टाइम 100 एआई 2026 की वैश्विक सूची में छाया भारतीय मूल की हस्तियों का दबदबा, 9 दिग्गजों ने बनाई जगह वैश्विक एआई परिदृश्य के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में 9 भारतीय मूल के दिग्गजों को स्थान मिला है। उद्योग, स्वास्थ्य, विज्ञान और न्याय प्रणाली के क्षेत्रों में इनके विशिष्ट योगदान को सम्मानित किया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक चर्चा जब भी शुरू होती है, तब आमतौर पर बड़े लैंग्वेज मॉडल विकसित करने वाली प्रमुख टेक कंपनियों और चिप निर्माताओं का नाम सुर्खियों में रहता है। हालांकि, आधुनिक दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की पहुंच केवल विशाल मॉडल तैयार करने तक सीमित नहीं रह गई है। आज एआई का दायरा कॉर्पोरेट संचालन, वैज्ञानिक अनुसंधान, चिकित्सा, न्यायिक सुधार, सार्वजनिक नीति और सुरक्षा मानकों तक व्यापक रूप से फैल चुका है। वैश्विक स्तर पर जारी 100 सबसे प्रभावशाली एआई दिग्गजों की 2026 की सूची में इस व्यापक बदलाव की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। इस प्रतिष्ठित सूची को चार प्रमुख श्रेणियों: लीडर्स, इनोवेटर्स, शेपर्स और थिंकर्स में विभाजित किया गया है। इस साल की वैश्विक सूची में भारतीय मूल की नौ प्रमुख हस्तियों ने अपनी विशिष्ट जगह बनाई है। इन सभी नौ दिग्गजों का कार्यक्षेत्र एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न है, जो दर्शाता है कि भारतीय प्रतिभाएं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बहुआयामी विकास में केंद्रीय भूमिका निभा रही हैं। कोई दिग्गज बड़े उद्यमों में एआई के व्यावसायिक इस्तेमाल की नई रणनीति बना रहा है, तो कोई भारत की भाषाई विविधता के अनुकूल तकनीक विकसित कर रहा है। इसी तरह, वैज्ञानिक मॉडलिंग से लेकर अदालती कार्यवाही और जीवन रक्षक स्वास्थ्य सेवाओं तक में भारतीय विशेषज्ञों का योगदान देखने को मिल रहा है। उद्योग और व्यापार में एआई की नई दिशा: अरविंद कृष्णा कारपोरेट जगत और एंटरप्राइज समाधानों के क्षेत्र में अरविंद कृष्णा का योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आईबीएम के चेयरमैन और CEO के रूप में कार्यरत अरविंद कृष्णा ने एआई तकनीक को अपनाने और उसके क्रियान्वयन को लेकर एक दूरदर्शी दृष्टिकोण पेश किया है। आईआईटी कानपुर से अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले अरविंद कृष्णा का स्पष्ट मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की असली आर्थिक क्षमता केवल सबसे बड़े और अत्यधिक संसाधन खींचने वाले मॉडलों से ही हासिल नहीं होगी। इसके विपरीत, उन्होंने उन छोटे और विशिष्ट एआई मॉडलों पर बल दिया है जो कंपनियों की खास व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किए जाते हैं। वर्ष 1990 में आईबीएम के साथ अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरविंद कृष्णा ने कॉर्पोरेट रणनीति में अपनी गहरी पकड़ बनाई और वर्ष 2020 में कंपनी के सर्वोच्य पद CEO का कार्यभार संभाला। उनका मानना है कि अधिकांश व्यावसायिक कार्यों के लिए विशालकाय जेनेरेटिव एआई मॉडलों के स्थान पर सटीक, किफायती और सुरक्षित एंटरप्राइज एआई मॉडल अधिक प्रभावी सिद्ध होते हैं। उनका यह व्यावहारिक नजरिया कंपनियों को परिचालन लागत घटाने और दक्षता बढ़ाने में सीधे तौर पर मदद कर रहा है। इसी एंटरप्राइज-केंद्रित सोच और दीर्घकालिक कॉर्पोरेट अनुभव के कारण उन्हें वैश्विक एआई दिग्गजों की सूची में प्रमुखता से शामिल किया गया है। रोजगार और भविष्य के कामकाज पर नया नजरिया: रवि कुमार एस तकनीकी सेवाओं और व्यावसायिक