# पहाड़ों पर एआई चैटबॉट्स की गलत सलाह से भटक रहे ट्रैकर्स, बढ़ रहा रेस्क्यू का खतरा

> जंगलों और पहाड़ों पर ट्रैकिंग के लिए एआई चैटबॉट्स पर भरोसा करना लोगों को भारी पड़ रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि बॉट्स की गलत जानकारी और इंसानी दिमाग का सोचना बंद कर देना जानलेवा साबित हो सकता है।

**Type:** article · **Category:** एआई · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/ai/paharon-para-ai-chaitabotsa-ki-galata-salaha-se-bhataka-rahe-traikarsa-barha-raha-reskyu-ka-khatara-54426 · **Language:** Hindi
**Tags:** आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, चैटबॉट्स, हाइकिंग, माउंट शास्ता, सर्च एंड रेस्क्यू, ट्रैकिंग सुरक्षा, क्लाउड, चैटजीपीटी

पहाड़ों और घने जंगलों की ट्रैकिंग पर निकलने वाले कई लोग अब पूरी तैयारी करने के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई पर आंख मूंदकर भरोसा करने लगे हैं। यूएस फॉरेस्ट सर्विस के माउंट शास्ता वाइल्डरनेस क्लाइम्बिंग एंड एवलांच सेंटर के प्रोग्राम मैनेजर निक मेयर्स के अनुसार, कई लोग बिना किसी बुनियादी रिसर्च के आते हैं, लेकिन जो लोग एआई की मदद लेकर योजना बनाते हैं, वे अक्सर अपना विवेक इस्तेमाल करना ही छोड़ देते हैं। हाल ही में बीस-बीस साल के तीन नौजवानों को इसी तरह की लापरवाही के बाद रेस्क्यू टीम की मदद से बचाना पड़ा था।

## माउंट शास्ता से लेकर ब्रिटिश कोलंबिया तक भटके लोग
जंगलों और बीहड़ इलाकों में एआई के झांसे में आने का यह अकेला मामला नहीं है। माउंट शास्ता पर ही एक महिला ने 'नो कैंपिंग' यानी तंबू लगाने की मनाही वाले साइनबोर्ड के ठीक पास अपना टेंट लगा लिया। जब उनसे पूछा गया, तो उन्होंने पूरे आत्मविश्वास से दलील दी कि उन्हें वहां तंबू लगाने का पूरा हक है क्योंकि एक एआई चैटबॉट ने उन्हें ऐसा करने की मंजूरी दी थी। इसी तरह, निक मेयर्स की टीम का सामना एक ऐसे व्यक्ति से हुआ जो एक ट्रैकिंग ट्रेलहेड के पास भटक रहा था। उस व्यक्ति के हाथ में एआई द्वारा तैयार किया गया एक नक्शा था, जिसमें आसपास के पहाड़ की अहम भौगोलिक जगहों को गलत दिशा में दिखाया गया था।

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में भी ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया, जहां रेस्क्यू हेलीकॉप्टर की टीम ने क्राउन माउंटेन के पिछले हिस्से में मौजूद विडोमेकर एरीट की एक खतरनाक चट्टान की धार से 16 साल के एक हाइकर को सुरक्षित निकाला। इस किशोर ने अपनी ट्रैकिंग यात्रा की योजना बनाने में एंथ्रोपिक के चैटबॉट क्लाउड की मदद ली थी। जब यह खबर सामने आई तो अमेरिका और कनाडा में तेजी से चर्चा का विषय बन गई, हालांकि बाद में उस लड़के ने बताया कि उसने गूगल मैप्स और लोकप्रिय हाइकिंग ऐप ऑलट्रेल्स की भी सलाह ली थी।

