गैविन न्यूजसम का बड़ा दावा, बोले- नवंबर के मिडटर्म में संसद हाथ से जाते ही बेअसर हो जाएगी डोनाल्ड ट्रंप की सत्ता कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूजसम ने दावा किया है कि आने वाले नवंबर के मिडटर्म चुनाव में निचले सदन में बहुमत हासिल कर डेमोक्रेट्स डोनाल्ड ट्रंप के मनमाने फैसलों और नीतियों पर पूरी तरह लगाम लगा देंगे. अमेरिकी सत्ता के शीर्ष पर बैठे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक पकड़ को लेकर विपक्षी खेमे से तीखा हमला सामने आया है. कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूजसम ने संकेत दिया है कि आगामी नवंबर के मिडटर्म चुनाव देश की सियासत का रुख पूरी तरह बदल देंगे. उनके मुताबिक, इस चुनाव के परिणाम सामने आते ही वर्तमान प्रशासन का निरंकुश दबदबा समाप्त हो जाएगा और व्हाइट हाउस की मनमानी नीतियों पर कानूनी अंकुश लग जाएगा. इसे राष्ट्रपति के एकतरफा फैसलों के खिलाफ जनमत का कड़ा फैसला बताया जा रहा है. संसद के निचले सदन में वापसी की तैयारी और ट्रंप की कार्यशैली पर सवाल न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के क्लाइमेट समिट के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए 58 वर्षीय डेमोक्रेटिक नेता गैविन न्यूजसम ने आगामी चुनावी परिदृश्य पर अपनी बात रखी. उन्होंने स्पष्ट किया कि नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों के जरिए डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रिजेंटेटिव में फिर से अपना नियंत्रण कायम कर लेगी. इस संभावित बदलाव के असर को रेखांकित करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा रूप में दिखने वाली डोनाल्ड ट्रंप की प्रेसिडेंसी पूरी तरह निष्प्रभावी हो जाएगी. वर्ष 2028 में राष्ट्रपति पद की दौड़ के अहम चेहरे माने जा रहे न्यूजसम के इस बयान ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. संसदीय संतुलन बिगड़ने से नीतियों और फैसलों पर कैसे लगेगा ब्रेक? अमेरिकी शासन व्यवस्था के तहत संसद के दोनों सदनों में सत्ता संतुलन बेहद अहम भूमिका निभाता है. यदि रिपब्लिकन पार्टी किसी एक सदन में भी अपनी संख्या खो देती है, तो राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां काफी हद तक सीमित हो जाती हैं. यद्यपि राष्ट्रपति के पास कार्यकारी आदेश जारी करने के अधिकार सुरक्षित रहते हैं, लेकिन राष्ट्रीय बजट को पारित कराने, नए अधिनियम बनाने तथा प्रमुख आर्थिक नीतियों को लागू करने के लिए संसद की मंजूरी अनिवार्य होती है. निचले सदन में डेमोक्रेटिक बहुमत बनते ही प्रशासन के आक्रामक रुख, टैक्स ढांचे में बदलावों और आव्रजन नियमों से जुड़े प्रस्तावों की कड़ी समीक्षा होगी और उन पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी. यही कारण है कि इस चुनावी मुकाबले को प्रशासन के नीतिगत फैसलों की दिशा तय करने वाला मोड़ माना जा रहा है. कैलिफोर्निया का मॉडल: आर्थिक मजबूती और स्वच्छ ऊर्जा की मिसाल अपने राज्य का उदाहरण रखते हुए गवर्नर न्यूजसम ने तर्क दिया कि कड़े पर्यावरण नियमों के साथ भी आर्थिक तरक्की की नई ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है. वर्तमान में कैलिफोर्निया दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की पायदान पर खड़ा है और वर्ष 2019 के बाद से राज्य की जीडीपी में 40 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है. इसके साथ ही ऊर्जा के मोर्चे पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए राज्य ने इस साल करीब 90 फीसदी दिनों में दिन के कुछ हिस्सों के दौरान अपनी पूरी 100 प्रतिशत बिजली आवश्यकता को केवल क्लीन ऊर्जा से पूरा किया है. हालांकि, इस विकास मॉडल को लेकर कैलिफोर्निया प्रशासन को राष्ट्रपति और संसद के रिपब्लिकन नेताओं के साथ निरंतर अदालती संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है. संघीय स्तर पर उन सख्त राज्य नीतियों को चुनौती दी जा रही है, जिनमें पेट्रोल व डीजल वाहनों के चलन को सीमित करने की योजना और अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं पर रोक लगाने के प्रयास शामिल हैं. इसी संदर्भ में कड़ा रुख अपनाते हुए न्यूजसम ने टिप्पणी की कि प्रशासन देश को पिछली सदी की तरफ धकेलने का काम कर रहा है और ऐसे फैसलों से राष्ट्रीय प्रगति की रफ्तार उल्टी दिशा में जा रही है. 