फोर्ट हुड गोलीकांड के दोषी निदाल मलिक हसन को मिलेगी मौत की सजा, फायरिंग स्क्वाड करेगा फैसला टेक्सास के फोर्ट हुड में 13 लोगों की जान लेने वाले पूर्व सैन्य मनोचिकित्सक निदाल मलिक हसन को 3 दिसंबर को फायरिंग स्क्वाड के जरिए मौत की सजा देने की तैयारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले को मंजूरी दे दी है। टेक्सास स्थित फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर हुए घातक हमले के दोषी निदाल मलिक हसन को इसी साल 3 दिसंबर को फायरिंग स्क्वाड के सामने खड़ा कर मौत की सजा दी जाएगी। 2009 में हुए इस भीषण गोलीकांड में 13 लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। यू.एस. आर्मी के कार्यवाहक सेक्रेटरी एडम टेले ने सजा के क्रियान्वयन की तारीख और तरीके की पुष्टि की है। इसके साथ ही पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने जानकारी दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निदाल मलिक हसन की मौत की सजा पर आधिकारिक मंजूरी दे दी है। अमेरिकी सैन्य इतिहास में यह कदम बेहद दुर्लभ माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिकी सेना ने साल 1961 के बाद से अब तक किसी भी दोषी को मौत की सजा नहीं दी है। हमले के समय सेना में मनोचिकित्सक था दोषी फोर्ट हुड में खूनी खेल खेलने वाला निदाल मलिक हसन खुद अमेरिकी सेना में मनोचिकित्सक के पद पर तैनात था। वर्ष 2009 में वह फोर्ट हुड के भीतर स्थित एक मेडिकल बिल्डिंग में दाखिल हुआ। उस समय इमारत में मौजूद अमेरिकी सैनिक अपनी नियमित मेडिकल जांच करवा रहे थे। इमारत में पहुंचते ही निदाल मलिक हसन ने 'अल्लाह हू अकबर' का नारा बुलंद किया और लेजर-साइट से लैस अपनी हैंडगन से निहत्थे सैनिकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस अचानक हुए हमले में 13 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। अदालत में खुद को बताया पाला बदलने वाला सैनिक मुकदमे की सुनवाई के दौरान निदाल मलिक हसन ने अपने इस भयानक कृत्य के पीछे की वजह अदालत के सामने रखी। उसने दावा किया कि वह नहीं चाहता था कि ये अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान जाएं और वहां उसके साथी मुसलमानों पर हमला करें या उन्हें मारें। सैनिकों को अफगानिस्तान रवाना होने से रोकने के मकसद से ही उसने यह खूनी कदम उठाया था। पूरे ट्रायल के दौरान उसने अपने बचाव में कोई खास कानूनी दलीलें पेश करने की कोशिश भी नहीं की। उसने जूरी सदस्यों के सामने साफ कहा कि तमाम साक्ष्य यह साबित कर देंगे कि फायरिंग करने वाला शख्स वही था। उसने खुद को ऐसे सिपाही के रूप में पेश किया जिसने अपना पाला बदल लिया था। कानूनी अपील से टल सकती है सजा 'आर्मी लॉयर' मैगजीन की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के अनुमोदन के साथ ही सजा पर अमल की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, निदाल मलिक हसन के पास अब भी कानूनी विकल्प मौजूद हैं। वह सिविलियन फेडरल कोर्ट सिस्टम का दरवाजा खटखटाकर 'हेबियस कॉर्पस' याचिका दायर कर सकता है। अगर अदालत इस अपील को स्वीकार करती है, तो सजा के अमल पर रोक लग सकती है और यह कानूनी रोक कई वर्षों तक खिंच सकती है। लाइव प्रसारण और वैश्विक परंपराओं पर चर्चा पूरी दुनिया में मौत की सजा का सार्वजनिक या खुला प्रदर्शन बेहद दुर्लभ मामलों में ही देखने को मिलता है। यदि अमेरिका में निदाल मलिक हसन की मौत की सजा का लाइव प्रसारण किया जाता है, तो अमेरिका उन गिने-चुने मुल्कों की फेहरिस्त में शामिल हो जाएगा जहां ऐसी सजाएं सार्वजनिक तौर पर दिखाई जाती हैं। वर्तमान समय में ऐसी प्रथाएं केवल ईरान और अफगानिस्तान जैसे देशों में ही प्रचलित मानी जाती हैं। इसका आप पर असर अमेरिकी सैन्य न्याय प्रणाली में 1961 के बाद पहली बार किसी सैन्य कैदी को मौत की सजा देने की तैयारी