## वायोमिंग के ग्रांड टेटन नेशनल पार्क में बढ़ा एआई का दखल
वायोमिंग राज्य के ग्रांड टेटन नेशनल पार्क में भी हालात तेजी से बदल रहे हैं। पार्क सुपरिंटेंडेंट चिप जेनकिंस का कहना है कि यात्रा से जुड़ी जानकारियों के लिए एआई का सहारा लेने वाले सैलानियों की संख्या में बीते एक साल के दौरान भारी उछाल आया है। पहले जहां शून्य फीसदी लोग इसका इस्तेमाल करते थे, वहीं अब 26 फीसदी आगंतुक एआई की मदद लेने की बात कह रहे हैं। जेनकिंस का मानना है कि यह चलन आगे और तेजी से बढ़ेगा।

हालांकि, निक मेयर्स का कहना है कि यह देखना अभी बाकी है कि क्या एआई के बढ़ते इस्तेमाल से जंगलों में होने वाले हादसों और रेस्क्यू अभियानों में वास्तव में भारी इजाफा होगा या नहीं। उत्तरी कैलिफोर्निया के विशाल जंगली इलाके की निगरानी करने वाला उनका दफ्तर हर साल औसतन करीब एक दर्जन रेस्क्यू ऑपरेशन चलाता है, और साल 2026 भी औसतन ऐसा ही नजर आ रहा है। वहीं, वायोमिंग में सर्च एंड रेस्क्यू कॉल्स की संख्या साल 2025 की तुलना में घटी है। वायोमिंग में साल 2024 में कुल 377 कॉल आई थीं और 2025 में 466 कॉल दर्ज की गई थीं, जबकि 2026 में अब तक केवल 312 कॉल ही दर्ज हुई हैं।

## सोशल मीडिया के बाद अब एआई बना नई मुसीबत
बचाव दल के अनुभवी कर्मियों का मानना है कि चैटबॉट्स कोई पहली तकनीक नहीं हैं जो लोगों को परेशानी में डाल रही हैं, बल्कि यह नई तरह की मुसीबतें खड़ी करने वाला सबसे ताजा जरिया भर है। करीब एक दशक पहले जब बैकपैकर्स, हाइकर्स और पर्वतारोहियों ने अपनी मंजिलों, रास्तों और प्रेरणा के लिए इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों पर निर्भर होना शुरू किया था, तब भी जानलेवा परिणाम देखने को मिले थे। उससे भी पहले, स्मार्टफोन कनेक्टिविटी और गूगल मैप्स पर अत्यधिक निर्भरता की वजह से कई ट्रैकर रास्ता भटक जाया करते थे।

कोलोराडो के कानूनी सलाहकार और सर्च एंड रेस्क्यू वॉलंटियर जिम मॉस ने बताया कि पिछले दो दशकों में मीडिया के जरिए लोगों को घर से बाहर निकलकर प्रकृति के बीच जाने के लिए बहुत ज्यादा प्रेरित किया गया है। इसके चलते अब भारी तादाद में लोग खुले जंगलों और पहाड़ों का रुख कर रहे हैं। मॉस का कहना है कि अब किसी रोबोट की संदिग्ध सलाह इन तमाम लोगों को किस दिशा में धकेलेगी, यह समझना अभी बाकी है।

## कॉग्निटिव सरेंडर और मनगढ़ंत जवाबों का दोहरा खतरा
साउथ कैरोलिना स्थित क्लेमसन यूनिवर्सिटी में ह्यूमन-सेंटर्ड कंप्यूटिंग के प्रोफेसर क्रिस फ्लैथमैन ने एआई और रेस्क्यू अभियानों पर अध्ययन किया है। उनका कहना है कि मार्गदर्शन के लिए एआई चैटबॉट का सहारा लेना अनोखे जोखिमों के साथ आता है। चैटबॉट्स अक्सर 'हलुसिनेट' करते हैं, यानी वे पूरी तरह गलत और झूठी जानकारी को भी बेहद भरोसेमंद और ठोस अंदाज में पेश करते हैं। इसके अलावा, इसका लगातार इस्तेमाल 'कॉग्निटिव सरेंडर' यानी बौद्धिक समर्पण की स्थिति पैदा कर देता है।

