मानव व्यवहार को समझने के लिए नया वर्ल्ड मॉडल तैयार कर रहा मिरर पार्टिकल सैन फ्रांसिस्को का स्टार्टअप मिरर पार्टिकल पारंपरिक भाषा मॉडलों की सीमाओं को चुनौती देते हुए इंसानी व्यवहार का पूर्वानुमान लगाने वाला नया फाउंडेशन मॉडल बना रहा है। इंसानों के व्यवहार और उनकी प्राथमिकताओं का पहले से सटीक अनुमान लगाने का दावा करने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप्स के बीच इन दिनों जबर्दस्त मुकाबला देखने को मिल रहा है। बाजार में कई नए खिलाड़ी भारी भरकम फंड जुटाकर इंसानी सोच को डिजिटली रीक्रिएट करने की कोशिश में जुटे हैं। पिछले एक साल के दौरान इस क्षेत्र में भारी पूंजी निवेश हुआ है। सिमिली ने 2 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर 200 मिलियन डॉलर जुटाए, जबकि आरू ने 1 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर 88 मिलियन डॉलर जुटाने में कामयाबी हासिल की। इसके अलावा ह्यूमन्स एंड नामक एआई स्टार्टअप ने जनवरी में 4.48 अरब डॉलर के विशाल वैल्यूएशन पर 480 मिलियन डॉलर का सीड राउंड हासिल किया और इंसानी व्यवहार को मॉडल करने के लिए परसिमोन पेश किया। इस समूची दौड़ के बीच सैन फ्रांसिस्को स्थित दो साल पुराना स्टार्टअप मिरर पार्टिकल पूरी प्रक्रिया को एकदम अलग नजरिए से देख रहा है। उसका मानना है कि मौजूदा तरीका बुनियादी रूप से ही सही नहीं है। पारंपरिक भाषा मॉडलों पर निर्भरता में क्या खामी है आजकल इंसानी व्यवहार का अनुमान लगाने का सबसे आम तरीका बड़े भाषा मॉडल्स यानी एलएलएम पर टिका है। इन मॉडल्स को अलग-अलग डेमोग्राफिक समूहों के हिसाब से रोल-प्ले करने के लिए प्रॉम्प्ट या फाइन-ट्यून किया जाता है। मिरर पार्टिकल की को-फाउंडर और सीईओ अभिव्यक्ति आहूजा का मानना है कि यह नजरिया नायग्रा जलप्रपात के सामने बच्चों की पानी वाली पिचकारी लेकर जाने जैसा है। उनका कहना है कि एलएलएम को सैकड़ों अरब डेटा बिंदुओं पर प्रशिक्षित किया गया होता है, ऐसे में बहुत थोड़े से डेटा से फाइन-ट्यूनिंग करके उनके व्यवहार पर कितना असर डाला जा सकता है। उनका स्पष्ट मानना है कि यह तकनीक अभी भी पुरानी सोच और पुराने ढर्रे में फंसी हुई है। अभिव्यक्ति आहूजा के अनुसार भाषा मॉडल उस तरह दुनिया को नहीं देख पाते जिस तरह एक जीता-जागता इंसान देखता है। एलएलएम केवल लिखित भाषा का ढांचा तैयार करते हैं, जबकि मनुष्य की पूरी बनावट दृश्य धारणा, स्थानिक समझ और सामाजिक समझदारी से मिलकर बनती है। उनका मानना है कि सिर्फ भाषा मॉडल्स पर निर्भर रहने का मतलब है उन बातों के आधार पर निष्कर्ष निकालना जिन पर इंसान खुद ध्यान ही नहीं देते। जब लक्ष्य इंसानी व्यवहार का सटीक पूर्वानुमान लगाना हो, तो यह तरीका असल मुद्दे से पूरी तरह भटक जाता है। इंसानी बदलावों को भांपने वाला नया वर्ल्ड मॉडल मिरर पार्टिकल ने इसके विपरीत एक नया रास्ता चुना है। स्टार्टअप एक ऐसा फाउंडेशन मॉडल या वर्ल्ड मॉडल तैयार कर रहा है जो शून्य से विकसित किया गया है। यह मॉडल इस बात का डिजिटल सिमुलेशन तैयार करता है कि इंसान कोई कदम क्यों उठाते हैं और समय के साथ उनका आचरण किस तरह बदलता है। कंपनी किसी स्थिर या जड़ इंसान की छवि को नहीं, बल्कि लगातार बदलते इंसान के तौर-तरीकों को दर्ज करना चाहती है। इस प्रक्रिया के तहत लंबी अवधि का ऐसा डेटा जुटाया जाता है जिससे पता चले कि लोग कैसे बदल रहे हैं, कौन से ट्रिगर्स उन्हें प्रभावित कर रहे हैं और यह बदलाव किस गहराई तक हो रहा है। यदि किसी