# रोबोटिक्स और वर्ल्ड मॉडल्स को असली दुनिया सिखाने के लिए गेमिंग डेटा पर दांव

> आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शोधकर्ता अब रोबोटिक्स और ऑटोनॉमस सिस्टम्स के लिए टेक्स्ट के बजाय वीडियो गेमिंग के विजुअल और कंट्रोलर इनपुट डेटा का इस्तेमाल वर्ल्ड मॉडल्स तैयार करने में कर रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** एआई · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/ai/robotics-aura-world-models-ko-asali-duniya-sikhane-ke-lie-gaming-data-para-danva-40684 · **Language:** Hindi
**Tags:** आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वर्ल्ड मॉडल्स, रोबोटिक्स, वीडियो गेम्स, एनवीडिया, मशीन लर्निंग, टेक्नोलॉजी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में अब यह धारणा तेजी से मजबूत हो रही है कि केवल शब्दों और टेक्स्ट पर प्रशिक्षित बड़े लैंग्वेज मॉडल्स यानी एलएलएम भौतिक दुनिया की पेचीदगियों को समझने में हमेशा सीमित साबित होंगे। टेक्स्ट पर महारत हासिल करने वाले मॉडल्स असल दुनिया में सेल्फ-ड्राइविंग कारों को चलाने, रोबोटिक हाथों को नाजुक काम सौंपने या अत्यधिक सटीकता की मांग करने वाले अभियानों को पूरा करने के लिए जरूरी समझ से महरूम रह सकते हैं। इसी बड़ी बाधा को दूर करने के लिए मशहूर शोधकर्ता फेई-फेई ली और यान लेकन जैसे बड़े वैज्ञानिक अपना पूरा ध्यान एक अलग श्रेणी की तकनीक पर केंद्रित कर रहे हैं, जिसे वर्ल्ड मॉडल्स कहा जाता है।

 भौतिक नियमों और वास्तविक दुनिया के विज्ञान में पारंगत होने के लिए वर्ल्ड मॉडल्स को केवल तस्वीरों या वीडियो की नहीं, बल्कि दृश्यों और उनके साथ जुड़ी इंसानी हरकतों के तालमेल की आवश्यकता होती है। मिसाल के तौर पर, यदि किसी फैक्ट्री के फर्श पर रोबोटिक आर्म से किसी नाजुक उपकरण को सही जगह रखवाना हो, तो मॉडल को न केवल उस कारखाने की वीडियो फुटेज देखनी होगी, बल्कि यह भी समझना होगा कि वस्तु को कितनी मजबूती से पकड़ना है और उस पर कितना घुमाव यानी टॉर्क लगाना है। टेक्स्ट पर तैयार एलएलएम को तो इंटरनेट पर अथाह सामग्री मिल गई, मगर वर्ल्ड मॉडल्स विकसित करने वाली प्रयोगशालाओं के पास कारण और प्रभाव सिखाने वाला ऐसा कोई विशाल डेटाबेस उपलब्ध नहीं है।

 

## इंटरनेट पर कारण और प्रभाव वाले डेटा का अभाव
 यूनिवर्सिटी ऑफ सरे में एआई विशेषज्ञ और एसोसिएट प्रोफेसर शियाशियान झू का मानना है कि वर्ल्ड मॉडल्स के निर्माण में सबसे अहम कड़ी क्रिया और उसके नतीजे का संबंध समझना है। इंटरनेट पर लिखित सामग्री की कोई कमी नहीं है, लेकिन भौतिक घटनाओं के पीछे छिपे कारण और उनके प्रत्यक्ष परिणामों का दर्ज रिकॉर्ड बेहद सीमित मात्रा में मौजूद है। जब तक कोई सिस्टम यह नहीं सीखेगा कि किसी वस्तु को धकेलने, गिराने या मोड़ने पर क्या घटित होता है, तब तक वह भौतिक दुनिया में स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाएगा।

 ब्रिटेन का एक स्टार्टअप वर्ल्डमॉडलडेटा, जिसे यान लेकन सलाह दे रहे हैं, इसी भारी कमी को दूर करने की कोशिश में जुटा है। यह कंपनी वीडियो गेमिंग स्टूडियो के पास जमा होने वाले विशाल कंट्रोलर इनपुट और गेमप्ले डेटा को वर्ल्ड मॉडल्स की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल करने योग्य डेटासेट में बदल रही है। गेमिंग स्टूडियो के लिए यह डेटा आमतौर पर सिर्फ एक उप-उत्पाद यानी बेकार पड़ा रिकॉर्ड भर होता है, मगर एआई शोध के नजरिए से यह सोने की खान साबित हो सकता है। जनरल इंट्यूशन और नियांटिक जैसी कुछ कंपनियां पहले से ही अपने स्वयं के प्लेटफॉर्म से वीडियो गेम डेटा इकट्ठा करके मॉडल्स बना रही हैं। इसके विपरीत, वर्ल्डमॉडलडेटा खुद को एक डेटा ब्रोकर के रूप में पेश कर रहा है, जो अलग-अलग गेमिंग स्टूडियो से संपर्क साधकर डेटा को व्यवस्थित करता है ताकि एआई लैबों को दर्जनों डेवलपर्स के साथ अलग से समझौते न करने पड़ें।

