डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल से अमरीकी किशोरों में रंगभेद और सामाजिक असमानता पर बंटी राय पांच साल के शोध में सामने आया है कि अमरीका में राजनीतिक फैसलों और व्हाइट हाउस के माहौल से किशोरों की नस्लीय सोच और असमानता पर समझ दो अलग-अलग दिशाओं में बंट रही है। अमरीका में राष्ट्रपति पद पर डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी के सामाजिक प्रभावों पर जब एक 16 वर्षीय अश्वेत छात्रा से सवाल किया गया, तो उसने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की। उसका कहना था कि संयुक्त राज्य अमरीका को आजादी की भूमि कहा जाता है, लेकिन हकीकत में यह रंगभेद का स्थान बन चुका है। दूसरी ओर, उसी उम्र की एक 16 वर्षीय श्वेत छात्रा का नज़रिया पूरी तरह अलग था। उसका मानना था कि स्थिति ठीक है और हालांकि उसे अल्पसंख्यकों के लिए दुख होता है, लेकिन श्वेत होने और एक समान पृष्ठभूमि से आने के कारण उसे अपने लिए कोई खतरा महसूस नहीं होता। ये दो विपरीत प्रतिक्रियाएं उस गहरे सामाजिक विभाजन को रेखांकित करती हैं जो अमरीका के युवाओं में दिखाई दे रहा है। किशोर विकास के विशेषज्ञों द्वारा 1,400 नवमीं से बारहवीं कक्षा के छात्रों पर किए गए पांच साल के व्यापक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि राजनीतिक बदलाव किशोरों की सोच को किस तरह दूरगामी रूप से प्रभावित करते हैं। इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि 1930 के दशक की महान मंदी, अमरीका का नागरिक अधिकार आंदोलन, 11 सितंबर के आतंकवादी हमले और विभिन्न राष्ट्रपति प्रशासनों का बदलाव जैसे बड़े राष्ट्रीय घटनाक्रमों ने युवाओं के मानस पर अमिट छाप छोड़ी है। ठीक इसी प्रकार, डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल और उसके बाद के घटनाक्रमों ने किशोरों के नजरिए को दो अलग-अलग ध्रुवों में बांट दिया है। वर्ष 2016 के चुनाव के दौरान वयस्कों के बीच दिख रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और विभाजन की छाया हाई स्कूल के छात्रों के विचारों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी थी। विचारधाराओं में बढ़ता फासला अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करने वाले युवा मुख्य रूप से श्वेत, पुरुष और रूढ़िवादी राजनीतिक सोच वाले परिवारों से ताल्लुक रखते थे, जिनमें अप्रवासी पृष्ठभूमि वाले परिवारों की संख्या कम थी। इसके विपरीत, ट्रंप की नीतियों की आलोचना करने वाले किशोरों में मुख्य रूप से छात्राएं, लातीनी, अश्वेत और एशियाई मूल के युवा शामिल थे, जिनके माता-पिता या दादा-दादी अमरीका में बाहर से आकर बसे थे। ये दोनों वर्ग केवल सामाजिक संरचना के आधार पर ही अलग नहीं थे, बल्कि समय के साथ नस्ल और सामाजिक असमानता पर उनकी सोच भी अलग-अलग दिशाओं में विकसित होती चली गई। डोनाल्ड ट्रंप के शुरुआती कार्यकाल के दौरान उनके समर्थक किशोरों में 'नस्लीय चेतना' में गिरावट देखी गई। ऐसे युवाओं ने सामाजिक समानता और विविधता का समर्थन करने वाले बयानों से दूरी बनानी शुरू कर दी। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वे सभी नस्लीय और जातीय समूहों के लिए समान अधिकारों का समर्थन करते हैं या भेदभाव पर चिंता व्यक्त करते हैं, तो उनकी सहमति का स्तर घट गया। इसके अलावा, समाज में मौजूद विषमताओं के प्रति भी उनकी जागरूकता कम हुई और उन्होंने इस बात को स्वीकार करने से इंकार किया कि अमरीका में कुछ समूहों के पास आगे बढ़ने के अवसर कम होते हैं। दूसरी तरफ, ट्रंप की नीतियों का विरोध करने वाले किशोरों में नस्लीय चेतना और सामाजिक असमानता के प्रति समझ अधिक मजबूत हुई। रंगीन मूल के युवाओं पर किए गए एक अन्य साक्षात्कार आधारित शोध से भी यह स्पष्ट हुआ कि राजनीतिक फैसलों के जवाब में आलोचक किशोरों ने समाज में गहराई से रचे-बसे भेदभाव को पहचानने और समझने की अपनी क्षमता को काफी हद तक विकसित कर लिया। मतदान और राजनीतिक भागीदारी पर प्रभाव नस्लीय सोच में आए इस बदलाव ने युवाओं के व्यवहार पर भी असर डाला। अध्ययन में देखा गया कि वर्ष 2016 के चुनाव के बाद ट्रंप समर्थक किशोरों में मतदान को लेकर रुचि अचानक बढ़ गई। यह रुझान वर्ष 2024 के अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों में भी साफ दिखाई दिया। यद्यपि 18 से 29 वर्ष की आयु के समग्र युवा मतदाताओं ने कमला हैरिस का अधिक समर्थन किया, परंतु जब केवल श्वेत युवाओं और युवा पुरुषों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, तो इनमें से 54 प्रतिशत श्वेत युवाओं और 56 प्रतिशत युवा पुरुषों ने डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में मतदान किया। वर्ष 2016 और 2017 के दौरान सर्वे में शामिल हाई स्कूल छात्र आज इसी युवा मतदाता वर्ग का हिस्सा बन चुके