# साइबर ठगों ने बनाया खतरनाक मालवेयर, शिकार की निजी जानकारी खंगालने के लिए किया एआई का इस्तेमाल

> शोधकर्ताओं ने वोल्टा-ऑटोडॉक्सर नामक एक नए इन्फोस्टीलर मालवेयर का खुलासा किया है, जो चुराए गए डिजिटल डेटा का विश्लेषण करने और पीड़ित की प्रोफाइल तैयार करने के लिए सीधे वाणिज्यिक एआई मॉडल का सहारा लेता है।

**Type:** article · **Category:** एआई · **Published:** 2026-10-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/ai/saibara-thagon-ne-banaya-khataranaka-malaveyara-shikara-ki-niji-janakari-khngalane-ke-lie-kiya-ai-ka-istemala-53960 · **Language:** Hindi
**Tags:** साइबर सुरक्षा, मालवेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इन्फोस्टीलर, सिस्को टालोस, डेटा चोरी, हैकिंग

डिजिटल दुनिया में सेंधमारी करने वाले साइबर अपराधियों ने अब आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकों को अपने दुर्भावनापूर्ण कोड में शामिल करना शुरू कर दिया है। सुरक्षा अनुसंधान में सामने आए एक नए मामले से पता चलता है कि इन्फोस्टीलर श्रेणी के एक दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर ने पीड़ितों की पहचान उजागर करने और उनके मूल्यवान खातों को छांटने के लिए बड़े भाषा मॉडलों की ताकत को अपना हथियार बना लिया है। सिस्टम के भीतर मौजूद आंतरिक संकेतों के आधार पर इस खतरे को वोल्टा-ऑटोडॉक्सर नाम दिया गया है। यह टूल पारंपरिक तरीके से पासवर्ड या टोकन चुराने तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि हासिल की गई भारी-भरकम जानकारी को एक व्यवस्थित रिपोर्ट में बदलने के लिए आधुनिक भाषा मॉडलों से विश्लेषण भी करवाता है।

## चोरी की पारंपरिक तकनीकों से कहीं आगे की तैयारी
आमतौर पर जाली या पायरेटेड सॉफ्टवेयर बंडलों के जरिए फैलने वाले इन्फोस्टीलर कंप्यूटरों की गुप्त जानकारी हथियाने के लिए कुख्यात रहे हैं। हाल के वर्षों में कई वैश्विक निगमों, जिनमें स्नोफ्लेक से जुड़े बड़े डेटा लीक मामले शामिल हैं और जहां डिज़नी के एक टेराबाइट डेटा के अलावा एटीएंडटी तथा टिकटमास्टर जैसे ब्रांड प्रभावित हुए थे, उनके पीछे इसी श्रेणी के औजारों से चुराए गए लॉगिन क्रेडेंशियल जिम्मेदार थे। पिछले कुछ सालों में ऐसे अभियानों के जरिए करोड़ों की तादाद में यूजरनेम और पासवर्ड उड़ाए जा चुके हैं। लेकिन सिस्को टालोस के विश्लेषकों ने इस नए प्रकार के कोड में जो तंत्र देखा है, वह अपराध की प्रक्रिया को पूरी तरह स्वचालित बनाने की दिशा में अगला कदम है।

सिस्को टालोस में सुरक्षा शोधकर्ता रयान फेटरमैन के अनुसार, यह दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर बेहद व्यापक स्तर पर शिकार के डिवाइस से जानकारियां एकत्र करता है। इसके बाद यह सारी सामग्री को एक क्रमबद्ध फाइल में संकलित करके भाषा मॉडल के पास विश्लेषण के लिए भेजता है। शोधकर्ता बताते हैं कि यह कोड किसी खुफिया विश्लेषक की तरह काम करने के लिए एआई मॉडल को निर्देश देता है, जिससे प्राथमिकताओं को तय करने और विश्लेषण करने में मदद मिलती है। टालोस ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमताओं से लैस हैकिंग औजारों को पकड़ने के लिए बनाए गए अपने नए सीएआईआरएन ढांचे की मदद से इस प्रोग्राम की पहचान की है, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वास्तविक दुनिया में इसका सक्रिय हमला दर्ज हुआ है या नहीं।

