# सामान्य दिखने वाले सैकड़ों ऐप्स की आड़ में चल रहा था आपत्तिजनक डीपफेक का अवैध नेटवर्क, ऐप स्टोर्स और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए फैला जाल

> पालतू जानवरों की तस्वीरें बनाने और भाषा सिखाने के नाम पर ऐप स्टोर में मौजूद सैकड़ों मोबाइल ऐप्लिकेशन के भीतर बेहद आपत्तिजनक एआई टूल छिपाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांचकर्ताओं ने पाया कि सोशल मीडिया पर हजारों भ्रामक विज्ञापनों और गुप्त कोड के जरिए यह पूरा सिंडिकेट ऑपरेट किया जा रहा था।

**Type:** article · **Category:** एआई · **Published:** 2026-11-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/ai/samanya-dikhane-vale-saikaron-aipsa-ki-ara-men-chala-raha-tha-apattijanaka-deepfake-ka-avaidha-netavarka-app-stores-aura-social-me-55021 · **Language:** Hindi
**Tags:** डीपफेक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऐप स्टोर, गूगल प्ले स्टोर, साइबर सुरक्षा, मेटा, एपल, डेटा प्राइवेसी

स्मार्टफोन ऐप स्टोर पर अक्सर ऐसे कई ऐप्लिकेशन देखने को मिल जाते हैं जो पालतू जानवरों की एआई फोटो बनाने, नई भाषाएं सिखाने या फिटनेस वर्कआउट में मदद करने का दावा करते हैं। पहली नजर में बेहद सीधे और सामान्य दिखने वाले इन ऐप्स के पीछे कई बार एक बहुत बड़ा और खतरनाक खेल छुपा होता है। तकनीकी शोधकर्ताओं की एक विस्तृत पड़ताल में एक ऐसे संगठित अंतरराष्ट्रीय डिजिटल नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो फिटनेस और ट्यूशन जैसे साधारण ऐप्स की आड़ लेकर यौन उत्पीड़न और जबरन बनाए जाने वाले आपत्तिजनक डीपफेक तैयार करने का अवैध कारोबार चला रहा था। इस पूरे तंत्र में 400 से अधिक इंटरनेट डोमेन और दर्जनों मोबाइल ऐप्लिकेशन शामिल पाए गए हैं, जिन्हें मुख्य तकनीकी मंचों पर नियमित रूप से प्रकाशित किया जा रहा था।

## कैसे काम करता है सामान्य ऐप्स के पीछे छिपा दोहरा चेहरा
इस नेटवर्क में शामिल मोबाइल ऐप्स को जब कोई सामान्य यूजर डाउनलोड करता है, तो स्क्रीन पर वही साधारण इंटरफेस दिखाई देता है जिसका दावा ऐप स्टोर पर किया गया होता है, जैसे पालतू जानवरों की तस्वीरें बनाना या वर्कआउट ट्रैक करना। हालांकि, पर्दे के पीछे यह ऐप लगातार यह तय करता है कि यूजर को साधारण रूप दिखाना है या फिर गैरकानूनी डीपफेक वाला गुप्त वेब इंटरफेस लोड करना है। जब ऐप को किसी खास लिंक या विज्ञापन के माध्यम से खोला जाता है, तो यह चुपचाप अपने अंदर एक छिपा हुआ वेब पेज लोड कर देता है। इस छिपे हुए इंटरफेस के जरिए यूजर किसी भी व्यक्ति की तस्वीर अपलोड करके आपत्तिजनक और हिंसक यौन वीडियो या चित्र तैयार कर सकते हैं। इस इंटरफेस में हिंसा से जुड़े कई भयावह टेम्पलेट भी मौजूद पाए गए, जिनमें महिलाओं की गर्दन पर चाकू रखने जैसे हिंसक दृश्य शामिल थे।

