अमेरिका की आक्रामक नीतियों से कनाडा ने बदला रुख, आठ साल का सन्नाटा तोड़कर चीन के साथ शुरू हुई सैन्य बातचीत डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक रुख और कनाडा को लेकर दिए गए बयानों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इसी बीच कनाडा और चीन ने आठ साल बाद अपनी सैन्य बातचीत दोबारा शुरू कर दी है, जिससे अमेरिका की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक रणनीतियां और धौंस जमाने वाली नीतियां अब उन्हीं पर भारी पड़ती नजर आ रही हैं। कनाडा को लेकर अपनाए गए कड़े रवैये और उसे अपना राज्य बताने वाले बयानों के बाद द्विपक्षीय संबंधों में गहरी खटास आ चुकी है। व्यापारिक मोर्चे पर मतभेदों के चलते दोनों देशों के बीच अहम ट्रेड डील पहले ही रद्द हो चुकी है, और अब हालात में बड़ा बदलाव तब आया जब कनाडा ने आठ साल का सन्नाटा तोड़ते हुए चीन के साथ फिर से रणनीतिक संवाद शुरू कर दिया है। इस अचानक हुए घटनाक्रम से वाशिंगटन के रणनीतिक हलकों में चिंता का माहौल है। आठ साल बाद पटरी पर लौटी चीन और कनाडा की सैन्य वार्ता लंबे समय से ठप पड़े कूटनीतिक और सैन्य संपर्कों को बहाल करते हुए कनाडा और चीन ने हाल ही में अपनी पांचवीं डिफेंस को-ऑर्डिनेशन डायलॉग बैठक का आयोजन किया। इस उच्चस्तरीय बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। चीनी रक्षा मंत्रालय ने इस संवाद की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच बेहद खुलकर और व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ बातचीत हुई है, जिसका उद्देश्य आपसी भरोसे को मजबूत करना है। कनाडाई रक्षा मंत्रालय ने भी इस बैठक की पुष्टि की है, हालांकि इस कदम के सामने आते ही घरेलू राजनीति में भूचाल आ गया है और कंजर्वेटिव पार्टी ने इसका कड़ा विरोध किया है। जानकारों का मानना है कि कनाडाई नौसेना के जहाजों के ताइवान जलडमरूमध्य से गुजरने के कारण चीन नाराज था, लेकिन अब कूटनीतिक मजबूरियों के चलते दोनों देश बातचीत की मेज पर लौट आए हैं। डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर उठ रहे हैं घरेलू सवाल अमेरिका के भीतर से ही ट्रंप प्रशासन की कूटनीति पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। जो बाइडन के कार्यकाल में कनाडा में अमेरिकी राजदूत रहे डेविड एल. कोहेन ने सार्वजनिक रूप से ट्रंप की आक्रामक व्यापारिक नीतियों को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि वाशिंगटन द्वारा लगातार दबाव बनाए जाने और ओטาวा को नीचा दिखाने के कारण कनाडा के पास चीन के साथ अपने रिश्ते सुधारने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की नीतियां उस बड़े उद्देश्य के विपरीत जा रही हैं जिसके तहत वैश्विक स्तर पर चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना था, लेकिन इसके बजाय पड़ोसी देश ही चीन की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. व्यापारिक समझौते टूटने और तीखे बयानों का दौर अमेरिका और कनाडा के बीच केवल कूटनीतिक दूरियां ही नहीं बढ़ी हैं, बल्कि व्यापारिक रिश्ते भी पूरी तरह चरमरा गए हैं। पिछले महीने दोनों देशों के बीच चल रही एक हाई-प्रोफाइल ट्रेड डील अचानक टूट गई, जिसके बाद कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने वाशिंगटन पर कड़ा प्रहार किया। मार्क कार्नी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका उनके साथ बराबरी का रिश्ता नहीं चाहता, बल्कि वह ओटावा को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखना चाहता है। दूसरी तरफ, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक रैली के दौरान कनाडा पर निशाना साधते हुए कहा कि कनाडा अमेरिकी उत्पादों के मुकाबले चीनी सामानों को अनुचित प्राथमिकता दे रहा है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बंद कमरों की कूटनीति और मेगा ट्रेड डील का टूटना दोनों देशों के बीच बनी मेगा ट्रेड डील के अचानक रद्द होने के पीछे की अंदरूनी कहानी काफी दिलचस्प रही है। अगस्त के महीने में जब समझौता अपने अंतिम चरण में था, तभी बातचीत अचानक पटरी से उतर गई। पूर्व राजदूत कोहेन