल्गोरिदम द्वारा गढ़ा गया उत्तर न देखें। तकनीकी उद्योग की पूर्व वरिष्ठ गूगल सर्च उत्पाद प्रबंधक और मौजूदा समय में कलेक्टेड कंपनी का संचालन करने वाली निकोल कर्सन के अनुसार, किसी भी कंपनी के लिए लंबे समय तक एक ही उत्पाद के दो अलग-अलग स्वरूप बनाए रखना बेहद जटिल कार्य होता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कंपनी दोहरे संस्करण के रखरखाव के लिए तकनीकी संसाधन लगाने को तैयार है या नहीं। इसके विपरीत माइक्रोसॉफ्ट क्रोम के लिए एक एक्सटेंशन उपलब्ध कराता है जो उपयोगकर्ताओं को बिंग सर्च में एआई संक्षेप बंद करने की छूट देता है। मैजिकस्कूल के संचालक और पूर्व शिक्षक व प्रधानाचार्य अदील खान ने गूगल द्वारा ऐसा विकल्प न दिए जाने को निराशाजनक, अपमानजनक और बेतुका करार दिया।

 

## स्कूलों के तकनीकी जुगाड़ और नए सर्च विकल्पों की तलाश

आधिकारिक तंत्र के अभाव में कई स्कूल जिलों ने अपने स्तर पर तकनीकी समाधान विकसित किए हैं। इनमें सर्च यूआरएल में फेरबदल करना और ऐसे ब्राउज़र एक्सटेंशन अपनाना शामिल है जो गूगल के खोज परिणामों के स्वरूप को बदल देते हैं। वर्जीनिया के फेयरफैक्स काउंटी पब्लिक स्कूल्स ने हाल ही में इसके लिए स्वयं का एक विशेष एक्सटेंशन तैयार किया है। हालांकि तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गूगल ने भविष्य में अपने सर्च नतीजों के वितरण का कोड बदला, तो ये अस्थायी उपाय स्वतः ही काम करना बंद कर देंगे।

 इस असंतोष के बीच डकडकगो जैसे प्राइवेसी-केंद्रित सर्च इंजनों को अपने लिए नया अवसर दिखाई दे रहा है। डकडकगो की प्रवक्ता एलिसन गुडमैन ने बताया कि यद्यपि वे गूगल क्लासरूम जैसी कोई व्यवस्था तुरंत नहीं ला रहे हैं, लेकिन वे उन शिक्षकों के लिए विशेष संसाधन तैयार करेंगे जो गूगल छोड़कर किसी अन्य मंच पर जाना चाहते हैं। उधर बड़े स्कूल जिले अभी भी स्थिति का आकलन कर रहे हैं। लॉस एंजेलिस यूनिफाइड ने स्पष्ट किया है कि वह गूगल की इस घोषणा के संभावित परिणामों की समीक्षा कर रहा है।

 

## अनुसंधान के आंकड़े और वाणिज्यिक दबाव

शिक्षा में एआई के बढ़ते दखल पर अकादमिक जगत भी सवाल उठा रहा है। स्टैनफोर्ड द्वारा एक वर्ष पूर्व किए गए अनुसंधानों की समीक्षा के अनुसार, कक्षाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रवेश से छात्रों के विश्लेषणात्मक चिंतन कौशल पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। स्वयं गूगल के सर्वेक्षण से पता चला है कि चार में से तीन किशोर साप्ताहिक आधार पर एआई का उपयोग करते हैं, लेकिन उनमें से केवल लगभग आधे ही इसकी सटीकता की दोबारा जांच करते हैं। इसी प्रकार सेंट लुइस स्थित वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के एक हालिया अध्ययन से खुलासा हुआ कि एआई ओवरव्यू के केवल 42 प्रतिशत उत्तरों का ही उनमें दिए गए संदर्भों और उद्धरणों से पूर्ण सत्यापन किया जा सका। हालांकि गूगल का कहना है कि उसके ओवरव्यू निरंतर कड़े परीक्षणों से गुजरते हैं और उनमें लगातार सुधार किया जा रहा है।

