# न्यूयॉर्क मेयर ज़ोहरान ममदानी ने बिना लगाम एआई के विस्तार पर जताई चिंता, जनता से खड़े होने का किया आह्वान

> मैनहटन के वेबस्टर हॉल में आयोजित एक चर्चा के दौरान मेयर ज़ोहरान ममदानी ने संघीय नियमों की कमी की आलोचना की और नागरिकों से तकनीकी कंपनियों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।

**Type:** article · **Category:** एआई · **Published:** 2026-10-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/ai/nyuyorka-meyara-zohran-mamdani-ne-bina-lagama-ai-ke-vistara-para-jatai-chinta-janata-se-khare-hone-ka-kiya-ahvana-49689 · **Language:** Hindi
**Tags:** ज़ोहरान ममदानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, एआई नियमन, न्यूयॉर्क शहर, इलाना ग्लेज़र, डोनाल्ड ट्रंप, ओपनएआई, एंथ्रोपिक

मैनहटन के ऐतिहासिक वेबस्टर हॉल में सोमवार की शाम आयोजित एक सार्वजनिक चर्चा में न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी और अभिनेत्री व सामाजिक कार्यकर्ता इलाना ग्लेज़र ने समाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की बढ़ती दखलंदाजी पर गंभीर चिंता व्यक्त की। इस परिचर्चा के दौरान मेयर ममदानी ने शहरवासियों से आग्रह किया कि वे इस निराशावादी सोच को पूरी तरह खारिज करें कि एआई उनके रोजगार, उनके बच्चों की मानसिक क्षमता और उनके मानवीय आत्मसम्मान को अनिवार्य रूप से छीन लेगा। उन्होंने नागरिकों को प्रेरित करते हुए कहा कि भविष्य को लाचार होकर देखने के बजाय लोगों को नियंत्रण अपने हाथों में लेना होगा और बड़े तकनीकी प्रतिष्ठानों की जवाबदेही तय करनी होगी।

यह कार्यक्रम एआई नाउ इंस्टीट्यूट के सौजन्य से आयोजित किया गया था, जो प्रौद्योगिकी के सामाजिक दुष्प्रभावों पर शोध करने वाला एक प्रमुख अध्ययन केंद्र है। मंच से बोलते हुए मेयर ने स्पष्ट किया कि शहरों पर नई तकनीकों का अंधाधुंध थोपा जाना कोई तयशुदा नियति नहीं है जिसे बिना सवाल स्वीकार कर लिया जाए। वाशिंगटन में बैठी संघीय सरकार द्वारा इस क्षेत्र में कड़े नियम बनाने से पीछे हटने के कारण अब स्थानीय प्रशासनों को अपने स्तर पर कड़े फैसले लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

## स्कूलों में प्रतिबंध और आवासीय विज्ञापनों पर नकेल
सार्वजनिक सुरक्षा की दिशा में कदम उठाते हुए मेयर ममदानी ने पिछले महीने ही शहर के सभी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में एआई के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने का शासकीय आदेश जारी किया था। परिचर्चा में ग्लेज़र ने एक अभिभावक के तौर पर अपनी चिंताएं साझा करते हुए बताया कि कक्षाओं में इस तकनीक की जबरन मौजूदगी उन्हें बेहद असहज करती है। ग्लेज़र ने सवाल उठाया कि जो उपकरण मात्र दो साल पहले तक स्कूली शिक्षा का हिस्सा नहीं थे, उन्हें अचानक बच्चों के दैनिक जीवन के लिए अनिवार्य क्यों मान लिया गया है।

इसके अलावा गर्मियों के दौरान नगर प्रशासन ने रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए भी एक नया नियम प्रस्तावित किया था। इस नीति के तहत सभी मकान मालिकों, संपत्ति दलालों और आवास बेचने वाले डिजिटल पोर्टलों के लिए यह अनिवार्य किया जा रहा है कि यदि वे संपत्तियों की बिक्री के लिए एआई निर्मित तस्वीरों या वीडियो का उपयोग करते हैं, तो उन्हें इसकी स्पष्ट घोषणा करनी होगी। इस नीति का मुख्य उद्देश्य किराएदारों और खरीदारों को भ्रामक डिजिटल विज्ञापनों के जरिए ठगे जाने से सुरक्षित रखना है। इन दोनों स्थानीय कदमों ने इस आम धारणा को खुली चुनौती दी है कि जनता को तकनीकी बदलावों को बिना शर्त स्वीकार करना ही होगा।

