सिलिकॉन वैली की नीतियों और एआई के दौर पर पैटी हैरिसन ने उठाए कड़े सवाल, तकनीकी दुनिया पर कही बड़ी बात अभिनेत्री और कॉमेडियन पैटी हैरिसन ने आधुनिक सोशल मीडिया एल्गोरिदम, एआई के अंधाधुंध प्रसार और तकनीकी कंपनियों के पूंजीवादी रवैये पर अपनी बेबाक राय रखी है। आधुनिक दौर में तकनीकी प्रगति और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को लेकर एक समय जो उम्मीदें और आकर्षण देखा जाता था, अब वही व्यवस्था गंभीर सवालों के घेरे में खड़ी नजर आ रही है। स्टैंड-अप कॉमेडी और अभिनय की दुनिया में अपनी अनोखी पहचान बनाने वाली पैटी हैरिसन ने हाल ही में तकनीकी उद्योग के मौजूदा स्वरूप, बड़े कॉर्पोरेट दिग्गजों की कार्यप्रणाली और समाज पर डिजिटल माध्यमों के गहरे दुष्प्रभावों को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी है। पांच बड़े तकनीकी नेतृत्वकर्ताओं—इलॉन मस्क, सैम ऑल्टमैन, डारियो अमोदेई, मार्क जुकरबर्ग और जेफ बेजोस (लॉरेन सांचेज बेजोस के साथ)—के प्रतीकात्मक चित्रण के संदर्भ में चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह कभी स्वतंत्रता और जुड़ाव का साधन माना जाने वाला इंटरनेट आज एल्गोरिदम और मुनाफे के जाल में तब्दील हो चुका है। लंदन में अपने सोल्ड-आउट शो 'जस्ट आयरनिंग सम थिंग्स आउट!' और एडिनबर्ग फेस्टिवल फ्रिंज में एक सप्ताह के प्रदर्शन के तुरंत बाद हैरिसन ने तकनीकी परिदृश्य के कई पहलुओं का विश्लेषण किया। कॉमेडी, पहचान और समाज से जुड़ाव पैटी हैरिसन ने अपने करियर की शुरुआत से ही ट्रांसजेंडर पहचान को कभी छिपाया नहीं, हालांकि उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि उनका हास्य केवल किसी खास पहचान के दायरे में बंधकर नहीं रहना चाहिए। जब किसी काम में किसी पात्र को स्पष्ट रूप से ट्रांसजेंडर नहीं दिखाया जाता, तो उस कलात्मक आजादी को वह बहुत महत्वपूर्ण मानती हैं। उनका मानना है कि जब तक किसी मजाक या कथ्य के लिए यह केंद्रीय न हो, तब तक इसे एक स्वाभाविक और खुला तत्व बने रहना चाहिए। हास्य की दुनिया में लोग अक्सर राजनीतिक या सामाजिक दबाव महसूस करते हैं, लेकिन हैरिसन के अनुसार जब कोई व्यक्ति पहले से ही एक संवेदनशील सामाजिक वास्तविकता जीता है, तो उसका पूरा अनुभव स्वतः ही राजनीतिक हो जाता है। समाज की वास्तविकताओं को समझना और उन पर टिप्पणी करना ही हास्य की बुनियादी ताकत रही है। समकालीन परिवेश में डिजिटल मीडिया की पहुंच और उसके एकाधिकार ने लोगों को एक सीमित दायरे में कैद कर दिया है। हैरिसन के अनुसार, वर्तमान स्थिति में ऐसा लगता है जैसे उपयोगकर्ताओं को अत्यंत सावधानीपूर्वक एक ऐसे ढांचे में धकेला जा चुका है जहां अभिव्यक्ति पर गहरा नियंत्रण है। जब दुनिया में भयावह घटनाएं घट रही हों और उनके साथ इंटरनेट पर सतही एआई सामग्री की भरमार हो, तो आम लोगों के भीतर एक भारी मानसिक विरोधाभास पैदा होता है। समाचारों को सोशल मीडिया के साथ मिलाकर परोसने की आदत ने पूरे परिदृश्य को विषाक्त बना दिया है, क्योंकि वहां केवल उत्तेजक और ध्यान खींचने वाली बातों को बढ़ावा मिलता है। सोशल मीडिया की बदलती कार्यशैली और प्लेटफॉर्म्स का असर शुरुआती दौर