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  "type": "article",
  "title": "जेनरेटिव एआई की फर्जी तस्वीरें बढ़ा रहीं पेट स्कैम, पशु कल्याण अभियानों की साख पर भी संकट",
  "summary": "खोए हुए पालतू जानवरों की तलाश में जुटे मालिकों को एआई से बनी फर्जी तस्वीरों के जरिए निशाना बनाया जा रहा है, वहीं यह तकनीक असली पशु कल्याण अभियानों और फोटोपत्रकारिता पर से लोगों का भरोसा भी कम कर रही है।",
  "content": "खोए हुए पालतू जानवर की तलाश में जुटी एक महिला के पास जब एक फोटो के साथ उम्मीद भरा मैसेज आता है, तो उसे बाद में अहसास होता है कि वह तस्वीर पैसे ऐंठने के मकसद से बनाई गई एक फर्जी एआई फोटो थी। यह चिंताजनक घटना उस बढ़ते रुझान को दर्शाती है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल लोगों की भावनात्मक लाचारी का फायदा उठाने के लिए किया जा रहा है। व्यक्तिगत स्तर पर होने वाली इस तरह की वित्तीय धोखाधड़ी के अलावा, इंटरनेट पर तेजी से फैल रही एआई-जनरेटेड जानवरों की फर्जी तस्वीरें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए गंभीर संकट खड़ी कर रही हैं। पशु क्रूरता का पर्दाफाश करने वाले गैर-लाभकारी जांच समूह अब तक के सबसे बड़े अविश्वास का सामना कर रहे हैं, जबकि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण संगठनों को डर है कि फर्जी रेस्क्यू वीडियो की वजह से असली बचाव अभियानों और जन-सहयोग पर से लोगों का भरोसा उठ जाएगा।\n\nपेट रैनसम स्कैम में एआई तस्वीरों का बढ़ता इस्तेमाल\nअप्रैल के महीने में मिब्बी बटलर को उस समय राहत की एक किरण दिखाई दी जब उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया कि उनका खोया हुआ बिल्ली का बच्चा ब्रुकलिन मिल गया है। इस मैसेज से ठीक एक दिन पहले, मिब्बी के रूममेट के बॉयफ्रेंड ने कथित तौर पर ब्रुकलिन को घर से दूर लॉस एंजिल्स के एक उपनगरीय इलाके में छोड़ दिया था, जो वहां से लगभग 30 मिनट की दूरी पर था। मिब्बी ने तुरंत सोशल मीडिया पर एक मिसिंग पोस्टर बनाकर शेयर किया था। वह अपने रूममेट के साथ गाड़ी से आसपास के इलाकों में ब्रुकलिन की तलाश कर ही रही थीं कि एक अनजान व्यक्ति ने उन्हें एक फोटो भेजी। उस तस्वीर में एक बिल्ली किचन काउंटर पर बैठी थी और एक लड़की उसे गले लगाए हुए थी।\n\nतस्वीर देखते ही मिब्बी ने खुशी से अपनी रूममेट से कहा कि उनका पालतू जानवर सुरक्षित है। हालांकि, जब मैसेज भेजने वाले व्यक्ति ने ब्रुकलिन को वापस करने से पहले उसके कथित अस्थायी रखरखाव के नाम पर एडवांस पैसों की मांग की, तो मिब्बी को शक हुआ। उन्होंने जब फोटो को ध्यान से देखना शुरू किया, तो उन्हें कई अजीब गड़बड़ियां नजर आईं। फोटो में बिल्ली बिल्कुल उसी मुद्रा में बैठी थी जैसी मिसिंग पोस्टर वाली फोटो में थी। इसके अलावा, पृष्ठभूमि में टॉरानी सिरप की बोतल और माइक्रोवेव भी दिख रहा था जो उनके घर जैसा ही था, लेकिन टॉरानी बोतल पर लिखा टेक्स्ट धुंधला और पढ़ा न जाने योग्य था, जो कि जनरेटिव एआई से बनी तस्वीरों का एक प्रमुख लक्षण है।\n\nधोखाधड़ी का अहसास होने पर मिब्बी ने पैसे देने से इनकार कर दिया। उन्होंने पुलिस में भी शिकायत दर्ज नहीं कराई क्योंकि उन्हें यकीन नहीं था कि तकनीकी रूप से कोई अपराध घटित हुआ है या नहीं। इस घटना के चार महीने बीत जाने के बाद भी ब्रुकलिन का कोई सुराग नहीं मिल सका है।