## युवा इंटरनेट उपयोगकर्ताओं पर खास नजर
इस सॉफ्टवेयर की बनावट बताती है कि यह डिजिटल रूप से अत्यधिक सक्रिय रहने वाले, विशेषकर कम उम्र के उपयोगकर्ताओं को अपना निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। कंप्यूटर पर दाखिल होते ही यह ब्राउज़र में सुरक्षित रखे गए क्रेडेंशियल, माइक्रोसॉफ्ट ओऑथ टोकन, कुकीज, क्रेडिट व डेबिट कार्ड की जानकारियां और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट के रिकवरी फ्रेज खंगाल डालता है। इसके अलावा डिस्कोर्ड, टेलीग्राम, स्टीम और रोबोब्लॉक्स जैसे गेमिंग व चैटिंग प्लेटफॉर्मों पर चालू लॉगिन सत्रों पर भी इसकी पैनी नजर रहती है।

पहली तलाशी में हाथ लगे सुरागों के आधार पर यह सॉफ्टवेयर एक दूसरा और अधिक गहरा तलाशी अभियान छेड़ देता है। यदि इसे पीड़ित के जीमेल या प्राथमिक ईमेल खाते तक पहुंच मिल जाती है, तो यह वहां मौजूद उबरईट्स और डोरडैश जैसी फूड डिलीवरी सेवाओं की रसीदों और ऑर्डर इतिहास का विश्लेषण करने लगता है। इन रसीदों के जरिए पीड़ित का वास्तविक निवास स्थान, उसके घूमने-फिरने के पैटर्न, खरीदारी की आदतें और उसकी दिनचर्या से जुड़े सारे ब्योरे जुटाकर एक संपूर्ण जीवन-चित्र तैयार कर लिया जाता है।

## एआई चैटबॉट्स को दिए जाने वाले विशेष निर्देश
डेटा का संकलन पूरा होने के बाद यह मालवेयर ओपनराउटर नामक एक मध्यस्थ सेवा के जरिए वाणिज्यिक एआई प्रदाताओं को संदेश भेजता है। यह सेवा विभिन्न कंपनियों के मॉडलों से सीधे जुड़ने की सुविधा देती है। डिफ़ॉल्ट रूप से यह प्रोग्राम एंथ्रोपिक के क्लॉड ओपस 4.6 मॉडल को अनुरोध भेजता है। यदि सुरक्षा नियमों या सेफ्टी गार्डरेल्स के कारण यह मॉडल उत्तर देने से मना कर दे, तो सॉफ्टवेयर में बैकअप के तौर पर चीनी ओपन वेट मॉडल मूनशॉट एआई किमी के2 और फिर गूगल के जेमिनी 2.5 फ्लैश को क्वेरी भेजने का विकल्प जोड़ा गया है। साइबर हमलावरों के बीच ब्लॉक होने से बचने के लिए पुराने या किफायती मॉडलों का बैकअप रखना एक आम चलन बन चुका है।

इस प्रोग्राम के भीतर लगभग 240 शब्दों का एक सुनियोजित प्रॉम्प्ट तैयार रखा गया है, जिसमें बुलेट बिंदुओं और नंबरों के जरिए मॉडल को काम सौंपा जाता है। इस प्रॉम्प्ट में चैटबॉट से कहा गया है कि वह एक फॉरेंसिक इंटेलिजेंस एनालिस्ट की भूमिका निभाते हुए जुटाए गए सबूतों के आधार पर पीड़ित का मूल्यांकन तैयार करे। मॉडल को निर्देश दिया गया है कि वह पीड़ित की आर्थिक हैसियत, उसके कार्यक्षेत्र, उसकी सुरक्षा सावधानियों का सारांश और एक कार्यकारी रिपोर्ट तैयार करे। प्रॉम्प्ट में मॉडल को गहराई से छानबीन करने और अलग-अलग कड़ियों को जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं, जैसे कि वाई-फाई पासवर्ड का व्यक्ति के उपनाम से मेल खाना।

शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रॉम्प्ट की भाषा को जानबूझकर ऐसा रखा गया है जिससे वह पहली नजर में दुर्भावनापूर्ण न लगे और सुरक्षा फिल्टरों से बच सके। रयान फेटरमैन ने स्पष्ट किया कि यदि मॉडल का जवाब खारिज हो जाता है तो यह धीरे-धीरे अधिक छूट देने वाले मॉडलों की ओर बढ़ जाता है। इसके अलावा, यदि एआई प्रणाली पूरी तरह विफल भी हो जाए, तो भी यह सॉफ्टवेयर बुनियादी इन्फोस्टीलर के रूप में स्वतंत्र रूप से अपना काम जारी रख सकता है।

## साइबर अपराध की दुनिया में बढ़ता ऑटोमेशन
यद्यपि कई निचले स्तर के साइबर धोखेबाज भूमिगत मंचों पर घटिया एआई सामग्री की भरमार को लेकर असंतोष जताते रहे हैं, लेकिन सुरक्षा समुदाय लगातार ऐसे समूह देख रहा है जो कोड लिखने और चुराए गए भारी डेटा को छांटने के लिए भाषा मॉडलों का उपयोग कर रहे हैं। थ्रेट इंटेलिजेंस एजेंसी क्राउडस्ट्राइक ने भी चीनी, स्पेनिश, अंग्रेजी, इंडोनेशियाई और रूसी भाषाओं में सक्रिय चार अलग-अलग साइबर गिरोहों को एआई उपकरणों के जरिए स्वास्थ्य सेवा, खुदरा व्यापार, पर्यटन और सरकारी विभागों को निशाना बनाते हुए पाया है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रोग्राम की आंतरिक बनावट यह संकेत देती है कि इसे किसी एक विशिष्ट समूह के लिए नहीं, बल्कि साइबर अपराध बाजारों में व्यापक बिक्री के उद्देश्य से विकसित किया गया होगा। पासवर्ड और ऑथेंटिकेशन टोकन की एक सीमित समय सीमा होती है जिसके बाद वे निष्प्रभावी हो जाते हैं। ऐसे में यदि स्वचालित एआई की मदद से सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों की तुरंत पहचान कर ली जाए, तो हमलावर टोकन की म्याद खत्म होने से पहले ही सिस्टम में सेंध लगाने में सफल हो जाते हैं। यह बदलाव सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का सबब बनता जा रहा है क्योंकि अब साधारण क्षमता वाले हैकर्स के हाथ भी अत्यधिक परिष्कृत औजार लग रहे हैं।

## इसका आप पर असर
यह नई तकनीक आम उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा और ऑनलाइन खातों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा पैदा करती है।

- **इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए:** कमजोर या दोहराए गए पासवर्ड और एक्टिव ब्राउज़र सेशन अब पहले से कहीं अधिक तेजी से हैकर्स के हाथ लग सकते हैं। उपयोगकर्ताओं को अपने सभी महत्वपूर्ण खातों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन तुरंत चालू करना चाहिए और पासवर्ड मैनेजर के इस्तेमाल में सावधानी बरतनी चाहिए।
- **गेमर्स और युवा वर्ग के लिए:** डिस्कोर्ड, रोबोब्लॉक्स और स्टीम जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने वाले किशोरों के अकाउंट और चैट हिस्ट्री सीधे निशाने पर हैं। अज्ञात स्रोतों, पायरेटेड गेम फाइलों या मुफ्त सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने से पूरी तरह बचना आवश्यक है।
- **वित्तीय सुरक्षा के संदर्भ में:** यह सॉफ्टवेयर क्रिप्टो वॉलेट के रिकवरी फ्रेज और ऑनलाइन फूड डिलीवरी के बिलों से वित्तीय व आवासीय जानकारी निकाल लेता है। उपयोगकर्ताओं को अपने वॉलेट के सीक्रेट फ्रेज कभी भी कंप्यूटर पर अनएन्क्रिप्टेड टेक्स्ट फाइल में नहीं रखने चाहिए।
- **सेंधमारी की गति पर प्रभाव:** एआई की मदद से हैकर्स चुराए गए ऑथेंटिकेशन टोकन के एक्सपायर होने से पहले ही महत्वपूर्ण खातों में घुसपैठ कर सकते हैं। किसी भी सिस्टम में संदिग्ध गतिविधि दिखने पर सभी एक्टिव सेशन तुरंत लॉगआउट कर देने चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
साइबर अपराधियों ने पारंपरिक इन्फोस्टीलर हमलों में मिलने वाले विशाल डेटा को छांटने में लगने वाले समय को कम करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का सहारा लिया है।

