टेक क्षेत्र से बाहर कंपनियों को एआई से नहीं हुआ कोई आर्थिक मुनाफा, अपोलो अर्थशास्त्री का दावा अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के मुख्य अर्थशास्त्री टॉर्स्टन स्लोक के अनुसार, टेक उद्योग को छोड़कर अन्य अमेरिकी कंपनियों को भारी निवेश के बाद भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कोई सीधा वित्तीय फायदा नहीं मिला है। दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर मचे भारी उत्साह और कंपनियों द्वारा किए जा रहे बड़े पूंजी निवेश के बावजूद, टेक उद्योग से बाहर की बड़ी कंपनियों को इससे अब तक कोई ठोस वित्तीय मुनाफा नहीं मिला है। निजी इक्विटी कंपनी अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के मुख्य अर्थशास्त्री टॉर्स्टन स्लोक के एक हालिया विश्लेषण में सामने आया है कि टेक्नोलॉजी सेक्टर से इतर काम कर रहे कॉर्पोरेट जगत के मुनाफे में एआई की वजह से कोई इजाफा नहीं हुआ है। एसएंडपी 493 का ब्योरा और सुस्त उत्पादकता टॉर्स्टन स्लोक ने अपने अध्ययन में एसएंडपी 500 इंडेक्स से सात प्रमुख टेक कंपनियों—अल्फाबेट, अमेज़न, एपल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और टेस्ला—को अलग कर बाकी बची कंपनियों के समूह को एसएंडपी 493 नाम दिया। इस विश्लेषण के मुताबिक, इन गैर-टेक कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन और प्रति कर्मचारी राजस्व में कोई उछाल नहीं आया है, बल्कि ये दोनों आंकड़े पूरी तरह सपाट बने हुए हैं। आंकड़ों से यह बिल्कुल साबित नहीं होता कि कार्यस्थल पर इस तकनीक को अपनाने से उत्पादकता में कोई उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया हो। स्लोक ने साफ तौर पर कहा कि बड़े पैमाने पर पूंजी झोंकने और हर तरफ तकनीक की चर्चा होने के बाद भी टेक सेक्टर से बाहर कॉर्पोरेट अमेरिका को शून्य वित्तीय प्रतिफल हासिल हुआ है। उनका मानना है कि आने वाले समय में भी गैर-टेक कंपनियों के लिए सस्ती होती जा रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मजबूत राजस्व वृद्धि और उच्च लाभ मार्जिन में बदल पाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होगा। व्यापार में मानवीय सूझबूझ और नैतिक समझ की अहमियत स्लोक के अनुसार, कंप्यूटर आधारित तकनीक और वास्तविक व्यावसायिक दुनिया के संचालन में एक बुनियादी अंतर मौजूद है। उन्होंने रेखांकित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक बेहतरीन कैलकुलेटर साबित हो सकता है, लेकिन कारोबार चलाने के लिए जरूरी बुद्धिमत्ता का मुख्य आधार व्यावहारिक निर्णय लेने की क्षमता है। स्लोक ने आगे विस्तार से बताया कि स्वचालित एल्गोरिदम जवाबदेही, आपसी भरोसा, कॉर्पोरेट संस्कृति, अनकहे नियम, नैतिक संतुलन या निष्पक्षता जैसे अहम पहलुओं को नहीं समझते हैं। वास्तव में यही मानवीय गुण किसी संस्थान के साख संबंधी जोखिम को तय करते हैं और अंततः राजस्व तथा मुनाफे को आगे बढ़ाते हैं। हालिया शोधों में भी यह बात सामने आई है कि कार्यस्थलों पर एआई के इस्तेमाल से अभी तक कोई व्यापक उत्पादकता लाभ देखने को नहीं मिला है। इसका आप पर असर कंपनियों द्वारा एआई पर किए जा रहे भारी खर्च का तुरंत कोई वित्तीय मुनाफा न दिखने से कारोबारी फैसलों और नौकरियों पर सीधा असर पड़ सकता है। • निवेशकों के लिए: टेक कंपनियों से अलग पारंपरिक शेयरों में एआई के दम पर मुनाफे में भारी उछाल की उम्मीद फिलहाल पूरी होती नहीं दिख रही है। निवेशकों को ऐसी कंपनियों में पैसा लगाने से पहले उनके वास्तविक वित्तीय नतीजों और मार्जिन की गहन पड़ताल करनी