\n\nडीपफेक की पहचान और एआई जनरेटर का सच\nपालतू जानवरों के मालिकों के लिए मानसिक प्रताड़ना यहीं खत्म नहीं होती। मिब्बी बटलर का कहना है कि उन्हें हर महीने कम से कम एक बार किसी न किसी अनजान व्यक्ति से ब्रुकलिन के मिलने का दावा करने वाली एआई डीपफेक फोटो मिलती रहती है। एआई तकनीक के जरिए इस तरह की जालसाजी कितनी आसानी से की जा सकती है, इसकी जांच के लिए चैटजीपीटी जैसे लोकप्रिय एआई चैटबॉट्स पर परीक्षण किए गए। चैटजीपीटी ने खुद इस बात की पुष्टि की कि मिब्बी को भेजी गई फर्जी तस्वीरों में से कम से कम एक तस्वीर उसी के द्वारा बनाई गई थी, जिसमें ब्रुकलिन जैसी दिखने वाली बिल्ली को एक दरवाजे के सामने खाना खाते हुए दिखाया गया था।\n\nइस तरह की भ्रामक तस्वीरें तैयार करने की प्रक्रिया बेहद आसान और सुलभ है। मिब्बी के मिसिंग पोस्टर वाली मूल फोटो और महज 29 शब्दों के एक सरल प्रोम्प्ट का उपयोग करके चैटजीपीटी से एक ऐसी नई तस्वीर तैयार कर ली गई जो ठग द्वारा भेजी गई फोटो से काफी मिलती-जुलती थी। इससे यह साफ होता है कि जालसाज किस तरह सोशल मीडिया पर मौजूद खोए हुए पालतू जानवरों के विज्ञापनों को उठाकर उन्हें आसानी से एआई टूल्स में डालते हैं और कुछ ही सेकंड्स में फर्जी फोटो बनाकर लाचार मालिकों से पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं।\n\nमिब्बी ऐसे फर्जी वीडियो और तस्वीरें भेजने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स को लगातार ब्लॉक करती रहती हैं, फिर भी एआई से बनी फर्जी बिल्ली की तस्वीरों से पीछा छुड़ाना उनके लिए नामुमकिन साबित हो रहा है। वह जैसे ही किसी एक अकाउंट को ब्लॉक करती हैं, उनकी फीड में नए फर्जी अकाउंट्स दिखने लगते हैं।\n\nपशु कल्याण संगठनों के सामने प्रामाणिकता का संकट\nएक तरफ जहां आम लोग व्यक्तिगत स्कैम का शिकार हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वास्तविक काम करने वाले फोटोपत्रकार और गैर-लाभकारी संगठन जनता के टूटते विश्वास से जूझ रहे हैं। गैर-लाभकारी संगठन वी एनिमल्स के साथ लगभग 175 फोटोपत्रकार जुड़े हुए हैं, जो सर्कस, वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं और औद्योगिक फार्मों में जानवरों के साथ होने वाली क्रूरता और दुर्व्यवहार को कैमरे में कैद करते हैं। वी एनिमल्स की मार्केटिंग मैनेजर ईवा वोन जागो का कहना है कि उनकी खोजी सामग्रियां अक्सर इतनी झकझोर देने वाली होती हैं कि लोग स्वाभाविक रूप से उन पर संदेह करने लगते हैं।\n\nउदाहरण के लिए, वी एनिमल्स द्वारा हाल ही में जारी किए गए ड्रोन फुटेज में एरिज़ोना के एक डेयरी फार्म की तस्वीरें दिखाई गई थीं। इस वीडियो में अपनी माताओं से अलग किए गए बछड़ों के लिए बनी बाड़ों की लंबी-लंबी कतारें नजर आ रही थीं। वीडियो में दिख रही बनावट और सजावट इतनी सटीक और व्यवस्थित लग रही थी कि दर्शकों को यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह असली फुटेज है। अतीत में भी लोग वी एनिमल्स के काम को एडिटेड या फोटोशॉप किया हुआ बताते रहे हैं, लेकिन अब एआई के दौर में दर्शकों ने सीधे तौर पर संगठन पर एआई के इस्तेमाल का आरोप लगाना शुरू कर दिया है, जबकि संगठन अपने फोटोग्राफरों द्वारा एआई के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाता है।\n\nइस महीने इंस्टाग्राम पर एक यूजर ने एरिज़ोना डेयरी फार्म वाले वीडियो पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यह कैसे साबित किया जाए कि यह एआई से नहीं बनाया गया है? इस तरह के बढ़ते संदेह से निपटने के लिए वी एनिमल्स अपनी पारदर्शिता रणनीतियों में बदलाव कर रहा है। संगठन अब दृश्यों के पीछे की सच्चाई यानी बिहाइंड-द-सीन्स वाले फुटेज साझा करने और अपनी सत्यापन प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की योजना बना रहा है। इसके अलावा, संगठन डिजिटल फाइलों में तस्वीरें खींचने और उन्हें एडिट करने का पूरा इतिहास दर्ज करने वाली तकनीकी प्रणालियों को अपनाने जा रहा है। वी एनिमल्स की विजुअल कंटेंट डायरेक्टर विक्टोरिया डी मार्टिग्नी का मानना है कि दर्शकों के भरोसे को बनाए रखना बेहद जरूरी है, वरना लोग उनके पूरे काम पर सवाल उठाने लगेंगे।