वैश्विक कानून और सैन्य नियमों में बड़ा बदलाव दर्शाती है। • न्यायिक मिसाल: अमेरिकी सेना छह दशक से अधिक समय बाद किसी व्यक्ति को मौत की सजा देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे सैन्य अदालतों द्वारा दिए जाने वाले मृत्युदंड और अपीलीय प्रक्रियाओं पर व्यापक असर पड़ेगा। • अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार: सजा के तरीके और लाइव प्रसारण की चर्चा से वैश्विक मानवाधिकार मंचों पर अमेरिका की नीतियों की समीक्षा तेज हो सकती है। सार्वजनिक या प्रसारित फांसी देने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी बहस छिड़ सकती है। • फेडरल अदालती विकल्प: दोषी के पास सिविल कोर्ट में अपील दायर करने का अधिकार अभी सुरक्षित है। इस प्रक्रिया से हेबियस कॉर्पस याचिकाओं के सैन्य मामलों में लागू होने की कानूनी सीमाओं पर नई स्पष्टता आएगी। • पीड़ितों के परिवार: 2009 के हमले में अपनों को खोने वाले परिवारों के लिए यह फैसला लंबे इंतजार के बाद आए न्याय के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि आगे की संभावित अपीलों के कारण उन्हें अंतिम निर्णय के लिए और प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। ऐसा क्यों हुआ यह घटना 2009 में फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर हुए घातक हमले और उसके बाद चली लंबी सैन्य अदालत की प्रक्रिया का परिणाम है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी के बाद अब मौत की सजा के निष्पादन का रास्ता साफ हुआ है। • 2009 का फोर्ट हुड हमला: सेना के मनोचिकित्सक निदाल मलिक हसन ने मेडिकल जांच केंद्र में मौजूद जवानों पर अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं। इस हमले में 13 लोग मारे गए थे और 30 से अधिक घायल हुए थे। • अफगानिस्तान तैनाती का विरोध: हसन ने स्वयं स्वीकार किया था कि वह अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान जाने से रोकना चाहता था ताकि साथी मुसलमान सुरक्षित रहें। इसी सोच के तहत उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। • अदालत में अपराध स्वीकारना: कोर्ट मार्शल के दौरान हसन ने गवाहों या साक्ष्यों को चुनौती नहीं दी और खुद को पाला बदलने वाला सैनिक बताया। जूरी ने सभी आरोपों में उसे दोषी करार देते हुए मृत्युदंड सुनाया था। • राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी: अमेरिकी सैन्य कानून के तहत मौत की सजा पर अंतिम अमल के लिए राष्ट्रपति की लिखित सहमति अनिवार्य होती है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इसे मंजूरी दिए जाने के बाद सेना ने 3 दिसंबर की तारीख तय की। सवाल-जवाब 1. निदाल मलिक हसन कौन है? निदाल मलिक हसन अमेरिकी सेना में मनोचिकित्सक था, जिसने 2009 में फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर 13 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 2. निदाल मलिक हसन को मौत की सजा कब और कैसे दी जाएगी? उसे 3 दिसंबर को फायरिंग स्क्वाड के जरिए मौत की सजा देने का फैसला किया गया है। 3. इस सजा को मंजूरी किसने दी है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निदाल मलिक हसन की मौत की सजा पर आधिकारिक मंजूरी दी है। 4. अमेरिकी सेना ने आखिरी बार मौत की सजा कब दी थी? अमेरिकी सेना ने वर्ष 1961 के बाद से अब तक किसी भी दोषी को मौत की सजा नहीं दी है। 5. क्या निदाल मलिक हसन के पास सजा रोकने का कोई कानूनी विकल्प है? हां, वह सिविलियन फेडरल कोर्ट सिस्टम में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर करके सजा के अमल पर रोक लगवाने की कोशिश कर सकता है। https://trendkia.com/america/fort-hood-golikanda-ke-doshi-nidal-malik-hasan-ko-milegi-mauta-ki-saja-phayaringa-skvada-karega-phaisala-46122 TrendKia — Har trend, sabse pehle.