# अमेरिकी प्रशासन का नया एआई आदेश: सरकारी खरीद के जरिए मॉडल्स पर वैचारिक नियंत्रण की तैयारी

> व्हाइट हाउस ने सरकारी खरीद के लिए एआई मॉडल्स से जलवायु परिवर्तन और विविधता से जुड़े संदर्भ हटाने का आदेश जारी किया है, जिससे अभिव्यक्ति की आजादी और निष्पक्षता पर गंभीर बहस छिड़ गई है।

**Type:** article · **Category:** एआई · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/ai/us-administration-ka-naya-ai-order-sarakari-kharida-ke-jarie-models-para-vaicharika-niyntrana-ki-taiyari-33869 · **Language:** Hindi
**Tags:** आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डोनाल्ड ट्रंप, व्हाइट हाउस, ओपनएआई, गूगल, एंथ्रोपिक, टेक नीतियां

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक दौड़ में बढ़त बनाए रखने के उद्देश्य से व्हाइट हाउस ने 28 पन्नों की एक व्यापक कार्ययोजना सार्वजनिक की है। इस रणनीति का मुख्य लक्ष्य तकनीकी विकास की प्रतिस्पर्धा में चीन को पीछे छोड़ना बताया गया है। इस पूरी रूपरेखा के केंद्र में एक ऐसा नीतिगत बदलाव शामिल किया गया है जो सीधे तौर पर यह तय करने का प्रयास करता है कि सरकारी उपयोग में आने वाले सिस्टम सूचनाओं और तथ्यों को किस दृष्टिकोण से प्रस्तुत करेंगे। निष्पक्षता और सत्य के नाम पर सामने लाई गई यह व्यवस्था असल में तकनीक को एक तय राजनीतिक चश्मे से देखने की बाध्यता बनाती दिख रही है।

## दस्तावेज की भाषा और सत्य की परिभाषा पर विवाद
इस आधिकारिक नीति पत्र में सीधे शब्दों में किसी वैचारिक दबाव का जिक्र नहीं किया गया है। इसके बजाय दस्तावेज़ में यह उल्लेख किया गया है कि इन आधुनिक प्रणालियों को शुरुआत से ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विचारों के मुक्त प्रवाह को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना आवश्यक है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अमेरिकी सरकारी नीतियों को इस बुनियादी लक्ष्य में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। नीति का जोर इस बात पर है कि एआई के युग में विचारों की आजादी फले-फूले और संघीय एजेंसियों द्वारा खरीदी जाने वाली तकनीक किसी सामाजिक बदलाव के एजेंडे को आगे बढ़ाने के बजाय पूरी तरह से वस्तुनिष्ठ सत्य को उजागर करे।

समस्या इस बात से पैदा होती है कि वस्तुनिष्ठ सत्य किसे माना जाएगा और सामाजिक बदलाव के एजेंडे की सीमाएं क्या तय होंगी। इसी कार्ययोजना के अगले हिस्से में वाणिज्य विभाग को पूर्ववर्ती जो बाइडन प्रशासन के समय बने एआई नियमों की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। इस निर्देश में साफ तौर पर कहा गया है कि दिशा-निर्देशों से भ्रामक सूचनाओं, विविधता, समानता, समावेश यानी डीईआई और जलवायु परिवर्तन से संबंधित सभी संदर्भ पूरी तरह हटा दिए जाएं। इससे यह सवाल गहरा गया है कि क्या पर्यावरण और जलवायु से जुड़े वैज्ञानिक विषयों को भी एक खास वैचारिक एजेंडा मान लिया गया है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी तथ्य पत्र में दावा किया गया है कि लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स यानी एलएलएम को सच्चा होना चाहिए और उनमें ऐतिहासिक सटीकता, वैज्ञानिक जांच और निष्पक्षता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

## संघीय खरीद नीति और कार्यपालिका का नया आदेश
वाशिंगटन में इस योजना का औपचारिक ऐलान करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिकी जनता एआई मॉडल्स में किसी तरह का वोक या वामपंथी दृष्टिकोण नहीं देखना चाहती। इसी भाषण के बाद उन्होंने संघीय सरकार में वोक एआई की रोकथाम से जुड़े एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। इस आदेश में यह दर्ज किया गया है कि संघीय सरकार को निजी बाजार में मौजूद एआई मॉडल्स की कार्यप्रणाली को नियंत्रित करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही यह अनिवार्य शर्त जोड़ी गई है कि सरकारी खरीद के मामलों में सरकार ऐसे किसी भी मॉडल को स्वीकार नहीं करेगी जो वैचारिक कारणों से सटीकता या सत्य के साथ समझौता करता हो।

वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कार्यरत लगभग सभी प्रमुख निजी कंपनियां भारी-भरकम सरकारी अनुबंध हासिल करने की होड़ में हैं। ऐसे में यह नया आदेश एक परोक्ष माध्यम बन जाता है जिसके दबाव में कंपनियों को अपने सिस्टम को सरकार के तय मानकों के अनुसार ढालना पड़ सकता है। कार्यकारी आदेश के कई हिस्सों में ऐसे मॉडल्स की आलोचना की गई है जो सामाजिक विविधता का समर्थन करते हैं, नस्लीय भेदभाव के मामलों को रेखांकित करते हैं या लैंगिक समानता को प्राथमिकता देते हैं। शीर्ष स्तर से किसी पूर्वाग्रह को रोकने के नाम पर जारी यह व्यवस्था स्वयं एक औपचारिक वैचारिक दबाव की तरह काम करती दिख रही है।

## कंपनियों की स्थिति और संवैधानिक अधिकारों का सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच तकनीकी कंपनियों के सामने अपने मॉडल्स के व्यवहार को संतुलित करने की चुनौती खड़ी हो गई है। ओपनएआई से जुड़े मॉडल व्यवहार इंजीनियरों के अनुसार सिस्टम को पहले से ही निष्पक्ष बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है और तकनीकी नजरिए से सरकार द्वारा तय मानकों का पालन करना कोई बहुत बड़ी रुकावट नहीं है। यह मामला केवल तकनीक तक सीमित नहीं है बल्कि यह सीधे तौर पर अभिव्यक्ति के अधिकारों और कानूनी सीमाओं से जुड़ा हुआ है।

यदि एंथ्रोपिक, ओपनएआई या गूगल जैसी कंपनियां अपने एलएलएम में नस्लीय पूर्वाग्रहों को कम करने के लिए विशेष उपाय करती हैं या जलवायु संकट के खतरों को स्पष्ट रूप से दर्शाने का स्वतंत्र फैसला लेती हैं, तो यह उनका अपना संपादकीय और तकनीकी अधिकार माना जाता है। ऐसे में यदि सरकार अपने अनुबंधों से उन कंपनियों को बाहर करने की शर्त रखती है जो इन विषयों को स्वतंत्र रूप से प्रस्तुत करती हैं, तो इसे कंपनियों के अधिकारों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप माना जा सकता है। इसके बावजूद अब तक किसी भी बड़ी टेक कंपनी ने सार्वजनिक मंच पर इस नीतिगत निर्देश का औपचारिक विरोध दर्ज नहीं कराया है। गूगल ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से जुड़े सरकारी कदमों का स्वागत किया है, जबकि एंथ्रोपिक ने निर्यात नियंत्रण में आई नरमी पर चिंता जताने के अलावा योजना पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। ओपनएआई का कहना है कि वह पहले से ही पूर्ण वस्तुनिष्ठता के बेहद करीब है।

## टेक उद्योग को मिलने वाली रियायतें और नया माहौल
कंपनियों की इस चुप्पी के पीछे एक बड़ा कारण यह है कि नई एआई कार्ययोजना उनके व्यावसायिक हितों के लिए कई बड़े अवसर भी लेकर आई है। जो बाइडन के कार्यकाल के दौरान जहां बिग टेक कंपनियों पर नियामकीय निगरानी काफी सख्त थी, वहीं नई नीति चीन के खिलाफ तकनीकी दौड़ में उद्योग जगत को सरकार का प्रमुख साझेदार मानती है। इस योजना के तहत बड़े डेटा केंद्रों के निर्माण के मार्ग में आने वाली पर्यावरणीय आपत्तियों को किनारे करने की खुली छूट दी जा रही है।

निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए एआई अनुसंधान में संघीय मदद बढ़ाने का वादा भी किया गया है। इस दस्तावेज़ में एक ऐसा प्रावधान भी शामिल है जो उन राज्यों के संघीय अनुदान में कटौती करता है जो अपने स्तर पर एआई को नियंत्रित करने के कड़े कानून बनाने की कोशिश करेंगे। हालिया बजट प्रक्रिया में राज्यों द्वारा नियम बनाने पर 10 साल का पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित नहीं हो सका था, इसलिए राज्यों को संघीय धन रोकने का यह नियम उसी प्रयास का एक विकल्प बनकर सामने आया है।

## सूचना की स्वतंत्रता और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
आम नागरिकों के दृष्टिकोण से यह नया आदेश एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है क्योंकि समाज में सूचना, समाचार और ज्ञान प्राप्त करने के लिए एआई टूल्स का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी परंपरा में स्वतंत्र सूचना माध्यमों को सरकारी दखल से दूर रखने की परंपरा रही है। सीनेटर एडवर्ड मार्की ने इस व्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अल्फाबेट, एंथ्रोपिक, ओपनएआई, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को पत्र लिखकर इस आदेश का विरोध करने का आह्वान किया है।

सीनेटर मार्की ने अपने संदेश में आगाह किया है कि इस कार्यकारी आदेश के विस्तृत क्रियान्वयन के नियम भले ही पूरी तरह स्पष्ट न हों, लेकिन यह बड़ी कंपनियों के लिए एक बड़ा वित्तीय दबाव बनाएगा ताकि उनके चैटबॉट्स ऐसी कोई भाषा या विचार व्यक्त न करें जो प्रशासन को असहज करे। उन्होंने टिप्पणी की कि सरकारी शक्ति का उपयोग इस तरह किया जा रहा है जिससे आधुनिक चैटबॉट्स एक खास राजनीतिक चैनल की भाषा बोलने लगें।

व्हाइट हाउस में इस योजना पर काम करने वाली टीम का मानना है कि उनका कदम पूरी तरह से तटस्थता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है और करदाताओं के पैसे का उपयोग किसी पक्षपाती व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए नहीं होना चाहिए। इस कार्ययोजना में चीन का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि वहां की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी किस तरह अपने प्रचार और सेंसरशिप के जरिए तथ्यों को नियंत्रित करती है। कार्ययोजना में चीनी मॉडल्स की जांच करने का निर्देश दिया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे कम्युनिस्ट पार्टी के रुख से कितने प्रभावित हैं। अगर अमेरिकी कंपनियां निष्पक्षता की रक्षा के लिए दृढ़ रुख नहीं अपनाती हैं, तो भविष्य में अमेरिकी मॉडल्स भी वाशिंगटन के तय राजनीतिक दृष्टिकोण के दायरे में सिमट कर रह सकते हैं।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी सरकार की नई एआई खरीद नीति से आम उपयोगकर्ताओं और वैश्विक तकनीकी परिदृश्य पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

