ओपनएआई के जीपीटी-6 एस्ट्रा ने संभाला टोयोटा कोरोला का स्टीयरिंग, ड्राइव-थ्रू से खाना लाने में मिली सफलता इंजीनियरों की एक टीम ने चैटबॉट्स की थ्रीडी समझ को परखने के लिए जीपीटी-6 एस्ट्रा को सीधे कार के स्टीयरिंग सिस्टम से जोड़ा। मॉडल ने ड्राइव-थ्रू लेन में धीमी गति से गाड़ी चलाकर ऑर्डर खिड़की तक पहुंचा दी। सैन फ्रांसिस्को बे एरिया के एक इन-एंड-आउट फास्ट-फूड रेस्तरां की ड्राइव-थ्रू लेन में खड़ी 2024 टोयोटा कोरोला के भीतर बैठे इंजीनियरों ने खुद गाड़ी चलाने के बजाय एक अनोखा प्रयोग करने का फैसला किया। उन्होंने अपना लैपटॉप खोला और ओपनएआई के जीपीटी-6 एस्ट्रा को कार का स्टीयरिंग व्हील सौंप दिया। इस पूरे सेटअप के लिए चैट इंटरफेस को एक सर्वर से जोड़ा गया, जो विंडस्क्रीन पर लगे कई कैमरों और कार के पावर स्टीयरिंग सिस्टम से जुड़ा था। किसी भी संभावित दुर्घटना को टालने के लिए एक सुरक्षा चालक अपने पैर को लगातार ब्रेक के ऊपर रखे हुए था। सामान्य तौर पर केवल टेक्स्ट, कोड और कभी-कभार तस्वीरें बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला यह एआई मॉडल बेहद धीमी लेकिन नियंत्रित गति से गाड़ी को टेक-आउट विंडो तक ले गया, जहाँ से खाना आसानी से लिया जा सका। इस सफल परीक्षण के बाद इंजीनियरों में से एक ने टिप्पणी की कि शायद बहुप्रतीक्षित आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस यानी एजीआई अब हकीकत बन चुका है। आमतौर पर ऑटोमैटिक या सेल्फ-ड्राइविंग कारों को चलाने के लिए ऐसे जटिल एल्गोरिदम तैयार किए जाते हैं, जिन्हें खास तौर पर ड्राइविंग का ही प्रशिक्षण दिया जाता है। इस मामले में गाड़ी चलाने वाला सिस्टम बुनियादी तौर पर टेक्स्ट आउटपुट देने वाला भाषा मॉडल था। तीनों शोधकर्ताओं ने इसे चलाने से पहले कोई विशेष पूर्व-प्रशिक्षण नहीं दिया था, बल्कि यह सब वास्तविक समय में हुआ। यह प्रयोग संकेत देता है कि भाषा पर आधारित एआई मॉडल अब भौतिक दुनिया की बुनियादी समझ भी विकसित करने लगे हैं। लैब से निकलकर सड़कों पर उतरते भाषा मॉडल दो टन वजनी तेज दौड़ने वाली कार की कमान किसी सामान्य एआई मॉडल के हाथ में सौंपना जोखिम भरा फैसला था, भले ही दोपहर के इस सफर में कोई अनहोनी नहीं हुई। आज के सबसे उन्नत मॉडल जटिल सवालों के जवाब देने और वर्चुअल दुनिया में कई काम खुद करने में माहिर हैं, लेकिन उनकी यह दक्षता केवल कंप्यूटर और इंटरनेट तक ही सीमित मानी जाती रही है। वास्तविक दुनिया के सामने आते ही ऐसे मॉडल अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। एजीआई के कई दावों के बावजूद एआई विकास से जुड़ी कंपनियां भी मानती हैं कि भौतिक दुनिया में तार्किक समझ विकसित करना इस तकनीक के लिए एक नई चुनौती है। इसी वजह से कुछ शोधकर्ता बड़ी कंपनियों को छोड़कर ऐसे स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, जो भौतिक तर्क पर काम कर रहे हैं। गूगल डीपमाइंड के पूर्व शोधकर्ता और एलोरियन एआई के सीईओ एंड्रयू दाई के अनुसार, बेहतर विजुअल रीजनिंग से नए रास्ते खुलेंगे। यह तकनीक भविष्य में यह समझने में काम आ सकती है कि रेस्तरां में लोग खाने का आनंद ले रहे हैं या नहीं, अथवा घर के काम संभालने वाले रोबोट्स को तैयार करने में भी इसकी अहम भूमिका होगी। एंड्रयू दाई मानते हैं कि रोबोटिक्स के लिए भौतिक समझ एक बेहद बुनियादी और अनिवार्य जरूरत है। मानवता की छठी इंद्री और ड्राइविंगबेंच टेस्ट एलोरियन और डेटा प्रदाता कंपनी स्केल एआई ने मिलकर एक नया बेंचमार्क तैयार किया है, जिसे ह्यूमैनिटीज सिक्स्थ सेंस नाम दिया गया है। यह बेंचमार्क भौतिक दृश्यों को समझने की मॉडल्स की क्षमता को मापता है। स्केल एआई के शोध वैज्ञानिक शिनगांग गुओ ने बताया कि विजुअल एआई से जुड़ा अधिकांश काम अब तक केवल विजुअल परसेप्शन पर केंद्रित रहा है, जबकि नया उद्देश्य यह समझना है कि कोई मॉडल किसी दृश्य को इंसानी सहजता से कैसे समझ सकता है। एग्जियोम कंपनी में काम करने वाले रमाभद्रन, माहन्स और गेस्लर ने अपने दफ्तर के काम से अलग वक्त निकालकर इन-एंड-आउट प्रोजेक्ट पर काम किया था। उनका मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि बिना किसी पूर्व तैयारी के ये मॉडल वास्तविक दुनिया की जटिलताओं में कैसा प्रदर्शन करते हैं। एक सप्ताहांत पर साथ बैठे इन इंजीनियरों ने देखा कि एस्ट्रा जैसे मॉडल जटिल थ्रीडी सिमुलेशन बना सकते हैं, जिसके बाद उनके मन में यह विचार आया कि क्या यह क्षमता वास्तविक दुनिया में कार चलाने में तब्दील हो सकती है। बे एरिया में रहते हुए टेस्ला और वेमो जैसी स्वायत्त कारों को देखने के अनुभव ने भी उन्हें इस परीक्षण के लिए प्रेरित किया। प्रॉम्प्टिंग की मदद से शुरू हुआ सफर शुरुआत में इंजीनियरों ने स्पेसएक्सएआई के ग्रॉक का परीक्षण किया और उसके बाद ओपनएआई तथा एंथ्रोपिक के मॉडल्स को आजमाया। पहले तो इन मॉडल्स ने गाड़ी का नियंत्रण लेने से पूरी तरह मना कर दिया। सिस्टम ने साफ कहा कि वह सड़क की तस्वीरों का विश्लेषण तो कर सकता है, लेकिन किसी भौतिक कार को चलने के कमांड नहीं दे सकता। सावधानीपूर्वक तैयार किए गए प्रॉम्प्ट्स की मदद से उन्हें आगे बढ़ने के लिए तैयार किया गया, और जब मॉडल्स ने सच में गाड़ी चलाना शुरू किया तो तीनों इंजीनियर दंग रह गए। इंजीनियरों का मानना है कि बड़ी टेक कंपनियां अपने मॉडल्स में स्थानिक समझ यानी स्पेशियल रीजनिंग सुधारने पर जोर दे रही हैं, लेकिन उनका मकसद मॉडल्स को ड्राइविंग सिखाना नहीं है। यह क्षमता दरअसल थ्रीडी रीजनिंग के प्रशिक्षण का ही एक स्वाभाविक परिणाम है। माहन्स का कहना है कि तस्वीरों, वीडियो और थ्रीडी मॉडल्स के जरिए मल्टीमॉडल ट्रेनिंग को बढ़ाने से यह नई क्षमता अनायास ही विकसित हो गई है। हालांकि, इन तीनों इंजीनियरों द्वारा तैयार किए गए ड्राइविंगबेंच नामक नए परीक्षण से पता चलता है कि इन मॉडल्स को इंसानी ड्राइविंग टेस्ट पास करने में अभी लंबा सफर तय करना है। पार्किंग स्थल में बने एक साधारण ड्राइविंग ट्रैक पर केवल एस्ट्रा ही पूरा चक्कर लगा पाया, वह भी काफी धीमी गति से। दूसरी तरफ क्लॉड फेबल 5.1 केवल 45 प्रतिशत रास्ता ही तय कर सका, जबकि ग्रॉक महज 11 प्रतिशत दूरी पर ही अटक गया। रमाभद्रन ने बताया कि नवीनतम मॉडल अपनी गलतियों से लगातार सीख रहे हैं और कार के नियंत्रण को रीयल-टाइम में बेहतर तरीके से संभाल रहे हैं। इसका आप पर असर जनरल-पर्पज एआई मॉडल्स द्वारा भौतिक दुनिया में वाहनों और उपकरणों का नियंत्रण संभालना आने वाले समय में स्वायत्त तकनीक के उपयोग को पूरी तरह बदल सकता है। • दैनिक जीवन पर असर: भविष्य में स्मार्ट असिस्टेंट केवल स्क्रीन पर चैट करने के बजाय घरेलू रोबोट