# प्रमुख अमेरिकी प्रकाशकों द्वारा बिना बताए कृत्रिम मेधा का बढ़ता इस्तेमाल, कर्मचारियों और एजेंटों में उपजा गहरा असंतोष

> हार्परकॉलिन्स, साइमन एंड शूस्टर और हैशेट जैसे बड़े प्रकाशन गृहों में किताबों के विपणन, ईमेल और अस्वीकृति पत्रों के लिए एआई टूल्स का उपयोग बढ़ने से संपादकीय कर्मियों में भारी बेचैनी है।

**Type:** article · **Category:** एआई · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/ai/major-us-book-publishers-face-backlash-after-quietly-rolling-out-ai-tools-across-editorial-workflows-45680 · **Language:** Hindi
**Tags:** पुस्तक प्रकाशन, कृत्रिम मेधा, हार्परकॉलिन्स, साइमन एंड शूस्टर, हैशेट, चैटजीपीटी, कॉपीराइट सुरक्षा, साहित्यिक जगत

अंतरराष्ट्रीय पुस्तक प्रकाशन उद्योग में कृत्रिम मेधा यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रवेश अब पर्दे के पीछे से निकलकर खुले विवाद का रूप लेता जा रहा है। अमेरिका के बिग फाइव प्रकाशक समूह में शामिल तीन दिग्गज संस्थान हार्परकॉलिन्स, साइमन एंड शूस्टर और हैशेट अपने दैनिक कामकाज में बड़े भाषाई मॉडलों को व्यापक तौर पर शामिल कर रहे हैं। यह पूरी प्रक्रिया पाठकों, लेखकों और साहित्य जगत के अन्य हितधारकों से आधिकारिक तौर पर छिपाकर संचालित की जा रही है, जिससे संस्थानों के भीतर काम करने वाले कर्मियों में आक्रोश पनप रहा है। संपादकीय और प्रचार विभागों से जुड़े दो दर्जन से अधिक कर्मचारियों ने अपनी नौकरियों पर खतरे के डर से नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि शीर्ष प्रबंधन के निर्देशों पर चैटजीपीटी और क्लॉड जैसे सिस्टमों का उपयोग सामान्य हो चुका है।

## प्रचार सामग्री से लेकर कवर डिजाइन तक एआई का बढ़ता दायरा
प्रकाशन गृहों के भीतर इन आधुनिक स्वचालित तकनीकों का इस्तेमाल अब केवल तकनीकी कार्यों तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर सीधे तौर पर उन रचनात्मक व व्यावसायिक जिम्मेदारियों पर पड़ रहा है जो दशकों से मानवीय कौशल का हिस्सा रही हैं। पुस्तक विक्रेता संगठनों, समीक्षकों और पत्रकारों को भेजे जाने वाले पिचों को तैयार करने के लिए बड़े भाषाई मॉडलों का सहारा लिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त ऑनलाइन शॉपिंग मंचों जैसे अमेज़न और गुडरीड्स पर दिखने वाले पुस्तक विवरण, कवर के पीछे छपने वाले सारांश और डिजिटल विज्ञापन अभियानों के लिए प्रचार सामग्री भी मशीनों से तैयार करवाई जा रही है। कुछ सहयोगी विदेशी इकाइयों के डिजाइनों और कवर आर्ट में भी सीधे तौर पर सॉफ्टवेयर जनित कलाकृतियों की मौजूदगी दर्ज की गई है।

प्रचार विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार का मशीनी दृष्टिकोण पाठकों और पुस्तक प्रेमियों के साथ विश्वासघात के समान है। एक प्रचारक के अनुसार मीडिया सहयोगियों के साथ संवाद हमेशा सद्भावना और मानवीय जुड़ाव पर आधारित होना चाहिए, जबकि मशीनी भाषा बहुत जल्द अपनी बनावट जाहिर कर देती है। वहीं हब सिटी प्रेस जैसी स्वतंत्र प्रकाशन संस्था की प्रकाशक मेग रीड का कहना है कि यह बदलाव कॉरपोरेट प्रकाशकों की लागत घटाने की होड़ का नतीजा है। जहां बड़े संस्थान कार्यकुशलता बढ़ाने के नाम पर स्वचालन अपना रहे हैं, वहीं स्वतंत्र प्रकाशक मानवीय दृष्टिकोण और लेखकों के साथ स्वाभाविक संवाद को प्राथमिकता दे रहे हैं।