- **वैश्विक उपयोगकर्ताओं पर:** यदि बड़ी टेक कंपनियां सरकारी अनुबंध पाने के लिए अपने मॉडल्स में बदलाव करती हैं, तो आम लोगों को मिलने वाले उत्तरों में जलवायु परिवर्तन और सामाजिक मुद्दों पर सीमित या एकतरफा जानकारी मिल सकती है। उपयोगकर्ताओं को निष्पक्ष संदर्भ प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र शोध और वैकल्पिक स्रोतों पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है।
- **टेक उद्योग और रोजगार:** डेटा सेंटर्स के निर्माण और निजी क्षेत्र के अनुसंधान के लिए मिलने वाले फंड से एआई क्षेत्र में पूंजी निवेश और नई नौकरियों के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, कंपनियों को सरकारी नियमों और तकनीकी मानकों के बीच संतुलन बनाने के लिए अपनी नीतियों में बड़े बदलाव करने होंगे।
- **राज्य स्तरीय नियमों पर:** राज्यों द्वारा बनाए जाने वाले स्थानीय एआई सुरक्षा कानूनों पर असर पड़ेगा क्योंकि संघीय मदद रोकने का प्रावधान रखा गया है। इससे क्षेत्रीय स्तर पर नागरिकों के अधिकारों और डेटा सुरक्षा की निगरानी कमजोर पड़ सकती है।
- **संवैधानिक और अभिव्यक्ति के अधिकारों पर:** अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और तकनीक की स्वायत्तता के बीच नया कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है। यह कदम अन्य देशों के लिए भी तकनीकी सिस्टम को राजनीतिक प्राथमिकताओं के अनुसार ढालने की एक मिसाल बन सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
व्हाइट हाउस ने यह कदम वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा और घरेलू राजनीतिक प्राथमिकताओं को साधने के लिए उठाया है। इस फैसले के पीछे अमेरिकी तकनीकी बढ़त बनाए रखने और सरकारी खर्च पर नियंत्रण रखने का तर्क दिया गया है।

- **चीन के साथ प्रतिस्पर्धा:** इस पूरी 28 पन्नों की कार्ययोजना का मुख्य आधार कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में चीन से आगे निकलना है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि मजबूत बुनियादी ढांचे और कम नियामकीय अड़चनों के बिना वैश्विक तकनीकी महाशक्ति बने रहना संभव नहीं है।
- **घरेलू राजनीतिक प्राथमिकताएं:** प्रशासन बाइडन काल के दौरान एआई नियमों में शामिल किए गए विविधता, सामाजिक समानता और जलवायु परिवर्तन संबंधी अनिवार्यताओं को गैर-जरूरी और पक्षपाती मानता है। अधिकारियों का तर्क है कि सरकारी खजाने का इस्तेमाल किसी खास विचारधारा को बढ़ावा देने वाले टूल्स खरीदने में नहीं होना चाहिए।
- **बिग टेक को रणनीतिक साझेदार बनाना:** निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी मजबूत करने के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरियों को आसान किया गया है और भारी निवेश का वादा किया गया है। बदले में सरकार यह चाहती है कि कंपनियां सरकारी एजेंसियों के लिए तय वैचारिक और तकनीकी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

## सवाल-जवाब

### 1. व्हाइट हाउस की नई एआई कार्ययोजना का मुख्य लक्ष्य क्या है?
इस 28 पन्नों की कार्ययोजना का प्राथमिक उद्देश्य एआई तकनीक की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में चीन को पीछे छोड़ना और अमेरिकी तकनीकी बढ़त सुनिश्चित करना है।

### 2. कार्यकारी आदेश में किन विषयों के संदर्भ हटाने का निर्देश दिया गया है?
वाणिज्य विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह एआई नियमों से भ्रामक जानकारी, विविधता, समानता, समावेशन (डीईआई) और जलवायु परिवर्तन के सभी संदर्भ हटा दे।

### 3. क्या यह आदेश निजी बाजार में एआई के सामान्य उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है?
नहीं, आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निजी बाजार में एआई के उपयोग को सीधे नियंत्रित नहीं किया जाएगा, बल्कि यह शर्त केवल संघीय सरकार द्वारा की जाने वाली खरीद पर लागू होगी।

### 4. टेक कंपनियों ने इस नए आदेश पर क्या रुख अपनाया है?
गूगल और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों ने बुनियादी ढांचे और विकास से जुड़ी नीतियों का स्वागत किया है और आदेश पर कोई सार्वजनिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।

### 5. सीनेटर एडवर्ड मार्की ने इस कदम पर क्या आपत्ति जताई है?
सीनेटर एडवर्ड मार्की ने टेक कंपनियों को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यह आदेश कंपनियों पर अपने सिस्टम को सरकार की पसंद के अनुसार ढालने का वित्तीय दबाव बनाएगा।

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