चीन के एआई बूम का नया केंद्र बना उलानकाब, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में अमेरिका को दे रहा चुनौती इनर मंगोलिया का उलानकाब शहर चीनी टेक कंपनियों के एआई डेटा सेंटर्स का बड़ा गढ़ बन चुका है, जहां 12.5 गीगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। हालांकि, पानी की किल्लत और कोयले पर निर्भरता पर्यावरण के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। चीन के इनर मंगोलिया प्रांत में स्थित उलानकाब शहर, जिसकी आबादी लगभग 1.5 मिलियन है, वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। वर्ष 2016 के बाद से इस शहर में करीब 100 डेटा सेंटर्स चालू किए जा चुके हैं या उनका निर्माण शुरू हो चुका है। वित्तीय सेवा फर्म गोल्डमैन सेक्स के एक शोध पत्र के अनुसार, चीनी कंपनियों ने उलानकाब में 12.5 गीगावाट की अनुमानित संयुक्त क्षमता वाले प्रोजेक्ट्स बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक घोषणाएं केवल पिछले एक साल के भीतर हुई हैं, जिसने इसे एशिया के सबसे तेजी से बढ़ते कंप्यूट क्लस्टर्स में शामिल कर दिया है। इसकी तुलना अगर अमेरिका की एआई परियोजनाओं से करें, तो ओपनएआई का 500 अरब डॉलर का स्टारगेट प्रोजेक्ट पूरा होने पर केवल 10 गीगावाट की कुल क्षमता तक ही पहुंच पाएगा। उलानकाब की भौगोलिक और आर्थिक विशेषताएं चीनी टेक और एआई कंपनियां उलानकाब का रुख कई रणनीतिक कारणों से कर रही हैं। यह शहर इनर मंगोलियाई पठार पर उच्च ऊंचाई पर स्थित है, जहां सर्दियों का मौसम लंबा और काफी ठंडा रहता है। इस ठंडे जलवायु की वजह से डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए अत्यधिक ऊर्जा खर्च करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसके अलावा, यह चीन की राजधानी बीजिंग के काफी करीब है, जिससे बीजिंग और आसपास के घनी आबादी वाले क्षेत्रों तक न्यूनतम लेटेंसी के साथ डेटा स्थानांतरित किया जा सकता है। सबसे बड़ा आकर्षण यहां मिलने वाली सस्ती बिजली है। इनर मंगोलिया में पवन और सौर ऊर्जा के तेज विस्तार और कोयले की प्रचुर आपूर्ति के कारण बिजली की दरें पूरे चीन में सबसे कम मानी जाती हैं। टेक कंपनियों का इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल में बदलाव उलानकाब में हो रहे इस विकास का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कौन सी कंपनियां इन डेटा सेंटर्स का निर्माण कर रही हैं। पारंपरिक रूप से क्लाउड कंपनियों से कंप्यूट क्षमता किराए पर लेने के बजाय, पहली बार चीनी एआई कंपनियां अपने स्वयं के भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रही हैं। डीपसीक उलानकाब में एक विशाल एआई डेटा सेंटर का निर्माण कर रही है, और इसी राह पर बाइटडांस, अलीबाबा तथा सियाओहोंगशू जैसी दिग्गज कंपनियां भी आगे बढ़ी हैं। पिछले कई सालों तक चीनी एआई कंपनियों ने प्रभावशाली क्षमता वाले एआई मॉडल विकसित करने के बावजूद अपने अमेरिकी प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी कम खर्च किया था। उलानकाब में जारी यह निर्माण क्रांति दर्शाती है कि अब वे इस दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। जल संकट और पर्यावरणीय चिंताएं इस बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण के बीच एक गंभीर जल संकट भी पैदा हो गया है। उलानकाब में सालाना औसतन केवल 14 इंच बारिश होती है, जो इसे अमेरिका के डेनवर शहर जितना ही शुष्क बनाती है। कई नियोजित डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स के पूरी तरह चालू होने से पहले ही स्थानीय सरकार नागरिकों की पानी की मांग पूरी करने के लिए संघर्ष कर रही है। पिछले महीने, उलानकाब की स्थानीय जल कंपनी को पीक समय में मांग को नियंत्रित करने के लिए हर रात सात घंटे के लिए कई वाटरवर्क्स बंद करने पड़े थे। हालांकि उलानकाब के स्थानीय मौसम आंकड़ों से पता चलता है कि शीतकालीन परिस्थितियों के कारण डेटा सेंटर्स को साल के केवल दो महीनों में ही कूलिंग के लिए अतिरिक्त पानी की जरूरत होती है, फिर भी यह नया बुनियादी ढांचा पूरे क्षेत्र के लिए एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती पेश कर सकता है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और लेटेंसी में सुधार इनर मंगोलिया मौजूदा एआई क्रांति से बहुत पहले से ही डेटा सेंटर गतिविधियों का केंद्र रहा है। हुआवेई ने 2016 में उलानकाब में अपना पहला डेटा सेंटर स्थापित किया था, और इसके तीन साल बाद 2019 में ऐप्पल ने भी यहां अपना सेंटर बनाया। वर्ष 2021 में इस क्षेत्र को राष्ट्रीय सरकारी परियोजना ईस्टर्न डेटा वेस्टर्न कंप्यूट के मुख्य हब के रूप में नामित किया गया था, जिसका उद्देश्य चीन के पश्चिमी भीतरी इलाकों में डेटा सेंटर्स