डिजिटल फॉरेंसिक और सुरक्षा विश्लेषकों ने जब इन ऐप्लिकेशंस और संबंधित वेबसाइटों के कोड को डीकोड किया, तो इस दोहरे रूप की तकनीकी कार्यप्रणाली सामने आई। डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ पॉल बाउचॉड ने इन ऐप्स के रिवर्स इंजीनियरिंग विश्लेषण में पाया कि जब भी कोई यूजर ऐप को इंस्टॉल करता है, तो ऐप तुरंत अपने सर्वर को एक संदेश भेजता है। इस संदेश में यूजर का स्थान, उसकी भाषा और एक विशिष्ट पहचान संख्या शामिल होती है। सर्वर इन जानकारियों के आधार पर तय करता है कि उस यूजर को ऐप का सामान्य रूप दिखाया जाए या फिर आपत्तिजनक डीपफेक वाला इंटरफेस। एक बड़ा ट्रिगर यह देखा गया कि जब यूजर सोशल मीडिया विज्ञापनों पर क्लिक करके ऐप डाउनलोड करते हैं, तो सर्वर उन्हें आपत्तिजनक संस्करण दिखा देता है।

## सोशल मीडिया विज्ञापनों और फर्जी पहचान का सहारा
इस पूरे गुप्त सिंडिकेट का सुराग उन हजारों वीडियो विज्ञापनों की जांच से मिला जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आक्रामक तरीके से चलाए जा रहे थे। इन विज्ञापनों में खुलेआम एआई जनरेटेड आपत्तिजनक डीपफेक सामग्री दिखाई जा रही थी। विज्ञापनों में नाबालिगों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री और यहां तक कि एक यूरोपीय शाही परिवार के सदस्य की मनगढ़ंत छवियां भी शामिल थीं। ये विज्ञापन हजारों लोगों तक पहुंचे और इनके कारण दुनिया भर की नियामक संस्थाओं ने सख्त रुख अपनाया। जब लोग इन विज्ञापनों पर क्लिक करते थे, तो उन्हें सीधे आधिकारिक ऐप स्टोर्स पर मौजूद साधारण ऐप्स के डाउनलोड लिंक पर भेज दिया जाता था।

विज्ञापनों को चलाने के लिए पूरी तरह से फर्जी और अजीबोगरीब प्रोफाइल नामों का इस्तेमाल किया जा रहा था, जैसे ड्राफ्टमोंडक्रेल्डब्रो डुहुस्टेप्र और स्वाल्डमुंग्शा ग्लासिरडक्रेल्डशोल्ड। इन फर्जी अकाउंट्स और शून्य फॉलोअर्स वाले पेजों के जरिए विज्ञापनों को चलाया जाता था ताकि असली ऑपरेटर तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट की निदेशक केटी पॉल ने इस पर बात करते हुए रेखांकित किया कि ये विज्ञापन तकनीकी कंपनियों की नीतियों का खुला उल्लंघन करते हैं और यह सवाल बेहद गंभीर है कि इन ऐप्स से होने वाली कमाई आखिर कहां जाती है और यह नेटवर्क सुरक्षा प्रणालियों को कैसे चकमा दे रहा है।

## अवैध टूल्स का गुप्त आर्किटेक्चर और ब्लैक स्क्रीन
इस नेटवर्क से जुड़ी वेबसाइटों को सीधे ब्राउजर में खोलने पर सामान्य तौर पर कुछ भी दिखाई नहीं देता। स्क्रीन पूरी तरह काली नजर आती है और कोई सामग्री लोड नहीं होती। केवल एक बदलाव यह दिखता है कि यूआरएल में 'रिस्क' शब्द जुड़ जाता है। लेकिन इसी वेबसाइट के भीतर आपत्तिजनक डीपफेक जनरेटर की पूरी परत छिपी होती है, जिसे ऐप के जरिए कॉल किया जाता है। इस वेब इंटरफेस में दर्जनों अश्लील डीपफेक टेम्पलेट उपलब्ध रहते हैं, जहां यूजर्स तस्वीरें अपलोड कर सकते हैं। सेवा का उपयोग करने के लिए वर्चुअल डायमंड्स खरीदने की व्यवस्था की गई थी, और यूजर्स भुगतान के लिए आधिकारिक पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करते थे। साथ ही किसी भी सवाल या शिकायत के लिए सोशल मीडिया अकाउंट्स के लिंक भी दिए गए थे।

