कार की तरह असेंबली लाइन पर एआई डेटा सेंटर बनाने की तैयारी में रनवेयर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर स्टार्टअप रनवेयर रोमानिया स्थित अपनी फैक्ट्री में मॉड्युलर डेटा सेंटर पॉड्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य पारंपरिक निर्माण के वर्षों के मुकाबले महज महीनों में हाइपरस्केल क्षमता खड़ी करना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कम्प्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग में भारी उछाल आया है। पारंपरिक डेटा सेंटरों के निर्माण में जमीन अधिग्रहण, डिजाइनिंग और जटिल सिविल निर्माण के चलते आमतौर पर कई साल लग जाते हैं। इसी समस्या को सुलझाने के लिए एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी रनवेयर अपने सोनिक इन्फेरेंस पॉड के जरिए नया दांव खेल रही है। यह एक मॉड्युलर डेटा सेंटर है, जिसे फैक्ट्री के भीतर तैयार करके सीधे ग्राहकों की तय जगह पर भेजा जाता है। अब कंपनी अपनी उत्पादन व्यवस्था को पूरी तरह से ऑटोमोबाइल असेंबली लाइन की तर्ज पर ढालने जा रही है, ताकि जिस तरह कारें बड़े पैमाने पर बनती हैं, उसी तरह डेटा सेंटर पॉड्स का भी लगातार उत्पादन किया जा सके। प्रीफैब्रिकेटेड डेटा सेंटरों की रेस और रनवेयर का मॉडल फैक्ट्री में डेटा सेंटर के ढांचे तैयार करने की तकनीक पूरी तरह नई नहीं है। क्रूसो और श्नाइडर इलेक्ट्रिक जैसी कंपनियां भी पहले से प्रीफैब्रिकेटेड पॉड्स की आपूर्ति करती रही हैं। हालांकि, रनवेयर का दावा है कि उसकी शिपिंग रफ्तार और असेंबली प्रक्रिया प्रतिस्पर्धियों से कहीं अधिक तेज है। बाजार में बड़े चिप निर्माताओं की ओर से भी इस दिशा में कदम उठाए गए हैं। उदाहरण के तौर पर एनवीडिया ने वेरा रूबिन एआई फैक्ट्रीज और डीएसएक्स पॉड की घोषणा की है, जिनका मकसद कंपनियों के लिए एआई डेटा सेंटर तैयार करने की प्रक्रिया को आसान और तीव्र बनाना है। रनवेयर का अंतर यह है कि कंपनी सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन पेश करने के बजाय खुद वास्तविक फैक्ट्री संचालित कर रही है, जहां इन मॉड्युलर यूनिट्स का निर्माण किया जा रहा है। उत्पादन क्षमता में भारी बढ़ोतरी का रोडमैप रनवेयर के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी फ्लावियू राडुलेस्कु के अनुसार, कंपनी रोमानिया में मौजूद अपनी फैक्ट्री से उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2028 तक प्रतिदिन 30 मेगावाट डेटा सेंटर क्षमता का उत्पादन करना है, जो हर महीने लगभग 1 गीगावाट क्षमता के बराबर बैठता है। यह पैमाना कितना विशाल है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस गति से कंपनी एक वर्ष में जितनी क्षमता तैयार करेगी, वह अमेरिका में इस साल जुड़ने वाली अनुमानित 10 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता के लगभग बराबर होगी। यह पूरी कवायद पूरे उद्योग में डेटा सेंटरों को अधिक तेजी और कुशलता से तैनात करने की व्यापक मांग को दर्शाती है। रोमानिया स्थित दो संयंत्र और निर्माण की गति उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से अगले साल से बढ़ाया जाएगा। रनवेयर के पास वर्तमान में दो उत्पादन संयंत्र हैं। इनमें से एक फैक्ट्री का इस्तेमाल कंपनी पिछले कुछ वर्षों से पॉड्स बनाने के लिए कर रही है, जबकि दूसरी नई फैक्ट्री का निर्माण इसी साल शुरू