व्यक्ति या समूह के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आ रहा है, तो स्टार्टअप उसे भी एक अहम संकेत मानता है। इस प्रणाली में ग्राहकों के आंतरिक डेटा के साथ-साथ ताजातरीन समसामयिक घटनाएं, पॉप संस्कृति और सोशल मीडिया का विस्तृत डेटा मिलाया जाता है। इससे किसी खास डेमोग्राफिक वर्ग को एक गतिशील व्यवस्था के रूप में देखा जाता है। कंपनी का सबसे बड़ा जोर लोगों के वास्तविक व्यवहार पर है, यानी वे असल जिंदगी में क्या करते हैं, न कि उन बातों पर जो वे केवल सर्वेक्षणों में दर्ज कराते हैं। बाजार अनुसंधान और ब्रांड रणनीतियों में शुरुआती इस्तेमाल व्यावसायिक दुनिया में कदम रखने के लिए मिरर पार्टिकल ने उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है जहां इस तरह के विश्लेषण के लिए बजट पहले से मौजूद हैं। इनमें मुख्य रूप से मार्केट रिसर्च, ब्रांड स्ट्रैटेजी और प्रोडक्ट प्लानिंग शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर, यह तकनीक किसी सौंदर्य प्रसाधन ब्रांड को सिर्फ जेन जी पीढ़ी के लिए बेहतर विज्ञापन कॉपी लिखने में ही मदद नहीं करती, बल्कि यह भी तय करती है कि उस वर्ग को वास्तव में वह उत्पाद चाहिए भी या नहीं। यदि लक्षित खरीदार आईशैडो पैलेट चाहते ही नहीं हैं, तो उस बाजार में ब्लश बेचना ज्यादा समझदारी भरा फैसला साबित हो सकता है। मिरर पार्टिकल का यह इंजन ब्रांड्स को केवल भविष्य के कदमों का अनुमान ही नहीं देता, बल्कि उन निर्णयों के पीछे की असली वजह भी बताता है। इसमें खरीदारों की प्रेरणाएं, उनकी सीमाएं और वह पूरा संदर्भ शामिल होता है जो किसी सिफारिश को ठोस आधार देता है। एक शुरुआती परीक्षण में पालतू जानवरों का खाना बनाने वाले एक प्रसिद्ध ब्रांड ने पूछा कि बिक्री बढ़ाने के लिए पैकेजिंग पर चिकन, बीफ या सब्जियों में से किसका चित्र लगाना चाहिए। मिरर की तकनीक ने खुलासा किया कि ब्रांड गलत सवाल पूछ रहा था। पैकेजिंग पर मौजूद तस्वीर से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था, क्योंकि ब्रांड की पहचान बहुत आम और सस्ती बन चुकी थी। जब तक वह अपनी इस सस्ती धारणा की समस्या को ठीक नहीं करता, तब तक उसकी बिक्री में ठहराव बना रहने वाला था। फाउंडर्स का सफर और भविष्य की योजनाएं अभिव्यक्ति आहूजा अपने मॉडल के विकास की तुलना एक बच्चे के दुनिया को समझने के सफर से करती हैं। जैसे एक बच्चा पहले देखने की क्षमता हासिल करता है, फिर भाषा सीखता है, अपने शरीर को समझता है और अंत में सामाजिक समझ हासिल करता है, ठीक उसी तरह यह तकनीक भी आगे बढ़ रही है। इंसानी दिमाग को मॉडल करने में आहूजा की गहरी रुचि न्यूरोसाइंस और कंप्यूटर साइंस की उनकी पढ़ाई से आई है। मूल रूप से भारत की रहने वाली आहूजा ने यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो में शिक्षा हासिल की, जहां वे न्यूरल नेटवर्क के दिग्गज जेफ्री हिंटन के शोध कार्यों से काफी प्रभावित हुईं। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद आहूजा ने अमेज़न रोबोटिक्स में काम किया, जहां वे अन्य रोबोट बनाने वाले रोबोट्स के निर्माण से जुड़ी थीं। वहीं उनकी मुलाकात अपने सह-संस्थापकों विल सॉन्ग और थॉमसन येन से हुई। सॉन्ग ने अपने करियर का बड़ा हिस्सा बिक्री को निजीकृत करने वाले इंजन बनाने में बिताया है, जबकि येन ने डीप लर्निंग के जरिए यह समझने पर काम किया है कि एआई एजेंट्स इंसानी आचरण को कैसे समझते हैं। स्टार्टअप का दीर्घकालिक सपना इंसानी