और निजी वाहनों के छोटे-मोटे काम संभालने में सक्षम हो सकते हैं। इसका अर्थ यह है कि रोजमर्रा के मैनुअल कामों के लिए समर्पित महंगे हार्डवेयर की आवश्यकता घट सकती है। • यात्री सुरक्षा और नियम: भाषा मॉडल्स पर आधारित ड्राइविंग तकनीक अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं है और इसे सार्वजनिक सड़कों पर उतारने से पहले कड़े परीक्षणों से गुजरना होगा। जब तक नियामक संस्थाएं इसे मंजूरी नहीं देतीं, तब तक ड्राइवरों को खुद ही स्टीयरिंग पर नियंत्रण बनाए रखना होगा। • तकनीकी लागत: सामान्य एआई मॉडल्स के जरिए स्वायत्त ड्राइविंग संभव होने से आने वाले वर्षों में सेल्फ-ड्राइविंग कारों की तकनीक सस्ती हो सकती है। इसका फायदा यह होगा कि आम बजट वाले वाहनों में भी आधुनिक सुरक्षा और नेविगेशन फीचर्स मिलने लगेंगे। • रोबोटिक्स उद्योग: भौतिक दृश्यों को समझने वाले एआई मॉडल्स से डिलीवरी और सर्विस इंडस्ट्री में ऑटोमेशन की रफ्तार तेज होगी। इस बदलाव से कंपनियों को नई दक्षता मिलेगी और उपयोगकर्ताओं को त्वरित सेवाएं मिल सकेंगी। ऐसा क्यों हुआ इंजीनियरों द्वारा जीपीटी-6 एस्ट्रा से कार चलवाने का यह प्रयोग यह जांचने के लिए किया गया कि क्या थ्रीडी सिमुलेशन में सक्षम भाषा मॉडल वास्तविक दुनिया के भौतिक वातावरण को भी समझ सकते हैं। • थ्रीडी क्षमताओं का उभार: मल्टीमॉडल ट्रेनिंग के तहत बड़े एआई मॉडल्स को वीडियो, तस्वीरों और थ्रीडी डेटा पर प्रशिक्षित किया गया, जिससे उनमें अनपेक्षित स्थानिक समझ पैदा हुई। शोधकर्ताओं ने इसी समझ को वास्तविक सड़क पर परखने का निर्णय लिया। • रोबोटिक्स में विजुअल रीजनिंग की कमी: मौजूदा भाषा मॉडल स्क्रीन के बाहर भौतिक दुनिया में दिशा और गति समझने में संघर्ष करते रहे हैं। एआई को वास्तविक दुनिया में उपयोगी बनाने के लिए उसके भौतिक तर्क कौशल का परीक्षण करना आवश्यक हो गया था। • स्वायत्त वाहनों का क्षेत्रीय प्रभाव: बे एरिया में रहते हुए शोधकर्ता लगातार टेस्ला और वेमो जैसी स्वायत्त गाड़ियों के संपर्क में थे। इस माहौल ने उन्हें सामान्य भाषा चैटबॉट की सीमाओं को कार नियंत्रण प्रणाली से जोड़कर देखने के लिए प्रेरित किया। सवाल-जवाब 1. इंजीनियरों ने कार चलाने के लिए किस एआई मॉडल का इस्तेमाल किया? इस परीक्षण के लिए ओपनएआई के जीपीटी-6 एस्ट्रा का उपयोग किया गया, जिसे विंडस्क्रीन कैमरों और स्टीयरिंग सिस्टम से जोड़ा गया था। 2. परीक्षण के दौरान कौन सी कार इस्तेमाल की गई थी? परीक्षण के लिए 2024 मॉडल की टोयोटा कोरोला का उपयोग किया गया था। 3. ड्राइविंगबेंच परीक्षण में विभिन्न एआई मॉडल्स का प्रदर्शन कैसा रहा? ड्राइविंगबेंच ट्रैक पर केवल एस्ट्रा ही पूरा चक्कर लगा सका, जबकि क्लॉड फेबल 5.1 ने 45 प्रतिशत और ग्रॉक ने केवल 11 प्रतिशत दूरी तय की। 4. क्या एआई मॉडल्स को कार चलाने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया था? नहीं, इन मॉडल्स को गाड़ी चलाने का कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं दिया गया था; उनकी यह क्षमता मल्टीमॉडल और थ्रीडी रीजनिंग ट्रेनिंग के दौरान स्वाभाविक रूप से उभरी। https://trendkia.com/ai/openai-ke-gpt-6-astra-ne-snbhala-toyota-corolla-ka-stiyaringa-draiva-thru-se-khana-lane-men-mili-saphalata-44896 TrendKia — Har trend, sabse pehle.