मेटा के एआई प्रोजेक्ट के लिए लोगो बनाना पड़ा भारी, ट्रोलिंग के बाद डिज़ाइनर जेसिका हिश ने बयां किया दर्द मेटा के नए एआई असिस्टेंट म्यूज का लोगो तैयार करने के बाद लेटरिंग आर्टिस्ट जेसिका हिश को ऑनलाइन आलोचना और तीखे हमलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपनी वित्तीय स्थिति और डिज़ाइन प्रक्रिया को साझा करते हुए बताया कि प्रोजेक्ट में एआई का कतई इस्तेमाल नहीं हुआ था। सैन फ्रांसिस्को बे एरिया की जानी-मानी लेटरिंग आर्टिस्ट और टाइप डिज़ाइनर जेसिका हिश ने जब मेटा के नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस असिस्टेंट 'म्यूज' के 'M' लोगो को नया रूप देने का काम हाथ में लिया था, तब उन्हें अंदाजा था कि इस फैसले से कुछ लोग नाराज हो सकते हैं। मेटा और एआई दोनों ही मौजूदा दौर में रचनात्मक दुनिया के भीतर बेहद संवेदनशील विषय बने हुए हैं। इसके बावजूद अपने स्वतंत्र कारोबार को चलाने और ऑकलैंड में मौजूद दो दुकानों के खर्च उठाने के लिए उन्होंने इस काम को स्वीकार किया। जब उन्होंने पिछले महीने अपने न्यूज़लेटर के जरिए इस नए काम की घोषणा की, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म थ्रेड्स पर साथी कलाकारों और डिजाइनरों का गुस्सा फूट पड़ा। कई लोगों ने उन पर लालच में आकर अपने नैतिक सिद्धांतों से समझौता करने का आरोप लगाया, जिसके बाद शुरू हुई ट्रोलिंग ने एक गंभीर विवाद का रूप ले लिया। मेटा का नया एआई असिस्टेंट म्यूज और प्रोजेक्ट की शुरुआत मेटा ने हाल ही में एआई एजेंट और पर्सनल असिस्टेंट की दुनिया में कदम रखते हुए म्यूज नाम की नई तकनीक पेश की है। इसी उत्पाद के लिए कंपनी को एक आकर्षक आइकन और लोगोटाइप की जरूरत थी। जेसिका हिश ने अपने न्यूज़लेटर में लिखा था कि उन्होंने म्यूज के लिए मेटा के साथ मिलकर आइकन और लोगोटाइप पर काम किया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि लोगों के मन में मेटा और एआई दोनों को लेकर गहरी और जटिल भावनाएं हैं, लेकिन उनके लिए यह कई मायनों में एक मजेदार प्रोजेक्ट साबित हुआ। हालांकि, जैसे ही यह खबर सार्वजनिक मंचों पर आई, सोशल मीडिया पर साथी डिजाइनरों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कई उपयोगकर्ताओं ने उन्हें सीधे तौर पर आड़े हाथों लेते हुए आलोचना शुरू कर दी। ऑनलाइन तीखी प्रतिक्रियाएं और व्यक्तिगत हमले थ्रेड्स पर सामने आई प्रतिक्रियाओं में हिश के फैसले को कला समुदाय के साथ विश्वासघात बताया गया। एक यूजर ने लिखा कि यह पैसे की नहीं, बल्कि नैतिकता की बात है। वहीं दूसरे यूजर ने इस कदम की तुलना माफिया के लिए काम करने से कर दी और कहा कि यह वैसा ही है जैसे कोई माफिया के लिए काम करे और बाद में उन्हीं के हाथों नुकसान होने पर हैरानी जताए। आलोचना सिर्फ पेशेवर काम तक सीमित नहीं रही, बल्कि कुछ लोगों ने हिश के घर की तस्वीरें साझा कीं और उनकी संपत्ति और वित्तीय स्थिति को लेकर मनगढ़ंत बातें करनी शुरू कर दीं। समुदाय से हल्के-फुल्के विरोध की उम्मीद रखने वाली हिश के लिए इस स्तर की नफरत और व्यक्तिगत हमले पूरी तरह अप्रत्याशित थे। छोटे कारोबार की चुनौतियां और 12,500 डॉलर का भुगतान हिश ने बताया कि पिछले एक या दो सालों से उनके पास क्लाइंट्स से मिलने वाला काम काफी धीमा पड़ गया था। वे मुख्य रूप से बड़े क्लाइंट्स के प्रोजेक्ट्स पर निर्भर रहती हैं ताकि अपने अन्य व्यवसायों का संचालन कर सकें। ऑकलैंड में उनकी दो पारंपरिक