अमेरिका-ईरान शांति समझौता तैयार: होर्मुज स्‍ट्रेट फिर खुलेगा, तेल कीमतों में बड़ी गिरावट — जानिए पूरी डील का हर पहलू अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के मसौदे पर सहमति बन गई है, जिस पर शुक्रवार को जेनेवा में हस्‍ताक्षर होंगे; इससे होर्मुज स्‍ट्रेट खुलने का रास्‍ता साफ होगा और इजरायल को लेबनान में सैन्य अभियान रोकना होगा। पश्चिम एशिया में ईरान को लेकर पैदा हुए तनाव ने पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को हिला दिया था, लेकिन अब इसी संकट के बीच राहत की एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौते के मसौदे पर सहमति बन चुकी है, और शुक्रवार को जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में दोनों पक्ष इस पर औपचारिक रूप से हस्‍ताक्षर करेंगे। इस समझौते की सबसे अहम कड़ी यह है कि इसके लागू होते ही होर्मुज स्‍ट्रेट के दोबारा खुलने का रास्‍ता साफ हो जाएगा और इजरायल को लेबनान में चल रहे अपने मिलिट्री ऑपरेशन को रोकना होगा। संकट की जड़: होर्मुज स्‍ट्रेट और ठप पड़ी ऊर्जा आपूर्ति ईरान को लेकर छिड़ी जंग ने पश्चिम एशिया को गंभीर तनाव में धकेल दिया था। इसका सबसे बुरा असर 'एनर्जी कॉरिडोर' के नाम से मशहूर होर्मुज स्‍ट्रेट पर पड़ा, जहां से गैस और तेल लदे जहाजों की आवाजाही पटरी से उतर गई। नतीजा यह हुआ कि भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में LPG के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की किल्लत महसूस की जाने लगी। हालात इतने बिगड़े कि कुछ देशों को आपात स्थिति तक घोषित करनी पड़ी। यही वजह है कि अब इस मार्ग के खुलने की खबर को वैश्विक स्तर पर बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। किसने की पुष्टि और किसने निभाई मध्यस्थ की भूमिका अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे टकराव को खत्म करने वाले इस अहम समझौते की पुष्टि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी अधिकारियों ने की है। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका पाकिस्तान ने निभाई, और समझौते की घोषणा खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की। समझौते में क्या-क्या तय हुआ इस डील के तहत युद्धविराम लागू किया जाएगा और दोनों पक्ष अपने सैन्य अभियानों पर रोक लगाएंगे। पाकिस्तान का कहना है कि यह समझौता सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों की तत्काल और स्थायी समाप्ति का प्रावधान करता है। खास बात यह है कि इसमें लेबनान से जुड़े संघर्ष को भी शामिल किया गया है, जिसे बातचीत का सबसे टेढ़ा और कठिन मुद्दा माना जा रहा था। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान के साथ समझौता अब पूरी तरह तैयार है। सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए उन्होंने बताया कि शुक्रवार से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर खोल दिया जाएगा। इसके साथ ही अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अपने अवरोधों को भी हटा लेगा। तेल बाजार ने दिखाई तुरंत प्रतिक्रिया होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है, और पिछले कई महीनों से ईरान द्वारा इसे व्यावहारिक रूप से बंद रखे जाने के कारण ही ऊर्जा कीमतों में आग लगी हुई थी। ऐसे में इसके खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। समझौते की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी — ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 4.6 प्रतिशत से भी ज्‍यादा टूट गया। इससे वैश्विक महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ गई है। 60 दिन की समयसीमा और परमाणु मुद्दे की पेचीदगी ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम ग़रीबाबादी के मुताबिक, 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान एक व्यापक समझौते पर बातचीत आगे बढ़ेगी। इस दौरान प्रतिबंधों में राहत, आर्थिक सहयोग और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील विषयों पर चर्चा होगी, और अंतिम समाधान निकलने तक अस्थायी व्यवस्थाएं लागू रहेंगी। मसौदे के अनुसार, अमेरिका ईरान की करीब 25 अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करने पर राजी हो सकता है। इसके बदले ईरान यह आश्वासन देगा कि वह न तो परमाणु हथियार विकसित करेगा और न ही यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का विस्तार करेगा। हालांकि परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी बरकरार हैं। तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं इस बड़ी घोषणा के बावजूद क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह थमा नहीं है। रविवार को लेबनान में हुए इजरायली हमले ने शांति प्रक्रिया पर ही सवालिया निशान लगा दिए। ईरान ने इस हमले के लिए अमेरिका को भी जिम्मेदार ठहराया और कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी, वहीं ट्रंप ने भी इस हमले को अनुचित करार दिया। इजरायल का अलग रुख गौरतलब है कि इजरायल इस प्रस्तावित अमेरिका-ईरान समझौते का औपचारिक पक्षकार नहीं है। लेबनान में सैन्य कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ट्रंप के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। इजरायल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा जरूरतों के मुताबिक कार्रवाई जारी रखने की आजादी बनाए रखेगा। दोनों देशों में गरमाई सियासत इस समझौते को लेकर अमेरिका और ईरान, दोनों ही जगह राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिका में बढ़ती ईंधन कीमतों के चलते ट्रंप सरकार पर दबाव बना हुआ था, जबकि ईरान में कट्टरपंथी गुट इस समझौते का खुलकर विरोध कर रहे हैं। कई शहरों में प्रदर्शन हुए और विदेश मंत्री अब्बास अरागची के खिलाफ नारेबाजी तक देखने को मिली। https://trendkia.com/america/amerika-irana-shanti-samajhauta-taiyara-hormuja-s-treta-phira-khulega-tela-kimat-882 TrendKia — Har trend, sabse pehle.