फ्लैथमैन के अनुसार, जब इंसान एआई सिस्टम के साथ काम करते हैं, तो वे कभी-कभी इसमें इतने गहरे उतर जाते हैं कि खुद अपने विवेक और तार्किक सोच से काम लेना पूरी तरह बंद कर देते हैं। जब कोई एआई मॉडल किसी अपरिचित विषय पर खुद को विशेषज्ञ की तरह पेश करता है, तो आम यूजर उसकी गलती नहीं पकड़ पाता क्योंकि यूजर के पास खुद उस विषय की विशेषज्ञता नहीं होती। जब कोई व्यक्ति गंभीर सोचना बंद कर देता है, तो बीहड़ और तनावपूर्ण हालात में दोबारा सही फैसला लेना उसके लिए बेहद कठिन हो जाता है।

चैटजीपीटी या क्लाउड जैसे चैटबॉट्स अक्सर वही बताते हैं जो यूजर सुनना चाहता है, और वे इसे बड़े अधिकार भाव से पेश करते हैं, भले ही उनका स्रोत कितना भी अविश्वसनीय क्यों न हो। वे रेडिट थ्रेड्स या यूट्यूब के पुराने वीडियो से डेटा उठाकर ऐसे रास्ते सुझा सकते हैं जो सुनने में तो प्रामाणिक लगते हैं लेकिन पूरी तरह मनगढ़ंत हो सकते हैं। फ्लैथमैन ने स्पष्ट किया कि टिकटॉक और इंस्टाग्राम सिर्फ प्रेरणा देते हैं, जबकि एआई सही या गलत निर्देश देने के साथ-साथ हौसला भी बढ़ाता है।

## सफर पर निकलने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जांचें जानकारी
विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि तकनीक चाहे जो भी हो, किसी भी नए और बीहड़ इलाके में जाने से पहले जानकारी को हमेशा अधिकृत स्रोतों से सत्यापित करना चाहिए। इसके लिए सरकारी एजेंसियों के नवीनतम नक्शे, आधिकारिक वेबसाइटें, ट्रेल एसोसिएशन के पोर्टल और मान्यता प्राप्त गाइडबुक्स का सहारा लेना चाहिए। सबसे बेहतर तरीका यह है कि किसी स्थानीय गाइड, नेशनल फॉरेस्ट अधिकारी या पार्क रेंजर से सीधे बातचीत की जाए।

निक मेयर्स का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति ऐसी जगहों पर जा रहा है जहां छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है, तो उसे अपनी यात्रा की योजना और तैयारियों को पूरी गंभीरता से लेना चाहिए।

## इसका आप पर असर
पहाड़ों और घने जंगलों में घूमने वाले ट्रैकर्स के लिए एआई चैटबॉट्स पर आंख मूंदकर भरोसा करना बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता है।

- **रास्तों की प्रामाणिकता:** चैटबॉट्स अक्सर काल्पनिक या गलत भौगोलिक नक्शे और रास्ते सुझाते हैं। किसी भी अनजान ट्रेल पर निकलने से पहले आधिकारिक सरकारी एजेंसी के मैप से रूट की पुष्टि जरूर करें।
- **नियमों और परमिट का उल्लंघन:** एआई बॉट नो-कैंपिंग जोन में भी तंबू लगाने जैसी गलत सलाह दे सकते हैं। वन विभाग के स्थानीय नियमों और जरूरी परमिट की जानकारी हमेशा पार्क रेंजर से सीधे हासिल करें।
- **इमरजेंसी और रेस्क्यू का जोखिम:** गलत दिशा में भटकने पर मोबाइल नेटवर्क न होने से मदद मिलना बेहद मुश्किल हो जाता है। हमेशा ऑफलाइन जीपीएस मैप और स्थानीय गाइडबुक साथ रखें ताकि रेस्क्यू की नौबत न आए।
- **मानसिक निर्भरता से बचाव:** तकनीक पर पूरी तरह निर्भर होकर खुद का विवेक इस्तेमाल करना बंद न करें। किसी भी यात्रा की योजना बनाते समय मौसम और जमीनी हकीकत का खुद आकलन करें।