के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और आज के सोशल मीडिया नेटवर्क के बीच जमीन-आसमान का अंतर आ चुका है। एक दशक पहले जब ज़ांगा या माइस्पेस जैसे मंच सक्रिय थे, तब लोग वहां केवल अपने शौक, हास्य और आपसी संवाद के लिए जुड़ते थे। ग्रामीण ओहायो में पली-बढ़ी हैरिसन के लिए उस दौर का इंटरनेट बाहरी दुनिया से संपर्क साधने और अपनी रुचियों वाले लोगों को खोजने का एक बड़ा माध्यम था। उस समय विज्ञापनों का ऐसा दबाव नहीं था, न ही उपयोगकर्ताओं पर हर सेकंड एल्गोरिदम का पहरा था। यूट्यूब के शुरुआती दिनों में जब पहली बार कोई विज्ञापन देखने को मिला था, तब दर्शकों के लिए वह एक बहुत चौंकाने वाला बदलाव था। लेकिन समय के साथ इन नेटवर्कों का पूरा ढांचा पूरी तरह बदल गया। हैरिसन को पूर्व में ट्विटर पर एक हास्यास्पद पैरोडी गतिविधि के चलते प्रतिबंधित कर दिया गया था। कंपनी का स्वामित्व बदलने और उसका नाम X किए जाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप और कान्ये वेस्ट जैसे चर्चित लोगों के खातों से प्रतिबंध हटा दिया गया, लेकिन कई अन्य खाते अभी भी निलंबित हैं। हैरिसन का मानना है कि आधुनिक सोशल मीडिया एक ऐसी निगरानी व्यवस्था बन चुका है जहां उपयोगकर्ताओं का कीमती समय बर्बाद होता है और उसका सीधा फायदा बड़ी कंपनियों के मुनाफे को बढ़ाता है। विडंबना यह है कि पूरा वैश्विक आर्थिक ढांचा और रोजगार के कई अवसर अब इन्हीं माध्यमों से जुड़ गए हैं, जिससे पूरी तरह अलग हो पाना आम लोगों के लिए बहुत कठिन बना दिया गया है। रोबोटिक्स, पूंजीवाद और वास्तविक दुनिया का यथार्थ बचपन में विज्ञान कथाओं और भविष्यवादी कल्पनाओं से गहरे प्रभावित होने की बात साझा करते हुए हैरिसन बताती हैं कि वह 'द मैट्रिक्स', 'एलियंस' और 'घोस्ट इन द शेल' जैसी रचनाओं की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं। उस समय एक ऐसी दुनिया की कल्पना की जाती थी जहां स्वायत्त गाड़ियां होंगी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता होगी और समाज की भलाई के लिए रोबोट काम करेंगे। हालांकि, वास्तविक दुनिया के पूंजीवादी ढांचे ने इस तकनीकी स्वप्न को पूरी तरह बदल दिया। मुनाफे की होड़ ने उन प्रौद्योगिकियों के खतरनाक उपयोग को भी बढ़ावा दिया, जिन्हें शुरू में हानिरहित बताया गया था। बोस्टन डायनेमिक्स के चार पैरों वाले रोबोट्स और एडवांस्ड डिफेंस रिसर्च से जुड़ी तकनीकों का उदाहरण देते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि किस तरह युद्ध क्षेत्रों में ऐसे उपकरणों का परीक्षण और उपयोग सामने आया है। गाजा में उत्पन्न मानवीय संकट और वहां रोबोटिक तकनीकों के प्रयोग को लेकर उन्होंने गहरी चिंता जताई। तकनीक का जो रूप मानवता की सेवा और प्रगति के लिए होना चाहिए था, वह अब अक्सर निगरानी, हथियारों और सैन्य अभियानों का जरिया बनता दिख रहा है। जब तकनीक जनहित के बजाय केवल कॉर्पोरेट और रक्षा हितों की पूर्ति में लग जाती है, तो शोध और विज्ञान की मूल भावना को भारी आघात पहुंचता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रचनात्मक क्षेत्र पर संकट कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के