अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में एआई लॉबी का करोड़ों डॉलर का दांव बेअसर, कई बड़े उम्मीदवार हारे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नियमों को प्रभावित करने के लिए चुनावी मैदान में उतरे राजनीतिक समूहों को मध्यावधि चुनाव में बड़ा झटका लगा है, जहां करोड़ों डॉलर खर्च करने के बाद भी मुख्य चेहरे हार गए। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र के भविष्य और उसके नियमन की दिशा तय करने के मकसद से राजनीतिक गुटों ने पानी की तरह पैसा बहाया। एआई उद्योग के समर्थक समूहों और कड़े नियमों की मांग करने वाले संगठनों, दोनों पक्षों ने चुनावी समर में करोड़ों डॉलर झोंक दिए। चुनाव नतीजों के सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि भारी भरकम फंड के दम पर लड़ी गई यह जंग मिली जुली साबित हुई है, जिसमें सबसे ज्यादा आर्थिक मदद पाने वाले कई प्रमुख दावेदारों को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। उद्योग समर्थक राजनीतिक कमेटियों का दांव पड़ा उल्टा एआई तकनीक का समर्थन करने वाले उद्योग जगत की तरफ से दो प्रमुख पॉलिटिकल एक्शन कमेटियों ने चुनावी समीकरणों को बदलने के लिए बड़ा फंड खर्च किया। अमेरिकन मिशन और बिल्डिंग द फ्यूचर नामक इन दोनों पीएसी ने मिलकर साउथ कैरोलिना से सीनेट उम्मीदवार डार्लिन ग्राहम के प्रचार में 4.8 मिलियन डॉलर की भारी रकम लगाई। इसके बावजूद डार्लिन ग्राहम अपनी सीट बचाने में नाकाम रहीं और चुनाव हार गईं। राजनीतिक ढांचे पर नजर डालें तो अमेरिकन मिशन दरअसल लीडिंग द फ्यूचर (एलटीएफ) की रिपब्लिकन खर्च इकाई के रूप में काम करता है। लीडिंग द फ्यूचर एक बड़ा राजनीतिक समूह है, जिसे ओपनएआई के प्रेसिडेंट ग्रेग ब्रॉकमैन और जानी मानी वेंचर कैपिटल फर्म आंद्रेसेन होरोविट्ज़ का वित्तीय समर्थन हासिल है। चुनावी मैदान में अमेरिकन मिशन की विफलता सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं रही। इस संगठन ने मोंटाना से रिपब्लिकन हाउस प्रत्याशी आरोन फ्लिंट और नॉर्थ कैरोलिना से लॉरी बकआउट के पक्ष में 500,000 डॉलर से अधिक की राशि अलग अलग खर्च की। चुनावी नतीजों में इन दोनों ही उम्मीदवारों को पराजय का मुंह देखना पड़ा। दूसरी तरफ, लीडिंग द फ्यूचर की डेमोक्रेटिक खर्च शाखा 'थिंक बिग' का प्रदर्शन कुछ बेहतर रहा। थिंक बिग ने फ्लोरिडा के प्रतिनिधि जेरेड मॉस्कोविट्ज़ का समर्थन किया था, जो दोबारा चुनाव जीतने में कामयाब रहे। सख्त सुरक्षा मानकों की वकालत करने वाले समूहों का प्रदर्शन एआई तकनीक पर मजबूत नियंत्रण और कड़े सुरक्षा मानकों की वकालत करने वाले राजनीतिक समूहों के नतीजे भी पूरी तरह एकतरफा नहीं रहे। एंथ्रोपिक समर्थित संगठन पब्लिक फर्स्ट ने अपनी संबंधित पीएसी के जरिए कई रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन किया था, लेकिन वे सभी चुनाव हार गए। हालांकि डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों के मामले में इस गुट को उल्लेखनीय सफलता मिली। पब्लिक फर्स्ट ने कैलिफोर्निया के