 

## गेमिंग के विशाल अनुभवों से सीखेगी कृत्रिम बुद्धिमत्ता
 वर्ल्डमॉडलडेटा की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिया लूकास का कहना है कि आज दुनिया में लाखों बेहतरीन वीडियो गेम्स मौजूद हैं, जो दिन-प्रतिदिन वास्तविक दुनिया के भौतिक वातावरण के और अधिक करीब पहुंचते जा रहे हैं। उनका तर्क है कि वीडियो गेम्स में मिलने वाले विशाल, विविध और प्रचुर अनुभवों को एआई को सिखाने के लिए काम में क्यों न लाया जाए।

 शोधकर्ता मोटे तौर पर यह मानकर चल रहे हैं कि जिस तरह बड़े लैंग्वेज मॉडल्स ने डेटा की मात्रा बढ़ने के साथ अपनी क्षमता में जबरदस्त सुधार दिखाया, ठीक उसी तरह वर्ल्ड मॉडल्स का प्रदर्शन भी उनके ट्रेनिंग डेटासेट के आकार के साथ बेहतर होगा। हालांकि इस परिकल्पना का पूरी तरह से परखा जाना अभी बाकी है, लेकिन इस मान्यता के कारण उपयुक्त ट्रेनिंग डेटा की कमी फिलहाल इस तकनीक के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई है।

 डेटा जुटाने के लिए कुछ प्रयोगशालाओं ने परीक्षण के दौरान इंसानों और रोबोटों पर सेंसर लगाकर खुद डेटा रिकॉर्ड करने का प्रयास किया। यह तरीका बहुत ही सीमित मात्रा में जानकारी जुटा पाता है और उन दुर्लभ या अप्रत्याशित परिस्थितियों को पूरी तरह छोड़ देता है, जिनका सामना किसी मशीन को असल दुनिया में करना पड़ता है। वेंचर कैपिटल फर्म खोसला वेंचर्स की पार्टनर निकोल फ्रेंकेल, जिन्होंने जनरल इंट्यूशन में निवेश किया है, का कहना है कि लोगों को पैसे देकर किसी वस्तु को उठाने और रखने का काम बार-बार कराया जा सकता है, लेकिन केवल दोहराव उस वास्तविक अव्यवस्था और जटिलता को नहीं पकड़ सकता जिसमें एक मशीन को काम करना होता है।

 

## दुर्लभ परिस्थितियों की पहचान और भविष्य की योजना
 वर्ल्डमॉडलडेटा का सिद्धांत है कि वीडियो गेम से मिलने वाला वातावरण, जहां 3D स्पेस के दृश्यों के साथ खिलाड़ी के हर बटन दबाने की हरकत दर्ज होती है, पर्याप्त मात्रा में भी है और इसमें अप्रत्याशित घटनाओं की विविधता भी मौजूद है। निकोल फ्रेंकेल इस बात पर जोर देती हैं कि एआई को असल दुनिया में सफल बनाने के लिए ऐसी ही जटिल और दुर्लभ स्थितियों को सही से संभालना सबसे जरूरी होता है। उनका स्पष्ट मानना है कि कार, विमान, ड्रोन, कारखाने के फोर्कलिफ्ट या चार पैरों वाले ऑटोनॉमस रोबोट के मामले में एक छोटी सी गलती की कीमत बहुत भारी पड़ सकती है।

 इस दिशा में आगे बढ़ते हुए वर्ल्डमॉडलडेटा ने लोकप्रिय वीडियो गेम्स तैयार करने वाले स्टूडियो से करीब 10 लाख घंटों के गेमिंग डेटा का लाइसेंस हासिल कर लिया है, हालांकि रिया लूकास ने उन स्टूडियो के नामों का खुलासा नहीं किया है। भविष्य में इस स्टार्टअप की योजना आम गेमर्स को भी अपने गेमप्ले डेटा के बदले वित्तीय मुआवजा देने की व्यवस्था बनाने की है। रिया लूकास का दृढ़ विश्वास है कि वीडियो गेम का डेटा ही आगे चलकर वर्ल्ड मॉडल्स की मुख्य ट्रेनिंग सामग्री बनेगा, जिसे बाद में किसी खास भौतिक वातावरण के अनुसार परिष्कृत किया जाएगा। उनका दावा है कि यह कदम वर्ल्ड मॉडल्स के लिए वही बड़ा ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है जैसा चैटजीपीटी ने लैंग्वेज मॉडल्स के लिए किया था।