 एआई को सर्च में आगे बढ़ाने का असर गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट के वित्तीय स्वास्थ्य पर भी पड़ा है। पिछले सप्ताह उम्मीद से कमजोर सर्च विज्ञापन बिक्री के आंकड़ों के बाद अल्फाबेट के शेयरों में इतिहास की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट देखी गई, जिससे कंपनी के बाजार पूंजीकरण से आधा ट्रिलियन डॉलर स्वाहा हो गए। इसका प्रमुख कारण एआई ओवरव्यू और एआई मोड का बढ़ता उपयोग रहा, जिनमें अभी सामान्य सर्च जितनी विज्ञापन सामग्री नहीं जोड़ी जा सकी है। इसके साथ ही विकिपीडिया, समाचार वेबसाइटों और शैक्षणिक उपकरणों के ट्रैफिक में भी कमी दर्ज की गई है क्योंकि प्रयोक्ता अब मूल स्रोतों पर जाने के बजाय ओवरव्यू पर ही निर्भर रहने लगे हैं। चूंकि गूगल सर्च और एआई दोनों के लिए एक ही बॉट का उपयोग करता है, अतः प्रकाशकों के पास अपनी सामग्री को एआई के उपयोग से बाहर रखने का कोई प्रभावी रास्ता नहीं बचा है।

 

## गाइडेड लर्निंग का वादा और नियामक निगरानी

विवाद के बीच गूगल ने घोषणा की है कि वह आगामी महीनों में छात्रों के लिए गाइडेड लर्निंग नामक एक नया फीचर पेश करने जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को तत्काल उत्तर देने के बजाय जानकारी खोजने के लिए प्रशिक्षित करना होगा। गूगल के शिक्षा विभाग के उपाध्यक्ष क्रिस फिलिप्स ने कंपनी के एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि एआई उत्पादों को सार्थक संघर्ष का समर्थन करना चाहिए, जिससे छात्र बिना निराश हुए सीखने की चुनौतियों का सामना कर सकें।

 यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के सेंटर फॉर जेनेरेटिव एआई एंड सोसाइटी के सह-प्रमुख स्टीफन एग्युलर सहित कई शोधकर्ताओं को इस व्यवस्था पर संदेह है। उनका मानना है कि गाइडेड लर्निंग कभी भी मानव शिक्षक की तरह स्वाभाविक नहीं हो सकती। स्टीफन एग्युलर इसे अमेरिकी कक्षाओं में गूगल के पहले से मौजूद प्रभुत्व जैसे कि क्रोमबुक लैपटॉप, गूगल क्लासरूम, सर्च और यूट्यूब को यथावत बनाए रखने की एक और युक्ति मानते हैं। उनके अनुसार साधनहीन जिले मजबूरी में गूगल का उपयोग जारी रखेंगे और छात्रों को डिजिटल साक्षरता सिखाने की अपनी योजनाओं में तेजी लाएंगे।

 वाशिंगटन, डीसी में स्कूल्स बियॉन्ड स्क्रीन्स का नेतृत्व करने में मदद करने वाली नीति व संचार रणनीतिकार कैरोल रबारिसन ने जोर देकर कहा कि यह कदम बड़ी टेक कंपनियों द्वारा कक्षाओं में उत्पादों को जबरन थोपने के पुराने ढर्रे को ही आगे बढ़ाता है जो अब कारगर नहीं होगा। उधर वर्ष 2024 में गूगल के अवैध सर्च एकाधिकार पर आए अदालती फैसले के तहत कंपनी को अपने सर्च डेटा और सेवाओं को प्रतिद्वंद्वियों के साथ साझा करने का आदेश दिया गया था, लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण यह प्रक्रिया समय से काफी पीछे चल रही है। अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स सहित कई सांसदों ने स्कूलों के प्रति गूगल के इस अडिग रवैये की कड़ी आलोचना की है, जिससे कंपनी के खिलाफ नियामकीय जांच का एक नया दौर शुरू होने की संभावना प्रबल हो गई है।

## इसका आप पर असर
कक्षाओं में गूगल द्वारा एआई ओवरव्यू अनिवार्य किए जाने से छात्रों की स्वतंत्र सोच और बुनियादी अनुसंधान क्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

