# स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बंद करने पर सर्च इंजन भी छिना, गूगल के नए नियम से फंसा पेंच

> गूगल ने अगले साल से स्कूलों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बंद रखने का फैसला लिया है, लेकिन इसे पूरी तरह ब्लॉक करने पर गूगल सर्च भी बंद हो जाएगा।

**Type:** article · **Category:** एआई · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/ai/skulon-men-artiphishiyala-intelijensa-bnda-karane-para-sarcha-injana-bhi-chhina-google-ke-nae-niyama-se-phnsa-pencha-55937 · **Language:** Hindi
**Tags:** गूगल, गूगल सर्च, जेमिनी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा, स्कूल

कक्षा 12वीं तक के छात्रों के लिए गूगल अगले साल अपने तमाम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स को डिफ़ॉल्ट रूप से बंद करने जा रहा है। स्कूल प्रशासन जब तक खुद इन सुविधाओं को सक्रिय नहीं करेंगे, तब तक छात्र इनका उपयोग नहीं कर सकेंगे। टेक कंपनी ने यह कदम शिक्षकों, स्कूल प्रशासकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं से व्यापक बातचीत के बाद उठाया है। इस व्यवस्था के लागू होने से जेमिनी, नोटबुकएलएम, क्लासरूम में जेमिनी और गूगल सर्च पर गहरा प्रभाव पड़ने वाला है।

## सर्च इंजन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अटूट जुड़ाव
इस फैसले के कारण स्कूलों के सामने एक बड़ा तकनीकी संकट खड़ा हो गया है। सर्च इंजन के भीतर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के फीचर्स पूरी तरह घुलमिल चुके हैं। यदि कोई शैक्षणिक संस्थान अपने नेटवर्क पर एआई को पूरी तरह ब्लॉक करने का विकल्प चुनता है, तो छात्रों के लिए गूगल सर्च का इस्तेमाल भी पूरी तरह रुक जाएगा। सर्च खोलने पर विद्यार्थियों को अपनी स्क्रीन पर स्कूल की ओर से यह संदेश दिखाई देगा कि यह सेवा उपलब्ध नहीं है।

गूगल में शिक्षा विभाग के उपाध्यक्ष क्रिस फिलिप्स ने बताया कि सर्च और एआई अब एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। इसका सीधा अर्थ यही है कि जो स्कूल कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएंगे, उनके छात्र सामान्य वेब सर्च से भी वंचित रह जाएंगे। यह बात स्कूलों के लिए भारी उलझन पैदा करती है, क्योंकि शिक्षक अक्सर यह तो चाहते हैं कि छात्र असाइनमेंट के लिए रेडीमेड सारांश या स्वचालित जवाब न उठाएं, लेकिन शोध सामग्री और स्रोत खोजने के लिए उन्हें सर्च इंजन की आवश्यकता बनी रहती है।

## क्लासरूम तकनीक पर प्रभाव और नई तैयारी
कक्षाओं में गूगल के ऐप्स की व्यापक मौजूदगी और क्रोमबुक्स के भारी इस्तेमाल के चलते इस निर्णय का असर बेहद बड़ा माना जा रहा है। स्कूलों के पास अब कोई बीच का रास्ता नहीं बचा है, क्योंकि सर्च इंजन चलाने के लिए उन्हें इसके स्वचालित एआई फीचर्स को स्वीकार करना ही होगा। कंपनी का कहना है कि बदलाव लागू होने से पहले आने वाले महीनों में संस्थानों के साथ विस्तृत तकनीकी ब्योरा साझा किया जाएगा, ताकि वे इस बदलाव के अनुसार अपनी व्यवस्था तैयार कर सकें।

क्रिस फिलिप्स ने अपने ब्लॉग पोस्ट में स्पष्ट किया कि कंपनी का उद्देश्य स्कूल प्रमुखों को अपनी कक्षाओं में एआई टूल्स के इस्तेमाल पर पूरा नियंत्रण और भरोसा देना है।