 

## एनवीडिया का अलग रुख और भौतिकी की पेचीदगियां
 गेमिंग डेटा के इस उपयोग को लेकर पूरी इंडस्ट्री एकमत नहीं है। अपने चिप्स पर चलने वाले वर्ल्ड मॉडल्स विकसित करने वाली प्रमुख कंपनी एनवीडिया गेमिंग इनपुट पर निर्भर रहने के बजाय वास्तविक दुनिया के भौतिकी को हूबहू दोहराने वाले अपने विशेष सिमुलेशन इंजन का उपयोग करना पसंद करती है।

 एनवीडिया में वर्ल्ड मॉडल विकास का नेतृत्व करने वाले मिंग-यू लियू का कहना है कि वीडियो गेम इनपुट पर प्रशिक्षित मॉडल्स उन कार्यों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे जिनमें उंगलियों और जोड़ों के बेहद बारीक नियंत्रण की जरूरत होती है। इसकी वजह यह है कि वीडियो गेम में दिखाई देने वाले भौतिक नियम अक्सर सतही होते हैं। गेम डेवलपर्स असलियत का भ्रम पैदा करने के लिए अक्सर आसान रास्ते चुनते हैं, जैसे कोई इन-गेम किरदार मेज से सेब उठाने के लिए हाथ बढ़ाता है, लेकिन डेवलपर कोड में यह दर्ज नहीं करता कि सेब को फिसलने से रोकने के लिए उंगलियों द्वारा कितना दबाव डाला गया।

 मिंग-यू लियू के अनुसार जटिल जोड़-तोड़ और वस्तुओं को पकड़ने के लिए वीडियो गेम डेटा का इस्तेमाल करने में सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि पकड़ने की भौतिकी कहीं अधिक जटिल होती है। उनका मानना है कि गेम डेटा का बेहतर इस्तेमाल केवल अत्यधिक वास्तविक दिखने वाले 3D वातावरण या वीडियो तैयार करने वाले वर्ल्ड मॉडल्स के लिए हो सकता है। प्रोफेसर शियाशियान झू ने भी इस चिंता से सहमति जताई है कि वीडियो गेम मूल रूप से सिमुलेटर हैं जिनमें भौतिकी की केवल सतही और अनुमानित समझ होती है। इसके बावजूद, वर्ल्ड मॉडल्स के अंतिम मुकाम तक पहुंचने के लिए शोधकर्ता अभी हर संभव विकल्प तलाश रहे हैं, और निकोल फ्रेंकेल के अनुसार यह देखना बाकी है कि कौन सा रास्ता सबसे अधिक कारगर साबित होता है।

## इसका आप पर असर
यह तकनीकी बदलाव भविष्य में रोबोटिक्स, सेल्फ-ड्राइविंग वाहनों और गेमिंग के जरिए कमाई के अवसरों को सीधे प्रभावित करेगा।

- **गेमर्स के लिए कमाई के नए रास्ते:** खिलाड़ी जल्द ही अपने गेमप्ले और कंट्रोलर इनपुट डेटा को बेचकर पैसे कमाने में सक्षम हो सकते हैं। स्टार्टअप्स व्यक्तिगत खिलाड़ियों को उनके गेमिंग डेटा का सीधे भुगतान करने के लिए नए रास्ते तैयार कर रहे हैं।
- **सटीक और सुरक्षित ऑटोनॉमस वाहन:** जटिल गेमिंग डेटा पर प्रशिक्षित वर्ल्ड मॉडल्स सेल्फ-ड्राइविंग कारों और ड्रोन की सुरक्षा को बेहतर बनाएंगे। इससे अप्रत्याशित और खतरनाक सड़क स्थितियों में मशीनों द्वारा गलत फैसले लेने का जोखिम काफी घटेगा।
- **कारखानों और वेयरहाउस में बेहतर ऑटोमेशन:** वास्तविक दुनिया की भौतिकी समझने वाले रोबोटिक उपकरण कारखानों में इंसानों के साथ अधिक सुरक्षित रूप से काम कर सकेंगे। यह प्रगति विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में इंसानी गलतियों और दुर्घटनाओं को कम करने में मदद करेगी।
- **अगली पीढ़ी के एआई टूल्स:** केवल टेक्स्ट लिखने वाले चैटबॉट्स के बजाय उपयोगकर्ताओं को भौतिक दुनिया की समझ रखने वाले नए एआई असिस्टेंट मिलेंगे। ये टूल्स थ्री-डायमेंशनल डिजाइनिंग, आर्किटेक्चर और गेम डेवलपमेंट को बेहद आसान बना देंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स की भौतिक दुनिया को न समझ पाने की विवशता और इंटरनेट पर कारण-प्रभाव वाले डेटा की भारी कमी के चलते वैज्ञानिकों ने गेमिंग का रुख किया है।