के अनुसार अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर अपनी पेशेवर सूझबूझ के बावजूद वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटानिक के अड़ियल रवैये के कारण पूरी डील को बचा नहीं सके। हावर्ड लुटानिक ने आरोप लगाया कि कनाडाई नेताओं ने राजनीतिक लाभ के लिए आखिरी वक्त पर अड़ंगे डाले। वहीं दूसरी ओर, जानकारों का मानना है कि मार्क कार्नी जब इस समझौते के मसौदे को अपने प्रांतीय मुख्यमंत्रियों के सामने ले गए, तो घरेलू स्तर पर ट्रंप विरोधी भावनाओं के कारण इसे भारी विरोध का सामना करना पड़ा, जिससे प्रधानमंत्री के लिए इस समझौते पर आगे बढ़ना राजनीतिक रूप से असंभव हो गया था। बदलते समीकरण और भविष्य की कूटनीतिक चुनौतियां इस पूरे घटनाक्रम के बीच अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अजीब विडंबनाएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां ट्रंप प्रशासन अपने सबसे पुराने और करीबी सहयोगी कनाडा के साथ उलझा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगामी व्हाइट हाउस दौरे की चर्चाएं तेज हो गई हैं। बाइडन के पूरे कार्यकाल में इस तरह की उच्चस्तरीय यात्राएं नहीं हुई थीं, लेकिन अब नए समीकरणों के तहत यह मुलाकात तय मानी जा रही है। एक तरफ अमेरिका चीन को घेरने के दावे कर रहा है, तो दूसरी तरफ उसकी अपनी नीतियां उसके पारंपरिक सहयोगियों को ही चीन की ओर धकेल रही हैं, जिससे आने वाले समय में वैश्विक राजनीति में अमेरिकी प्रभुत्व के लिए बड़ी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। इसका आप पर असर वैश्विक कूटनीति और व्यापारिक तनाव का असर आम नागरिकों और वैश्विक बाजारों पर सीधा पड़ सकता है। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच बदलते समीकरणों और आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव का असर भारतीय आयात-निर्यात और वैश्विक व्यापार नीतियों पर पड़ सकता है। • कनाडा में: ओटावा और वाशिंगटन के बीच व्यापारिक समझौते टूटने तथा चीन के साथ सैन्य संवाद बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था, आयात शुल्क और कारोबारी माहौल पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसा क्यों हुआ कनाडा और चीन के बीच आठ साल बाद सैन्य बातचीत शुरू होने और अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्ते टूटने के पीछे कई कूटनीतिक और राजनीतिक कारण जिम्मेदार रहे हैं। • आक्रामक व्यापार नीतियां: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा पर लगातार दबाव बनाने और उसे नीचा दिखाने वाले बयानों ने ओटावा में भारी राजनीतिक नाराजगी पैदा की। • ट्रेड डील का टूटना: अगस्त के महीने में अंतिम चरण में पहुंची उच्चस्तरीय व्यापारिक वार्ता घरेलू राजनीतिक विरोध और प्रशासनिक असहमतियों के कारण रद्द हो गई। • सैन्य संपर्कों की बहाली: पूर्व में ताइवान जलडमरूमध्य से जुड़े नौसैनिक विवादों के कारण ठप पड़े कूटनीतिक संवाद को दोनों देशों ने अपने रणनीतिक हितों के तहत फिर से शुरू किया है। सवाल-जवाब 1. कनाडा और चीन के बीच हाल ही में कौन सी बड़ी बैठक हुई है? कनाडा और चीन के बीच आठ साल के अंतराल के बाद पांचवीं डिफेंस को-ऑर्डिनेशन डायलॉग बैठक आयोजित की गई है। 2. कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते क्यों खराब हुए हैं? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीतियों और बयानों के कारण दोनों देशों के बीच की मेगा ट्रेड डील रद्द हो गई है। 3. डेविड एल. कोहेन कौन हैं? डेविड एल. कोहेन जो बाइडन के शासनकाल में कनाडा में अमेरिकी राजदूत रह चुके हैं। 4. कनाडा के प्रधानमंत्री का क्या नाम है? कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी हैं। 5. चीन के रक्षा मंत्रालय ने इस संवाद के बारे में क्या कहा है? चीन के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दोनों देशों के अधिकारियों के बीच खुलकर बातचीत हुई है और वे आपसी भरोसा बढ़ाने के लिए सहमत हुए हैं। https://trendkia.com/america/canada-pivot-toward-beijing-after-trade-row-with-washington-30500 TrendKia — Har trend, sabse pehle.