परिवर्तन के क्षेत्र में कॉग्निजेंट के CEO रवि कुमार एस एक प्रमुख पहचान के रूप में उभरे हैं। भविष्य के कार्यबल और एआई के व्यावसायिक प्रभाव पर उनके विचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहा गया है। उन्हें लगातार दूसरे वर्ष इस वैश्विक एआई सूची में जगह मिली है, जिसकी पुष्टि कॉग्निजेंट ने भी की है। रवि कुमार का पेशेवर सफर काफी अनोखा रहा है, क्योंकि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक न्यूक्लियर साइंटिस्ट के रूप में की थी। एआई के कारण नौकरियों के खतरे पर चल रही वैश्विक बहस के बीच रवि कुमार एस एक बेहद संतुलित और तर्कसंगत विचार प्रस्तुत करते हैं। उनका तर्क है कि एआई के आगमन को केवल सामूहिक रूप से नौकरियां खत्म होने के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बजाय, यह तकनीक लोगों के काम करने के पारंपरिक तरीकों और रोजमर्रा के कार्यों के स्वरूप को बुनियादी तौर पर बदल रही है। आने वाले समय में विभिन्न पेशों के पूरी तरह समाप्त होने की संभावना कम है, बल्कि एआई की मदद से कर्मचारी अधिक जटिल और रचनात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे, जबकि नियमित और दोहराव वाले काम ऑटोमेट हो जाएंगे। भारतीय भाषाओं और तकनीकी आत्मनिर्भरता की पहल: विवेक राघवन भारत की स्थानीय आवश्यकताओं और भाषाई विविधताओं को ध्यान में रखते हुए तकनीक विकसित करने के मामले में विवेक राघवन का काम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। विवेक राघवन भारत के ऐतिहासिक डिजिटल पहचान ढांचे यानी आधार की तकनीकी अवसंरचना तैयार करने वाली मूल कोर टीम का हिस्सा रहे हैं। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के इस विशाल अनुभव के बाद उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में कदम रखा और सरवम AI की सह-स्थापना की। सरवम AI का मुख्य उद्देश्य ऐसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल तैयार करना है जो भारत की बहुभाषी संस्कृति और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं की बारीकियों को गहराई से समझ सकें। भारत में करोड़ों नागरिक अंग्रेजी के बजाय अपनी मातृभाषा में डिजिटल सेवाओं का उपयोग करना पसंद करते हैं। ऐसे में भारतीय भाषाओं में काम करने वाले सक्षम एआई सिस्टम का निर्माण देश में एक बड़ा तकनीकी अवसर प्रस्तुत करता है। इसके अतिरिक्त, विवेक राघवन एआई के क्षेत्र में भारत की 'तकनीकी आत्मनिर्भरता' पर लगातार जोर देते रहे हैं। उनका मानना है कि भारत को केवल विदेशी एआई तकनीकों का उपभोक्ता बनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी विशिष्ट जरूरतों के अनुकूल स्वदेशी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना चाहिए। वैज्ञानिक मॉडलिंग और भौतिक दुनिया की समझ: अनिमा आनंदकुमार कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग केवल कंटेंट बनाने या चैटबॉट से संवाद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विज्ञान की जटिल समस्याओं को सुलझाने का एक शक्तिशाली साधन बन चुका है। इस दिशा में आईआईटी मद्रास की पूर्व छात्रा और प्रसिद्ध संस्थान कालटेक की प्रोफेसर अनिमा आनंदकुमार का शोध कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने एआई-आधारित साइंटिफिक मॉडलिंग और फोरकास्टिंग के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया है। अनिमा आनंदकुमार का नया उद्यम 'एक्सेलरेटेड अंडरस्टैंडिंग' इस बात पर केंद्रित है कि कैसे एआई की मदद से भौतिक दुनिया की जटिल प्रक्रियाओं को समझा और मॉडल किया जा सकता है। जलवायु परिवर्तन, मौसम पूर्वानुमान, भौतिक