## साहित्यिक एजेंटों को भेजे जाने वाले अस्वीकृति पत्रों पर संदेह
पुस्तकों की पांडुलिपियों के मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया में भी बड़े भाषाई मॉडलों की पैठ गहरी हो चुकी है। चालू वर्ष की शुरुआत में कई साहित्यिक एजेंटों ने पाया कि विभिन्न रचनाओं के लिए बिग फाइव प्रकाशकों के संपादकों से मिलने वाले अस्वीकृति ईमेलों में एक जैसी बनावट और खास भाषाई ढांचे नजर आ रहे हैं। इनमें विरोधाभासी जुमले और तीन बिंदुओं में बात रखने की जानी-पहचानी शैली शामिल थी। अंदरूनी कर्मियों ने भी पुष्टि की है कि कई संपादक समय बचाने के उद्देश्य से एजेंटों को जवाब देने के लिए स्वचालित सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं।

इस विषय पर औपचारिक रुख स्पष्ट करते हुए हैशेट के एक प्रतिनिधि ने कहा कि कंपनी परिचालन संबंधी कार्यों में तकनीकी औजारों के इस्तेमाल का समर्थन करती है ताकि पुस्तकें अधिक पाठकों तक पहुंच सकें, लेकिन रचनाकारों व साझेदारों के साथ संवाद में रचनात्मक एआई के उपयोग का समर्थन नहीं करती। साइमन एंड शूस्टर की वैश्विक मुख्य विपणन एवं संचार अधिकारी विबके ग्रुटजेन ने स्पष्ट किया कि उद्यम स्तर के कुछ अनुमोदित टूल्स कर्मचारियों के लिए उपलब्ध अवश्य हैं, पर उनका उपयोग अनिवार्य नहीं बनाया गया है। उन्होंने रेखांकित किया कि कंपनी का उद्देश्य कर्मियों को लेखकों के साथ रचनात्मक कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर देना है। हार्परकॉलिन्स ने इस मामले पर पूछे गए सवालों का कोई उत्तर नहीं दिया।

## पांडुलिपियों की गोपनीयता और कॉपीराइट उल्लंघन का बड़ा खतरा
एजेंटों और लेखकों के बीच सबसे बड़ी चिंता अनधिकृत पांडुलिपियों के इन सार्वजनिक मॉडलों में फीड किए जाने को लेकर है। जब कोई संपादक अप्रकाशित पुस्तक के किसी हिस्से या पूरे ड्राफ्ट को खुले भाषाई मॉडल में पेस्ट करता है, तो वह डेटा टेक कंपनियों के सर्वरों तक पहुंच सकता है। इस जोखिम से निपटने के लिए साहित्यिक एजेंटों ने अब अनुबंधों में नई सुरक्षा शर्तें जोड़ना शुरू कर दिया है, जो स्पष्ट रूप से रचना को किसी भी बाहरी स्वचालित मॉडल में डालने पर पाबंदी लगाती हैं।

सामान्य रूप से इंटरनेट पर उपलब्ध गूगल जेमिनी या चैटजीपीटी जैसे मॉडल खुले नेटवर्क पर काम करते हैं, जबकि पूरी तरह सुरक्षित माने जाने वाले क्लोज्ड-लूप मॉडल स्थानीय स्तर पर बिना इंटरनेट डेटा साझा किए संचालित होते हैं। हार्परकॉलिन्स के कानूनी विभाग ने संपादकों को चेतावनी दी है कि वे पूरी पांडुलिपियों को ओपन-लूप सॉफ्टवेयर में बिल्कुल न डालें, हालांकि इस संबंध में स्पष्ट और पारदर्शी दिशा-निर्देशों का अभी भी अभाव है। इसके साथ ही उद्योग में उन प्रतिष्ठित लेखकों की पुस्तकें रद्द होने की घटनाएं भी सामने आई हैं जिन्होंने अपनी रचनाओं के निर्माण में अनुचित रूप से सॉफ्टवेयर का सहारा लिया था।

## कर्मचारियों की छंटनी और बढ़ता काम का बोझ बना वजह
प्रकाशन उद्योग के निचले और मध्य स्तर के कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी मर्जी से इन तकनीकों की ओर नहीं जा रहे, बल्कि प्रबंधन द्वारा थोपी गई परिस्थितियों के कारण विवश हैं। बिग फाइव कंपनियों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की गई है, जिससे बची हुई छोटी टीमों पर पहले से दो से तीन गुना अधिक पुस्तकों का संपादन और प्रबंधन करने का भारी दबाव आ गया है। वर्ष 2023 के आंकड़ों के मुताबिक न्यूयॉर्क शहर में बिग फाइव और स्कोलास्टिक के शुरुआती स्तर के कर्मचारियों का औसत वार्षिक वेतन 47,583 डॉलर था।