व्यवहार का पूर्वानुमान लगाने वाली एक सामान्य परत बनना है, ताकि आने वाले समय में पूरी आबादी के स्तर से आगे बढ़कर व्यक्तिगत स्तर पर सटीक जानकारियां दी जा सकें। इसका आप पर असर उपभोक्ता व्यवहार को सीधे समझने वाली नई एआई तकनीक आने वाले दिनों में उत्पादों के डिजाइन और विज्ञापनों के स्वरूप को पूरी तरह बदल सकती है। • खरीदारी के विकल्पों पर: ब्रांड्स अब यह बेहतर समझ सकेंगे कि आम ग्राहक असल में क्या खरीदना चाहते हैं। इससे बाजारों में गैर-जरूरी उत्पादों के बजाय ज्यादा प्रासंगिक और काम के उत्पाद देखने को मिलेंगे। • विज्ञापनों की प्रासंगिकता पर: कंपनियों का ध्यान केवल आकर्षक नारों से हटकर ग्राहकों की असली प्राथमिकताओं पर जाएगा। इसका मतलब है कि खरीदारों को अपनी पसंद और जरूरतों के ज्यादा सटीक विज्ञापन देखने को मिलेंगे। • मार्केट रिसर्च के क्षेत्र में: पारंपरिक सर्वे और सवालों पर आधारित शोध के तरीके धीरे-धीरे पीछे छूट सकते हैं। शोध से जुड़ी कंपनियों और प्रोफेशनल्स को अब वास्तविक व्यवहार संबंधी डेटा टूल्स अपनाने होंगे। • उत्पाद की कीमतों और गुणवत्ता पर: कंपनियां पैकेजिंग और दिखावे के बजाय ब्रांड की साख और गुणवत्ता सुधारने पर बजट खर्च करेंगी। इससे ग्राहकों को बेहतर मूल्य और पारदर्शी उत्पाद मिलने की संभावना बढ़ेगी। ऐसा क्यों हुआ पारंपरिक लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स इंसानी व्यवहार का अनुमान लगाने में लगातार सीमाओं का सामना कर रहे हैं, जिससे नई तकनीकों की जरूरत महसूस हुई। टेक्स्ट-आधारित मॉडल्स वास्तविक इंसानी अनुभव और सामाजिक समझ को पूरी तरह पकड़ने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। • भाषा मॉडल्स की सीमित समझ: मौजूदा एलएलएम केवल लिखित भाषा के पैटर्न सीखते हैं, जबकि इंसानी फैसले दृश्य और सामाजिक समझ पर आधारित होते हैं। इस अंतर के कारण पारंपरिक मॉडल्स इंसानी फैसलों के वास्तविक कारणों को नहीं समझ पाते। • अत्यधिक सामान्य डेटा प्रशिक्षण: भाषा मॉडल्स सैकड़ों अरब पुराने डेटा बिंदुओं पर तैयार होते हैं, जिन्हें थोड़े से नए डेटा से बदलना लगभग असंभव होता है। परिणामस्वरूप वे बदलते हुए इंसानी व्यवहार को समय पर नहीं भांप पाते। • सर्वेक्षणों की भ्रामक प्रकृति: लोग अक्सर सर्वे फॉर्म में जो कहते हैं, उनका वास्तविक व्यवहार उससे बिल्कुल अलग होता है। इसी अंतर को पाटने के लिए प्रत्यक्ष व्यवहार संबंधी डेटा पर चलने वाले नए वर्ल्ड मॉडल बनाए जा रहे हैं। सवाल-जवाब 1. मिरर पार्टिकल क्या काम करता है? यह स्टार्टअप एक ऐसा वर्ल्ड मॉडल विकसित कर रहा है जो इंसानी व्यवहार और उसके पीछे की वजहों का सटीक पूर्वानुमान लगाता है। 2. कंपनी के अनुसार एलएलएम इंसानी व्यवहार समझने में क्यों असफल हैं? एलएलएम केवल लिखित भाषा पर प्रशिक्षित होते हैं, जबकि इंसानों के फैसले सामाजिक और दृश्य समझ पर आधारित होते हैं। 3. मिरर पार्टिकल की शुरुआत किसने की है? इसकी सह-संस्थापक और सीईओ अभिव्यक्ति आहूजा हैं, जिनके साथ विल सॉन्ग और थॉमसन येन इसके अन्य सह-संस्थापक हैं। 4. इस तकनीक का शुरुआती इस्तेमाल किन क्षेत्रों में हो रहा है? शुरुआती दौर में इसका उपयोग मार्केट रिसर्च, ब्रांड स्ट्रैटेजी और उत्पाद विकास जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है। https://trendkia.com/ai/manava-vyavahara-ko-samajhane-ke-lie-naya-varlda-modala-taiyara-kara-raha-mirror-particle-44181 TrendKia — Har trend, sabse pehle.