हैं। स्कूलों में बढ़ता भेदभाव और मानसिक स्वास्थ्य पर असर विचारधारा में आए इस विभाजन का प्रभाव केवल राजनीतिक सोच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर अमरीकी स्कूलों के माहौल पर भी पड़ा। अध्ययनों के अनुसार, K-12 स्तर के 28 प्रतिशत शिक्षकों ने माना कि ट्रंप के पहले चुनाव के बाद छात्रों द्वारा अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने की घटनाओं में वृद्धि हुई। विशेष रूप से उन स्कूलों में जहां श्वेत छात्रों की संख्या अधिक थी, वहां अप्रवासियों और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयानबाजी की घटनाएं बढ़ीं। इसके साथ ही स्कूलों में अश्वेत विरोधी नस्लवाद और ट्रांसजेंडर छात्रों के खिलाफ पक्षपात के मामले दर्ज किए गए। लातीनी युवाओं के अध्ययन से पता चला कि वे राष्ट्रपति चुनाव के बाद अधिक भेदभाव और मानसिक तनाव का सामना कर रहे थे। अप्रवासन नीतियों और सख्त बयानबाजी के कारण लातीनी किशोरों में अनिश्चितता और भय का माहौल पैदा हुआ, जिसे उन्होंने सीधे तौर पर नस्लवाद से जोड़कर देखा। चार प्रमुख मनोवैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध की समीक्षा से यह निष्कर्ष निकला कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अपनाई गई नीतियों ने लातीनी किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाया। यद्यपि सभी घटनाओं के लिए सीधे तौर पर साथी छात्रों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन आंकड़ों से स्पष्ट है कि ट्रंप समर्थक युवाओं में भेदभाव के प्रति संवेदनशीलता घटी थी, जबकि वयस्क समर्थकों में भी अप्रवासी विरोधी सोच और राजनीतिक हिंसा के प्रति झुकाव बढ़ा था। वर्ष 2025 के कार्यकारी आदेश और भावी स्थिति वर्ष 2025 में जारी नए कार्यकारी आदेशों ने इस बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। नए आदेशों के तहत अप्रवासियों की हिरासत और निर्वासन की प्रक्रिया को तेज किया गया है, जेंडर को केवल बाइनरी रूप में परिभाषित किया गया है और विविधता, समानता व समावेशन (DEI) कार्यक्रमों पर पाबंदी लगा दी गई है। इन फैसलों के तुरंत बाद सामाजिक स्तर पर इसके परिणाम देखने को मिले। चुनाव के तुरंत बाद LGBTQ+ युवाओं की सहायता के लिए संचालित हेल्पलाइन पर मदद मांगने वाली क्राइसिस कॉल में 200 प्रतिशत का उछाल देखा गया। वहीं अमरीका के 20 राज्यों में अश्वेत, लातीनी और LGBTQ+ किशोरों को परेशान करने वाले फोन संदेश भेजे जाने की घटनाएं सामने आईं। इसके अतिरिक्त, स्कूलों में नस्लीय व लैंगिक समानता से जुड़ी पढ़ाई पर रोक लगाने के कार्यकारी आदेश से किशोरों के लिए समाज की विविध विषमताओं को समझने के रास्ते बंद होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमरीकी युवाओं में सामाजिक सोच और नस्लीय समानता को लेकर विभाजन और गहरा हो सकता है। इसका आप पर असर अमरीका में रहने वाले परिवारों पर: अमरीकी स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों के लिए नस्लीय और लैंगिक समानता की शिक्षा पर कार्यकारी रोक लगने से पाठ्यक्रम और क्लासरूम में विविधता पर चर्चा सीमित होगी। वैश्विक पाठकों के लिए: यह अध्ययन दर्शाता है कि किसी देश की शीर्ष राजनीति और नीतियां किस तरह भावी पीढ़ी के मानसिक विकास, सामाजिक दृष्टिकोण और चुनाव व्यवहार को आकार देती हैं। सवाल-जवाब 1. शोध में अमरीकी किशोरों पर डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल का क्या प्रभाव देखा गया? पांच साल के अध्ययन से पता चला कि अमरीकी किशोरों की सोच नस्लवाद और सामाजिक असमानता पर दो हिस्सों में बंट गई; समर्थकों में समानता के प्रति संवेदनशीलता घटी जबकि विरोधियों में इसकी समझ और गहरी हुई। 2. वर्ष 2024 के अमरीकी चुनाव में युवा वोटिंग का क्या पैटर्न रहा? 18 से 29 वर्ष के युवाओं ने कुल मिलाकर कमला हैरिस को पसंद किया, लेकिन 54 प्रतिशत श्वेत युवाओं और 56 प्रतिशत युवा पुरुषों ने डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में मतदान किया। 3. वर्ष 2025 के कार्यकारी आदेशों का स्कूलों और छात्रों पर क्या असर पड़ा है? कार्यकारी आदेशों ने DEI कार्यक्रमों और स्कूलों में समानता की पढ़ाई पर रोक लगाई है, जिसके बाद LGBTQ+ हेल्पलाइन पर क्राइसिस कॉल में 200 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। 4. कितने प्रतिशत शिक्षकों ने स्कूलों में भेदभाव की घटनाएं बढ़ने की बात कही? अध्ययन के अनुसार K-12 स्तर के 28 प्रतिशत शिक्षकों ने अमरीकी स्कूलों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां बढ़ने की पुष्टि की। https://trendkia.com/america/donald-trump-ke-rashtrapati-karyakala-se-amariki-kishoron-men-rngabheda-aura-samajika-assam-anata-para-bnti-raya-12597 TrendKia — Har trend, sabse pehle.