# आतंकवाद की दोहरी परिभाषा पर वैश्विक मंच पर कड़ी आपत्ति जताते हुए बिप्लब देब ने पहलगाम त्रासदी का उठाया मुद्दा

> संयुक्त राष्ट्र में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य बिप्लब कुमार देब ने स्पष्ट किया कि निर्दोष लोगों की हत्या का कोई तर्क नहीं हो सकता। उन्होंने पहलगाम हमले के षड्यंत्रकारियों और वित्तपोषकों पर कठोर अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की।

**Type:** article · **Category:** अमेरिका · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/america/atnkavada-ki-dohari-paribhasha-para-vaishvika-mncha-para-kari-apatti-jatate-hue-biplab-deb-ne-pahalgam-trasadi-ka-uthaya-mudda-44338 · **Language:** Hindi
**Tags:** संयुक्त राष्ट्र, बिप्लब कुमार देब, पहलगाम हमला, आतंकवाद, विदेश नीति, संयुक्त राष्ट्र महासभा

वैश्विक मंच पर हिंसा और चरमपंथ के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए भारत ने दोहरे मापदंडों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान छठी समिति की बैठक में भारतीय संसदीय दल के प्रतिनिधि बिप्लब कुमार देब ने देश का आधिकारिक दृष्टिकोण रखा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेताया कि हिंसक घटनाओं को किसी भी संदर्भ में स्वीकार्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह प्रवृत्ति पूरी दुनिया की सुरक्षा, सामाजिक उन्नति, नागरिक अधिकारों और सौहार्द के लिए लगातार गहरा संकट पैदा कर रही है।

## हिंसा की मनमानी श्रेणियों पर भारत का स्पष्ट रुख
सत्र को संबोधित करते हुए बीजेपी सांसद ने कहा कि बेगुनाह इंसानों को लहूलुहान करने वाले किसी भी कृत्य को जायज नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि चरमपंथी वारदातों को अलग-अलग चश्मे से देखना बंद होना चाहिए। उनका स्पष्ट संदेश था कि निर्दोष नागरिकों की जान लेने का कोई बहाना नहीं चल सकता और इस तरह के अपराधों में किसी भी तरह का कृत्रिम अंतर संभव नहीं है।

> "आम नागरिकों को निशाना बनाने का कोई भी कारण या औचित्य नहीं हो सकता और 'अच्छे' या 'बुरे' आतंकवाद के बीच कोई फर्क नहीं होता।"

## आधुनिक संचार साधनों और इंटरनेट के दुरुपयोग पर चिंता
भाषण के दौरान भारतीय प्रतिनिधि ने चरमपंथी गुटों द्वारा अत्याधुनिक तकनीकों के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि नई डिजिटल व्यवस्थाओं का सहारा लेकर संगठन युवाओं को भड़काने, चरमपंथी सोच थोपने, दुष्प्रचार की बाढ़ लाने, जमीनी हमलों की योजनाएं तैयार करने और बड़े पैमाने पर अवैध धन जुटाने का काम कर रहे हैं। इस बदलते खतरे से निपटने के लिए उन्होंने दुनिया भर की सरकारों से आपसी तकनीकी साझेदारी और कानूनी समन्वय को नए सिरे से सशक्त बनाने का आग्रह किया।

## वैश्विक कानूनी रूपरेखा और छह प्राथमिकताओं का खाका
भारत ने काफी समय से लंबित कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (CCIT) को शीघ्र अंतिम रूप देने की मांग को एक बार फिर प्रमुखता से उठाया। इस संधि को अमल में लाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चरमपंथ विरोधी कानूनी व्यवस्था को एक मजबूत आधार मिलेगा। इसके साथ ही भारतीय सांसद ने इस संकट से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए छह प्रमुख प्राथमिकताओं का उल्लेख किया, जिनमें देश के भीतर सुरक्षा क्षमताओं का विस्तार करना तथा चरमपंथी सोच और उसके सहायक बुनियादी ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त करना शामिल है।

## पहलगाम त्रासदी और सीमा पार नेटवर्क पर जवाबदेही की मांग
पड़ोसी मुल्कों से संचालित नेटवर्क द्वारा पहुंचाए जा रहे नुकसान का जिक्र करते हुए भारतीय पक्ष ने पहलगाम में घटी दर्दनाक घटना का विशेष उल्लेख किया। अप्रैल 2025 तथा अप्रैल 2026 की आतंकी घटनाओं का संदर्भ देते हुए बताया गया कि अप्रैल 2026 के हमले में 26 निर्दोष नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। सांसद ने स्पष्ट किया कि केवल बंदूक थामने वालों को ही नहीं, बल्कि पूरी साजिश रचने वालों, धन मुहैया कराने वालों और सीमा पार शरण देने वाले प्रायोजकों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेह बनाया जाना जरूरी है। भारत ने यह भी दोहराया कि वह बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बनाए रखते हुए अपने नागरिकों की सुरक्षा के संप्रभु अधिकार का सदैव पालन करेगा।

