अमेरिका में गठित होगी समर्पित एआई फोर्स, डोनाल्ड ट्रंप नियुक्त करेंगे उच्च बौद्धिक क्षमता वाला नया सार डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में तकनीकी सुरक्षा और विस्तार के लिए विशेष एआई फोर्स और एक प्रमुख सार तैनात करने का ऐलान किया है, जिससे देश की आर्थिक प्रगति को गति मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी सत्ता के शीर्ष पर बैठे डोनाल्ड ट्रंप ने उभरती हुई कम्प्यूटेशनल तकनीकों को राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक शक्ति का मुख्य आधार बनाते हुए एक विशेष समर्पित एआई फोर्स के गठन की रूपरेखा सामने रखी है। उन्होंने शनिवार को स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन इस उभरते तकनीकी क्षेत्र के संपूर्ण विकास और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बिल्कुल नई प्रशासनिक संरचना खड़ी करेगा। इस पूरी व्यवस्था का संचालन संभालने के लिए एक विशेष कार्यकारी पद तैयार किया जा रहा है, जिसे अनौपचारिक रूप से एआई सार के तौर पर पहचाना जाएगा। अपने मंच ट्रुथ सोशल पर साझा किए गए संदेश में उन्होंने दावा किया कि वे इस तकनीक को कमजोर करने या सीमित करने वाली किसी भी मुहिम को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसके पीछे सक्रिय राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के मंसूबों को नाकाम कर दिया जाएगा। स्पेस फोर्स की तर्ज पर तैयार होगी नई विंग इस नई तकनीकी इकाई की परिकल्पना को स्पष्ट करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में स्थापित की गई स्पेस फोर्स का संदर्भ दिया। उनके अनुसार जिस तरह अंतरिक्ष के क्षेत्र में स्पेस फोर्स ने अपनी उपयोगिता और कामयाबी दर्ज कराई है, ठीक उसी स्तर की विशिष्ट कार्यप्रणाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार और संरक्षण के लिए अमेरिका में दरकार है। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस शाखा का नेतृत्व करने वाले एआई सार के पद पर केवल असाधारण रूप से उच्च बौद्धिक क्षमता वाले व्यक्तियों को ही जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस पद के लिए अंतिम चयन जल्द ही सार्वजनिक किए जाने की तैयारी है, ताकि तकनीक को रणनीतिक दिशा दी जा सके। अर्थव्यवस्था में पच्चीस फीसदी भागीदारी की उम्मीद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक प्रभाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने इसे आधुनिक इतिहास की अगली औद्योगिक क्रांति के समकक्ष रखा। उनके आकलन के मुताबिक आने वाले दौर में यह तकनीक अमेरिकी अर्थव्यवस्था के आकार को कई गुना विस्तार दे सकती है, जिसके तहत देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद अर्थात जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी पच्चीस प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि इस शुरुआती घोषणा में यह विवरण साझा नहीं हुआ है कि यह विंग किस मौजूदा सरकारी महकमे के दायरे में काम करेगी, इसमें कितने पेशेवर तैनात होंगे अथवा इसके औपचारिक कानूनी अधिकार क्या होंगे। इन प्रशासनिक पहलुओं पर आने वाले दिनों में आधिकारिक आदेशों के जरिए ही तस्वीर साफ हो सकेगी। चुनौतियों और सुरक्षा मानकों के बीच राजनीतिक दांव यह पहल एक ऐसे मोड़ पर आई है जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, व्यापार और सूचना तंत्र में अभूतपूर्व तेजी से हो रहा है। इसके साथ ही कार्यस्थलों पर छंटनी, भ्रामक जानकारियों का फैलाव और डेटा प्राइवेसी से जुड़े खतरे भी