अमेरिकी चुनाव 2028 को लेकर ओपनएआई की नई रणनीति, नीतिगत बदलावों और न्यू डील की तर्ज पर पेश किया एजेंडा ओपनएआई के मुख्य वैश्विक मामलों के अधिकारी क्रिस लेहाने ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव को एआई के लिए निर्णायक मोड़ बताते हुए एक नई नीतिगत रूपरेखा पेश की है। उन्होंने 1930 के दशक की 'न्यू डील' की तर्ज पर एआई से जुड़े आर्थिक और तकनीकी बदलावों के लिए एक तीसरा रास्ता अपनाने का प्रस्ताव रखा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच ओपनएआई ने 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को इस क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ करार दिया है। कंपनी के मुख्य वैश्विक मामलों के अधिकारी क्रिस लेहाने का मानना है कि राजनीतिक नेताओं को केवल तकनीक विरोधी जनभावनाओं या डेटा सेंटरों के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर सतही बयानबाजी करने के बजाय ठोस नीतियां तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए। जनता के बीच तकनीक के आर्थिक असर को लेकर गहरी चिंताएं हैं, जिन्हें दूर करने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं की दरकार है। 1930 के दशक की 'न्यू डील' से तुलना और तीसरा रास्ता क्रिस लेहाने ने एक नए निबंध में एआई की अर्थव्यवस्था को बदलने की क्षमता की तुलना 1930 के दशक के उस दौर से की है जब राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने 'न्यू डील' कार्यक्रम पेश किए थे। उस समय औद्योगिकीकरण और महामंदी ने पुरानी आर्थिक व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया था, जिससे आम नागरिकों के मन में अपनी आजीविका को लेकर भारी असुरक्षा पैदा हो गई थी। लेहाने का कहना है कि आज भी अमेरिकी समाज अपने आर्थिक भविष्य पर से नियंत्रण खोने को लेकर वैसी ही आशंकाओं से घिरा हुआ है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्होंने नीति-निर्माताओं से एक सम्मोहक तीसरा रास्ता तैयार करने का आग्रह किया है, ताकि आम लोग एआई के जरिए पैदा होने वाले लाभ में सीधी हिस्सेदारी हासिल कर सकें। अपने प्रस्ताव में उन्होंने पांच मुख्य नीतिगत प्राथमिकताओं का खाका खींचा है। इनमें कार्यबल की सुरक्षा, शैक्षणिक सुधार, एआई प्रणालियों की सुरक्षा और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार शामिल है। मध्यावधि चुनाव के नतीजे और बदलती राजनीतिक प्राथमिकताएं यह प्रस्ताव हाल ही में संपन्न हुए मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी को मिली बड़ी जीत के ठीक बाद सामने आया है। इन चुनावों में जीवनयापन की बढ़ती लागत से जूझ रहे मतदाताओं के असंतोष के बीच कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण स्थापित हुआ। हालांकि इन चुनावों में एआई कोई सबसे बड़ा मुद्दा नहीं था, लेकिन डेटा सेंटर निर्माण का विरोध कई राज्यों के चुनावी मुकाबलों में एक प्रमुख द्विदलीय मुद्दा बनकर उभरा। स्थानीय लोग लगातार बढ़ते बिजली बिलों और ऊर्जा की खपत को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। एआई नाउ इंस्टीट्यूट में एआई और कॉरपोरेट पावर नीति प्रमुख केट ब्रेनन के अनुसार, लेहाने का यह ताजा रुख ओपनएआई के पिछले साल के नीतिगत एजेंडे से काफी अलग नजर आता है। पहले कंपनी का पूरा ध्यान एआई के विकास को गति देने, नियामक बाधाओं को कम करने और बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार पर