डोनाल्ड ट्रंप ने दिए ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई के निर्देश, कच्चे तेल के दामों में उछाल से गहराया संकट अमेकिी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए सैन्य हमले करने के निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। इस फैसले के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमतें 86 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए सैन्य हमले शुरू करने की व्यापक योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। यदि यह सैन्य कार्रवाई होती है तो यह इसी वीकेंड तक हो सकती है। अमेरिकी प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सैन्य दबाव को इस स्तर तक बढ़ाना है कि तेहरान अपनी जिद छोड़कर वाशिंगटन द्वारा निर्धारित शर्तों पर बातचीत के मेज पर आने के लिए मजबूर हो जाए। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब ईरान के साथ जारी राजनयिक प्रयासों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट रूप से संदेह जताया है। जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले के बाद से मध्य पूर्व में दोनों देशों के बीच संघर्ष लगातार आक्रामक मोड़ लेता जा रहा है। कैंप डेविड की कैबिनेट बैठक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले की योजना मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड में शुक्रवार को हुई उच्चस्तरीय कैबिनेट बैठक के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी आक्रामक रणनीति को सार्वजनिक किया। बैठक में मौजूद अधिकारियों और मीडिया को संबोधित करते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी 'हम उन पर बहुत जोरदार हमला करेंगे।' उन्होंने आगे कहा कि सैन्य दबाव का सिलसिला तब तक जारी रहेगा जब तक ईरानी नेतृत्व यह स्वीकार न कर ले कि वे अब इस तरह के निरंतर हमलों को सहने की स्थिति में नहीं हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति ने ईरानी नेतृत्व पर झूठे दावे करने और तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कूटनीतिक रास्तों पर उनका भरोसा खत्म होता जा रहा है। सैन्य रणनीतिकारों द्वारा तैयार किए जा रहे विकल्पों में ईरान के प्रमुख ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शामिल है। इसमें देश के बिजली उत्पादन संयंत्र और पेट्रोलियम रिफाइनरियों पर सटीक हवाई हमले करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय नागरिक अधिकार संगठनों और मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इस प्रकार की योजना पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि जानबूझकर किसी संप्रभु देश के नागरिक बुनियादी ढांचे और ऊर्जा सुविधाओं को नष्ट करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी घरेलू राजनीति ऊर्जा सुविधाओं पर संभावित अमेरिकी हमलों की खबर सामने आते ही वैश्विक कमोडिटी बाजारों में हड़कंप मच गया। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमत तुरंत उछलकर 86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। तेल बाजार में आई इस अचानक तेजी से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने प्रशासन के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा 'ईरान को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।' उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक ईरानी नेतृत्व राष्ट्रपति ट्रंप की शर्तों के अनुसार किसी सार्थक और परिणामदायक वार्ता के लिए तैयार नहीं होता, तब तक उस पर दबाव कम नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही अमेरिकी सैन्य अभियानों के कारण पेंटागन की अपनी लॉजिस्टिक चुनौतियां भी उभरकर सामने आई हैं। फरवरी के अंत से लगातार चल रहे सैन्य अभियानों की वजह से अमेरिकी सेना के हथियारों का भंडार, विशेष रूप से मध्य पूर्व में तैनात सैन्य अड्डों की सुरक्षा करने वाले उन्नत एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की संख्या में भारी कमी आई है। अमेरिका में घरेलू मोर्चे पर भी यह सैन्य तनाव गहरा असर डाल रहा है। ईंधन के दामों में बढ़ोतरी के कारण अमेरिका में खाद्य सामग्री, परिवहन और आवास की लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। आगामी नवंबर महीने में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले सामने आए विभिन्न जनमत सर्वेक्षणों से पता चलता है कि आम अमेरिकी मतदाता अर्थव्यवस्था की स्थिति और युद्ध में अमेरिका की संलिप्तता को लेकर ट्रंप प्रशासन के कामकाज से काफी असंतुष्ट हैं। 