\n\nफर्जी रेस्क्यू वीडियो और वन्यजीव संरक्षण पर असर\nइस समस्या की एक बड़ी वजह एआई से बने कंटेंट का व्यावसायिक इस्तेमाल है। ऐतिहासिक रूप से, असली और संवेदनशील तस्वीरें हमेशा से वन्यजीव संरक्षण और पशु कल्याण संगठनों के लिए धन जुटाने का प्रमुख जरिया रही हैं। लेकिन एआई स्लोप अकाउंट्स चलाने वाले लोग लाइक्स, शेयर्स और विज्ञापन से कमाई करने के लिए सस्ते और आसान रास्ते के रूप में एआई से बनी फर्जी तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल कर रहे हैं। चूंकि एआई कंटेंट बहुत कम लागत में तैयार हो जाता है, इसलिए यह सोशल मीडिया एल्गोरिदम और सर्च इंजनों पर असली और इंसानों द्वारा ली गई तस्वीरों को दबा रहा है।\n\nऑस्कर होर्टा, जो एक दार्शनिक और प्रमुख पशु अधिकार कार्यकर्ता हैं तथा जिन्होंने हाल ही में वन्यजीवों पर एआई के प्रभावों पर एक लघु फिल्म का सह-निर्देशन किया है, का कहना है कि यह प्रवृत्ति बेहद खतरनाक है। ऑस्कर होर्टा ने जंगलों की आग और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जंगली जानवरों को बचाए जाने के फर्जी और काल्पनिक वीडियो पर चिंता जताई। उनका मानना है कि एआई से बने ये रेस्क्यू वीडियो लोगों में जानवरों के व्यवहार और वास्तविक बचाव प्रक्रियाओं को लेकर गलतफहमियां पैदा करते हैं।\n\nजलवायु परिवर्तन के कारण जब प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही हैं, तब यह भ्रामक जानकारी और भी नुकसानदेह साबित हो सकती है। फर्जी रेस्क्यू वीडियो देखने के बाद लोग असली रेस्क्यू टीमों की तकनीकों पर सवाल उठा सकते हैं और भविष्य में उन्हें मिलने वाले दान में कमी आ सकती है। ऑस्कर होर्टा ने बर्फानी भालू के डूबने और इंसानों द्वारा नावों से उन्हें बचाने वाले डीपफेक वीडियो का उदाहरण देते हुए कहा कि ये दृश्य पूरी तरह से हास्यास्पद हैं और असली पशु कल्याण कार्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करते। इस तरह के भ्रामक कंटेंट से प्रभावित होकर लोग वास्तविक जीवन में खतरनाक कदम उठा सकते हैं।\n\nतकनीकी समाधान, नीतियां और कानूनी कदम\nएआई जनरेटेड भ्रामक जानकारियों के प्रसार को रोकने के लिए शोधकर्ता, नीति निर्माता और कानूनविद विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे हैं। न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर माइंड, एथिक्स एंड पॉलिसी के निदेशक जेफ सबो ने इस महीने एआई डेवलपर्स से अपील की कि वे अपने मॉडल गाइडलाइंस में ऐसे नियम शामिल करें जो जानवरों को नुकसान पहुंचाने वाले जवाबों को हतोत्साहित करें। जेफ सबो का कहना है कि एआई मॉडल्स को इस तरह से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए कि वे साक्ष्यों और तर्कों पर आधारित रहें, बिना किसी अनावश्यक उपदेशात्मक रवैये के।\n\nदूसरी तरफ, कानूनी मोर्चे पर भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। कैलिफोर्निया और यूरोपीय संघ में लागू नए कानूनों के तहत प्रमुख एआई इमेज जनरेटर प्लेटफॉर्म्स के लिए अपनी बनाई हर सामग्री में एक अदृश्य डिजिटल वॉटरमार्क या टैग लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इन वॉटरमार्क्स की पहचान करके सार्वजनिक रूप से एआई से बनी तस्वीरों और वीडियो पर स्पष्ट लेबल लगाने के निर्देश दिए गए हैं।