# चुनाव में वोटिंग और उम्मीदवारों की जानकारी के लिए AI चैटबॉट्स पर भरोसा करना पड़ सकता है भारी

> शोधकर्ताओं की पड़ताल में सामने आया है कि प्रमुख AI चैटबॉट्स चुनाव से जुड़े लगभग 40 फीसदी सवालों के जवाब में गलतियां कर रहे हैं और पक्षपाती वेबसाइट्स का हवाला दे रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** एआई · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/ai/chunava-men-votinga-aura-ummidavaron-ki-janakari-ke-lie-ai-chatbots-para-bharosa-karana-para-sakata-hai-bhari-55882 · **Language:** Hindi
**Tags:** आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, चैटजीपीटी, जेमिनी, क्लॉड, चुनाव, गलत सूचना, वोटिंग

मतदाताओं के बीच राजनीतिक जानकारी हासिल करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI का चलन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन चुनावी मामलों में यह तकनीक भारी जोखिम साबित हो रही है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक लगभग 50 प्रतिशत अमेरिकी वयस्क जीवन में कम से कम एक बार AI चैटबॉट का इस्तेमाल कर चुके हैं। इसके अलावा 8 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्होंने मध्यावधि चुनाव से पहले उम्मीदवारों और नीतियों की पड़ताल के लिए इन डिजिटल टूल्स की मदद ली है। हालांकि, व्यापक अध्ययनों से यह बात साफ हो गई है कि इन चैटबॉट्स द्वारा दिए जाने वाले जवाब अक्सर पुराने, भ्रामक और मनगढ़ंत तथ्यों पर आधारित होते हैं।

## तथ्यों की भारी अनदेखी और गलत समय-सीमा
राजनीतिक रूप से निष्पक्ष माने जाने वाले प्रमुख प्लेटफॉर्म जैसे ओपनAI का चैटजीपीटी, एंथ्रोपिक का क्लॉड और गूगल का जेमिनी भी चुनावी सवालों पर लड़खड़ाते नजर आ रहे हैं। फोरम AI के एक शोध के अनुसार मुख्यधारा के सभी चैटबॉट्स द्वारा दिए गए चुनावी जवाबों में से लगभग 40 प्रतिशत में कम से कम एक तथ्यात्मक गलती पाई गई। उदाहरण के तौर पर, गूगल के AI मोड ने वर्ष 2020 के चुनावी नतीजे बताने से सीधे इनकार कर दिया। वहीं दूसरी तरफ गूगल के जेमिनी चैटबॉट ने पेंसिल्वेनिया में डाक मतपत्र यानी मेल-इन बैलेट का अनुरोध करने की अंतिम तिथि 3 नवंबर बता दी, जबकि वास्तविक अंतिम तारीख 27 अक्टूबर थी। इस तरह की गंभीर भूल मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर सकती है।

## उम्मीदवारों की पहचान में भ्रम
फोरम AI के शोधकर्ताओं ने अगस्त के महीने में जब क्लॉड से यह पूछा कि किसी को नॉर्थ कैरोलिना के सांसद डॉन डेविस को वोट क्यों देना चाहिए, तो चैटबॉट ने पूरी तरह भ्रामक उत्तर दिया। उसने मौजूदा सांसद को उसी नाम वाले एक पूर्व स्कूल सुपरिंटेंडेंट समझ लिया और दोनों व्यक्तियों की पहचान को आपस में मिला दिया। ऐसे मामलों से साफ जाहिर होता है कि चैटबॉट्स वास्तविक संदर्भ और एक ही नाम वाले व्यक्तियों के बीच अंतर समझने में सक्षम नहीं हैं।

## पक्षपाती और 'पिंक स्लाइम' वेबसाइट्स का बढ़ता दायरा
इस संकट की एक बड़ी वजह यह है कि ये चैटबॉट्स इंटरनेट पर मौजूद बेहद संदेहास्पद और समस्याग्रस्त जानकारियों पर निर्भर हैं। न्यूज़गार्ड के विश्लेषण में पाया गया कि मध्यावधि चुनावों से जुड़े उम्मीदवारों और नीतियों के बारे में पूछे जाने पर चैटबॉट्स लगभग 50 प्रतिशत मामलों में तथाकथित 'पिंक स्लाइम' वेबसाइट्स को स्रोत के रूप में पेश करते हैं। ये 'पिंक स्लाइम' पोर्टल खुद को सामान्य मुख्यधारा के समाचार आउटलेट्स के रूप में पेश करते हैं, लेकिन वास्तव में इनका वित्तपोषण राजनीतिक या वैचारिक समूहों और विशिष्ट व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। चुनावों से ठीक पहले ऐसे मंचों की संख्या में अचानक भारी उछाल आया है और चैटबॉट्स लगातार इनकी सामग्री उठा रहे हैं।

## चैटबॉट्स के प्रदर्शन में अंतर
न्यूज़गार्ड के निष्कर्षों में ओपनAI का चैटजीपीटी सबसे खराब स्थिति में रहा, जिसने 70 प्रतिशत से अधिक खोजों में इन राजनीतिक रूप से वित्तपोषित 'पिंक स्लाइम' साइट्स का हवाला दिया। इसके मुकाबले xAI का ग्रोक चैटबॉट अपेक्षाकृत बेहतर रहा, जिसने 30 प्रतिशत मामलों में ऐसी साइट्स का संदर्भ लिया। इस पूरे मुद्दे पर गूगल और एंथ्रोपिक ने किसी तरह का जवाब नहीं दिया, जबकि ओपनAI ने वर्ष 2026 के चुनावों के प्रति कंपनी के दृष्टिकोण को रेखांकित करने वाले एक ब्लॉग का हवाला दिया।

