9/11 हमले की फाइलें खुलीं, उमर अल-बयूमी और सऊदी कनेक्शन पर बरसों तक एफबीआई की लापरवाही से उठा पर्दा अमेरिका में 9/11 के भीषण आतंकी हमले को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एक नए खुलासे के बाद यह बात सामने आई है कि सऊदी अरब और अल-कायदा के बीच संदिग्ध रिश्तों से जुड़े अहम वीडियो और दस्तावेज जांच एजेंसियों के पास होने के बावजूद वर्षों तक नजरअंदाज किए गए। अमेरिका की सरजमीं पर हुए 9/11 के आतंकवादी हमले को आज भी लोग सिहर उठते हैं। इस भीषण त्रासदी के बाद दुनिया भर में सुरक्षा और खुफिया तंत्र पर कई सवाल उठे, लेकिन कुछ राज आज भी अंधेरे में हैं। हाल ही में सामने आए पुराने फुटेज ने इस जघन्य कृत्य से जुड़े एक अहम किरदार उमर अल-बयूमी को एक बार फिर सुर्खियों में ला खड़ा किया है। यह शख्स 9/11 के पीड़ित परिवारों द्वारा दायर एक लाख करोड़ डॉलर के मुकदमे का मुख्य केंद्र बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि इस भयानक साजिश से जुड़े व्यक्ति का एक वीडियो हमले के ठीक कुछ ही दिनों के भीतर अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के हाथ लग गया था, लेकिन इसके बावजूद उस पर गहराई से जांच नहीं की गई। यह संदिग्ध और उलझा हुआ मामला आज भी एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। सामने आए एक वीडियो क्लिप में 1997 या 1998 के आसपास सैन डिएगो के पास पेंटबॉल के खेल के दौरान उमर अल-बयूमी और अनवर अल-अवलाकी दोनों एक साथ नजर आते हैं। यहां यह याद दिलाना जरूरी है कि अनवर अल-अवलाकी वही शख्स है, जो आगे चलकर अल-कायदा के अरब प्रायद्वीप शाखा का प्रमुख बना था। इस खेल के दौरान खिलाड़ी सैन्य पोशाक पहनकर युद्ध जैसा अभ्यास कर रहे थे, जहां लगातार निशानेबाजी चल रही थी और बीच-बीच में धार्मिक नारे गूंज रहे थे। इस फुटेज में एक सऊदी शेख की मौजूदगी भी दर्ज की गई है। अमेरिकी जांच एजेंसी को बाद में इस बात का पता चला कि कुछ लोग इन प्रशिक्षण सत्रों को सीधे तौर पर जिहाद की ट्रेनिंग मानते थे। उमर अल-बयूमी और अनवर अल-अवलाकी जैसे लोग इस तरह के खेलों और गतिविधियों में लंबे समय तक सक्रिय रूप से शामिल रहे थे। इसके अलावा एक अन्य वीडियो भी सामने आया है, जो साल 1998 का है और जिसमें दोनों को आपस में गले मिलते हुए देखा जा सकता है। उमर अल-बयूमी साल 1994 में सऊदी अरब से सैन डिएगो अंग्रेजी सीखने के लिए आया था, लेकिन उसने जल्द ही अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। इसके बाद वह लगातार सऊदी इस्लामिक मामलों के मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों और विभिन्न प्रचारकों के संपर्क में बना रहा। हमले के तुरंत बाद उसका नाम दो हाईजैकर्स नवाफ अल-हजमी और खालिद अल-मिहधार के अपार्टमेंट के किराए से जुड़े कागजातों में मिला, जिसके बाद वह एजेंसियों के शक के दायरे में आ गया। जब 21 सितंबर 2001 को उसे ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया, तो उसके पास से हजारों दस्तावेज, कई तस्वीरें और अस्सी से अधिक वीडियो टेप बरामद किए गए। उनमें से एक नोटबुक का पन्ना भी शामिल था, जिस पर एक विमान का स्केच और उड़ान से संबंधित हिसाब-किताब लिखा हुआ था। पीड़ित परिवारों की ओर से पैरवी कर रही वकील जोडी वेस्टब्रुक फ्लॉवर्स का कहना है कि उस पन्ने पर लिखा गया वह हिसाब दरअसल प्लेन क्रैश का पूरा गणित था। जब हमने उसे गहराई से समझा तो हमें लगा कि यही सबसे बड़ा और ठोस सबूत यानी स्मोकिंग गन है। इन तमाम पुख्ता जानकारियों के बावजूद उमर अल-बयूमी को 28 सितंबर को रिहा कर