## ऐसा क्यों हुआ
यह स्थिति इसलिए पैदा हो रही है क्योंकि लोग एआई चैटबॉट्स की अधिकारपूर्ण भाषा के प्रभाव में आकर अपना खुद का विवेक लगाना छोड़ रहे हैं और इन टूल्स द्वारा दी गई गलत जानकारियों की पड़ताल नहीं कर रहे हैं।

- **सीधा कारण:** चैटबॉट्स अक्सर पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट, रेडिट थ्रेड्स और यूट्यूब वीडियो से डेटा जुटाकर रास्ते बनाते हैं, जिससे वे बिना किसी सत्यापन के पूरी तरह गलत या काल्पनिक दिशा-निर्देश दे देते हैं।
- **बौद्धिक समर्पण की स्थिति:** शोधकर्ताओं के अनुसार यूजर एआई के साथ बातचीत में इतने खो जाते हैं कि वे खुद सोचना बंद कर देते हैं, जिसे 'कॉग्निटिव सरेंडर' कहा जाता है। अनजान विषय पर एआई के आत्मविश्वास को सामान्य लोग पकड़ नहीं पाते।
- **तकनीक पर निर्भरता का इतिहास:** करीब एक दशक पहले इंस्टाग्राम की तस्वीरों और उससे पहले गूगल मैप्स पर अत्यधिक निर्भरता के कारण भी लोग इसी तरह रास्तों से भटकते रहे हैं। एआई उसी तकनीकी निर्भरता का नया रूप है।
- **प्रकृति की ओर बढ़ता रुझान:** पिछले दो दशकों में मीडिया अभियानों के चलते बड़ी संख्या में गैर-अनुभवी लोग जंगलों और पहाड़ों में जा रहे हैं, जो बिना तैयारी के चैटबॉट के सुझावों को सच मान लेते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. हाइकर्स जंगलों में रास्ता क्यों भटक रहे हैं?
वे यात्रा की योजना बनाने के लिए एआई चैटबॉट्स पर निर्भर हो रहे हैं, जो अक्सर गलत और काल्पनिक नक्शे या रास्ते बता देते हैं।

### 2. माउंट शास्ता पर महिला ने नो-कैंपिंग जोन में तंबू क्यों लगाया था?
उस महिला ने दावा किया कि एक एआई चैटबॉट ने उसे वहां तंबू लगाने की अनुमति दी थी, इसलिए वह वहां रुकी।

### 3. कनाडा के क्राउन माउंटेन पर फंसे 16 वर्षीय हाइकर ने किस चैटबॉट का इस्तेमाल किया था?
उसने अपनी यात्रा की योजना बनाने के लिए एंथ्रोपिक के क्लाउड चैटबॉट के साथ गूगल मैप्स और ऑलट्रेल्स की मदद ली थी।

### 4. ग्रांड टेटन नेशनल पार्क में एआई इस्तेमाल करने वाले सैलानियों की संख्या कितनी बढ़ी है?
पार्क में यात्रा की जानकारी के लिए एआई का उपयोग करने वाले आगंतुकों का अनुपात शून्य से बढ़कर 26 प्रतिशत हो गया है।

### 5. कॉग्निटिव सरेंडर क्या होता है?
यह वह स्थिति है जब इंसान एआई पर इतना अधिक भरोसा करने लगता है कि वह खुद तार्किक रूप से सोचना और फैसले लेना बंद कर देता है।

### 6. जंगली इलाकों में जाने से पहले विशेषज्ञों की क्या सलाह है?
विशेषज्ञों का कहना है कि जानकारी को आधिकारिक वन विभाग के नक्शों, गाइडबुक्स या स्थानीय पार्क रेंजर से मिलकर सत्यापित करना चाहिए।

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