स्टेट सीनेटर स्कॉट वीनर का समर्थन करने वाली एक पीएसी को 3 मिलियन डॉलर का भारी योगदान दिया, जो चुनाव नतीजों के रुझानों में अपनी सीट पर आगे चल रहे थे। इसी बीच गार्डरेल्स अलायंस नामक एक अन्य संगठन ने एआई कंपनियों से फंडिंग लेने वाले उम्मीदवारों को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने की रणनीति अपनाई। गार्डरेल्स अलायंस ने उन दो उम्मीदवारों के विरोध में 1 मिलियन डॉलर से अधिक की रकम अलग अलग खर्च की जो आखिरकार चुनाव हार गए। इनमें कैलिफोर्निया के प्रतिनिधि जिमी गोमेज़ और मोंटाना के आरोन फ्लिंट शामिल थे। इसके अतिरिक्त, इस समूह ने एंजेला गोंजालेस-टोरेस के प्रचार में 300,000 डॉलर का फंड लगाया, जिन्होंने कड़े मुकाबले में जिमी गोमेज़ को मात दी। चुनावी लहर और प्राथमिक चुनावों की रणनीति राजनीतिक विश्लेषकों के लिए इन नतीजों से एआई पर हुए खर्च के असर को अलग करके देखना काफी जटिल है, क्योंकि मंगलवार के चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की एक व्यापक लहर देखने को मिली। रिपब्लिकन उम्मीदवारों को जिताने के लिए चुनावी मैदान में आधा बिलियन डॉलर झोंकने वाले एलन मस्क के समर्थित कई उम्मीदवार भी अपनी सीटें हार गए। लीडिंग द फ्यूचर ने भी जिन प्रत्याशियों को मजबूत मानकर दांव लगाया था, उनमें से कई को डेमोक्रेट्स के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा। हालांकि लीडिंग द फ्यूचर के लिए आम चुनाव कभी भी मुख्य प्राथमिक एजेंडा नहीं था। समूह ने मतदान से पहले स्पष्ट किया था कि वह पार्टी के प्राथमिक चुनावों (प्राइमरी इलेक्शन) में पैसा लगाने को ज्यादा प्रभावी मानता है। उनका मानना है कि प्राथमिक स्तर पर प्रत्याशियों के चयन के दौरान फंड खर्च करने से उम्मीदवारों की पहचान बनती है और उन्हें भविष्य का एआई नीतिगत एजेंडा तैयार करने में मदद मिलती है। लीडिंग द फ्यूचर ने प्राथमिक चुनावों के दौरान कुल 27.38 मिलियन डॉलर का भारी फंड खर्च किया था। इसमें से अकेले 8 मिलियन डॉलर न्यूयॉर्क असेंबली के सदस्य एलेक्स बोरेस की उम्मीदवारी का विरोध करने में खर्च किए गए, जो बीते जून महीने में कांग्रेस की अपनी दावेदारी हार गए थे। किसी भी आम चुनाव में उतरने से पहले एलटीएफ इस बात का बारीकी से आकलन करता है कि मुकाबला कितना कड़ा है, क्या उनके खर्च से नतीजे बदल सकते हैं, या फिर भविष्य के चुनावों के लिए अपनी पूंजी सुरक्षित रखना ज्यादा समझदारी भरा कदम होगा। एआई फंडिंग का राजनीतिक असर और भविष्य की दिशा गार्डरेल्स अलायंस के पॉलिटिकल डायरेक्टर चार्ली ब्लैटलर ने इस बात का अलग विश्लेषण पेश किया कि आखिर उद्योग समर्थक समूहों ने आम चुनाव में अपेक्षाकृत कम राशि क्यों खर्च की। ब्लैटलर के मुताबिक, वे यह कतई नहीं चाहते थे कि उनका पैसा इन आम चुनावों में कोई बड़ा चुनावी मुद्दा बन जाए। उन्होंने मिशिगन सीनेट के प्राथमिक चुनाव का उदाहरण दिया, जहां इजराइल समर्थक लॉबिंग समूह एआईपीएसी ने अब्दुल एल-सईद के खिलाफ डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हेली स्टीवंस के प्रचार