अमेरिकी अदालत ने टैक्सपेयर फंड से चलने वाले विज्ञापनों पर लगाई रोक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कानूनी झटका न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को सरकारी धन से चलने वाले सभी टीवी विज्ञापनों को तत्काल रद्द करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं ने इसे करदाताओं के लाखों डॉलर का दुरुपयोग बताया था। अमेरिका में एक फेडरल अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा करदाताओं की गाढ़ी कमाई से वित्तपोषित टीवी विज्ञापनों के प्रसारण पर तत्काल रोक लगाने का फैसला सुनाया है। रविवार की रात सुनाए गए इस न्यायिक निर्देश में प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि वह ऑन-एयर होने वाले सभी शेष प्रचार अभियानों को तुरंत प्रभाव से वापस ले। इस कानूनी कार्रवाई के केंद्र में वे विज्ञापन हैं, जिन पर नागरिक अधिकार समूहों ने सरकारी खजाने के अवैध उपयोग का गंभीर आरोप लगाया था। फेडरल जज का शेष सभी विज्ञापनों को तुरंत रोकने का निर्देश न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज जेनिफर एल. रोचोन ने इस विवाद पर विचार करते हुए प्रशासन के खिलाफ एक अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की। अदालत ने यह कड़ा कदम गैर-पक्षपाती संस्था कॉमन कॉज तथा अन्य संबंधित नागरिक अधिकार संगठनों द्वारा दायर की गई कानूनी चुनौती के बाद उठाया। अपने स्पष्ट निर्देश में जज रोचोन ने आदेश दिया कि रविवार रात प्रसारित होने के लिए तय किए गए विज्ञापनों सहित आगे आने वाले सभी विज्ञापनों को अविलंब निरस्त किया जाए, जिससे इस अभियान का सार्वजनिक प्रसारण तुरंत बंद हो सके। टैक्सपेयर्स के लाखों डॉलर खर्च करने का आरोप अदालत में दायर याचिका में नागरिक अधिकार समूहों ने दलील दी थी कि प्रशासन अपने खास राजनीतिक संदेशों को जनता के बीच पहुंचाने और अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए आम जनता के लाखों डॉलर खर्च कर रहा था। याचिकाओं में रेखांकित किया गया कि सार्वजनिक धन को इस तरह के राजनीतिक प्रचार में झोंकना सरकारी वित्त का पूरी तरह से गैर-कानूनी और अनुचित उपयोग है। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं ने अदालत से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की थी। प्रशासन की दलील खारिज, अभियान पर तत्काल प्रभाव दूसरी तरफ, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया के दौरान अदालत में तर्क दिया था कि यह व्यापक विज्ञापन अभियान पहले ही अपने अंतिम चरण में है और बहुत जल्द स्वाभाविक रूप से समाप्त होने वाला था। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और बचे हुए सभी टीवी स्लॉट्स को फौरन रद्द करने की अपनी सख्त हिदायत बरकरार रखी। इस न्यायिक हस्तक्षेप से प्रशासन की चल रही प्रचार योजनाओं पर त्वरित रोक लग गई है। इसका आप पर असर इस न्यायिक आदेश से सरकारी धन के उपयोग और टैक्सपेयर्स के पैसों से चलाए जाने वाले प्रचार अभियानों पर तुरंत कानूनी बंदिश लग गई है। • अमेरिकी नागरिकों के लिए: करदाताओं के लाखों डॉलर के सार्वजनिक धन का राजनीतिक संदेशों के लिए इस्तेमाल तत्काल प्रभाव से रुक गया है। इससे यह मिसाल तय होती है कि संघीय बजट का इस्तेमाल आधिकारिक प्रचार तक ही सीमित रहना चाहिए। • प्रशासनिक प्रचार पर रोक: रविवार रात से ऑन-एयर होने वाले सभी टीवी विज्ञापनों को तुरंत हटाना होगा। इसके कारण प्रशासन की तय प्रसारण योजनाओं और प्रचार रणनीतियों को तत्काल रद्द करना पड़ा है। • सार्वजनिक धन की जवाबदेही: कॉमन कॉज जैसी संस्थाओं की इस याचिका से सरकारी फंड के इस्तेमाल पर अदालतों की निगरानी कड़ी हो गई है। आगे किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा चलाए जाने वाले मीडिया अभियानों की न्यायिक जांच का रास्ता खुल गया है। • वैश्विक मीडिया नजरिए से: अमेरिकी सरकार के आंतरिक खर्चों पर अदालती रोक की यह खबर प्रशासन और न्यायपालिका के बीच शक्ति संतुलन को दर्शाती है। यह दिखाता है कि नीतिगत अभियानों में भी अदालतें बिना देरी के दखल दे सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ यह कानूनी टकराव तब पैदा हुआ जब नागरिक अधिकार संस्थाओं ने प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे सरकारी टीवी अभियानों के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की। • सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर आपत्ति: याचिकाकर्ताओं ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सरकारी खजाने के लाखों डॉलर का उपयोग प्रशासन अपने संदेशों के प्रसार के लिए कर रहा था। इस कदम को टैक्सपेयर्स के पैसे का गैर-कानूनी इस्तेमाल करार दिया गया। • कॉमन कॉज की कानूनी चुनौती: गैर-पक्षपाती संस्था कॉमन कॉज तथा अन्य सहयोगी समूहों ने संघीय अदालत में आपातकालीन याचिका लगाई। उन्होंने मांग की कि नियमों के खिलाफ चल रहे इन प्रसारणों पर तुरंत निषेधाज्ञा जारी की जाए। • अभियान समाप्ति के तर्क को खारिज करना: यद्यपि प्रशासन ने दलील दी कि यह विज्ञापन अभियान जल्द ही समाप्त होने वाला है, लेकिन जज जेनिफर एल. रोचोन ने पाया कि शेष विज्ञापनों को भी चलने देना उचित नहीं है। अदालत ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रविवार रात को ही अंतरिम आदेश जारी कर दिया। सवाल-जवाब 1. अदालत ने ट्रंप प्रशासन के किन विज्ञापनों पर रोक लगाई है? अदालत ने करदाताओं के पैसे से टीवी पर चलाए जा रहे शेष सभी विज्ञापनों को तुरंत प्रभाव से रद्द करने का आदेश दिया है। 2. यह आदेश किस अदालत और जज ने जारी किया है? यह फैसला न्यूयॉर्क की अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज जेनिफर एल. रोचोन ने एक अंतरिम रोक के रूप में रविवार रात जारी किया। 3. याचिकाकर्ताओं ने अदालत में क्या आरोप लगाए थे? गैर-पक्षपाती संस्था कॉमन कॉज और अन्य समूहों ने आरोप लगाया था कि प्रशासन अपने राजनीतिक संदेश के प्रचार में टैक्सपेयर्स के लाखों डॉलर का गैर-कानूनी इस्तेमाल कर रहा है। 4. प्रशासन ने अदालत के सामने अपना क्या पक्ष रखा? प्रशासन ने अदालत में दलील दी थी कि यह विज्ञापन अभियान पहले से ही जल्द समाप्त होने वाला था, जिसे जज ने नहीं माना। https://trendkia.com/america/ameriki-adalata-ne-taiksapeyara-phnda-se-chalane-vale-vijnapanon-para-lagai-roka-rashtrapati-donald-trump-ko-kanuni-jhataka-46637 TrendKia — Har trend, sabse pehle.