केंद्रित था। न्यू डील जैसे ऐतिहासिक सरकारी हस्तक्षेप का नाम लेना दरअसल जनता के हित में सरकारी क्षमता को लागू करने का संकेत होता है, जबकि यहां एक निजी कंपनी अपने फायदे के लिए नीतियां बनवाने की वकालत कर रही है। महंगाई, डेटा सेंटर और आजीविका से जुड़े सवाल 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए जीवनयापन की लागत, महंगाई और टैरिफ पहले से ही बेहद अहम मुद्दे बने हुए हैं। आने वाले दो वर्षों में तकनीक से जुड़े आर्थिक बदलाव भी इस व्यापक बहस का केंद्र बन सकते हैं। मतदाताओं को इस बात की चिंता सता रही है कि नए डेटा सेंटरों से बिजली की दरें बढ़ेंगी, स्वचालन के कारण उनकी नौकरियां छिन जाएंगी और तकनीकी क्रांति से होने वाला पूरा आर्थिक लाभ केवल मुट्ठी भर अमीर कंपनियों की तिजोरियों में सिमट जाएगा। लेहाने इन सभी चिंताओं को स्वीकार करते हैं, लेकिन उनके प्रस्तावों में दौलत के इस अत्यधिक केंद्रीकरण को रोकने के लिए ठोस बाध्यकारी प्रावधानों की कमी साफ दिखाई देती है। इसके विपरीत, वे इस बात पर जोर देते हैं कि जो अमेरिकी नागरिक एआई को अपनाने के लिए तैयार हैं, उनके लिए यह तकनीक समृद्धि का नया मार्ग खोल सकती है। टैक्स कोड और कामगारों की हिस्सेदारी के सुझाव टैक्स नियमों में बदलाव को लेकर लेहाने ने कुछ खास सुझाव रखे हैं। वे चाहते हैं कि कामगारों को एआई कौशल सीखने के लिए प्रोत्साहन मिले, नए उद्यमियों को पूंजी तक आसान पहुंच दी जाए और कर्मचारियों के स्वामित्व तथा मुनाफा साझा करने के नए तरीके अपनाए जाएं। हालांकि आलोचकों का मानना है कि ये स्वैच्छिक सुझाव उन बाध्यकारी कानूनी नियमों के समान नहीं हैं, जो यह तय कर सकें कि कंपनियों द्वारा अर्जित संपत्ति में श्रमिकों को वास्तविक हिस्सा मिले या फिर स्वचालन से विस्थापित होने वाले कामगारों की भरपाई कंपनियां स्वयं करें। इस दृष्टिकोण पर टिप्पणी करते हुए ब्रेनन ने कहा कि यह पूरी नीति पहले से ही उस भविष्य पर आधारित है जहां एआई का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो चुका है और समाज को इसका लाभ मिल रहा है, जबकि हकीकत में ऐसा होना अभी साबित नहीं हुआ है। उनके मुताबिक नीति-निर्माताओं को कॉरपोरेट टैक्स की दरों में संशोधन करने, मशीनों की जगह इंसानों को काम पर रखने वाली कंपनियों को टैक्स छूट देने और तकनीकी कंपनियों के अत्यधिक बाजार प्रभाव को रोकने वाले उपायों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। डेटा सेंटरों पर पाबंदी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा डेटा सेंटरों के निर्माण पर होने वाले विरोध को खारिज करते हुए लेहाने ने इसके आर्थिक फायदों को सामने रखा है। उनका तर्क है कि डेटा केंद्रों के निर्माण से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होते हैं और नगरपालिकाओं को पर्याप्त टैक्स राजस्व मिलता है। इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों को चेतावनी दी कि डेटा सेंटरों के निर्माण पर किसी भी प्रकार की रोक लगाने से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अमेरिका की चीन पर बढ़त खतरे में पड़ सकती है। अपने इस रुख को धार देने के लिए उन्होंने डेटा सेंटरों पर रोक लगाने की मांग की तुलना 2002 में इराक युद्ध को अधिकृत करने वाले उस मतदान से कर दी, जिसे बाद में एक ऐतिहासिक भूल माना गया था। शिक्षा, बच्चों की सुरक्षा और मॉडल कंट्रोल अपने एजेंडे में लेहाने ने बाल सुरक्षा और