अलास्का सीनेट चुनाव में हमनाम उम्मीदवार पर बवाल, ट्रंप ने साधा डेमोक्रेट्स पर निशाना अलास्का में सीनेटर डैन एस. सुलिवन के खिलाफ डैनियल जे. सुलिवन जूनियर के पर्चा भरने पर विवाद खड़ा हो गया है. रिपब्लिकन पार्टी और डोनाल्ड ट्रंप ने वोट काटने के इरादे से डमी प्रत्याशी उतारने का आरोप लगाया है. लोकतांत्रिक चुनावों में विरोधी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए हमनाम अथवा मिलते-जुलते नाम वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का चलन काफी पुराना रहा है. भारत के संसदीय इतिहास में पंचायत स्तर से लेकर लोकसभा चुनावों तक राजनीतिक दल इस पैंतरे को आजमाते रहे हैं. इस रणनीति का मुख्य मकसद मतदाताओं के बीच असमंजस पैदा करना और मुख्य प्रत्याशी के वोटों को बांटना होता है. अब चुनावी राजनीति का यह जाना-पहचाना दांव अमेरिका के अलास्का राज्य में सीनेट की जंग के दौरान सबसे बड़े विवाद का कारण बन गया है. वायनाड से महासमुंद तक भारतीय राजनीति के प्रमुख उदाहरण भारत में जब भी एक जैसे नामों वाले प्रत्याशियों की चर्चा होती है, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का किस्सा अक्सर याद किया जाता है. वर्ष 2019 के आम चुनाव में जब राहुल गांधी ने केरल की वायनाड सीट से पर्चा भरा था, तब उनके खिलाफ तीन मिलते-जुलते नाम वाले प्रत्याशी खड़े थे. इनमें से दो प्रत्याशियों के नाम में सीधे राहुल गांधी शामिल था, जबकि तीसरे उम्मीदवार के नाम में गांधी उपनाम जुड़ा हुआ था. मतपत्र पर एक ही नाम दिखने से वोटर कई बार गफलत में आ जाते हैं. इसी तरह की चुनावी चालबाजी वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की महासमुंद लोकसभा सीट पर देखने को मिली थी. वहां कांग्रेस नेता अजीत जोगी के सामने बीजेपी ने चंदूलाल साहू को मैदान में उतारा था. उस मुकाबले में चंदूलाल साहू नाम के सात और चंदूलाल से मिलते-जुलते नाम वाले तीन अन्य प्रत्याशी चुनावी समर में कूद पड़े थे. इस तरह एक ही नाम के दस उम्मीदवारों ने वोटरों को भ्रमित करने की कोशिश की थी. हालांकि, जब मतदाता जागरूक हों और चुनाव चिह्न स्पष्ट हों, तो यह पैंतरा पूरी तरह बेअसर भी साबित हो जाता है. अलास्का में दो सुलिवन आमने-सामने, ट्रंप ने डेमोक्रेट्स को घेरा अब ठीक वैसा ही नजारा अमेरिका के अलास्का में देखने को मिल रहा है, जहां सीनेट की एक सीट के लिए मुकाबला बेहद रोचक मोड़ पर पहुंच चुका है. रिपब्लिकन पार्टी के मौजूदा सीनेटर डैन एस. सुलिवन लगातार तीसरी बार छह वर्ष का कार्यकाल हासिल करने के लिए चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं. उनके खिलाफ डेमोक्रेटिक पार्टी ने मैरी पेल्टोला को अपना प्रत्याशी बनाया है. लेकिन इस सीधी जंग में अचानक डैनियल जे. सुलिवन जूनियर के आने से भारी घमासान मच गया है. डैनियल जे. सुलिवन जूनियर एक रिटायर्ड स्कूल शिक्षक हैं, जिन्होंने मई के महीने में सीनेट चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था. उनका नाम रिपब्लिकन सीनेटर डैन सुलिवन से अत्यधिक मिलता-जुलता होने के कारण रिपब्लिकन खेमे में खलबली मच गई. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए सीधे तौर पर डेमोक्रेट्स पर आरोप लगाया कि यह कदम मतदाताओं को भ्रमित करने और रिपब्लिकन पार्टी के मतों को काटने की सोची-समझी साजिश है. राजनीतिक आरोपों के बीच न्याय विभाग और एफबीआई की सक्रियता रिपब्लिकन पार्टी का स्पष्ट आरोप है कि डेमोक्रेट्स ने जानबूझकर चुनावी गणित बिगाड़ने के लिए हमनाम डमी कैंडिडेट खड़ा किया. वहीं एक प्रमुख अमेरिकी अखबार के दावे के अनुसार, मैरी पेल्टोला के चुनावी अभियान से जुड़े लोग ऐसे उम्मीदवारों की तलाश कर रहे थे जो