\n\nवर्तमान में चैटजीपीटी, जेमिनी और मेटा एआई जैसे टूल्स में यह जांचने की सुविधा मौजूद है कि कोई फोटो उनके प्लेटफॉर्म द्वारा बनाई गई है या नहीं। लेकिन व्यवहारिक रूप से हर व्यक्ति के पास हर फोटो को इन टूल्स में अपलोड करके जांचने का समय नहीं होता, और इन टूल्स की अपनी सीमाएं भी हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर इन सत्यापन प्रणालियों को सीधे मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, मैसेजिंग ऐप और वेब ब्राउज़र में डिफ़ॉल्ट रूप से शामिल कर दिया जाए, तो आम यूजर्स को फर्जीवाड़े से तुरंत सुरक्षा मिल सकती है।\n\nएआई विरोधी समुदायों में राहत की तलाश\nमिब्बी बटलर जैसी पीड़ितों के लिए तकनीकी सुधार शायद उनके पुराने दर्द को पूरी तरह खत्म न कर सकें, लेकिन मानवीय समुदाय उन्हें नई उम्मीद दे रहे हैं। ब्रुकलिन के खो जाने के गम के बीच, मिब्बी ने अब ऐसे ऑनलाइन समूहों में समय बिताना शुरू कर दिया है जो एआई से बनी सामग्री का विरोध करते हैं।\n\nवह अब फेसबुक पर एआई विरोधी कलाकारों के एक बड़े समूह में सक्रिय रहती हैं, जिसमें लगभग 3,00,000 सदस्य जुड़े हुए हैं। यह समूह उनके लिए एक सुरक्षित जगह बन गया है, जहां वह बिना किसी फर्जी एल्गोरिदम के इंसानों द्वारा बनाई गई असली कलाकृतियों का आनंद ले सकती हैं। ब्रुकलिन के वापस लौटने की उम्मीद के साथ-साथ, मिब्बी इस तरह के मानवीय समुदायों के सहारे डिजिटल फर्जीवाड़े के इस दौर में मानसिक शांति की तलाश कर रही हैं।\n\nइसका आप पर असर\nइंटरनेट और सोशल मीडिया यूजर्स के लिए:\n\n• पेट ओनर्स के लिए: खोए हुए पालतू जानवरों की खोज के दौरान एडवांस पैसे मांगने वाले अज्ञात व्यक्तियों की तस्वीरों की बारीकी से जांच करें और किसी भी अज्ञात व्यक्ति को भुगतान न करें।\n• डिजिटल कंज्यूमर के लिए: सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले अजीब और अवास्तविक जानवर रेस्क्यू वीडियो पर बिना पुष्टि भरोसा या शेयर न करें।\n• ऑनलाइन डोनर्स के लिए: पशु कल्याण के लिए दान देने से पहले संस्थाओं की प्रामाणिकता और सत्यापन प्रक्रियाओं को जरूर जांचें।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पालतू जानवरों से जुड़ा एआई रैनसम स्कैम क्या है?\nजालसाज सोशल मीडिया से खोए हुए पालतू जानवरों के विज्ञापनों से फोटो उठाकर एआई टूल्स की मदद से फर्जी तस्वीरें बनाते हैं और मालिक को भेजकर पालतू जानवर वापस करने के बदले पैसे ऐंठते हैं।\n\n2. एआई से बनी फर्जी जानवरों की तस्वीरों की पहचान कैसे करें?\nतस्वीरों की पृष्ठभूमि में लिखे टेक्स्ट, धुंधले हिस्सों, अप्राकृतिक बनावट और पुरानी तस्वीरों से मैच होने वाली बॉडी पोज को ध्यान से देखकर फर्जीवाड़े की पहचान की जा सकती है।\n\n3. वी एनिमल्स जैसे संगठन अपनी तस्वीरों की प्रामाणिकता कैसे साबित करेंगे?\nसंगठन बिहाइंड-द-सीन्स फुटेज साझा करने और डिजिटल फाइलों में प्रोवेनेंस मेटाडेटा और एडिट हिस्ट्री दर्ज करने वाली तकनीक अपनाने की योजना बना रहा है।\n\n4. कैलिफोर्निया और ईयू के नए एआई कानून क्या हैं?\nनए कानूनों के तहत एआई इमेज जनरेटर प्लेटफॉर्म्स के लिए इमेज में अदृश्य डिजिटल वॉटरमार्क लगाना और सोशल मीडिया नेटवर्क के लिए उन पर स्पष्ट लेबल प्रदर्शित करना अनिवार्य है।\n\n5. क्या चैटजीपीटी या जेमिनी से एआई फोटो की जांच की जा सकती है?\nहां, चैटजीपीटी, जेमिनी और मेटा एआई में यह जांचने की सुविधा है कि कोई तस्वीर उनके प्लेटफॉर्म द्वारा जनरेट की गई है या नहीं।",
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  "publishedAt": "2026-08-26",
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