## सैन्य गलतियां और तकनीक को अचूक मानने का भ्रम
ममदानी ने आधुनिक तकनीकी कंपनियों के उस रवैये की कड़ी निंदा की जिसके तहत एआई को पूरी तरह अचूक और सवालों से परे पेश किया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि तकनीक की सीमाओं को समझे बिना उसे जल्दबाजी में लागू करना भारी मानवीय त्रासदी का कारण बन सकता है। अपने तर्क के समर्थन में उन्होंने फरवरी माह में ईरान के एक स्कूल पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले का उल्लेख किया, जिसमें 150 से अधिक निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी और मरने वालों में कम से कम 123 मासूम बच्चे शामिल थे। पेंटागन की आंतरिक जांच में यह तथ्य सामने आया था कि हमले के लिए निशाने तय करने की प्रक्रिया में एआई प्रणालियों पर अत्यधिक और अंधाधुंध निर्भरता इस भयानक भूल की एक प्रमुख वजह थी।

मेयर ने कहा कि सिलिकॉन वैली का यह दावा बिल्कुल वर्ष 2008 के फेसबुक जैसा है, जब सोशल मीडिया कंपनियां यह दलील देती थीं कि तकनीक को केवल वही लोग समझ और नियंत्रित कर सकते हैं जो उसका निर्माण कर रहे हैं। ममदानी के अनुसार यह रवैया केवल कानूनी जवाबदेही से बचने की एक सोची-समझी चाल है, ताकि कंपनियों के आगामी सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ के दौरान उनके मूल्यांकन पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। ध्यान देने योग्य है कि एंथ्रोपिक इसी वर्ष शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की योजना बना रही है, जबकि ओपनएआई ने वर्ष 2027 में सार्वजनिक होने की समयसीमा तय की है।

## राष्ट्रीय नीति की विफलता और चीन से होड़ की मानसिकता
राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत कमजोरियों को उजागर करते हुए ममदानी ने कहा कि संघीय कानून पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है। अमेरिकी संसद और सत्ता के गलियारों में एआई से जुड़ी हर चर्चा को केवल चीन के साथ तकनीकी हथियारों की दौड़ के संकीर्ण चश्मे से देखा जाता है। इस भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की आड़ में आम इंसानों के अधिकारों, मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी वास्तविक चिंताओं को जानबूझकर दरकिनार कर दिया जाता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इसी महीने घोषित सुपरइंटेलिजेंस टास्क फोर्स भी कड़े सरकारी नियमों को लागू करने के बजाय तकनीकी कंपनियों को स्व-नियमन की खुली छूट देने पर केंद्रित है। यह छूट ऐसे समय में दी जा रही है जब ओपनएआई, गूगल डीपमाइंड और एंथ्रोपिक जैसी दिग्गज कंपनियों के पूर्व कर्मचारियों और व्हिसलब्लोअर्स ने खुलेआम चेतावनी दी है कि अनियंत्रित एआई मानव सभ्यता के अस्तित्व के लिए भी गंभीर संकट खड़ा कर सकता है। ममदानी ने जोर देकर कहा कि मौजूदा संघीय प्रशासन के बाद देश को एक ऐसे नए और मानवीय दृष्टिकोण की सख्त जरूरत होगी, जो तकनीकी विकास के साथ-साथ कठोर सार्वजनिक जवाबदेही को अनिवार्य बनाए।

## इसका आप पर असर
न्यूयॉर्क नगर प्रशासन द्वारा एआई के नियमन को लेकर उठाए गए कदम सीधे तौर पर छात्रों, अभिभावकों और किराए पर घर तलाशने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा को प्रभावित करते हैं।