## गाइडेड लर्निंग का विकल्प और पढ़ाई की चुनौतियां
इस नई नीति के साथ ही कंपनी ने स्कूलों के लिए गाइडेड लर्निंग की भी घोषणा की है। इस साल की शुरुआत में पेश किया गया यह टूल एक तरह से एआई ट्यूटर की तरह काम करता है, जिसका मकसद छात्रों को सीधे जवाब देने के बजाय किसी विषय की गहरी समझ विकसित करने में सहायता करना है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब शिक्षकों और विशेषज्ञों के बीच यह चिंता लगातार बढ़ रही है कि चैटबॉट्स तैयार जवाब देकर विद्यार्थियों की मौलिक सोच और सीखने की स्वाभाविक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

## इसका आप पर असर
गूगल टूल्स का उपयोग करने वाले स्कूलों को अब अपनी डिजिटल नीतियों में बड़ा बदलाव करना होगा।

- **छात्रों के लिए:** स्कूल नेटवर्क पर यदि एआई बंद किया जाता है तो सामान्य सर्च इंजन भी काम नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में छात्रों को प्रोजेक्ट और संदर्भ खोजने के लिए दूसरे विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
- **स्कूल प्रशासकों के लिए:** स्कूलों को तय करना होगा कि वे एआई टूल्स को अनुमति दें या पूरा सर्च इंजन ब्लॉक करें। प्रशासन को अगले साल बदलाव लागू होने से पहले नेटवर्क नीतियां तय करनी होंगी।
- **शिक्षकों के लिए:** सीधे उत्तर देने वाले चैटबॉट्स के बजाय अब गाइडेड लर्निंग टूल का विकल्प मिलेगा। शिक्षक छात्रों को होमवर्क के लिए तैयार उत्तरों से बचाने के नए रास्ते चुन सकेंगे।
- **अभिभावकों के लिए:** क्रोमबुक और स्कूल सिस्टम पर बच्चों द्वारा एआई के उपयोग की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। माता-पिता यह जान पाएंगे कि स्कूल ने इन टूल्स को चालू रखा है या बंद किया है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह बदलाव इसलिए सामने आया है क्योंकि आधुनिक सर्च इंजनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को आंतरिक रूप से जोड़ दिया गया है, जिससे उन्हें अलग करना संभव नहीं रहा।

- **सीधा कारण:** गूगल सर्च के बुनियादी आर्किटेक्चर में एआई ओवरव्यूज को पूरी तरह एकीकृत कर दिया गया है। इस तकनीकी ढांचे के कारण सर्च को बिना एआई के स्वतंत्र रूप से चलाना संभव नहीं है।
- **शिक्षकों की चिंताएं:** शैक्षणिक समुदाय और शोधकर्ताओं ने शिकायत की थी कि चैटबॉट्स तैयार उत्तर देकर छात्रों की सोचने की क्षमता घटा रहे हैं। इसी दबाव के चलते गूगल को स्कूल सेटिंग्स में बदलाव का फैसला लेना पड़ा।
- **तकनीकी निर्भरता:** क्लासरूम और क्रोमबुक इकोसिस्टम में गूगल का गहरा प्रभाव है। कंपनी अब सीधे उत्तर देने के बजाय गाइडेड लर्निंग जैसे टूल्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. गूगल स्कूलों के लिए एआई टूल्स पर क्या नया नियम ला रहा है?
गूगल अगले साल से कक्षा 12वीं तक के छात्रों के लिए एआई फीचर्स को डिफ़ॉल्ट रूप से बंद रखेगा, जिसे केवल स्कूल प्रशासक ही चालू कर सकेंगे।

### 2. यदि कोई स्कूल एआई को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है तो क्या होगा?
अगर कोई स्कूल एआई को ब्लॉक करता है, तो उसके छात्रों के लिए गूगल सर्च की सुविधा भी पूरी तरह बंद हो जाएगी।

### 3. गूगल सर्च और एआई को अलग-अलग क्यों नहीं किया जा सकता?
गूगल के अनुसार सर्च और एआई फीचर्स अब आपस में पूरी तरह जुड़े हुए हैं, इसलिए इन्हें अलग से संचालित करना संभव नहीं है।

### 4. गाइडेड लर्निंग टूल क्या है और यह कैसे काम करता है?
यह एक एआई ट्यूटर जैसा टूल है जो छात्रों को तैयार उत्तर देने के बजाय किसी विषय को गहराई से समझाने और सीखने में मदद करता है।

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