लगातार नीतिगत बहस का केंद्र बने हुए हैं। उद्योग जगत के कई विश्लेषक और विधिवेत्ता तीव्र विकास के समानांतर कड़े सुरक्षा मानकों की पैरोकारी कर रहे हैं। ट्रंप ने बिना कोई ठोस ब्योरा रखे अपने राजनीतिक विरोधियों पर इस क्षेत्र में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं, जिससे साफ है कि यह कदम केवल तकनीकी शोध तक सीमित न रहकर सीधे आर्थिक और भू-राजनीतिक संप्रभुता से जुड़ चुका है। इसका आप पर असर अमेरिकी तकनीकी नीतियों में होने वाले इस बड़े संगठनात्मक बदलाव से वैश्विक नवाचार, रोजगार के तौर-तरीकों और डिजिटल सुरक्षा मानकों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। • वैश्विक पेशेवरों पर प्रभाव: उच्च तकनीकी पदों के लिए प्रतिभाओं की तलाश तेज होगी। इससे वैश्विक स्तर पर कार्यरत शोधकर्ताओं और डेटा वैज्ञानिकों के लिए नई प्राथमिकताओं और अवसरों के द्वार खुलेंगे। • आर्थिक परिदृश्य: सकल घरेलू उत्पाद में बड़ी हिस्सेदारी का लक्ष्य तय होने से निवेश बढ़ेगा। सॉफ्टवेयर, सेमीकंडक्टर और संबंधित क्षेत्रों में पूंजी प्रवाह को नई रफ्तार मिल सकती है। • डेटा और निजता नियमन: सुरक्षा ढांचे में बदलाव से आम उपभोक्ताओं के डेटा पर असर होगा। डिजिटल सेवाओं का उपभोग करने वाले नागरिकों के सुरक्षा मानकों को नए सिरे से परखा जा सकता है। • रोजगार और स्वचालन: उद्योगों में मशीनी क्षमताओं का उपयोग तेजी से व्यापक बनेगा। पारंपरिक नौकरियों में बदलाव के कारण कौशल विकास और नए प्रशिक्षण की आवश्यकता बढ़ जाएगी। ऐसा क्यों हुआ वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल वाणिज्यिक सॉफ्टवेयर न मानकर राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक संप्रभुता और औद्योगिक आधिपत्य के निर्णायक साधन के रूप में देखा जा रहा है। इसी सोच के तहत संगठनात्मक ढांचा तैयार किया जा रहा है। • तकनीकी प्रतिस्पर्धा: वैश्विक शक्तियों के बीच कम्प्यूटेशनल बढ़त हासिल करने की होड़ मची है। इस वर्चस्व को सुरक्षित रखने के लिए साधारण मंत्रालयों से इतर विशेष संरचनाओं की आवश्यकता समझी गई। • स्पेस फोर्स का पूर्व अनुभव: पूर्व कार्यकाल में रक्षा क्षेत्र में अंतरिक्ष के लिए अलग विंग तैयार की गई थी। उस प्रयोग को सफल मानते हुए उसी तर्ज पर तकनीकी सुरक्षा तंत्र खड़ा करने की योजना बनी। • राजनीतिक और नीतिगत मतभेद: तकनीकी नियमन और नवाचार की गति को लेकर आंतरिक राजनीति में भारी टकराव चल रहा है। सत्ता पक्ष प्रतिद्वंद्वियों के कदमों को तकनीक के विकास में रुकावट मान रहा है। सवाल-जवाब 1. डोनाल्ड ट्रंप ने किस नई इकाई के गठन की घोषणा की है? उन्होंने अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सुरक्षा और प्रगति के लिए एक विशेष एआई फोर्स गठित करने की बात कही है। 2. प्रस्तावित एआई सार की भूमिका क्या होगी? एआई सार इस नई व्यवस्था का नेतृत्व करेंगे, और इस पद के लिए असाधारण बौद्धिक क्षमता वाले व्यक्ति का चयन किया जाएगा। 3. इस नई पहल की तुलना किस व्यवस्था से की गई है? इसकी तुलना ट्रंप के पिछले कार्यकाल में स्थापित की गई स्पेस फोर्स से की गई है। 4. अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर क्या अनुमान लगाया गया है? ट्रंप ने अनुमान जताया है कि आने वाले समय में देश के सकल घरेलू उत्पाद में एआई का योगदान पच्चीस प्रतिशत तक पहुंच सकता है। https://trendkia.com/america/amerika-men-gathita-hogi-samarpita-ai-force-donald-trump-niyukta-karenge-uchcha-bauddhika-kshamata-vala-naya-sara-35140 TrendKia — Har trend, sabse pehle.