- **मौजूदा एआई की भौतिक सीमाएं:** टेक्स्ट पर प्रशिक्षित चैटबॉट्स भौतिक वस्तुओं की गति, वजन और घर्षण को समझने में पूरी तरह अक्षम हैं। इसी वजह से शोधकर्ता ऐसी तकनीक पर काम करने को मजबूर हुए जो सिर्फ भाषा नहीं बल्कि भौतिक विज्ञान के नियम सीख सके।
- **पर्याप्त वास्तविक डेटा का अभाव:** इंटरनेट पर लिखित सामग्री तो बहुत है, लेकिन भौतिक क्रियाओं और उनके परिणामों का डिजिटल रिकॉर्ड नगण्य है। प्रयोगशालाओं में सेंसर लगाकर रोबोट चलाने का तरीका बहुत धीमा और अत्यधिक सीमित डेटा ही जुटा पाता है।
- **गेमिंग डेटा की प्रचुरता और विविधता:** वीडियो गेम्स में 3D दृश्य और खिलाड़ियों के सटीक कंट्रोलर इनपुट पहले से ही भारी मात्रा में रिकॉर्ड होते हैं। यह डेटा उन जटिल और दुर्लभ स्थितियों को भी पकड़ लेता है जो सामान्य टेस्टिंग के दौरान रोबोट्स के सामने नहीं आतीं।

## सवाल-जवाब

### 1. वर्ल्ड मॉडल्स पारंपरिक लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स से किस तरह अलग हैं?
लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स केवल शब्दों और टेक्स्ट पर प्रशिक्षित होते हैं, जबकि वर्ल्ड मॉडल्स दृश्यों और इंसानी हरकतों के तालमेल से वास्तविक दुनिया के भौतिक नियमों को सीखते हैं।

### 2. एआई वैज्ञानिक वर्ल्ड मॉडल्स की ट्रेनिंग के लिए वीडियो गेम्स का रुख क्यों कर रहे हैं?
इंटरनेट पर भौतिक क्रिया और प्रतिक्रिया से जुड़े डेटा की भारी कमी है, जबकि वीडियो गेम्स में करोड़ों घंटों का विजुअल और कंट्रोलर इनपुट डेटा आसानी से उपलब्ध है।

### 3. वर्ल्डमॉडलडेटा स्टार्टअप इस क्षेत्र में क्या काम कर रहा है?
यह स्टार्टअप लोकप्रिय वीडियो गेमिंग स्टूडियो से कंट्रोलर इनपुट डेटा का लाइसेंस लेकर उसे वर्ल्ड मॉडल्स की ट्रेनिंग के लिए उपयुक्त डेटासेट के रूप में तैयार करता है।

### 4. वर्ल्डमॉडलडेटा ने अब तक कितना गेमिंग डेटा हासिल किया है?
कंपनी ने विभिन्न लोकप्रिय वीडियो गेम्स के स्टूडियो से लगभग 10 लाख घंटों के गेमिंग डेटा का लाइसेंस हासिल कर लिया है।

### 5. एनवीडिया वीडियो गेम डेटा के इस्तेमाल को लेकर सतर्क क्यों है?
एनवीडिया का मानना है कि वीडियो गेम्स में भौतिक नियमों की केवल सतही समझ होती है और डेवलपर्स शॉर्टकट अपनाते हैं, जिससे वस्तुओं को पकड़ने और नाजुक नियंत्रण वाले काम सीखना कठिन है।

### 6. क्या साधारण वीडियो गेम खेलने वालों को भी भविष्य में इसका फायदा मिलेगा?
कंपनी की योजना भविष्य में ऐसा मंच तैयार करने की है जिससे व्यक्तिगत खिलाड़ी भी अपने गेमप्ले डेटा के बदले आर्थिक मुआवजा प्राप्त कर सकें।

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