किया गया था। इस दूसरे संयंत्र का निर्माण कार्य आने वाले कुछ महीनों में पूरा होने की उम्मीद है और यह अगले साल की शुरुआत में पूरी तरह चालू हो जाएगा। पहले एक पॉड को बनाने में तीन हफ्ते का समय लगता था, लेकिन जैसे-जैसे उत्पादन लाइन की रफ्तार बढ़ेगी, यह काम घटकर केवल एक दिन का रह जाएगा। स्थापना और संचालन का ढांचा ग्राहक इन मॉड्युलर डेटा सेंटरों को स्थापित करने के लिए अपनी खुद की जमीन मुहैया करा सकते हैं, या फिर रनवेयर उनके लिए उपयुक्त जगह की व्यवस्था कर सकती है। राडुलेस्कु के मुताबिक, कंपनी का लक्ष्य पॉड्स को महज 48 घंटे के भीतर ऑनलाइन और चालू करने का है। यह 48 घंटे का समय केवल साइट पर इंस्टॉलेशन और तकनीकी सेटअप के लिए है, इसमें फैक्ट्री निर्माण का समय शामिल नहीं है। यदि किसी यूनिट का कोई पुर्जा खराब होता है, तो कंपनी अतिरिक्त स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति भी सुनिश्चित करेगी। व्यावसायिक मॉडल के तहत ग्राहक सीधे रनवेयर से कम्प्यूट क्षमता किराए पर ले सकते हैं, अथवा अपने खुद के जीपीयू चिप्स लगाकर पॉड्स और उनके संचालन के लिए एक तय मासिक शुल्क चुका सकते हैं। बिजली और इंटरनेट कनेक्शन का शुल्क अलग से लिया जाता है। कस्टमाइजेशन और चिप आपूर्ति का गणित रनवेयर के पॉड्स एक मानक डिजाइन पर आधारित हैं, लेकिन उन्हें ग्राहकों की खास जरूरतों और बाजार में आने वाले नए जीपीयू चिप्स के हिसाब से बदला जा सकता है। आम तौर पर चिप्स का ऑर्डर देने के बाद उनकी डिलीवरी में लंबा वक्त लगता है, और यही देरी कंपनी के पक्ष में काम करती है। राडुलेस्कु के अनुसार, उनके पॉड की डिलीवरी का समय जीपीयू मिलने की समयसीमा से भी कम है, जिससे ग्राहकों द्वारा ऑर्डर किए गए हार्डवेयर के हिसाब से ढांचे को ढालने का पर्याप्त अवसर मिल जाता है। जब भी नई पीढ़ी के जीपीयू आते हैं, रनवेयर की इन-हाउस हार्डवेयर टीम घटकों का डिजाइन, निर्माण और परीक्षण खुद कर लेती है, जिससे तेजी से बदलाव संभव हो पाता है। मैन्युफैक्चरिंग की चुनौतियां और लागत नियंत्रण कागजी योजनाओं को जमीन पर उतारना सबसे बड़ी परीक्षा होती है। ऐसी फैक्ट्री को सुचारू रूप से चलाने के लिए भारी तादाद में कुशल कामगारों, इन्वेंट्री प्रबंधन, मजबूत सप्लाई चेन और भारी पूंजी की आवश्यकता होती है। मैन्युफैक्चरिंग को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश में कई कंपनियां पहले लड़खड़ा चुकी हैं। इसका एक बड़ा उदाहरण इलेक्ट्रिक वाहन स्टार्टअप अराइवल है, जिसका मूल्यांकन कभी 13 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया था, लेकिन वह पारंपरिक संयंत्रों की तुलना में लागत प्रभावी ढंग से बड़े पैमाने पर वाहन बनाने में नाकाम रहा। रनवेयर अब तक 60 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटा चुकी है। कंपनी का इरादा आगे सीरीज बी राउंड जुटाने का है, लेकिन फिलहाल वह अपने संयंत्र को पिछले दिसंबर में जुटाए गए 50 मिलियन डॉलर के सीरीज ए फंड की मदद से पूरा कर रही है। लागत के सवाल पर राडुलेस्कु का कहना है कि उनकी लागत संरचना अराइवल जैसी कंपनियों से काफी अलग है। कंपनी के पास स्टाफ और सामग्री की लागत जरूर है, लेकिन एआई कम्प्यूट की भारी मांग और मूल्य की तुलना में उनके कारखाने के कर्मचारियों की लागत काफी संतुलित है। इसके अलावा, अपने सिस्टम खुद डिजाइन करने और बाजार में आसानी से