- **सीखने की आदतें:** विद्यार्थियों को खोज परिणामों के शीर्ष पर स्वचालित उत्तर मिलने से उनकी स्वयं संदर्भ खोजने और गहन अध्ययन करने की क्षमता कमजोर हो सकती है। छात्रों को तैयार उत्तरों पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न स्रोतों से जानकारी सत्यापित करने की आदत डालनी होगी।
- **स्कूल प्रशासकों की चुनौती:** स्कूलों को या तो पूरे गूगल सर्च को पूरी तरह ब्लॉक करना होगा या फिर अनधिकृत ब्राउज़र एक्सटेंशन जैसे अस्थायी तकनीकी रास्तों पर निर्भर रहना होगा। इसके चलते शैक्षणिक संस्थानों पर अपने कंप्यूटर नेटवर्क और सॉफ्टवेयर नीतियों में बड़े बदलाव करने का दबाव बढ़ेगा।
- **तथ्यों की प्रामाणिकता:** अनुसंधानों के अनुसार एआई सारांशों में केवल 42 प्रतिशत उत्तर ही पूरी तरह सत्यापित पाए गए हैं, जिससे गलत सूचनाएं फैलने का खतरा बना रहता है। शिक्षकों और अभिभावकों को बच्चों को यह सिखाना होगा कि स्क्रीन पर दिखे हर सारांश को सच न मानें।
- **वैकल्पिक टूल्स का प्रसार:** कई स्कूल अब गूगल पर अपनी निर्भरता घटाने के लिए डकडकगो जैसे वैकल्पिक प्राइवेसी-केंद्रित सर्च इंजनों का रुख कर सकते हैं। इससे कक्षाओं में गैर-व्यावसायिक और विज्ञापन-मुक्त डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहन मिल सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
गूगल ने एआई ओवरव्यू को सर्च परिणामों का अभिन्न हिस्सा मानते हुए स्कूलों को अलग से इसे बंद करने का स्विच देने से मना कर दिया है, जिसके कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ है।

- **एकीकृत उत्पाद रणनीति:** कंपनी का तर्क है कि 2023 में शुरू हुआ एआई ओवरव्यू और एआई मोड उसके खोज बुनियादी ढांचे में स्थायी रूप से एकीकृत हो चुके हैं। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी वैश्विक सर्च उत्पाद के दो समानांतर संस्करण चलाना तकनीकी रूप से बेहद जटिल होता है।
- **अल्फाबेट पर वित्तीय दबाव:** विज्ञापन बिक्री घटने और पिछली तिमाही में कंपनी के बाजार पूंजीकरण से आधा ट्रिलियन डॉलर के नुकसान के बाद गूगल सर्च के भीतर एआई अपनाने की रफ्तार बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। उपयोगकर्ता सीधे चैटबॉट्स पर न जाएं, इसलिए पारंपरिक खोज में ही जेमिनी मॉडल के नतीजे जोड़े जा रहे हैं।
- **नियामकीय और कानूनी खींचतान:** वर्ष 2024 में गूगल के सर्च एकाधिकार को अवैध ठहराए जाने के बावजूद स्वतंत्र निगरानी समिति की प्रक्रियाएं कानूनी विवादों के कारण सुस्त पड़ी हैं। इसके चलते बर्नी सैंडर्स जैसे सांसदों द्वारा सार्वजनिक आलोचना किए जाने के बाद भी टेक कंपनियों द्वारा स्कूलों पर उत्पाद थोपने की प्रवृत्ति जारी है।

## सवाल-जवाब

### 1. गूगल ने स्कूलों के लिए एआई ओवरव्यू को लेकर क्या फैसला लिया है?
गूगल ने स्कूलों को सर्च रिजल्ट्स से एआई ओवरव्यू को अलग से बंद करने का टॉगल देने से इनकार कर दिया है।

### 2. यदि कोई स्कूल एआई ओवरव्यू हटाना चाहता है तो उसके पास क्या विकल्प होगा?
अगले साल से स्कूलों को एआई ओवरव्यू से बचने के लिए पूरे गूगल सर्च का एक्सेस ही पूरी तरह ब्लॉक करना होगा।

### 3. गूगल की डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स में क्या बदलाव होने जा रहा है?
अगले वर्ष से स्कूलों में सर्च, जेमिनी चैटबॉट और जेमिनी नोटबुक डिफ़ॉल्ट रूप से बंद रहेंगे और प्रशासक इन्हें अपनी इच्छा से चालू कर सकेंगे।

### 4. अध्ययनों में एआई ओवरव्यू की सटीकता को लेकर क्या आंकड़े सामने आए हैं?
वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अनुसार एआई ओवरव्यू के केवल लगभग 42 प्रतिशत उत्तरों का ही दिए गए संदर्भों से पूर्ण सत्यापन हो सका।

### 5. गूगल छात्रों के लिए कौन सा नया फीचर लाने की योजना बना रहा है?
गूगल आगामी महीनों में गाइडेड लर्निंग नामक फीचर लाएगा, जो तुरंत उत्तर देने के बजाय छात्रों को जानकारी खोजने के लिए संकेत देगा।

### 6. अल्फाबेट के शेयरों पर हाल ही में क्या असर पड़ा था?
सर्च विज्ञापन से कमजोर कमाई के चलते अल्फाबेट के शेयरों में भारी बिकवाली हुई जिससे कंपनी की बाजार पूंजी में आधा ट्रिलियन डॉलर घट गए।

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