दुकानें हैं, जो ज्यादा मुनाफा नहीं कमा पातीं। दोनों दुकानों को मिलाकर पिछले साल उन्हें केवल 10,000 डॉलर का शुद्ध मुनाफा हुआ था, जो उनके खुद के भरण-पोषण के लिए काफी नहीं था। इसके अलावा उन्होंने क्रिएटिव प्रोफेशनल्स के लिए एडमिन प्लेटफॉर्म 'स्टूडियोवर्क्स' में 1,00,000 डॉलर और ऑकलैंड में बच्चों की आर्ट शॉप 'ड्रॉलिंग' में 30,000 डॉलर का निवेश किया था, जहां वे कक्षाएं और वर्कशॉप आयोजित करती हैं। हिश के पेरोल पर खुद के अलावा उनकी मां और दुकान के दो कर्मचारी समेत कुल 4 लोग शामिल हैं। पूरे साल उनके बैंक खाते में मुश्किल से 2 से 4 पेरोल जितनी ही रकम बची रहती थी, जो किसी भी छोटे व्यवसायी के लिए बेहद अनिश्चित स्थिति होती है। जब मेटा का यह प्रोजेक्ट आया, तो उन्होंने दो दिनों के गहन काम के लिए 12,500 डॉलर की फीस ली। उनका मानना था कि एक बड़ी कंपनी के लिए दो दिन की मेहनत के लिहाज से यह अच्छी रकम थी, हालांकि यह कोई जीवन बदल देने वाली दौलत नहीं थी। इस कमाई से उन्हें अपने कर्मचारियों के वेतन और एक कर्मचारी के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना का प्रबंध करने में सीधी मदद मिली। दो दिनों का स्प्रिंट और 32 अलग-अलग ड्राफ्ट लोगो रिफ्रेश करने की विशेषज्ञ हिश ने इससे पहले फेंडर के स्क्वॉयर गिटार, जेनीज आइसक्रीम और सदर्न लिविंग मैगजीन के लोगो को नया रूप दिया है। उनका कहना है कि वे लोगो को इस तरह तराशती हैं मानो वह किसी स्पा से तरोताजा होकर निकला हो, न कि कोई भारी प्लास्टिक सर्जरी कराकर आया हो। मेटा की इन-हाउस टीम ने उत्पाद डिजाइनरों और इंजीनियरों की मदद से पहले ही 'M' अक्षर पर काम किया था, लेकिन वे जानते थे कि वह पूरी तरह सही नहीं बैठ रहा था। टाइपोग्राफी में अक्षरों को हाथ से तराशना एक खास हुनर होता है। मेटा की आंतरिक टीम ने शुरुआती 'M' को एक समान मोटाई वाले सिंगल वेक्टर स्ट्रोक से बनाया था। जब किसी अक्षर में कोई मानवीय समायोजन नहीं होता, तो उसकी बनावट में गहराई नहीं आ पाती। टाइप डिजाइन में जब स्ट्रोक एक-दूसरे को छूते हैं, तो वहां थोड़ा भारीपन आता है, जिसे डिजाइनर संतुलन देने के लिए बारीक बदलाव करते हैं। मेटा की मुख्य मांग थी कि यह लोगो तकनीक की तरह कठोर और ठंडा न दिखे, बल्कि रचनात्मक, प्रेरणादायक और खेलने में मजेदार महसूस हो। हिश ने दो दिनों के भीतर 'M' के 32 अलग-अलग वर्जन तैयार किए, जबकि पूरे लोगोटाइप को अंतिम रूप देने में दो सप्ताह का अतिरिक्त समय लगा। मेटा का इनफिनिटी लूप और डिजाइन पर चर्चा मेटा के चीफ एआई ऑफिसर अलेक्जेंडर वांग ने हाल ही में इस लोगो के बारे में चर्चा की थी और संतोष जताया था कि यह प्रतिस्पर्धियों के कुछ अजीबोगरीब डिजाइनों जैसा नहीं दिखता। हिश ने बताया कि आंतरिक तौर पर शायद टीम इस बात को लेकर सतर्क थी, लेकिन उनके साथ चर्चा मुख्य रूप से मेटा के मौजूदा इनफिनिटी लूप लोगो के इर्द-गिर्द केंद्रित थी। उनका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि म्यूज का नया लोगो मेटा के मुख्य विजुअल ब्रह्मांड का ही एक स्वाभाविक हिस्सा नजर आए। सोशल मीडिया पर गलतफहमी और मानसिक तनाव हिश ने आलोचनाओं का जवाब शांति से देने की कोशिश की, जैसा वे आमतौर पर ऑनलाइन विवादों में करती रही हैं। उन्होंने उल्लेख किया था कि इस कमाई के जरिए वे छुट्टियों के मौसम में अपनी दुकान के लिए इन्वेंट्री खरीदते समय 50,000 डॉलर के क्रेडिट कार्ड कर्ज से बच सकेंगी। लेकिन इस बात को संदर्भ से काटकर पेश किया गया और लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि वे छुट्टियों पर 50,000 डॉलर उड़ाने वाली अमीर महिला हैं। उन्हें एक ऐसी काल्पनिक अरबपति के रूप में पेश किया जाने लगा जो संघर्षरत कलाकारों पर चिल्लाती है। इस पूरे घटनाक्रम ने हिश को मानसिक रूप से झकझोर दिया। वे खुद को बेहद गलत समझे जाने के अहसास से घिर गईं। वे कोई 1,500 डॉलर का महंगा कोर्स बेचने वाली गुरु नहीं हैं, बल्कि 5 घंटे की वर्कशॉप के लिए महज 35 डॉलर लेती हैं। उन्होंने प्रोजेक्ट में एआई का शून्य इस्तेमाल किया था और उन्हें लगा था कि एक बड़ी टेक कंपनी द्वारा जेनरेटिव एआई के बजाय एक स्वतंत्र मानवीय कलाकार को काम पर रखना एक अच्छी पहल है। विवाद बढ़ने के बाद वे इतनी आहत हुईं कि दो दिनों तक बिस्तर पर बैठकर रोती रहीं। उन्हें ऐसा लगा मानो उनकी सालों की मेहनत, सही फैसले और साथी कलाकारों के लिए उपलब्ध कराए गए मुफ्त संसाधन सब बेकार चले गए हों। कला जगत में एआई का डर और हिश का नजरिया हिश ने स्वीकार किया कि कमर्शियल आर्ट की दुनिया में एआई को लेकर कलाकारों का डर पूरी तरह वास्तविक है। शुरुआत में जब उनके पति एआई पर काम कर रहे थे, तो वे खुद इसके सख्त खिलाफ थीं। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने डेटा प्रोसेसिंग और बैकएंड कार्यों में इसकी उपयोगिता को समझा, जिससे उनका रुख कुछ नरम हुआ। उनका स्पष्ट मानना है कि एआई का वास्तविक प्रभाव कमर्शियल आर्ट पर पड़ रहा है और एआई मॉडल कलाकारों के काम की अनधिकृत चोरी पर आधारित हैं। वे मानती हैं कि एंथ्रोपिक के खिलाफ चल रहे कानूनी मामले के समझौते से उन्हें भी लाभ मिल सकता है क्योंकि उनकी किताबों का डेटा भी बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया है। हिश खुद जेनरेटिव आर्ट के लिए एआई का इस्तेमाल नहीं करती हैं, बल्कि केवल कोडिंग, वेबसाइट बनाने और प्रशासनिक कार्यों में इसकी सहायता लेती हैं। उनका साफ मानना है कि जब भी एआई किसी इंसान की जगह लेता है या मानवीय रचनात्मकता के जरूरी हिस्से पर कब्जा करता है, तब यह एक गंभीर समस्या बन जाता है। हिश को इस बात का अफसोस नहीं है कि उन्होंने काम किया, लेकिन इंटरनेट की दुनिया में कलाकारों और टेक कंपनियों के बीच बढ़ती खाई ने इस पूरे प्रोजेक्ट को एक कड़वे अनुभव में बदल दिया। इसका आप पर असर यह विवाद दिखाता है कि टेक कंपनियों के एआई प्रोजेक्ट्स के साथ जुड़ने पर स्वतंत्र कलाकारों और फ्रीलांसर्स को किस तरह की नैतिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। • फ्रीलांसर्स और डिजाइनर्स पर: बड़े कॉर्पोरेट ब्रांड्स के साथ काम करते समय अपनी ऑनलाइन साख और समुदाय की संवेदनशीलता का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो गया है। किसी भी विवादित तकनीक से जुड़े काम को सार्वजनिक करते समय पेशेवरों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। • छोटे व्यवसायों पर: स्वतंत्र कलाकारों को अपने कर्मचारियों के वेतन और संचालन खर्चों को पूरा करने के लिए कठिन समझौते करने पड़ सकते हैं। अपने वित्तीय संघर्षों को सोशल मीडिया पर साझा करने से पहले उसके संभावित दुष्परिणामों का आकलन करना आवश्यक है। • कॉर्पोरेट कंपनियों पर: टेक कंपनियों द्वारा एआई टूल्स के बजाय मानव कलाकारों को काम पर रखने के बावजूद जनता का आक्रोश कम नहीं हो रहा है। कंपनियों को अपने नए प्रोजेक्ट्स के प्रचार में स्वतंत्र