मिलने वाले किफायती पुर्जों के इस्तेमाल से भी खर्च को नियंत्रण में रखा गया है। काम के सटीक क्रियान्वयन के लिए कंपनी ने ऑटोमोटिव उद्योग के एक अनुभवी प्लांट मैनेजर को अपने हार्डवेयर प्रमुख के साथ जिम्मेदारी सौंपी है। सप्लाई चेन निर्भरता और कारोबारी मांग पुर्जों की सोर्सिंग भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। यद्यपि रनवेयर अपने कूलिंग सिस्टम और अन्य बुनियादी ढांचे को मानक घटकों से खुद तैयार करती है, लेकिन पंप और पंखे जैसे कुछ जरूरी उपकरण जर्मनी से मंगाए जाते हैं। साथ ही, नेटवर्किंग के लिए कंपनी अब भी एनवीडिया पर निर्भर है। इन चुनौतियों के बावजूद बाजार में कंपनी के प्रति रुचि काफी मजबूत दिख रही है। बाहरी ग्राहकों के लिए सोनिक पॉड्स की पेशकश शुरू करने के एक महीने के भीतर कंपनी को 1 अरब डॉलर के प्रतिबद्ध ऑर्डरों की दिलचस्पी मिली है। राडुलेस्कु ने बताया कि यह मांग 20 मेगावाट से अधिक क्षमता की है, जिसे पूरा करने के लिए कंपनी तेजी से काम कर रही है। ऊर्जा खपत और वाटरलेस कूलिंग सिस्टम दुनिया भर में डेटा सेंटर भारी बिजली और पानी की खपत को लेकर आलोचनाओं के घेरे में रहे हैं, जिससे स्थानीय ग्रिड और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव पड़ता है। इस चिंता पर राडुलेस्कु का कहना है कि उनके पॉड्स को केवल बिजली और इंटरनेट की आवश्यकता होती है। इनमें लिक्विड कूलिंग का एक बंद लूप सिस्टम इस्तेमाल किया गया है, जिसमें गर्मी को बाहर निकालने के लिए एयर-कूल्ड रेडिएटर लगे हैं, इसलिए इन्हें किसी बाहरी जल स्रोत या पानी के कनेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती। कंपनी बिजली प्रदाताओं के साथ मिलकर 397 मेगावाट क्षमता वाली संभावित साइटों की योजना पर काम कर रही है, जिसे भविष्य में 1.2 गीगावाट तक बढ़ाया जा सकता है। रनवेयर अपने इन पॉड्स को अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसे हाइपरस्केलर्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले विशाल परिसरों के मुकाबले काफी छोटी जगहों पर स्थापित कर रही है। वैश्विक विस्तार की योजनाएं रोमानिया में अपनी नई फैक्ट्री को अगले साल की शुरुआत में पूरी तरह चालू करने के बाद, रनवेयर अमेरिका और दुनिया के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में अपना विस्तार करने की योजना बना रही है। राडुलेस्कु का मानना है कि मॉड्युलर प्रणालियां ही भविष्य हैं और जल्द ही बड़े एआई बुनियादी ढांचे के लिए यह एक मानक बन जाएंगी। इस तकनीक के दम पर ग्राहक शुरुआत से ही फैक्ट्री में बने पॉड्स के आधार पर डेटा सेंटर की योजना बना सकते हैं और कई साल इंतजार करने के बजाय कुछ महीनों में ही परिचालन शुरू कर सकते हैं। इसका आप पर असर मॉड्युलर डेटा सेंटरों के तेजी से बनने से एआई सेवाओं के विकास की रफ्तार बढ़ेगी और पानी की बर्बादी रुकेगी। • कम्प्यूटिंग लागत और उपलब्धता: एआई कंपनियों को सर्वर क्षमता के लिए वर्षों इंतजार करने के बजाय महीनों में इंफ्रास्ट्रक्चर मिल सकेगा। इससे नई एआई सेवाओं की लॉन्चिंग तेज होगी और परिचालन लागत में कमी आ सकती है। • पर्यावरण और जल संरक्षण: इन पॉड्स में एयर-कूल्ड रेडिएटर वाला क्लोज्ड-लूप लिक्विड कूलिंग सिस्टम होने से बाहरी पानी की जरूरत नहीं पड़ती। इससे डेटा सेंटरों वाले इलाकों में भूजल या स्थानीय जलस्रोतों पर दबाव नहीं