## इसका आप पर असर
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के इस कड़े रुख से सुरक्षा नीतियों, सीमा पार निगरानी और वैश्विक सहयोग पर सीधा असर पड़ेगा।

- **भारत में:** सीमा सुरक्षा तंत्र और आंतरिक निगरानी प्रणालियों में तकनीकी निवेश तेज किया जाएगा। इसके जरिए नागरिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सीमा पार से आने वाले खतरों की पहचान मजबूत होगी।
- **जम्मू और कश्मीर में:** संवेदनशील पर्यटन व नागरिक क्षेत्रों जैसे पहलगाम में सुरक्षा चौकसी और खुफिया निगरानी में वृद्धि देखने को मिलेगी। इससे स्थानीय निवासियों और आगंतुकों की सुरक्षा को पुख्ता करने में मदद मिलेगी।
- **डिजिटल सुरक्षा पर प्रभाव:** ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और संचार माध्यमों पर कट्टरपंथी सामग्रियों की निगरानी कड़ी की जाएगी। सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को संदिग्ध गतिविधियों व भ्रामक दुष्प्रचार से अधिक सतर्क रहना होगा।
- **वैश्विक वित्तीय नियमों पर असर:** अवैध फंडिंग और संदिग्ध सीमा पार लेन-देन पर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी सख्त हो सकती है। गैर-सरकारी संगठनों और विदेशी फंड हस्तांतरण में नियामक सत्यापन और कड़ा किया जाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह कूटनीतिक वक्तव्य हाल के घातक आतंकी हमलों और वैश्विक मंचों पर चरमपंथ की बदलती परिभाषाओं के मद्देनजर दिया गया है। भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ एक स्पष्ट और एकीकृत कानून बनाने के लिए लंबे समय से दबाव बना रहा है।

- **पहलगाम में हुए हमले:** अप्रैल 2026 में हुए घातक हमले में 26 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी, जिसने सीमा पार मौजूद नेटवर्क की पोल खोली। इस भारी मानवीय क्षति के कारण भारत ने आयोजकों और फंडिंग करने वालों को जिम्मेदार ठहराने की मांग उठाई।
- **नई तकनीकों का बढ़ता जोखिम:** चरमपंथी समूह अब भर्ती करने, प्रोपेगैंडा फैलाने और फंड जुटाने के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीकों का तेजी से उपयोग कर रहे हैं। इस बदलते स्वरूप से निपटने के लिए पुराने कानूनी तंत्र नाकाफी साबित हो रहे थे।
- **कानूनी संधि में हो रही देरी:** कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (CCIT) दशकों से लंबित पड़ा है और आम सहमति नहीं बन पा रही है। भारत चाहता है कि वैश्विक समुदाय बिना दोहरे मापदंड के इस अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे को तुरंत लागू करे।

## सवाल-जवाब

### 1. संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष किसने रखा?
बीजेपी सांसद और भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य बिप्लब कुमार देब ने भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत किया।

### 2. यह संबोधन संयुक्त राष्ट्र के किस सत्र में हुआ?
यह वक्तव्य न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान छठी समिति की बैठक में दिया गया।

### 3. बिप्लब देब ने आतंकवाद की परिभाषा को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने का कोई औचित्य नहीं हो सकता और आतंकवाद में 'अच्छे' या 'बुरे' का कोई भेद नहीं होता।

### 4. पहलगाम आतंकी हमले के संबंध में क्या आंकड़े बताए गए?
सत्र में उल्लेख किया गया कि अप्रैल 2026 में हुए पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी।

### 5. भारत ने किस अंतरराष्ट्रीय संधि को पूरा करने की मांग की?
भारत ने कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (CCIT) को शीघ्र पूरा करने की मांग दोहराई।

### 6. चरमपंथी गुटों द्वारा नई तकनीकों के उपयोग पर क्या चिंता जताई गई?
चिंता जताई गई कि नई तकनीकों का इस्तेमाल लोगों की भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने, प्रोपेगैंडा, योजना बनाने और फंड जुटाने में हो रहा है।

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