- **कक्षाओं में सुरक्षा:** प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल के विद्यार्थियों के लिए एआई के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गई है। इसका मतलब है कि छात्रों के बौद्धिक विकास और मूल्यांकन के दौरान एल्गोरिदम के बजाय मानवीय शिक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी।
- **आवास विज्ञापनों में पारदर्शिता:** मकान मालिकों और प्रॉपर्टी ब्रोकर्स को एआई से बनी तस्वीरों या वीडियो की स्पष्ट पहचान सार्वजनिक करनी होगी। इससे किराएदारों और खरीदारों को नकली तस्वीरों के जरिए धोखा देकर पैसे ऐंठने की घटनाओं पर रोक लगेगी।
- **जवाबदेही की मांग:** बड़े कॉर्पोरेट्स पर निर्भरता कम करने के लिए नागरिकों को सवाल पूछने के अधिकार दिए जा रहे हैं। तकनीकी कंपनियों के दावों को बिना परखे स्वीकार करने के बजाय स्थानीय नियम उपभोक्ताओं के व्यक्तिगत अधिकारों को सुरक्षित करेंगे।
- **वैश्विक नीतियों पर दबाव:** स्थानीय स्तर पर बने ये कड़े नियम अन्य महानगरों और सरकारों के लिए भी मानक तय कर सकते हैं। राष्ट्रीय नियमों के अभाव में शहर स्तर की नीतियां नागरिकों को डेटा दुरुपयोग से बचाने का तात्कालिक रास्ता दिखाती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटनाक्रम इसलिए सामने आया क्योंकि केंद्र सरकार की तरफ से एआई कंपनियों पर कड़े कानूनी बंधन लगाने के बजाय खुद नियम तय करने की छूट दी जा रही थी। इसके चलते स्थानीय नेतृत्व को सीधे दखल देना पड़ा।

- **संघीय निष्क्रियता:** राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुपरइंटेलिजेंस टास्क फोर्स ने कंपनियों को स्व-नियमन की अनुमति दी है। सरकारी पाबंदियों के अभाव में स्थानीय स्तर पर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए नगर प्रशासनों को स्वतंत्र कानून बनाने पड़े हैं।
- **सैन्य और तकनीकी विफलताएं:** ईरान के एक स्कूल पर हुए अमेरिकी हमले में एआई की गलत पहचान से 123 से अधिक बच्चों की मौत हो गई थी। इस तरह की गंभीर भूलों ने यह साबित किया कि तकनीकी उपकरण पूरी तरह विश्वसनीय या अचूक नहीं हैं।
- **आगामी सार्वजनिक निर्गम:** एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध होकर भारी मुनाफा कमाने की तैयारी में हैं। कंपनियों की प्राथमिकता कानूनी जवाबदेही से बचते हुए अपने कॉर्पोरेट मूल्यांकन को बढ़ाना बनी हुई है।

## सवाल-जवाब

### 1. मेयर ज़ोहरान ममदानी ने मैनहटन में किस विषय पर बात की?
उन्होंने समाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अंधाधुंध प्रसार, कंपनियों की जवाबदेही और स्थानीय स्तर पर सुरक्षात्मक नियम बनाने पर जोर दिया।

### 2. न्यूयॉर्क के स्कूलों में एआई को लेकर क्या फैसला हुआ है?
मेयर ममदानी ने पिछले महीने शहर के सभी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में एआई के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था।

### 3. हाउस-फिशिंग से आम लोगों को बचाने के लिए क्या नियम बना है?
मकान मालिकों और दलालों के लिए यह अनिवार्य किया जा रहा है कि यदि विज्ञापन की तस्वीरें या वीडियो एआई से बने हैं, तो वे इसका स्पष्ट खुलासा करें।

### 4. ईरान के स्कूल पर हुए हमले का इस मामले में क्या संदर्भ है?
पेंटागन की जांच में सामने आया था कि हमले के निशाने तय करने में एआई पर अत्यधिक निर्भरता के कारण 123 से अधिक बच्चों समेत 150 से ज्यादा लोगों की जान गई थी।

### 5. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एआई नीति को लेकर क्या आलोचना की गई?
उनकी सुपरइंटेलिजेंस टास्क फोर्स कड़े सरकारी नियम बनाने के बजाय तकनीकी कंपनियों को खुद नियम तय करने की खुली छूट देती है।

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