चाहिए। • कर्मचारियों के लिए: कार्यस्थल पर एआई को बड़े पैमाने पर लागू करने के बावजूद प्रति कर्मचारी राजस्व सपाट बना हुआ है। इसका मतलब है कि प्रबंधन पर उत्पादकता साबित करने का दबाव बढ़ेगा, जिससे कार्यशैली और प्राथमिकताओं में बदलाव आ सकता है। • कंपनी प्रबंधकों के लिए: महंगी एआई तकनीकों की खरीद पर आंख मूंदकर खर्च करने की जगह उनके वास्तविक रिटर्न की समीक्षा जरूरी हो गई है। फैसले लेते समय सॉफ्टवेयर की क्षमता के साथ-साथ नैतिक जिम्मेदारियों और व्यावसायिक सूझबूझ को प्राथमिकता देनी होगी। • ग्राहकों के लिए: पारंपरिक कंपनियों में लागत दक्षता न बढ़ने के कारण उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में तुरंत किसी बड़ी कमी की संभावना नहीं है। कंपनियां केवल तकनीक अपनाने के नाम पर ग्राहकों को मिलने वाले सेवा अनुभव में नाटकीय बदलाव नहीं ला पाई हैं। ऐसा क्यों हुआ यह विश्लेषण इसलिए सामने आया क्योंकि तकनीकी क्षेत्र से बाहर की कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में एआई में अरबों डॉलर लगाए हैं, लेकिन उनके वित्तीय नतीजों में इसका कोई असर नहीं दिखा। अर्थशास्त्रियों ने जब वास्तविक कारोबारी आंकड़ों की पड़ताल की तो तकनीक और जमीनी कारोबार के बीच बड़ा अंतर उजागर हुआ। • सीधा कारण: अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के अर्थशास्त्री ने पाया कि एसएंडपी 493 कंपनियों के लाभ मार्जिन और प्रति कर्मचारी राजस्व में कोई बढ़त दर्ज नहीं की गई है। भारी पूंजी लगाने के बाद भी इन गैर-तकनीकी उद्यमों की उत्पादकता में कोई सुधार नहीं दिखा। • व्यावसायिक समझ की कमी: मौजूदा एआई मॉडल गणना और डेटा प्रोसेसिंग में तेज होने के बावजूद जवाबदेही, विश्वास, संस्कृति और नैतिक संतुलन जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक कारकों को समझने में पूरी तरह असमर्थ हैं। कारोबार में अंतिम लाभ मानवीय निर्णय लेने की क्षमता पर निर्भर करता है, जिसे सॉफ्टवेयर नहीं दोहरा सकता। • अध्ययनों के निष्कर्ष: हालिया स्वतंत्र शोधों ने भी संकेत दिया है कि कार्यस्थलों पर एआई अपनाने से कोई बड़ा उत्पादकता लाभ नहीं मिला है। नतीजतन, इस तकनीक को लेकर बना शुरुआती अति-उत्साह अब ठोस आर्थिक वास्तविकता के सामने सवालों के घेरे में आ गया है। सवाल-जवाब 1. अपोलो के अर्थशास्त्री ने गैर-टेक कंपनियों को लेकर क्या खुलासा किया है? उन्होंने बताया कि तकनीक क्षेत्र से बाहर की बड़ी कंपनियों को भारी निवेश के बाद भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कोई वित्तीय मुनाफा नहीं हुआ है। 2. एसएंडपी 493 समूह में कौन सी कंपनियां शामिल हैं? एसएंडपी 500 इंडेक्स में से सात दिग्गज टेक कंपनियों अल्फाबेट, अमेज़न, एपल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और टेस्ला को हटाकर बाकी बची कंपनियों को यह नाम दिया गया है। 3. गैर-टेक कंपनियों की उत्पादकता और मुनाफे की स्थिति क्या है? अध्ययन के अनुसार, इन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन और प्रति कर्मचारी राजस्व पूरी तरह सपाट बने हुए हैं और उत्पादकता में सुधार का कोई सबूत नहीं मिला है। 4. स्लोक के अनुसार एआई किस मामले में पिछड़ जाता है? स्लोक का कहना है कि एआई अच्छा कैलकुलेटर तो है, लेकिन यह जवाबदेही, विश्वास, संस्कृति, अनकहे नियमों और नैतिक समझ को नहीं समझता जो कारोबार के लिए जरूरी हैं। https://trendkia.com/ai/teka-kshetra-se-bahara-knpaniyon-ko-ai-se-nahin-hua-koi-arthika-munapha-apollo-arthashastri-ka-dava-51641 TrendKia — Har trend, sabse pehle.