शिक्षा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है। उन्होंने नाबालिगों के लिए उम्र के अनुसार सुरक्षा मानक तय करने और नाबालिगों के लिए बनाए गए एआई साथियों के आसपास सख्त सुरक्षा घेरा बनाने की जरूरत बताई है। साथ ही उन्होंने स्कूलों की कक्षाओं से एआई को पूरी तरह बाहर रखने के कदमों का विरोध किया है। उनका तर्क है कि अगर स्कूलों में तकनीक का इस्तेमाल रोका गया, तो अमीर छात्रों और ग्रामीण समुदायों के बच्चों के बीच एक बड़ा शैक्षणिक अंतर पैदा हो जाएगा। हालांकि आलोचक मानते हैं कि एआई से सीखने की क्षमता में वास्तव में सुधार होता है या नहीं, यह दावा अभी तक असत्यापित है और इसे मानव शिक्षकों द्वारा दिए जाने वाले व्यक्तिगत ध्यान से बेहतर नहीं माना जा सकता। सुरक्षा मानकों के मोर्चे पर लेहाने ने लागू करने योग्य एआई सुरक्षा नियमों, स्वतंत्र मूल्यांकन, सार्वजनिक निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर सिस्टम को बंद करने वाले 'किल स्विच' के प्रावधानों की वकालत की है। दूसरी ओर, हालिया अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि प्रमुख लैब्स ने अभी तक इस बात की कोई विस्तृत योजना सार्वजनिक नहीं की है कि यदि कोई मॉडल मानव नियंत्रण से बाहर निकल जाए तो उससे कैसे निपटा जाएगा। कैलिफोर्निया में 2024 के एआई सुरक्षा विधेयक 'एसबी 1047' का उदाहरण देते हुए विश्लेषकों ने कंपनी के पुराने रुख की ओर इशारा किया है, जिसका कंपनी ने उस वक्त विरोध किया था। उस कानून में विनाशकारी जोखिमों के अनिवार्य मूल्यांकन और शटडाउन क्षमताओं की मांग की गई थी। हालांकि हाल के दिनों में कंपनी के रुख में कुछ लचीलापन देखा गया है और उसने कुछ राज्यों के सुरक्षा कानूनों का समर्थन करते हुए स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं को अनुमति देने की बात कही है। निर्णय लेने में इंसानी नियंत्रण का भविष्य निबंध के अंत में लेहाने इस बात पर बल देते हैं कि एआई के उपयोग से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों पर अंतिम नियंत्रण इंसानों के हाथ में ही रहना चाहिए और पूरा निर्णय मशीनों पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। हालांकि जब कार्यस्थलों, स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी तंत्र में एआई का उपयोग अनिवार्य बनता जा रहा हो, तब वास्तविक इंसानी नियंत्रण का स्वरूप क्या होगा, यह सवाल अभी अनुत्तरित है। आम मध्यम वर्ग के भविष्य को सीधे तौर पर तकनीकी दिग्गजों की अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखने की यह नीति वास्तविक अधिकार देगी या सत्ता के मौजूदा ढांचे को और मजबूत करेगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। इसका आप पर असर इस नीतिगत बहस का सीधा असर तकनीक के नियमन, रोजगार के भविष्य और ऊर्जा खपत की लागत पर पड़ेगा। • कार्यबल और नौकरियां: एआई स्वचालन से नौकरियों के विस्थापन की आशंकाओं के बीच नए कौशल सीखने पर जोर दिया जा रहा है। कंपनियों द्वारा इंसानों की जगह मशीनों को प्राथमिकता देने से रोजगार के नियमों और कामगारों की हिस्सेदारी पर नई बहस छिड़ सकती है। • बिजली बिल और ऊर्जा: बड़े डेटा सेंटरों के निर्माण से ग्रिड पर भारी दबाव पड़ने और बिजली के बिल बढ़ने की आशंका है। स्थानीय स्तर पर डेटा सेंटरों के विरोध से ऊर्जा नीतियों और बिजली दरों पर सीधा असर पड़ सकता है। • स्कूली शिक्षा: कक्षाओं में एआई उपकरणों को शामिल करने या बाहर