सुरक्षा फर्म इन्फोब्लॉक्स के थ्रेट रिसर्चर मेल ले तौज ने जब वेबसाइटों के जावास्क्रिप्ट बंडल की पड़ताल की, तो उन्हें लगभग 500 जुड़े हुए डोमेन मिले। इस कोड बंडल में डेवलपर्स द्वारा बनाए गए सभी डोमेन और ऐप्स की सूची, एन्क्रिप्शन कीज, और सोशल मीडिया विज्ञापन ट्रैकर्स दर्ज थे। सभी डोमेन एक ही कोड पर काम कर रहे थे और एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क चीनी सर्वरों पर होस्ट किया गया था, इसका कोड चीनी भाषा में लिखा गया था और उसमें बड़ी संख्या में चीनी भाषा की टिप्पणियां मौजूद थीं। विज्ञापनों में दिखाए गए वीडियो में चीनी भाषा के वीडियो एडिटिंग सॉफ्टवेयर के वाटरमार्क भी पाए गए।

## एक साल से सक्रिय था सिंडिकेट, लाखों डाउनलोड्स
डोमेन पंजीकरण के विश्लेषण से पता चला कि इस नेटवर्क से जुड़े ऐप्स 2025 के अंत में सामने आने लगे थे और इसके बाद इनमें तेजी से उछाल आया। एक समय ऐसा भी था जब हर हफ्ते करीब 30 ऐसे ऐप्स और वेबसाइट्स रजिस्टर की जा रही थीं। सितंबर के महीने में ऐसे 27 ऐप्स प्ले स्टोर पर सक्रिय पाए गए थे। इन ऐप्स को कुल मिलाकर 350,000 से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका था। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इनमें से कई ऐप्स को सभी आयु वर्ग के लिए उपयुक्त रेटिंग दी गई थी।

इस सिंडिकेट के सबसे लोकप्रिय ऐप्स में से एक डिफएआई था, जिसे दिसंबर 2025 में बनाया गया था और इसे 100,000 से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया था। इस ऐप के रिव्यू सेक्शन में एक यूजर ने चेतावनी देते हुए लिखा भी था कि यह ऐप नाबालिगों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री और अश्लील सामग्री बनाने के टेम्पलेट प्रदान करता है और इसमें कोई उम्र सत्यापन प्रक्रिया नहीं है। यह ऐप काफी समय तक स्टोर पर मौजूद रहा और बाद में इसे हटाया गया।

## हांगकांग की शेल कंपनी और डिजिटल निशान मिटाने की कोशिश
पड़ताल में इस पूरे नेटवर्क के पीछे केलिंग टेक्नोलॉजी लिमिटेड नामक एक हांगकांग पंजीकृत इकाई और चीनी डेवलपर्स का हाथ होने की बात सामने आई। नेटवर्क की सबसे पहली पंजीकृत वेबसाइट पर संपर्क विवरण के रूप में केलिंग टेक्नोलॉजी लिमिटेड का नाम दर्ज था। इसके अलावा आपत्तिजनक डीपफेक टेम्पलेट और उसके एडमिनिस्ट्रेशन लॉगिन पेज पर भी इसी इकाई का संदर्भ मिला। कुछ ऐप्स की प्राइवेसी पॉलिसी में भी इसी डोमेन से जुड़े ईमेल पते पाए गए थे। सितंबर के अंत में इस इंटरफेस पर वेयरा नाम का एक नया एआई मॉडल पेश किया गया, जिसे अधिक वास्तविक और अधिक अनियंत्रित बताया गया था। वेयरा एआई की वेबसाइट पर भी केलिंग का ही ईमेल पता संपर्क के लिए दिया गया था।