कम वेतन और अत्यधिक कार्यभार के बीच कर्मचारियों को जैस्पर और क्लॉड जैसे सॉफ्टवेयर थमाकर उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। हार्परकॉलिन्स में वरिष्ठ नेतृत्व ने एंथ्रोपिक से लाइसेंस खरीदे और फिर कर्मचारियों को बैठकों में नवाचार तलाशने का जिम्मा सौंपा। जब कर्मियों ने इन टूल्स के कानूनी, नैतिक और पर्यावरणीय दुष्प्रभावों पर सवाल उठाए, तो प्रबंधन ने इसे व्यापार की मजबूरी करार दिया। कंपनी के आंतरिक पोर्टल पर यह तर्क भी जोड़ा गया कि व्यक्तिगत कार्बन फुटप्रिंट की तुलना में इसका पर्यावरणीय असर काफी सीमित है।

## कार्यस्थल निगरानी सॉफ्टवेयर पर साइमन एंड शूस्टर में तीखा विरोध
साइमन एंड शूस्टर में स्थिति उस वक्त और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब यह जानकारी सामने आई कि कंपनी स्कैन एआई नामक सॉफ्टवेयर के परीक्षण पर विचार कर रही है। यह कदम निवेश फर्म केकेआर के दबाव में उठाया जा रहा था, जिसने 2023 में साइमन एंड शूस्टर का अधिग्रहण किया था। स्कैन एआई का मुख्य कार्य कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखकर यह पहचानना है कि किन प्रक्रियाओं को स्वचालित करके लागत घटाई जा सकती है।

इस कदम से आशंकित होकर कर्मचारियों ने अपने मुख्य कार्यकारी अधिकारी ग्रेग ग्रीली को एक खुला पत्र भेजकर कड़ा विरोध दर्ज कराया और कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के निगरानी सॉफ्टवेयर को शामिल न करने की मांग की। विरोध तेज होने पर 6 अक्टूबर को ग्रीली ने एक आंतरिक ज्ञापन जारी कर स्पष्ट किया कि ब्लूप्रिंट उत्पाद के प्रारंभिक परीक्षण पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि बाद में पेंगराम जैसे सॉफ्टवेयर विश्लेषण से यह संकेत भी मिले कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी के ज्ञापन का कुछ हिस्सा स्वचालित टूल्स की मदद से लिखा गया था।

## अनुवाद और भविष्य की कार्यप्रणाली को लेकर अनसुलझे सवाल
प्रकाशन क्षेत्र में भाषा अनुवाद को लेकर भी कृत्रिम मेधा का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। फ्रैंकफर्ट और लंदन पुस्तक मेलों में ऐसी कई अनुवादित पांडुलिपियां पेश की गई हैं जिनमें स्वचालित तकनीक के इस्तेमाल की घोषणाएं शामिल थीं। यूरोपा एडिशन्स के कार्यकारी प्रकाशक माइकल रेनॉल्ड्स ने भी अनुवाद में इस नई तकनीक की संभावनाओं पर उत्साह व्यक्त किया था, जो पहले से ही किताबों के कवर पर अनुवादकों के नाम न देने के कारण चर्चा में रहे हैं।

साहित्यिक शोधकर्ताओं और विश्लेषकों का मानना है कि प्रकाशन क्षेत्र का उच्च प्रबंधन अन्य पारंपरिक कॉरपोरेट कंपनियों की तरह केवल लाभ को अधिकतम करने की रणनीति पर काम कर रहा है। लेखकों, संपादकों और एजेंटों की स्पष्ट मांग है कि जब तक इन टूल्स पर कोई वैधानिक प्रतिबंध या कड़े नियम नहीं बनते, तब तक प्रकाशकों को इसके उपयोग के हर पहलू पर सार्वजनिक पारदर्शिता और जवाबदेही तय करनी चाहिए।

## इसका आप पर असर
पुस्तक प्रकाशन क्षेत्र में कृत्रिम मेधा के गुपचुप इस्तेमाल से लेखकों के कॉपीराइट, अनुवादकों की आजीविका और पाठकों को मिलने वाली साहित्यिक गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ सकता है।