रचनाकारों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा। • सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं पर: ऑनलाइन मंचों पर किसी कलाकार के व्यक्तिगत जीवन और पते को निशाना बनाना कानूनी और नैतिक सीमाओं का उल्लंघन है। किसी पेशेवर निर्णय पर असहमति जताने और निजी उत्पीड़न करने के बीच के अंतर को समझना जरूरी है। ऐसा क्यों हुआ मेटा के नए एआई असिस्टेंट म्यूज के लोगो डिजाइन को लेकर यह विवाद तब खड़ा हुआ, जब लेटरिंग आर्टिस्ट जेसिका हिश ने सोशल मीडिया पर इस साझेदारी की घोषणा की। कला समुदाय में एआई तकनीक और बिग टेक कंपनियों के प्रति मौजूद गहरे अविश्वास ने इस सामान्य फ्रीलांस प्रोजेक्ट को भारी विरोध का केंद्र बना दिया। • एआई तकनीक के प्रति असंतोष: व्यावसायिक कला जगत में कई रचनाकारों का मानना है कि जेनरेटिव एआई मॉडल कलाकारों के काम की अनधिकृत चोरी पर बने हैं और इंसानी नौकरियों को खत्म कर रहे हैं। इस वजह से किसी भी एआई उत्पाद से जुड़ना समुदाय के साथ विश्वासघात माना जाने लगा है। • वित्तीय स्पष्टीकरण की गलत व्याख्या: हिश ने जब अपने दो छोटे व्यवसायों के खर्च, कर्मचारियों के पेरोल और हॉलिडे इन्वेंट्री के लिए 50,000 डॉलर के कर्ज से बचने की बात कही, तो सोशल मीडिया पर इसे संदर्भ से बाहर निकालकर उन्हें अहंकारी और अमीर बता दिया गया। • मेटा की साख को लेकर संवेदनशीलता: बिग टेक प्लेटफॉर्म्स के प्रति कला समुदाय पहले से ही आलोचनात्मक रहा है। म्यूज प्रोजेक्ट से हिश का जुड़ना कई साथी डिजाइनरों को नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ लगा। सवाल-जवाब 1. जेसिका हिश कौन हैं और उन्होंने मेटा के लिए क्या काम किया? जेसिका हिश सैन फ्रांसिस्को बे एरिया की एक प्रसिद्ध लेटरिंग आर्टिस्ट और टाइप डिज़ाइनर हैं, जिन्होंने मेटा के नए एआई असिस्टेंट म्यूज के लिए 'M' लोगो और लोगोटाइप तैयार किया। 2. सोशल मीडिया पर जेसिका हिश की आलोचना क्यों हुई? साथी कलाकारों और डिजाइनरों ने आरोप लगाया कि उन्होंने एआई तकनीक और मेटा जैसी बड़ी कंपनी के साथ काम करके कला समुदाय के नैतिक सिद्धांतों से समझौता किया है। 3. मेटा के इस प्रोजेक्ट के लिए जेसिका हिश को कितना भुगतान मिला? दो दिनों के इस डिजाइन स्प्रिंट के लिए उन्हें 12,500 डॉलर की फीस मिली, जिसका उपयोग उन्होंने अपने छोटे व्यवसाय के कर्मचारियों के वेतन और खर्चों के लिए किया। 4. क्या इस लोगो को बनाने में जेनरेटिव एआई का इस्तेमाल किया गया था? नहीं, हिश ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस लोगो को डिजाइन करने में किसी भी प्रकार के एआई टूल का उपयोग नहीं किया और यह पूरी तरह मानवीय कला पर आधारित था। 5. हिश ने आर्थिक तंगी को लेकर क्या जानकारी दी? उन्होंने बताया कि ऑकलैंड में उनकी दो दुकानों से पिछले साल सिर्फ 10,000 डॉलर का मुनाफा हुआ था और उनके बैंक खाते में कर्मचारियों के लिए बमुश्किल 2 से 4 पेरोल की रकम ही बची रहती थी। 6. मेटा के 'M' लोगो को बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? मेटा की आंतरिक टीम द्वारा बनाया गया शुरुआती लोगो सिंगल स्ट्रोक का था और काफी सपाट व तकनीकी दिख रहा था, जिसे मानवीय, चंचल और रचनात्मक बनाने के लिए हिश को सौंपा गया था। https://trendkia.com/ai/meta-ke-ai-projekta-ke-lie-logo-banana-para-bhari-trolinga-ke-bada-dizainara-jessica-hische-ne-bayan-kiya-darda-45029 TrendKia — Har trend, sabse pehle.