रिपब्लिकन सीनेटर के वोटों में सेंध लगा सकें. हालांकि, मैरी पेल्टोला और डेमोक्रेटिक पार्टी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए किसी भी साजिश से साफ इनकार किया है. मामले ने इतना तूल पकड़ा कि अलास्का के रिपब्लिकन गवर्नर माइक डनलीवी ने पूरे प्रकरण की आधिकारिक जांच के आदेश जारी कर दिए. इसके तुरंत बाद अमेरिकी न्याय विभाग ने भी मामले में आपराधिक जांच आरंभ कर दी. संघीय जांच एजेंसी एफबीआई ने सक्रिय होते हुए डैनियल जे. सुलिवन जूनियर को चुनावी चंदा देने वाले लोगों से पूछताछ की. चुनाव से ठीक पहले केंद्रीय जांच एजेंसियों की इस कार्रवाई ने राज्य के सियासी तापमान को कई गुना बढ़ा दिया है. रैंक्ड चॉइस वोटिंग व्यवस्था कैसे कम करती है भ्रम का खतरा अलास्का के चुनाव की एक अहम विशेषता यह है कि यहां भारत की तरह सीधे सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार विजयी घोषित नहीं होता. इस राज्य में रैंक्ड चॉइस वोटिंग प्रणाली लागू है, जिसमें मतदाता अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार प्रत्याशियों को क्रमबद्ध करते हैं. वोटर बैलेट पेपर पर अपनी पहली पसंद, दूसरी पसंद और तीसरी पसंद दर्ज करते हैं. इस चुनावी प्रणाली का नियम यह है कि यदि कोई उम्मीदवार पहली पसंद के 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल नहीं कर पाता, तो सबसे कम मत पाने वाले प्रत्याशी को दौड़ से बाहर कर दिया जाता है. इसके बाद बाहर हुए प्रत्याशी को मिले मतपत्रों पर मतदाताओं की अगली पसंद देखी जाती है और वोट संबंधित उम्मीदवार को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं. मतों के हस्तांतरण का यह चक्र तब तक जारी रहता है जब तक किसी एक प्रत्याशी को कुल मतों का स्पष्ट बहुमत प्राप्त न हो जाए. समान नाम की रणनीति का वास्तविक असर और कानूनी स्थिति रैंक्ड चॉइस वोटिंग की मौजूदगी के कारण हमनाम प्रत्याशी उतारकर वोट काटने का खतरा काफी हद तक घट जाता है. उदाहरण के तौर पर, यदि किसी मतदाता ने भ्रमवश रिटायर्ड शिक्षक डैनियल जे. सुलिवन जूनियर को अपनी पहली पसंद चुन लिया, लेकिन दूसरी पसंद के रूप में रिपब्लिकन सीनेटर डैन एस. सुलिवन का चयन किया, तो डैनियल के बाहर होते ही वह वोट सीनेटर डैन एस. सुलिवन के खाते में जुड़ जाएगा. यही कारण है कि चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि अलास्का में इस रणनीति का नुकसान सीमित रह सकता है. फिर भी यदि किसी मतदाता ने डैनियल को वोट देने के बाद अपनी दूसरी या तीसरी पसंद का विकल्प खाली छोड़ दिया, तो ऐसी स्थिति में रिपब्लिकन उम्मीदवार को वास्तविक नुकसान उठाना पड़ सकता है. कानूनी दृष्टि से देखा जाए तो केवल नाम का समान होना कोई अपराध नहीं है. अलास्का की अदालतों ने भी डैनियल जे. सुलिवन जूनियर को चुनाव लड़ने की पूरी वैधानिक अनुमति दी थी. फिलहाल अमेरिकी न्याय विभाग आरोपों की बारीकी से पड़ताल कर रहा है और किसी भी तरह का दोष साबित होना अभी बाकी है. इसका आप पर असर अलास्का में सीनेट सीट के लिए चल रही इस कानूनी और राजनीतिक लड़ाई का सीधा असर मतपत्र पर प्रत्याशियों के चयन और चुनावी पारदर्शिता पर पड़ेगा. • मतदान प्रक्रिया: चुनावी मतपत्र पर मिलते-जुलते नाम दिखने पर मतदाताओं को अपने पसंदीदा उम्मीदवार का पूरा नाम ध्यान से जांचना होगा. यदि किसी नागरिक ने असावधानी में गलत नाम चुन लिया, तो उसका मत अनचाहे प्रत्याशी के खाते में जा सकता है. • वरीयता निर्धारण: रैंक्ड चॉइस वोटिंग प्रणाली में मतदाताओं को अपनी दूसरी और तीसरी पसंद भी अनिवार्य रूप से दर्ज करनी चाहिए. केवल एक उम्मीदवार को चुनकर बाकी वरीयताएं खाली छोड़ने पर मतपत्र मतगणना के अगले चरणों से बाहर हो सकता है. • चुनावी