विज्ञान के नियमों और आणविक संरचनाओं जैसे जटिल विषयों को समझने के लिए उनका एआई फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है। उनका यह शोध एआई को मात्र भाषा या टेक्स्ट से आगे ले जाकर भौतिक विज्ञान की वास्तविक समस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में एक नया मार्ग प्रशस्त करता है। न्याय प्रणाली में एआई का समावेश: उत्कर्ष सक्सेना कानूनी क्षेत्र और न्यायिक व्यवस्था में तकनीक का एक बेहद क्रांतिकारी और व्यावहारिक उदाहरण उत्कर्ष सक्सेना के कार्यों में देखने को मिलता है। भारत के सुप्रीम कोर्ट में लॉ क्लर्क के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद उत्कर्ष सक्सेना ने न्यायिक प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के उद्देश्य से 'अदालत AI' की सह-स्थापना की। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारतीय न्याय प्रणाली की कार्यकुशलता में सुधार लाने के लिए एआई तकनीक का एकीकरण करना है। अदालत AI द्वारा विकसित तकनीक वर्तमान में देश के 11 राज्यों में 6,000 से अधिक जजों द्वारा इस्तेमाल की जा रही है। यह एआई सिस्टम अदालती दस्तावेजों के प्रबंधन, कानूनी शोध और केस फाइलों के त्वरित विश्लेषण में न्यायाधीशों की सहायता करता है। इस सफलता को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने अक्टूबर 2026 से राज्य की पूरी जिला न्यायपालिका में अदालत AI के सिस्टम को व्यापक रूप से लागू करने की आधिकारिक घोषणा की है। यह प्रयोग दर्शाता है कि एआई का प्रभाव अब केवल टेक कंपनियों या स्टार्टअप्स तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की अत्यंत संवेदनशील और पारंपरिक न्यायिक संरचना में भी यह परिवर्तन का माध्यम बन रहा है। स्वास्थ्य सेवा और जीवन रक्षा के लिए एआई तकनीक: सूची सरिया स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एआई के उन्नत इस्तेमाल और मरीजों की जान बचाने की दिशा में डॉक्टर सूची सरिया ने अविश्वसनीय योगदान दिया है। वह बायेसिएन हेल्थ की संस्थापिका होने के साथ-साथ प्रतिष्ठित जॉन्स होपकिंस यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने ऐसी अत्याधुनिक एआई तकनीक विकसित की है जो अस्पताल में भर्ती मरीजों में सेप्सिस यानी गंभीर और जानलेवा संक्रमण के खतरे का शुरुआती चरण में ही सटीक अनुमान लगा लेती है। सेप्सिस एक ऐसी चिकित्सीय स्थिति है जहां कुछ ही घंटों की देरी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। डॉक्टर सूची सरिया की एआई प्रणाली मरीज के वाइटल संकेतों और मेडिकल डेटा का निरंतर विश्लेषण करके डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को समय से पहले चेतावनी जारी करती है। इसके कारण चिकित्सकों को तुरंत उपचार शुरू करने का अवसर मिल जाता है, जिससे हजारों मरीजों की जान बचाना संभव हो पाया है। उनका यह कार्य चिकित्सा विज्ञान में एआई के जीवन-रक्षक अनुप्रयोग का एक अनुपम उदाहरण है। वैश्विक एआई परिदृश्य में भारतीय प्रभाव का महत्व 2026 की इस वैश्विक एआई सूची में शामिल ये नौ भारतीय मूल के दिग्गज इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य किसी एक देश, कंपनी या एक ही दृष्टिकोण पर निर्भर नहीं है। जहां अरविंद कृष्णा और रवि कुमार एस जैसे कॉर्पोरेट लीडर्स बिजनेस स्ट्रेटेजी और रोजगार के भविष्य को नया आकार दे रहे हैं, वहीं विवेक राघवन भाषाई समावेशन और स्वदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव मजबूत कर रहे हैं। दूसरी ओर, अनिमा आनंदकुमार, उत्कर्ष सक्सेना और सूची सरिया जैसे वैज्ञानिक और इनोवेटर्स एआई का