पड़ेगा। • बिजली ग्रिड और साइट चयन: छोटे आकार के कारण इन्हें बड़े हाइपरस्केल कैंपस के मुकाबले कम जगह पर लगाया जा सकता है। इससे स्थानीय बिजली ग्रिड पर अचानक अत्यधिक भार पड़ने का जोखिम नियंत्रित रहता है। • क्लाउड ग्राहकों के लिए विकल्प: कंपनियां अपने खुद के जीपीयू चिप लगाकर मासिक संचालन शुल्क पर यह इंफ्रास्ट्रक्चर ले सकती हैं। इससे स्टार्टअप्स को अपने हार्डवेयर पर पूरा नियंत्रण बनाए रखने की सुविधा मिलती है। ऐसा क्यों हुआ एआई मॉडल के तेजी से बढ़ते उपयोग के कारण डेटा सेंटर क्षमता की मांग में भारी उछाल आया है, जबकि पारंपरिक निर्माण विधियां बेहद धीमी साबित हो रही हैं। रनवेयर ने इस खाई को पाटने के लिए ऑटोमोबाइल असेंबली लाइन के मॉडल को अपनाया है ताकि निर्माण के समय को वर्षों से घटाकर दिनों में बदला जा सके। • पारंपरिक निर्माण में देरी: पारंपरिक बड़े डेटा सेंटरों को जमीन से तैयार करने में कई साल लग जाते हैं, जिससे तकनीकी कंपनियों को कम्प्यूटिंग क्षमता के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। रनवेयर का मॉड्युलर प्रीफैब्रिकेटेड डिजाइन इकाइयों को पहले से तैयार रखकर इस प्रक्रिया को काफी तेज कर देता है। • चिप डिलीवरी का अंतराल: वर्तमान में उन्नत जीपीयू चिप्स की डिलीवरी मिलने में लंबा समय लग रहा है। रनवेयर का पॉड निर्माण समय इस प्रतीक्षा अवधि से भी कम है, जिससे चिप आने से पहले ही बुनियादी ढांचा पूरी तरह तैयार हो जाता है। • औद्योगिक मैन्युफैक्चरिंग अनुभव: उत्पादन की गुणवत्ता और लागत को नियंत्रित रखने के लिए कंपनी ने ऑटोमोटिव क्षेत्र के अनुभवी प्लांट मैनेजर की मदद ली है। इसका उद्देश्य असेंबली लाइन के जरिए प्रति पॉड निर्माण समय को तीन हफ्ते से घटाकर सिर्फ एक दिन करना है। सवाल-जवाब 1. रनवेयर कंपनी किस उत्पाद का उत्पादन बढ़ा रही है? कंपनी सोनिक इन्फेरेंस पॉड नामक मॉड्युलर डेटा सेंटरों का उत्पादन बढ़ा रही है, जिन्हें फैक्ट्री में तैयार करके सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है। 2. रनवेयर का 2028 तक उत्पादन का क्या लक्ष्य है? कंपनी का लक्ष्य 2028 तक प्रतिदिन 30 मेगावाट क्षमता का उत्पादन करना है, जो हर महीने लगभग 1 गीगावाट के बराबर होता है। 3. एक पॉड को साइट पर चालू करने में कितना समय लगता है? पॉड के साइट पर पहुंचने के बाद उसे 48 घंटे के भीतर इंस्टॉल और चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। 4. क्या इन डेटा सेंटरों को ठंडा करने के लिए पानी के कनेक्शन की जरूरत होती है? नहीं, इनमें एयर-कूल्ड रेडिएटर के साथ क्लोज्ड-लूप लिक्विड कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल होता है, इसलिए पानी के कनेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती। 5. रनवेयर ने अब तक कुल कितनी फंडिंग जुटाई है? कंपनी अब तक 60 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटा चुकी है, जिसमें पिछले दिसंबर में मिला 50 मिलियन डॉलर का सीरीज ए फंड शामिल है। 6. सोनिक पॉड्स को लेकर कंपनी को अब तक कितनी रुचि मिली है? कंपनी को बाहरी ग्राहकों की ओर से 1 अरब डॉलर के प्रतिबद्ध ऑर्डरों की दिलचस्पी मिली है, जो 20 मेगावाट से अधिक क्षमता के बराबर है। https://trendkia.com/ai/kara-ki-taraha-asenbali-laina-para-ai-deta-sentara-banane-ki-taiyari-men-runware-53475 TrendKia — Har trend, sabse pehle.