रखने का फैसला बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित करेगा। यदि तकनीक की पहुंच असमान रही तो ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के पिछड़ने का जोखिम बना रहेगा। • कानूनी नियमन: एआई सिस्टम के लिए शटडाउन स्विच और कड़े सुरक्षा मानकों की मांग आने वाले वर्षों में नए कानून ला सकती है। इससे आम उपयोगकर्ताओं के डेटा की सुरक्षा और एआई साथियों के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लागू हो सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में जीवनयापन की लागत और डेटा सेंटरों के विरोध को लेकर मतदाताओं के रुख के बाद यह नीतिगत प्रस्ताव सामने आया है। • आर्थिक असंतोष और चुनाव परिणाम: मध्यावधि चुनावों में महंगाई और खर्चों से परेशान मतदाताओं ने कांग्रेस की सत्ता पलट दी। इस राजनीतिक बदलाव ने टेक कंपनियों को यह अहसास कराया कि 2028 के चुनाव में तकनीक की लागत और नौकरियों का मुद्दा बड़ा रूप ले सकता है। • डेटा सेंटरों के खिलाफ जनविरोध: अमेरिका के कई चुनावी क्षेत्रों में नए डेटा सेंटरों के निर्माण का दोनों प्रमुख दलों के मतदाताओं ने कड़ा विरोध किया। भारी बिजली खपत और स्थानीय जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव के चलते नेताओं को निर्माण पर रोक लगाने की मांग करनी पड़ी। • नियामक रुख में बदलाव: ओपनएआई ने पहले कैलिफोर्निया के सुरक्षा कानून जैसे प्रस्तावों का विरोध किया था, लेकिन बढ़ते राजनीतिक दबाव के कारण अब कंपनी खुद आगे बढ़कर एक संतुलित नीतिगत ढांचा पेश करने की कोशिश कर रही है। • चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की तकनीकी बढ़त बनाए रखने की चिंता के चलते बुनियादी ढांचे को रोकने से बचने की दलीलें दी जा रही हैं। सवाल-जवाब 1. ओपनएआई के क्रिस लेहाने ने 2028 के चुनाव को लेकर क्या कहा है? उन्होंने 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को एआई के लिए एक निर्णायक मोड़ बताया है और नेताओं से तकनीक के असर को लेकर ठोस नीतियां बनाने की अपील की है। 2. लेहाने ने एआई की तुलना 'न्यू डील' से क्यों की? उन्होंने 1930 के दशक के आर्थिक संकट और सुधारों का हवाला देते हुए कहा कि आज भी लोग आर्थिक असुरक्षा महसूस कर रहे हैं, जिसके लिए सरकार को एक तीसरा रास्ता निकालना चाहिए। 3. डेटा सेंटरों को लेकर क्या विवाद चल रहा है? स्थानीय नागरिक बिजली बिलों में बढ़ोतरी और ऊर्जा की अत्यधिक खपत के कारण नए डेटा सेंटरों के निर्माण का विरोध कर रहे हैं। 4. डेटा सेंटर पर रोक लगाने को लेकर लेहाने की क्या चेतावनी है? उन्होंने चेतावनी दी कि डेटा सेंटरों पर रोक लगाने से चीन के मुकाबले अमेरिका की बढ़त खतरे में पड़ सकती है और इसकी तुलना 2002 के इराक युद्ध वाले वोट से की। 5. एआई नाउ इंस्टीट्यूट की केट ब्रेनन ने प्रस्ताव पर क्या आपत्ति जताई? ब्रेनन ने कहा कि न्यू डील का रूपक जनता के भले के लिए होता है, जबकि यह प्रस्ताव एक निजी कंपनी ने अपने फायदे के लिए तैयार किया है। 6. स्कूली शिक्षा और बच्चों की सुरक्षा के बारे में क्या सुझाव दिए गए हैं? नाबालिगों के लिए एआई साथियों पर सख्त नियम बनाने और ग्रामीण छात्रों के हित में एआई को कक्षाओं से बाहर न रखने का सुझाव दिया गया है। https://trendkia.com/ai/us-election-2028-ko-lekara-openai-ki-nai-rananiti-nitigata-badalavon-aura-new-deal-ki-tarja-para-pesha-kiya-ejenda-56730 TrendKia — Har trend, sabse pehle.