- **डेटा छंटाई की भारी चुनौती:** एक सफल मालवेयर हमले में हजारों फाइलों, टोकनों और पासवर्डों का भारी भंडार जमा हो जाता है जिसे इंसानी हाथों से जांचना धीमा साबित होता था। अपराधियों ने इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए कमर्शियल लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स को डेटा विश्लेषण के काम में लगा दिया।
- **टोकन एक्सपायरी की समयसीमा:** आधुनिक वेब सेवाओं के ऑथेंटिकेशन टोकन और कुकीज कुछ घंटों या दिनों में निष्क्रिय हो जाते हैं। एआई की मदद से तत्काल प्रोफाइलिंग होने के कारण हमलावर टोकन की वैधता खत्म होने से पहले ही मुख्य खातों पर कब्जा कर लेते हैं।
- **कमर्शियल एआई एपीआई की आसान पहुंच:** ओपनराउटर जैसी सेवाओं और विभिन्न भाषा मॉडलों के सार्वजनिक एपीआई ने हमलावरों के लिए जटिल टूल बनाना बेहद आसान बना दिया है। एक मॉडल द्वारा सुरक्षा प्रतिबंध लगाने पर सिस्टम अपने आप दूसरे मॉडल पर स्विच करने में सक्षम हो जाता है।
- **साइबर अपराध का बाजारीकरण:** कोड के विश्लेषण से संकेत मिलते हैं कि इसे अन्य साइबर अपराधियों को बेचने के लिए एक उत्पाद की तरह तैयार किया गया था। इस तरह के औजारों के प्रसार से अनुभवहीन हैकर्स भी अब अत्यधिक सटीक हमलों को अंजाम देने में सक्षम हो रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. वोल्टा-ऑटोडॉक्सर क्या है?
यह एक नया इन्फोस्टीलर मालवेयर है जो कंप्यूटर से चुराए गए पासवर्ड और निजी डेटा का विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडलों का उपयोग करता है।

### 2. यह मालवेयर किस प्रकार का डेटा चुराता है?
यह ब्राउज़र में सहेजे गए पासवर्ड, माइक्रोसॉफ्ट टोकन, पेमेंट कार्ड, क्रिप्टो वॉलेट की जानकारी, ईमेल और गेमिंग सत्रों का डेटा चुराता है।

### 3. डेटा के विश्लेषण के लिए कौन से एआई मॉडल इस्तेमाल किए जाते हैं?
यह मुख्य रूप से क्लॉड ओपस 4.6 का उपयोग करता है और रुकावट आने पर मूनशॉट एआई के किमी के2 या जेमिनी 2.5 फ्लैश का बैकअप लेता है।

### 4. इस खतरे की पहचान किस सुरक्षा टीम ने की है?
सिस्को टालोस के सुरक्षा शोधकर्ताओं ने अपने नए सीएआईआरएन फ्रेमवर्क का उपयोग करके इस दुर्भावनापूर्ण टूल का पता लगाया है।

### 5. यह टूल पीड़ितों के व्यक्तिगत जीवन की जानकारी कैसे निकालता है?
यह ईमेल में मौजूद उबरईट्स और डोरडैश जैसी डिलीवरी सेवाओं की रसीदों को खंगालकर पीड़ित का पता, आदतें और दिनचर्या समझता है।

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