## विशेषज्ञों की चेतावनी
अमेरिकन सनलाइट प्रोजेक्ट की कार्यकारी निदेशक और बाइडन प्रशासन के दौरान पूर्व गलत सूचना मामलों की प्रमुख नीना जांकोविज़ ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि अधिकांश नागरिक उपभोक्ता AI के इस दौर में चुनावी परिदृश्य से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि कंपनियों और उनके अधिकारियों ने AI की वास्तविक क्षमताओं को लेकर जरूरत से ज्यादा दावे किए हैं। AI को डेटा कहीं न कहीं से प्राप्त करना होता है और अक्सर वे स्रोत भरोसेमंद नहीं होते। चूंकि यह एक प्रिडिक्टिव तकनीक है, इसलिए जब इसे सटीक उत्तर पता नहीं होता, तो यह खुद से मनगढ़ंत बातें बना देती है।

## इसका आप पर असर
चुनाव के दौरान AI चैटबॉट्स से मतदान नियमों और उम्मीदवारों की जानकारी लेना आपको गलत फैसले या छूटी हुई समय-सीमा की ओर धकेल सकता है।

- **मतदान की समय-सीमा:** चैटबॉट्स डाक मतपत्र और पंजीकरण की गलत तारीखें बता सकते हैं। इससे आपका वोट रद्द हो सकता है या आप समय पर आवेदन करने से चूक सकते हैं।
- **उम्मीदवारों की सही पहचान:** AI टूल्स एक ही नाम के अलग-अलग लोगों के रिकॉर्ड को मिला देते हैं। किसी भी प्रत्याशी की नीतियों की पुष्टि केवल आधिकारिक चुनाव आयोग और प्रामाणिक रिकॉर्ड से ही करें।
- **पक्षपाती खबरों से बचाव:** चैटबॉट्स गुप्त रूप से पोषित राजनीतिक वेबसाइट्स को निष्पक्ष समाचार समझकर पेश करते हैं। राजनीतिक दावों पर यकीन करने से पहले प्राथमिक स्रोतों की स्वयं पड़ताल करें।
- **आधिकारिक चुनाव पोर्टल:** AI से सवाल पूछने के बजाय सीधे आधिकारिक सरकारी चुनाव पोर्टल पर जाएं। वहां आपको सत्यापित नियम, मतदान केंद्र और सही तिथियां प्राप्त होंगी।

## ऐसा क्यों हुआ
AI चैटबॉट्स द्वारा चुनावी मामलों में लगातार गलतियां करने के पीछे तकनीकी सीमाएं और इंटरनेट पर मौजूद भ्रामक सामग्री मुख्य कारण हैं।

- **प्रेडिक्टिव भाषा मॉडल की बनावट:** ये प्रणालियां केवल शब्दों के संभावित अनुक्रम का अनुमान लगाती हैं और तथ्यों को समझने में असमर्थ होती हैं। जब इन्हें सटीक उत्तर नहीं मिलता, तो वे खुद से कल्पित जवाब तैयार कर देती हैं।
- **पारदर्शी स्रोतों की कमी:** चैटबॉट्स इंटरनेट से बड़ी मात्रा में अप्रमाणित डेटा इकट्ठा करते हैं। इस प्रक्रिया में गुप्त रूप से संचालित राजनीतिक वेबसाइट्स का भ्रामक प्रचार भी उनके प्रशिक्षण का हिस्सा बन जाता है।
- **चुनावी संदर्भ को पहचानने में विफलता:** चैटबॉट्स एक जैसे नामों वाले दो अलग व्यक्तियों के बीच भेद नहीं कर पाते हैं। इसी वजह से वे किसी सांसद की जगह उसी नाम के किसी अन्य पेशेवर का विवरण पेश कर देते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. कितने प्रतिशत अमेरिकी वयस्कों ने चुनाव की जानकारी के लिए AI चैटबॉट्स का उपयोग किया है?
प्यू रिसर्च के अनुसार 8 प्रतिशत अमेरिकी वयस्कों ने मध्यावधि चुनाव से पहले उम्मीदवारों और नीतियों की जानकारी के लिए इन टूल्स का उपयोग किया है।

### 2. चुनावी सवालों पर AI चैटबॉट्स कितनी गलतियां कर रहे हैं?
फोरम AI के शोध के अनुसार मुख्यधारा के चैटबॉट्स द्वारा दिए गए लगभग 40 प्रतिशत चुनावी जवाबों में कम से कम एक तथ्यात्मक गलती पाई गई।

### 3. पेंसिल्वेनिया में मेल-इन बैलेट की समय-सीमा को लेकर जेमिनी ने क्या गलत जानकारी दी?
जेमिनी ने आवेदन की अंतिम तिथि 3 नवंबर बताई, जबकि वास्तविक आधिकारिक अंतिम तिथि 27 अक्टूबर थी।

### 4. 'पिंक स्लाइम' वेबसाइट्स क्या होती हैं?
ये ऐसी वेबसाइट्स हैं जो खुद को मुख्यधारा के स्थानीय समाचार पोर्टल की तरह दिखाती हैं, लेकिन वास्तव में राजनीतिक या वैचारिक समूहों द्वारा वित्तपोषित होती हैं।

### 5. पक्षपाती वेबसाइट्स का हवाला देने में कौन सा चैटबॉट सबसे आगे रहा?
न्यूज़गार्ड के अनुसार ओपनAI का चैटजीपीटी 70 प्रतिशत से अधिक खोजों में इन पक्षपाती साइट्स का हवाला देकर सबसे खराब स्थिति में रहा।

### 6. कौन से चैटबॉट ने इन साइट्स का सबसे कम संदर्भ दिया?
xAI के ग्रोक ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और केवल 30 प्रतिशत मामलों में इन वेबसाइट्स का हवाला दिया।

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