तेजी से बढ़ते उपयोग पर चर्चा करते हुए हैरिसन ने डैल-ई जैसे शुरुआती टूल्स के अपने अनुभवों को याद किया। उनका मानना है कि तकनीक के रूप में यह प्रभावशाली हो सकती है, लेकिन जिस गति से बिना किसी सख्त जांच-पड़ताल और सामाजिक सहमति के इसे लागू किया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। विशाल डेटा केंद्रों के कारण पर्यावरण पर पड़ रहे भारी दबाव और ऊर्जा की खपत एक ऐसा विषय है जिस पर तुरंत गंभीर विचार करने की आवश्यकता है। केवल व्यावसायिक दौड़ में आगे निकलने के लिए कई बड़ी कंपनियां सुरक्षा मानकों और जनहित की अनदेखी कर रही हैं। कला और रचनात्मक क्षेत्र में एआई के बढ़ते दखल पर उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर मौजूद किसी भी सामग्री का एआई मॉडलों द्वारा अवशोषण अनिवार्य हो चुका है। यही वजह है कि वह लाइव प्रदर्शनों और दर्शकों के साथ सीधे संवाद को सबसे सुरक्षित और सच्चा माध्यम मानती हैं। मंच पर दर्शकों की वास्तविक उपस्थिति, जीवंत ऊर्जा और मानवीय भावना को कोई भी एआई प्रतिकृति पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकती। डिजिटल दुनिया में जहां हर चीज को रिकॉर्ड और रीसायकल किया जा रहा है, वहां एक बार के अनूठे लाइव अनुभव की अहमियत और बढ़ जाती है। एल्गोरिदम का ध्रुवीकरण और डिजिटल स्वामित्व का सवाल आज के डिजिटल वातावरण में एल्गोरिदम इस तरह तैयार किए गए हैं कि वे उपयोगकर्ताओं को भावनात्मक रूप से उत्तेजित करें। जब कोई हास्य सामग्री अपनी मूल संदर्भ से कटकर अनजान दर्शकों के फीड में फेंक दी जाती है, तो वहां अनावश्यक विवाद और नफरत पैदा होती है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर तकनीकी प्लेटफॉर्म्स पर स्पष्ट दोहरे मानदंड देखने को मिलते हैं। जहां एक तरफ सामान्य हास्य या दोस्तों के बीच बातचीत में इस्तेमाल हुए साधारण शब्दों को भी स्वचालित एआई सिस्टम आपत्तिजनक मानकर हटा देते हैं, वहीं दूसरी तरफ वास्तविक अपमान, गाली-गलौज और गंभीर धमकियों को अक्सर नियमों के अनुरूप बताकर छोड़ दिया जाता है। इसके साथ ही डिजिटल युग में संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व को लेकर भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पहले जब लोग सीडी, डिस्क या भौतिक वस्तुएं खरीदते थे, तो वे उस सामग्री के वास्तविक स्वामी होते थे। आज डिजिटल मार्केटप्लेस में किसी भी सामग्री को सिर्फ तब तक एक्सेस किया जा सकता है जब तक कोई कंपनी उसे अपने प्लेटफॉर्म पर रखना चाहती है। यही कारण है कि अब लोग दोबारा भौतिक प्रारूपों, प्रिंट पत्रिकाओं और वास्तविक अनुभवों की ओर लौटने लगे हैं। पैटी हैरिसन के अनुसार, व्यवस्थागत बदलाव और सामाजिक चेतना ही भविष्य में तकनीक को सही दिशा में ले जाने का एकमात्र रास्ता साबित हो सकती है। इसका आप पर असर तकनीकी कंपनियों के कारोबारी मॉडल और सोशल मीडिया के एल्गोरिदम का आम पाठकों के मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल अधिकारों पर सीधा असर पड़ रहा है। • डिजिटल प्राइवेसी और सुरक्षा: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निजी डेटा और बातचीत की निगरानी लगातार बढ़ रही है। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन कुछ भी साझा करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। • मानसिक तनाव और स्क्रीन टाइम: उत्तेजक सामग्री और एल्गोरिदम आधारित फीड्स उपयोगकर्ताओं के तनाव स्तर को बढ़ाते हैं। पाठक अपने दैनिक स्क्रीन समय को सीमित करके और नोटिफिकेशन बंद करके इस मानसिक दबाव से बच सकते हैं। • डिजिटल संपत्तियों का स्वामित्व: ऑनलाइन खरीदे गए सॉफ्टवेयर, गेम्स और मीडिया पर कंपनियों का पूरा नियंत्रण रहता है। यदि कोई कंपनी अपना स्टोर बंद करती है तो खरीदार का एक्सेस खत्म हो सकता है, इसलिए जरूरी डेटा का ऑफलाइन बैकअप रखना आवश्यक है। • एआई सामग्री की पहचान: इंटरनेट पर सिंथेटिक और अनवेरिफाइड एआई सामग्री की बाढ़ से गलत सूचनाओं का खतरा बढ़ गया है। किसी भी संवेदनशील खबर या तस्वीर पर विश्वास करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से पुष्टि करना जरूरी हो गया है। ऐसा क्यों हुआ यह विषय इसलिए सामने आया क्योंकि तकनीकी उद्योग में हाल के वर्षों में आए बदलावों और एआई के अनियंत्रित विस्तार ने रचनाकारों और उपयोगकर्ताओं के बीच गहरी हताशा पैदा कर दी है। • एल्गोरिदम आधारित मुद्रीकरण: शुरुआती इंटरनेट के सामुदायिक स्वरूप को हटाकर विज्ञापन और सहभागिता बढ़ाने के लिए एल्गोरिदम लागू किए गए। इससे रचनात्मक सामग्री के स्थान पर केवल उत्तेजक और ध्यान खींचने वाली पोस्ट्स को प्राथमिकता मिलने लगी। • एआई का अनियंत्रित विस्तार: कॉर्पोरेट प्रतिस्पर्धा के चलते बड़ी तकनीकी कंपनियों ने बिना पर्याप्त सुरक्षा समीक्षा और पर्यावरणीय आकलन के जनरेटिव एआई उत्पादों को बाजार में उतार दिया। इस जल्दबाजी ने रचनाकारों और आम जनता में असंतोष पैदा किया। • कॉर्पोरेट प्राथमिकताओं में बदलाव: नवोन्मेष और सामाजिक कल्याण के शुरुआती वादों की जगह रक्षा समझौतों और अंधाधुंध मुनाफे की होड़ ने ले ली। इसके परिणामस्वरूप तकनीकी जगत के मानवीय पहलू को भारी नुकसान पहुंचा है। सवाल-जवाब 1. पैटी हैरिसन ने किन तकनीकी दिग्गजों पर टिप्पणी की है? उन्होंने इलॉन मस्क, सैम ऑल्टमैन, डारियो अमोदेई, मार्क जुकरबर्ग और जेफ बेजोस की कार्यप्रणाली और उनके नेतृत्व में चल रही तकनीकी व्यवस्था पर टिप्पणी की है। 2. हैरिसन के अनुसार आधुनिक सोशल मीडिया में क्या मुख्य समस्या है? उनका मानना है कि आज के प्लेटफॉर्म्स उपयोगकर्ताओं को उत्तेजित करने वाले एल्गोरिदम और अत्यधिक विज्ञापनों पर निर्भर हैं, जिससे लोगों का मानसिक स्वास्थ्य और समय बर्बाद होता है। 3. पैटी हैरिसन लाइव कॉमेडी शो को डिजिटल वीडियो से बेहतर क्यों मानती हैं? वह मानती हैं कि एक कमरे में दर्शकों के साथ रूबरू होने का जीवंत अनुभव सच्चा होता है और उसे कोई भी एआई या डिजिटल माध्यम चुरा या दोहरा नहीं सकता। 4. तकनीक और रोबोटिक्स को लेकर हैरिसन की क्या चिंता है? उन्होंने चिंता जताई कि शांति और सहायता के नाम पर विकसित की गई रोबोटिक तकनीकों का इस्तेमाल अब युद्ध क्षेत्रों और निगरानी में किया जा रहा है। https://trendkia.com/ai/patti-harrison-ne-silicon-valley-aura-ai-para-uthae-gnbhira-savala-36446 TrendKia — Har trend, sabse pehle.