में लगभग 30 मिलियन डॉलर झोंक दिए थे। उस मुकाबले में स्टीवंस को हार माननी पड़ी और एल-सईद ने सीनेट सीट पर जीत दर्ज की। ब्लैटलर ने बताया कि उस मुकाबले में लॉबिंग ग्रुप का पैसा ही सबसे बड़ा मुद्दा बन गया था। उन्होंने कहा कि आम जनता एआई अरबपतियों और इन कंपनियों को चलाने वाले लोगों से दूरी महसूस करती है तथा टेक उद्योग के राजनीतिक खर्च और लॉबिंग को बेहद अविश्वास की नजर से देखती है। ऐसे में कड़े मुकाबले वाली सीटों पर टेक उद्योग का सीधे तौर पर पैसा लगाना संबंधित उम्मीदवार के लिए बहुत बड़ा राजनीतिक नुकसान साबित हो सकता है। गार्डरेल्स अलायंस का मुख्य मकसद ही एआई उद्योग से मिलने वाले फंड को राजनीतिक रूप से नुकसानदेह बनाना है। उनके विज्ञापनों में सीधे तौर पर इस बात को उजागर किया जाता है कि कौन सा नेता एआई कंपनियों से पैसा ले रहा है, जबकि एलटीएफ के विज्ञापनों में शायद ही कभी एआई का जिक्र होता है और वे केवल मतदाताओं के लोकप्रिय मुद्दों पर केंद्रित रहते हैं। समर्थक और विरोधी गुटों के बीच सबसे मुख्य विवाद इस बात पर केंद्रित है कि क्या अमेरिकी कांग्रेस को एक ऐसा राष्ट्रीय एआई ढांचा तैयार करना चाहिए जो राज्यों के अपने कानूनों को दरकिनार कर दे, या फिर राज्यों को अपनी मर्जी से सुरक्षा नियम लागू करने का अधिकार बरकरार रखना चाहिए। इस कानूनी लड़ाई में कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। एकल राष्ट्रीय कानूनी ढांचे का समर्थन करने वाली एलटीएफ ने 2028 के चुनावों में भी भारी खर्च जारी रखने की योजना बनाई है, जबकि गार्डरेल्स अलायंस ने भी एआई उद्योग समर्थित उम्मीदवारों का पुरजोर विरोध जारी रखने का संकल्प लिया है। इसका आप पर असर अमेरिकी चुनावों में एआई कंपनियों और लॉबिंग समूहों के इस टकराव का सीधा असर वैश्विक तकनीकी नियमों और आम उपयोगकर्ताओं के डिजिटल अधिकारों पर पड़ेगा। • तकनीकी नियमों पर असर: कांग्रेस में एआई समर्थक लॉबी की हार से राष्ट्रीय स्तर पर कंपनियों के मनमुताबिक ढीले नियम थोपना मुश्किल हो जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि तकनीकी दिग्गजों को अब जवाबदेही और डेटा प्राइवेसी से जुड़े कड़े नियमों का सामना करना पड़ सकता है। • राज्य स्तरीय सुरक्षा कानून: राष्ट्रीय स्तर पर राज्यों के अधिकारों को खत्म करने की योजना अटकने से कैलिफोर्निया जैसे राज्य सख्त नियम लागू रख सकेंगे। इससे आम उपभोक्ताओं के व्यक्तिगत डेटा और नौकरियों पर एआई के असर को नियंत्रित करने वाली नीतियों को बढ़ावा मिलेगा। • चुनावी फंडिंग की पारदर्शिता: टेक कंपनियों के अरबपतियों द्वारा समर्थित उम्मीदवारों की हार से मतदाताओं का यह संदेश साफ है कि बड़े फंड से वोट नहीं खरीदे जा सकते। इसके चलते भविष्य के चुनावों में टेक उद्योग के पैसे को लेकर आम जनता और राजनेताओं के बीच सतर्कता बढ़ेगी। • उपभोक्ता अधिकार: मजबूत सुरक्षा मानकों की वकालत करने वाले समूहों के सक्रिय रहने से एआई आधारित भ्रामक जानकारियों और कॉपीराइट उल्लंघनों पर कड़ा पहरा रहेगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने वाले आम नागरिकों को ज्यादा सुरक्षित ऑनलाइन माहौल मिल सकेगा। ऐसा क्यों हुआ एआई उद्योग और सुरक्षा निगरानी समूहों के बीच हुआ यह भारी चुनावी खर्च आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कानूनी सीमाएं तय करने की होड़ की वजह से हुआ। दोनों पक्षों ने भविष्य की नीतियों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए अरबों रुपये झोंके लेकिन व्यापक चुनावी लहर के चलते नतीजे अप्रत्याशित रहे। • कानूनी वर्चस्व की लड़ाई: मुख्य टकराव इस बात पर था कि क्या अमेरिकी कांग्रेस को एक ऐसा केंद्रीय कानून बनाना चाहिए जो राज्यों के कड़े नियमों को रद्द कर दे। टेक कंपनियां एकतरफा राष्ट्रीय ढांचा चाहती थीं, जबकि सुरक्षा समर्थक राज्य स्तर पर कड़े नियमों की आजादी बचाना चाहते थे। • प्राथमिक बनाम आम चुनाव की रणनीति: उद्योग समर्थित लीडिंग द फ्यूचर ने आम चुनाव से पहले प्राइमरी चुनावों में 27.38 मिलियन डॉलर खर्च किए ताकि नीति निर्माता उम्मीदवारों को पहले ही प्रभावित किया जा सके। लेकिन आम चुनाव में उतरने पर जनता के बीच एआई अरबपतियों के प्रति अविश्वास के कारण यह पैसा उम्मीदवारों के लिए उलटा नुकसानदेह साबित हुआ। • व्यापक राजनीतिक लहर का प्रभाव: मंगलवार के मतदान में डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में एक मजबूत लहर चली, जिसने व्यक्तिगत फंड के असर को बेअसर कर दिया। जिस तरह एलन मस्क द्वारा खर्च किए गए आधे बिलियन डॉलर कई रिपब्लिकन उम्मीदवारों को नहीं बचा सके, उसी तरह एआई फंड भी मतदाताओं के सामान्य रुझान को नहीं बदल पाया। सवाल-जवाब 1. लीडिंग द फ्यूचर के समर्थित समूहों ने साउथ कैरोलिना सीनेट सीट पर कितना पैसा खर्च किया? अमेरिकन मिशन और बिल्डिंग द फ्यूचर ने मिलकर साउथ कैरोलिना से डार्लिन ग्राहम के प्रचार में 4.8 मिलियन डॉलर खर्च किए, लेकिन वे चुनाव हार गईं। 2. लीडिंग द फ्यूचर का मुख्य वित्तीय समर्थन किन लोगों और कंपनियों से मिलता है? इस समूह को ओपनएआई के प्रेसिडेंट ग्रेग ब्रॉकमैन और वेंचर कैपिटल फर्म आंद्रेसेन होरोविट्ज़ का समर्थन प्राप्त है। 3. प्राथमिक चुनावों में लीडिंग द फ्यूचर ने कुल कितना फंड खर्च किया था? समूह ने प्राथमिक चुनावों के दौरान कुल 27.38 मिलियन डॉलर खर्च किए, जिसमें न्यूयॉर्क के एलेक्स बोरेस का विरोध करने में 8 मिलियन डॉलर शामिल थे। 4. गार्डरेल्स अलायंस का मुख्य चुनावी लक्ष्य क्या था? गार्डरेल्स अलायंस का मुख्य उद्देश्य एआई उद्योग से मिलने वाले फंड को राजनीतिक रूप से नुकसानदेह बनाना और टेक कंपनियों के पैसे लेने वाले उम्मीदवारों का विरोध करना था। 5. एआई लॉबी के बीच सबसे बड़ा नीतिगत विवाद क्या है? मुख्य विवाद इस बात पर है कि क्या केंद्र सरकार का एक राष्ट्रीय कानून राज्यों के कड़े नियमों को रद्द करेगा या राज्यों को अपनी सुरक्षा नीतियां लागू करने का हक रहेगा। https://trendkia.com/ai/us-madhyavadhi-chunavon-men-ai-lobi-ka-karoron-dolara-ka-danva-beasara-kai-bare-ummidavara-hare-56743 TrendKia — Har trend, sabse pehle.