उपयोग भौतिक विज्ञान, अदालतों और अस्पतालों में जीवन बचाने के लिए कर रहे हैं। इन सभी विशेषज्ञों का सामूहिक योगदान यह स्थापित करता है कि एआई तकनीक का असली उद्देश्य मानव जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना और समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाना है। इसका आप पर असर आप पर प्रभाव: इस वैश्विक उपलब्धि का भारत के तकनीक परिदृश्य, रोज़गार और डिजिटल सेवाओं पर सीधा और व्यापक असर पड़ेगा। • भारत में: देश भर के नागरिकों को जल्द ही क्षेत्रीय भाषाओं में अधिक सटीक और सुलभ डिजिटल तथा न्यायिक सेवाएं प्राप्त होंगी। स्वदेशी एआई मॉडलों के विकास से भारत की तकनीक निर्भरता विदेशी कंपनियों पर कम होगी। • तकनीक और रोज़गार क्षेत्र में: आईटी सेक्टर और कॉर्पोरेट जगत में काम करने वाले युवाओं के लिए नई कुशलताओं के अवसर पैदा होंगे। नौकरियों के खात्मे की बजाय वर्कफ़्लो में बदलाव आने से कर्मचारियों को बेहतर री-स्किलिंग के मौके मिलेंगे। • स्वास्थ्य और कानूनी सेवाओं में: जिला अदालतों से लेकर अस्पतालों तक में एआई के समावेश से मुकदमों का निपटारा तेज़ होगा और गंभीर बीमारियों का समय पर इलाज संभव हो सकेगा। आम जनता को पारदर्शी और त्वरित नागरिक सुविधाएं मिल सकेंगी। सवाल-जवाब 1. टाइम 100 एआई 2026 सूची क्या है? यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की एक वार्षिक वैश्विक सूची है, जिन्हें चार श्रेणियों में बांटा गया है। 2. इस सूची में कितने भारतीय मूल के लोग शामिल हैं? इस साल की वैश्विक 100 एआई सूची में भारतीय मूल के 9 दिग्गजों को जगह मिली है। 3. अरविंद कृष्णा का एआई को लेकर क्या दृष्टिकोण है? आईबीएम के CEO अरविंद कृष्णा केवल विशाल मॉडलों के स्थान पर कंपनियों की खास जरूरतों के लिए छोटे और प्रभावी एंटरप्राइज एआई मॉडलों पर जोर देते हैं। 4. सरवम AI का मुख्य उद्देश्य क्या है? विवेक राघवन द्वारा सह-स्थापित सरवम AI भारत की भाषाई विविधता के अनुकूल स्वदेशी एआई मॉडल तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करता है। 5. अदालत AI का न्याय प्रणाली में क्या योगदान है? उत्कर्ष सक्सेना द्वारा शुरू की गई अदालत AI 11 राज्यों में 6,000 से अधिक जजों तक पहुंच चुकी है और न्यायिक प्रक्रियाओं को गति प्रदान कर रही है। 6. डॉक्टर सूची सरिया ने स्वास्थ्य क्षेत्र में क्या विकास किया है? बायेसिएन हेल्थ की संस्थापिका डॉक्टर सूची सरिया ने मरीजों में गंभीर संक्रमण (सेप्सिस) के खतरे को शुरुआती चरण में ही पहचानने वाली एआई तकनीक विकसित की है। प्रेरणा और सबक प्रेरणा और सीख: इस सूची में स्थान पाने वाले दिग्गजों के सफर से उभरते उद्यमियों और टेक पेशेवरों के लिए कई महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं। • व्यावहारिक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करें: केवल लोकप्रिय प्रवृत्तियों के पीछे भागने के बजाय उन वास्तविक समस्याओं को हल करें जो व्यापार, स्वास्थ्य या कानून को प्रभावित करती हैं। • स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दें: अपनी संस्कृति और भाषाई विविधता के अनुकूल तकनीक का निर्माण करके विशाल अवसरों का सृजन किया जा सकता है। • तकनीकी समझ के साथ निरंतरता: अपनी तकनीकी विशेषज्ञता को लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रखने के लिए लगातार सीखने और बदलाव को अपनाने का दृष्टिकोण रखें। https://trendkia.com/ai/time-100-ai-2026-ki-vaishvika-suchi-men-chhaya-indian-origin-ki-hastiyon-ka-dabadaba-9-diggajon-ne-banai-jagaha-23737 TrendKia — Har trend, sabse pehle.