का विकास करना था। शुरुआत में, चीन के घनी आबादी वाले पूर्वी तट से दूर होने के कारण डेटा ट्रांसफर में उच्च लेटेंसी की समस्या आती थी, जिससे इन सेंटर्स का उपयोग मुख्य रूप से बैकअप स्टोरेज तक सीमित था। सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी में चीन के कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर का अध्ययन करने वाले प्रोफेसर एंड्रयू स्टोकोल्स बताते हैं कि 2022 में एआई के उभार के साथ यह अहसास हुआ कि दूरदराज के इन डेटा सेंटर्स का उपयोग मॉडल ट्रेनिंग के लिए किया जा सकता है। एआई मॉडल की ट्रेनिंग प्रक्रिया में महीनों का समय लगता है और इसमें रीयल-टाइम बदलावों की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए लेटेंसी कोई बड़ी रुकावट नहीं बनती। इसके अतिरिक्त, उलानकाब में 2017 और 2019 में बिछाई गई दो समर्पित फाइबर ऑप्टिक केबल्स ने औसत लेटेंसी को 5 मिलीसेकंड से भी कम कर दिया है। इतनी तेज गति रीयल-टाइम एआई इंफेरेंस जैसी प्रक्रियाओं का समर्थन करने के लिए पर्याप्त है। एंड्रयू स्टोकोल्स का कहना है कि उलानकाब का विकास सरकारी निवेश के बजाय वाणिज्यिक मांग से अधिक संचालित हुआ है, क्योंकि डीपसीक, मूनशॉट एआई और झिपु एआई जैसे स्टार्टअप्स को अपने भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं को सेवा देने के लिए स्थानीय स्तर पर इंफेरेंस डेटा सेंटर्स की जरूरत महसूस हुई है। अक्षय ऊर्जा और कोयले पर निर्भरता की वास्तविकता चीन सरकार के लिए इनर मंगोलिया में डेटा सेंटर बनाना देश की अतिरिक्त अक्षय ऊर्जा क्षमता को खपाने का एक अच्छा जरिया है। सिंगापुर स्थित शोध केंद्र कारनेगी चाइना के निदेशक डेमियन मा का कहना है कि चीन के जिन क्षेत्रों में अप्रयुक्त अक्षय ऊर्जा सबसे अधिक है, वहां डेटा सेंटर निर्माण की गति भी सबसे तेज देखी गई है। सरकार के नजरिए से यह एक दोहरा फायदा है, जिससे चीन डेटा सेंटर निर्माण में अमेरिका की बराबरी कर सकता है और साथ ही स्वच्छ ऊर्जा की मांग को बढ़ावा दे सकता है। इसी क्रम में पवन टर्बाइन निर्माता एनविज़न ने हाल ही में उलानकाब में 2 गीगावाट क्षमता का एआई डेटा सेंटर बनाने की घोषणा की है, जो सीधे कंपनी की अपनी स्वच्छ बिजली आपूर्ति से जुड़ा होगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि एआई डेटा सेंटर्स और स्वच्छ ऊर्जा के मेल को पूरी तरह सुचारू मान लेना जल्दबाजी होगी। एंड्रयू स्टोकोल्स के शोध से पता चलता है कि उलानकाब में बिजली का लगभग 37 प्रतिशत हिस्सा अभी भी कोयले से आता है। डेटा सेंटर्स को 24 घंटे लगातार चलना पड़ता है, इसलिए ऑपरेटर विश्वसनीयता के लिए जीवाश्म ईंधन को प्राथमिकता देते हैं। डेमियन मा का कहना है कि इनर मंगोलिया लंबे समय से चीन का मुख्य कोयला उत्पादक क्षेत्र रहा है। यद्यपि क्षेत्र में कोयले को पवन और सौर ऊर्जा से बदलने का काम तेजी से चल रहा है, फिर भी यह बदलाव कितना तेज होगा यह देखना बाकी है। डेमियन मा के अनुसार, फिलहाल डेटा सेंटर्स को कोयले पर निर्भर रहना पड़ेगा, लेकिन संभव है कि तीन वर्षों में वे पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होने लगें। इसका आप पर असर • वैश्विक एआई बाजार पर: चीन द्वारा 12.5 गीगावाट की विशाल कंप्यूट क्षमता तैयार करने से वैश्विक स्तर पर एआई मॉडल्स की प्रोसेसिंग लागत कम हो सकती है और ओपन-सोर्स एआई टूल्स की पहुंच बढ़ेगी। • तकनीक और पर्यावरण पर: डेटा सेंटर्स के लिए भारी मात्रा में बिजली और पानी की जरूरत स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच नए संतुलन की मांग करती है। सवाल-जवाब 1. उलानकाब डेटा सेंटर निर्माण का प्रमुख केंद्र क्यों बना है? उलानकाब में ठंडा मौसम, सस्ती बिजली (सौर, पवन और कोयला), तथा बीजिंग से निकटता के कारण कम लेटेंसी मिलती है, जो एआई प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त है। 2. उलानकाब में डेटा सेंटर्स की प्रस्तावित क्षमता कितनी है? चीनी कंपनियों ने उलानकाब में कुल 12.5 गीगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स की प्रतिबद्धता जताई है। 3. क्या उलानकाब में डेटा सेंटर्स को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है? हाँ, उलानकाब में सालाना केवल 14 इंच बारिश होती है, जिससे स्थानीय जल निकायों पर दबाव बढ़ गया है और जल कटौती की स्थिति बनी है। 4. कौन सी प्रमुख चीनी टेक कंपनियां उलानकाब में निवेश कर रही हैं? डीपसीक, बाइटडांस, अलीबाबा और सियाओहोंगशू जैसी प्रमुख कंपनियां उलानकाब में अपने स्वयं के डेटा सेंटर्स का निर्माण कर रही हैं। https://trendkia.com/ai/china-ke-ai-buma-ka-naya-kendra-bana-ulanqab-data-center-infrastructure-men-us-ko-de-raha-chunauti-19866 TrendKia — Har trend, sabse pehle.