सुचिता: डमी उम्मीदवारों को लेकर संघीय जांच एजेंसियों की सक्रियता से भविष्य के चुनावों में स्वतंत्र प्रत्याशियों के वित्तपोषण की कड़ी निगरानी होगी. राजनीतिक दल अब किसी भी स्वतंत्र नामांकन के पीछे के वित्तीय स्रोतों पर सीधी कानूनी नजर रखेंगे. • वैश्विक चुनावी सबक: एक जैसे नाम वाले उम्मीदवारों का यह विवाद अन्य लोकतांत्रिक देशों के मतदाताओं को अधिक सतर्क रहने का संदेश देता है. चुनाव चिह्न और पूरा विवरण सत्यापित करने के बाद ही मतदान करना सबसे सुरक्षित उपाय साबित होता है. ऐसा क्यों हुआ यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब अलास्का की सीनेट सीट पर मौजूदा रिपब्लिकन सीनेटर के बिल्कुल समान नाम वाले एक रिटायर्ड शिक्षक ने स्वतंत्र रूप से अपना पर्चा दाखिल कर दिया. • समान नाम का नामांकन: रिटायर्ड स्कूल शिक्षक डैनियल जे. सुलिवन जूनियर ने मई में सीनेट चुनाव के लिए नामांकन दर्ज कराया था. उनका नाम मौजूदा रिपब्लिकन सीनेटर डैन एस. सुलिवन से अत्यधिक मिलता-जुलता होने के कारण सीधे भ्रम की स्थिति बनी. • वोट विभाजन के आरोप: रिपब्लिकन पार्टी और डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया कि डेमोक्रेट्स ने जानबूझकर यह चाल चली ताकि मुख्य उम्मीदवार के मत बंट जाएं. एक मीडिया दावे में भी डेमोक्रेटिक अभियान से जुड़े लोगों द्वारा ऐसे विकल्प तलाशने की बात कही गई. • गवर्नर और एजेंसियों का दखल: अलास्का के गवर्नर माइक डनलीवी द्वारा जांच के निर्देश देने के बाद न्याय विभाग और एफबीआई ने आपराधिक जांच शुरू की. संघीय जांचकर्ताओं ने डैनियल सुलिवन को चंदा देने वाले लोगों से पूछताछ की जिससे मामला कानूनी बन गया. • अदालती अनुमति: अमेरिकी अदालतों ने स्पष्ट किया कि केवल नाम मिलना चुनाव लड़ने से रोकने का आधार नहीं है. इसी कारण डैनियल सुलिवन को मैदान में रहने की अनुमति मिली, जबकि आपराधिक जांच में आरोप साबित होना अभी शेष है. सवाल-जवाब 1. अलास्का सीनेट चुनाव में किस बात को लेकर विवाद खड़ा हुआ है? रिपब्लिकन सीनेटर डैन एस. सुलिवन के सामने उन्हीं के जैसे नाम वाले डैनियल जे. सुलिवन जूनियर के चुनाव मैदान में उतरने से विवाद पैदा हुआ है. 2. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में क्या आरोप लगाया है? डोनाल्ड ट्रंप ने इसे डेमोक्रेट्स की सोची-समझी चाल बताते हुए आरोप लगाया कि यह मतदाताओं को भ्रमित करने और रिपब्लिकन वोट काटने के लिए किया गया है. 3. डैनियल जे. सुलिवन जूनियर कौन हैं? डैनियल जे. सुलिवन जूनियर एक रिटायर्ड स्कूल शिक्षक हैं, जिन्होंने मई के महीने में सीनेट सीट के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था. 4. इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की क्या भूमिका रही है? गवर्नर के निर्देश के बाद अमेरिकी न्याय विभाग ने आपराधिक जांच शुरू की और एफबीआई ने डैनियल सुलिवन को चंदा देने वाले लोगों से पूछताछ की है. 5. अलास्का में रैंक्ड चॉइस वोटिंग से वोट कटने का खतरा कैसे कम होता है? मतदाता अपनी पहली, दूसरी और तीसरी पसंद तय करते हैं, जिससे पहले उम्मीदवार के बाहर होने पर उसका वोट मतदाता की अगली पसंद को ट्रांसफर हो जाता है. 6. भारत में राहुल गांधी के साथ एक जैसे नाम वाले उम्मीदवारों का क्या मामला हुआ था? वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में केरल की वायनाड सीट पर राहुल गांधी के नाम से मिलते-जुलते तीन अन्य प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे थे. https://trendkia.com/america/alaska-sineta-chunava-men-hamanama-ummidavara-para-bavala-donald-trump-ne-sadha-democrats-para-nishana-56161 TrendKia — Har trend, sabse pehle.