28 फरवरी से भड़का क्षेत्रीय संघर्ष और आपूर्ति श्रृंखला पर असर मध्य पूर्व में मौजूदा व्यापक संकट की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए संयुक्त सैन्य हमलों के बाद हुई थी। इन शुरुआती हमलों के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया और संघर्ष तेजी से भड़क उठा। इसके जवाब में ईरान ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह से बाधित कर दिया। इस नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में भेजे जाने वाले कच्चे तेल, तरल प्राकृतिक गैस (LNG) और रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति ठप हो गई। केवल समुद्री मार्ग बंद करने तक ही ईरान सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने फारस की खाड़ी के पड़ोसी देशों में स्थित विभिन्न ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले भी किए। इन लगातार हमलों के कारण खाड़ी देशों की औद्योगिक, व्यावसायिक और आर्थिक गतिविधियों पर अत्यंत प्रतिकूल असर पड़ा है। हाल के दिनों में यह संघर्ष और अधिक घातक रूप ले चुका है। इस हफ्ते मिस्र के दमियेट्टा बंदरगाह पर खड़े LNG ले जा रहे दो व्यापारिक जहाजों को ड्रोन हमलों के जरिए निशाना बनाया गया। इसके अलावा ईरान की तरफ से दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों ने स्थिति को और अधिक विस्फोटक बना दिया। जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की शहादत और ईरानी मिसाइल परीक्षणों के बाद वाशिंगटन का रुख बेहद कड़ा हो गया है। तेहरान और वाशिंगटन के बीच भरोसे का गहराता संकट कैंप डेविड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच बन रहे अविश्वास पर चिंता जताई। उन्होंने दोहराया कि एक समय ऐसा आएगा जब तेहरान इस दबाव के आगे घुटने टेकने पर मजबूर हो जाएगा। दूसरी ओर तेहरान के अधिकारियों और ईरानी नेतृत्व का रुख भी उतना ही सख्त बना हुआ है। ईरानी प्रशासन का कहना है कि वाशिंगटन ने पूर्व में हुए समझौतों और वादों का बार-बार उल्लंघन किया है। तेहरान के अनुसार अमेरिकी सरकार पर किसी भी तरह का कूटनीतिक भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि वह अपने ही वादों से मुकर जाती है। इस प्रकार दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई इतनी चौड़ी हो चुकी है कि निकट भविष्य में शांतिपूर्ण कूटनीतिक समाधान निकलने की संभावनाएं बेहद कम नजर आ रही हैं। इसका आप पर असर भारत में: मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमत 86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे आम लोगों पर परिवहन खर्च का बोझ बढ़ेगा। दुनिया भर में: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी से प्राकृतिक गैस और उर्वरक की वैश्विक आपूर्ति बाधित होने का खतरा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की महंगाई बढ़ सकती है। सवाल-जवाब 1. क्या अमेरिका इस वीकेंड ईरान पर नए सैन्य हमले करने की तैयारी कर रहा है? हां, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना को ईरान पर नए सैन्य हमले की तैयारी के निर्देश दिए हैं ताकि तेहरान पर अमेरिका की शर्तों के अनुसार कूटनीतिक वार्ता में शामिल होने का दबाव बनाया जा सके। 2. सैन्य कार्रवाई के दौरान किन ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है? अमेरिकी प्रशासन ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे, जैसे बिजली उत्पादन केंद्रों और पेट्रोलियम रिफाइनरियों को निशाना बनाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। 3. सैन्य हमलों की खबर का अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर क्या असर हुआ? ईरान के ऊर्जा ढांचे पर संभावित हमलों की रिपोर्ट के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमत उछलकर 86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। 4. अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा सैन्य संघर्ष कब शुरू हुआ था? यह क्षेत्रीय संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए संयुक्त सैन्य हमलों के बाद शुरू हुआ था। 5. ईरान ने अमेरिकी और इजरायली हमलों के जवाब में क्या कदम उठाए हैं? ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करके तेल व प्राकृतिक गैस की आपूर्ति रोक दी है, और फारस की खाड़ी के देशों तथा मिस्र के दमियेट्टा बंदरगाह पर एलएनजी जहाजों पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए हैं। https://trendkia.com/america/donald-trump-ne-iran-ke-urja-thikanon-para-sainya-karravai-ke-die-nirdesha-kachche-tela-ke-damon-men-uchhala-se-gaharaya-snkata-12795 TrendKia — Har trend, sabse pehle.