- **किताबों की गुणवत्ता पर असर:** प्रकाशन गृहों द्वारा प्रचार सामग्री और संपादन में मशीनी टूल्स का इस्तेमाल बढ़ने से पुस्तकों के सार और प्रस्तुति में एकरूपता आ सकती है। पाठकों को किताबों के चयन के दौरान स्वाभाविक मानवीय समीक्षा के बजाय स्वचालित प्रचार सामग्री का सामना करना पड़ सकता है।
- **लेखकों के कॉपीराइट की सुरक्षा:** पांडुलिपियों को बिना अनुमति भाषाई मॉडलों में डाले जाने से अप्रकाशित रचनात्मक सामग्री के लीक होने का खतरा बढ़ गया है। नए और स्थापित लेखकों को अब अपने प्रकाशक अनुबंधों में डेटा गोपनीयता से जुड़ी शर्तें अनिवार्य रूप से जोड़ने की जरूरत होगी।
- **रचनात्मक नौकरियों पर संकट:** संपादन, प्रचार और विदेशी भाषा अनुवाद से जुड़े पेशेवरों के काम में कटौती का खतरा गहरा रहा है। स्वतंत्र प्रकाशक जहां मानवीय शिल्प को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं कॉरपोरेट कंपनियों में कर्मचारियों पर लागत घटाने के नाम पर मशीनों को अपनाने का दबाव बढ़ रहा है।
- **पारदर्शिता की नई मांग:** पाठकों और रचनाकारों के बीच यह मांग जोर पकड़ रही है कि किताबों के निर्माण में एआई के उपयोग का स्पष्ट खुलासा किया जाए। भविष्य में पुस्तकों के कवर और विवरणों पर कानूनी तौर पर ऐसी घोषणाएं देखना अनिवार्य हो सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
कॉरपोरेट प्रकाशकों द्वारा बड़े पैमाने पर लागत घटाने, कर्मचारियों की छंटनी के बाद बढ़े कार्यभार को संभालने और निजी इक्विटी फर्मों द्वारा लाभ मार्जिन बढ़ाने के दबाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

- **कॉरपोरेट छंटनी और कार्यभार:** प्रकाशक समूहों में संपादकीय टीमों का आकार घटाकर बहुत छोटा कर दिया गया है, जिससे सीमित कर्मचारियों पर दो से तीन गुना किताबें संभालने का दबाव है। कम वेतन और भारी काम के बोझ के चलते कर्मचारी समय बचाने के लिए स्वचालित टूल्स का सहारा लेने को मजबूर हैं।
- **निजी इक्विटी का वित्तीय दबाव:** साइमन एंड शूस्टर जैसी कंपनियों का केकेआर जैसी निवेश फर्मों द्वारा अधिग्रहण किए जाने के बाद मुनाफा बढ़ाने और परिचालन लागत घटाने के लिए स्वचालन पर जोर दिया जा रहा है। इसी रणनीति के तहत कर्मचारियों की निगरानी और प्रक्रियाओं की पहचान के लिए स्कैन एआई जैसे सिस्टम लाए गए।
- **स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव:** शीर्ष नेतृत्व ने नई तकनीकों के लाइसेंस तो खरीद लिए, लेकिन उनके नैतिक और व्यावहारिक इस्तेमाल के कोई पारदर्शी नियम तय नहीं किए। स्पष्ट नीतियों के अभाव में विभागों ने बिना लेखकों और एजेंटों की सहमति के स्वतंत्र रूप से प्रयोग शुरू कर दिए।

## सवाल-जवाब

### 1. किन प्रमुख पुस्तक प्रकाशकों पर बिना बताए एआई इस्तेमाल करने के आरोप हैं?
अमेरिका के बिग फाइव प्रकाशकों में शामिल हार्परकॉलिन्स, साइमन एंड शूस्टर और हैशेट पर बिना सार्वजनिक खुलासे के एआई टूल्स का उपयोग करने के आरोप हैं।

### 2. प्रकाशन गृह किन कार्यों के लिए आधुनिक भाषाई मॉडलों का सहारा ले रहे हैं?
प्रकाशक मुख्य रूप से किताबों के प्रचार विवरण, बैक-कवर सारांश, विज्ञापन सामग्री, साहित्यिक एजेंटों को ईमेल और अस्वीकृति पत्र लिखने में इन टूल्स का उपयोग कर रहे हैं।

### 3. साहित्यिक एजेंटों को पांडुलिपियों की सुरक्षा को लेकर क्या डर है?
एजेंटों को आशंका है कि संपादक अप्रकाशित पांडुलिपियों को ओपन-लूप एआई मॉडलों में पेस्ट कर सकते हैं, जिससे लेखकों की मौलिक सामग्री क्लाउड सर्वर पर लीक हो सकती है।

### 4. साइमन एंड शूस्टर के कर्मचारियों ने सीईओ को खुला पत्र क्यों लिखा?
कर्मचारियों ने स्कैन एआई नामक निगरानी और स्वचालन सॉफ्टवेयर के संभावित परीक्षण का कड़ा विरोध करते हुए सीईओ ग्रेग ग्रीली को पत्र लिखा था।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._