जब इस नेटवर्क से जुड़े ईमेल पतों पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो कोई सीधा जवाब नहीं आया। हालांकि, तुरंत ही डिजिटल साक्ष्य मिटाने की कवायद शुरू हो गई। जुड़े हुए सोशल मीडिया चैनलों के नाम बदल दिए गए, वेयरा की वेबसाइट से ईमेल हटा दिए गए और पहली वेबसाइट से भी केलिंग टेक्नोलॉजी लिमिटेड का पता साफ कर दिया गया।

## तकनीकी कंपनियों की कार्रवाई और चुनौतियां
ऐप स्टोर चलाने वाली कंपनियों ने कहा है कि वे अपनी सुरक्षा नीतियों को लेकर बेहद सख्त हैं। एपल के प्रवक्ता एडम डेमा ने कहा कि कंपनी ने 19 ऐप्स को हटा दिया है, जिनमें पेट फोटो ऐप विएफर भी शामिल था। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि समीक्षा के समय ये ऐप्स नियमों का पालन कर रहे थे, लेकिन मंजूरी मिलने के बाद डेवलपर्स ने उस वेबसाइट को बदल दिया जहां से ऐप सामग्री लोड करता था और साधारण सामग्री की जगह आपत्तिजनक इंटरफेस लोड करना शुरू कर दिया। एपल ने बताया कि उसने इस तरह की भ्रामक रणनीति अपनाने वाले हजारों ऐप्स को पहले भी निलंबित किया है और नियमों को कड़ा किया है।

वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनी मेटा ने बताया कि उसने केलिंग टेक्नोलॉजी लिमिटेड को विज्ञापन देने से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया था। 400 से अधिक डोमेन की जानकारी मिलने के बाद कंपनी ने बताया कि उसने 11,600 विज्ञापन खातों, 4,700 से अधिक बिजनेस पेजों, 5,200 यूजर्स और 15,000 पेजों पर कार्रवाई की है, साथ ही 209 ऐप्स को विज्ञापन देने से रोका है। हालांकि, कंपनियों की तमाम सख्तियों और दावों के बावजूद इस तरह के संगठित नेटवर्क अपनी पहचान बदलकर और नए डोमेन बनाकर लगातार सक्रिय रहने के रास्ते तलाश रहे हैं।

## इसका आप पर असर
सामान्य और उपयोगिता वाले ऐप्स की आड़ में चलने वाले इस तरह के गुप्त डीपफेक टूल्स आम स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की डिजिटल सुरक्षा और निजता के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा करते हैं।

- **उपयोगकर्ताओं की प्राइवेसी:** अनजाने में डाउनलोड किए गए ऐसे ऐप्स फोन का डेटा या तस्वीरें गलत सर्वरों पर भेज सकते हैं। किसी भी साधारण फोटो एडिटर या वर्कआउट ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसके डेवलपर और परमिशन की सावधानीपूर्वक जांच करना जरूरी है।
- **भुगतान और वित्तीय सुरक्षा:** इन अवैध टूल्स में वर्चुअल क्रेडिट या डायमंड खरीदने के लिए आधिकारिक पेमेंट गेटवे का उपयोग किया जा रहा था। किसी भी अनजान ऐप पर इन-ऐप खरीदारी करने से व्यक्तिगत वित्तीय विवरणों और बैंक खातों के असुरक्षित होने का जोखिम रहता है।
- **पारिवारिक और बच्चों की सुरक्षा:** इनमें से कई ऐप्स बिना किसी उम्र सत्यापन के प्ले स्टोर पर सभी उम्र के लिए उपयुक्त के रूप में लिस्टेड थे। माता-पिता को अपने बच्चों के स्मार्टफोन में मौजूद ऐप्स और उनकी गतिविधियों पर नियमित नजर रखनी चाहिए।
- **सोशल मीडिया पर सावधानी:** सोशल मीडिया फीड पर दिखने वाले आकर्षक या भ्रामक विज्ञापनों पर क्लिक करने से सीधे अवैध नेटवर्क से जुड़े ऐप्स इंस्टॉल हो सकते हैं। किसी भी अनजान विज्ञापन लिंक पर सीधे क्लिक करने से बचना सबसे सुरक्षित उपाय है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह गुप्त अवैध सिंडिकेट इसलिए पनपा क्योंकि ऑपरेटरों ने तकनीकी मंचों की समीक्षा प्रणालियों की तकनीकी खामियों और सोशल मीडिया विज्ञापनों के वितरण तंत्र का सुनियोजित फायदा उठाया।