दिया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे प्रत्यर्पण की कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत नहीं माना। सैन डिएगो की एफबीआई टीम को यह बेहद महत्वपूर्ण सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं कराई जा सकी थी। उस समय की घटना के जांच प्रमुख रिक लैम्बर्ट का कहना है कि अगर यह सामग्री वक्त पर मिल जाती, तो इस पूरी पहेली को बहुत पहले ही सुलझा लिया जाता। सबसे बड़ा दुख इस बात का है कि उमर अल-बयूमी पर कभी भी अदालत में मुकदमा नहीं चलाया जा सका। पीड़ित परिवारों का यह गंभीर आरोप है कि सऊदी अरब इस पूरे हमले की साजिश में शामिल था और उमर अल-बयूमी ने दो हाईजैकर्स को शरण देने के साथ-साथ उनकी हरसंभव मदद की थी। आपको बता दें कि 11 सितंबर 2001 को कुल 19 आतंकवादियों ने मिलकर चार विमानों का अपहरण किया था। इनमें से दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड Center से जा टकराए, एक विमान पेंटागन पर गिरा और चौथा विमान पेन्सिलवेनिया के एक खुले मैदान में जा गिरा। इस खौफनाक हमले में कुल 2977 लोगों की जान चली गई थी। अब ये नए वीडियो एक बार फिर पुरानी जांच में रह गई भारी खामियों और चूकों को जनता के सामने उजागर कर रहे हैं। इसका आप पर असर 9/11 हमलों से जुड़े नए दस्तावेजों और वीडियो के सामने आने से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ चल रही वैश्विक कानूनी लड़ाइयों पर गहरा असर पड़ा है। • भारत में: यह खुलासा भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और नीति निर्माताओं को यह संदेश देता है कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के मामलों में सीमा पार की साक्ष्यों और गोपनीय फाइलों की निष्पक्ष समीक्षा कितनी आवश्यक है। • वैश्विक स्तर पर: पीड़ित परिवारों द्वारा चलाए जा रहे मुकदमों और कूटनीतिक दबाव के कारण सऊदी अरब और पश्चिमी देशों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और जवाबदेही के नए मानक तय हो सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ 9/11 के बाद की शुरुआती जांच में कई कड़ियों के छूट जाने और खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण ये वीडियो और दस्तावेज समय पर सामने नहीं आ सके। • जांच में समन्वय की कमी: सैन डिएगो की एफबीआई टीम को ब्रिटेन से बरामद महत्वपूर्ण सामग्रियां और दस्तावेज समय पर नहीं मिल पाए, जिससे समय रहते पूछताछ नहीं हो सकी। • कानूनी और प्रत्यर्पण सीमाएं: अमेरिकी अधिकारियों द्वारा उस समय उपलब्ध सबूतों को प्रत्यर्पण या मुकदमे के लिए अपर्याप्त मानना भी मुख्य वजह रहा कि संदिग्ध को छोड़ दिया गया। सवाल-जवाब 1. 9/11 के हमलों में कुल कितने लोग मारे गए थे? 11 सितंबर 2001 के इन हमलों में कुल 2977 लोग मारे गए थे। 2. उमर अल-बयूमी कौन है? उमर अल-बयूमी वह संदिग्ध शख्स है जिसका नाम 9/11 के दो हाईजैकर्स के अपार्टमेंट के किराए के कागजात में मिला था। 3. ब्रिटेन में उमर अल-बयूमी की गिरफ्तारी कब हुई थी? उमर अल-बयूमी को 21 सितंबर 2001 को ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया था और 28 सितंबर को छोड़ दिया गया था। 4. नए वीडियो में उमर अल-बयूमी के साथ कौन नजर आ रहा है? नए वीडियो में उमर अल-बयूमी के साथ अनवर अल-अवलाकी नजर आ रहा है, जो बाद में अल-कायदा का ब्रांच लीडर बना था। https://trendkia.com/america/9-11-hamale-ki-phailen-khulin-omar-al-bayoumi-aura-saudi-kanekshana-para-barason-taka-fbi-ki-laparavahi-se-utha-parda-29899 TrendKia — Har trend, sabse pehle.