- **बेट-एंड-स्विच तकनीकी चाल:** डेवलपर्स ने ऐप स्टोर की शुरुआती समीक्षा पास करने के लिए पूरी तरह से वैध और साधारण ऐप्स पेश किए। एक बार स्टोर पर ऐप मंजूर होने के बाद, उन्होंने रिमोट सर्वर के माध्यम से कोड बदलकर उसमें आपत्तिजनक वेब इंटरफेस लोड करना शुरू कर दिया।
- **फर्जी विज्ञापन नेटवर्क का दुरुपयोग:** ऑपरेटरों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हजारों फर्जी खातों और अनसुलझे नामों का उपयोग करके आक्रामक प्रचार अभियान चलाए। इन अभियानों ने मुख्यधारा के सुरक्षा एल्गोरिदम को चकमा देकर लाखों उपयोगकर्ताओं तक पहुंच बनाई।
- **संगठित शेल कंपनियों का पर्दा:** हांगकांग में पंजीकृत शेल संस्थाओं और चीनी क्लाउड होस्टिंग का उपयोग करके वास्तविक ऑपरेटरों ने अपनी पहचान को छिपाए रखा। जब भी किसी एक ऐप या डोमेन पर कार्रवाई होती थी, वे तुरंत दर्जनों नए डोमेन सक्रिय कर देते थे।

## सवाल-जवाब

### 1. यह गुप्त डीपफेक नेटवर्क क्या था?
यह 400 से अधिक डोमेन और मोबाइल ऐप्स का एक संगठित नेटवर्क था, जो फिटनेस और फोटो एडिटिंग जैसे साधारण ऐप्स की आड़ में आपत्तिजनक एआई डीपफेक तैयार करने की सुविधा देता था।

### 2. यह नेटवर्क ऐप स्टोर की सुरक्षा जांच से कैसे बचता था?
डेवलपर्स समीक्षा के समय पूरी तरह सामान्य ऐप दिखाते थे, लेकिन मंजूरी मिलने के बाद रिमोट सर्वर के जरिए ऐप के भीतर छिपा हुआ अवैध वेब इंटरफेस लोड कर देते थे।

### 3. इस नेटवर्क का पता कैसे चला?
शोधकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर चल रहे हजारों भ्रामक और आपत्तिजनक विज्ञापनों की कड़ियों की जांच की, जो सीधे इन ऐप्स के डाउनलोड पेज तक ले जाते थे।

### 4. इन ऐप्स को कितनी बार डाउनलोड किया गया था?
जांच में सामने आया कि गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद इस नेटवर्क के ऐप्स को 350,000 से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका था, जिसमें डिफएआई अकेला 100,000 से ज्यादा बार इंस्टॉल हुआ था।

### 5. इस नेटवर्क के पीछे कौन सी कंपनी जुड़ी पाई गई?
पड़ताल में हांगकांग पंजीकृत इकाई केलिंग टेक्नोलॉजी लिमिटेड और चीनी डेवलपर्स के डिजिटल सुराग व ईमेल पते इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए।

### 6. तकनीकी कंपनियों ने क्या कार्रवाई की?
एपल ने 19 ऐप्स को हटाया, गूगल ने अधिकांश संबंधित ऐप्स को हटा दिया, और मेटा ने इस नेटवर्क से जुड़े हजारों विज्ञापन खातों और पेजों को ब्लॉक कर दिया।

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