2028 की राष्ट्रपति रेस: मार्को रुबियो और जेडी वेंस पर सीधा प्रहार भविष्य के राजनीतिक परिदृश्य पर विस्तार से बात करते हुए गैविन न्यूजसम ने वर्ष 2028 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी अपनी राय रखी. उन्होंने विश्वास जताया कि उस मुकाबले में डेमोक्रेटिक पार्टी का जो भी आधिकारिक प्रत्याशी मैदान में आएगा, वह जीत दर्ज कर अमेरिका का अगला राष्ट्रपति बनेगा. इसके समानांतर उन्होंने रिपब्लिकन खेमे के प्रमुख संभावित नामों, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, के राजनीतिक रुख पर तीखे सवाल उठाए. न्यूजसम का आरोप था कि इन नेताओं ने शासन से जुड़े बुनियादी मूल्यों, संस्थाओं की साख और सार्वजनिक सच की उपेक्षा का लगातार समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक दल का कोई भी सामान्य उम्मीदवार भी इन दोनों के मुकाबले कहीं अधिक सक्षम विकल्प होगा. अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेस और बदलती चुनावी धारा अगले आम चुनाव की चर्चाओं के बीच डेमोक्रेटिक कांग्रेस महिला अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेस द्वारा दिए गए एक हालिया साक्षात्कार ने भी बहस छेड़ दी है. उन्होंने इस बात पर विचार रखा था कि क्या देश एक लैटिना महिला को शीर्ष पद पर स्वीकार करेगा, विशेषकर तब जब वर्ष 2016 और 2024 में महिला प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा. राजनीतिक सट्टेबाजी के बाजारों में इस समय ओकासियो-कोर्टेस के साथ-साथ गैविन न्यूजसम और जॉर्जिया के युवा सीनेटर जॉन ओसॉफ को प्रमुख संभावित दावेदारों में गिना जा रहा है. न्यूजसम ने इस विमर्श में ओकासियो-कोर्टेस का समर्थन करते हुए साफ किया कि किसी भी महिला प्रत्याशी की चुनावी क्षमता पर संदेह जताना अनुचित है. उन्होंने राजनीतिक विश्लेषकों की पुरानी धारणाओं को नकारते हुए कहा कि उम्मीदवारों के भौगोलिक और पहचान आधारित बहानों का दौर अब खत्म हो चुका है. इसका आप पर असर अमेरिकी संसद के चुनावी नतीजों से वैश्विक नीतियों, भारतीय आव्रजन तथा आर्थिक नियमों पर सीधा असर पड़ सकता है. • भारतीय प्रवासियों और वीजा नियमों पर: यदि अमेरिकी संसद के निचले सदन में सत्ता संतुलन बदलता है तो कठोर आव्रजन कानूनों को पारित कराना मुश्किल होगा. इससे अमेरिका में अध्ययनरत या कार्यरत भारतीय पेशेवरों के लिए वीजा नियमों में अचानक आने वाले प्रतिकूल बदलावों की आशंका कम हो सकती है. • व्यापार और आर्थिक नीतियों पर: खंडित संसद के कारण प्रशासन के लिए एकतरफा टैक्स बढ़ोतरी और टैरिफ से जुड़े नए कानून बनाना आसान नहीं रहेगा. यह वैश्विक व्यापार में स्थिरता लाने और अंतरराष्ट्रीय निर्यातकों के लिए विनियामक जोखिम को सीमित करने में मददगार हो सकता है. • जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा पर: अमेरिकी नीतियों में स्वच्छ ऊर्जा के समर्थन से वैश्विक स्तर पर रिन्यूएबल ऊर्जा तकनीकों और निवेश को गति मिलने की संभावना बनी रहती है. इससे वैश्विक जलवायु वार्ताओं और कार्बन उत्सर्जन कटौती के लक्ष्यों को कानूनी संरक्षण प्राप्त हो सकता है. • अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए: अमेरिकी बजट और सरकारी खर्च पर विधायी सहमति अनिवार्य होने से नीतियों में अचानक आने वाले अप्रत्याशित झटके रुक सकते हैं. इससे वैश्विक शेयर बाजारों और मुद्रा दरों में अस्थिरता का जोखिम कम होता है. ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक टकराव आगामी नवंबर मिडटर्म चुनावों को लेकर बढ़ते तनाव और विधायी शक्तियों पर नियंत्रण की लड़ाई के कारण सामने आया है. • विधायी शक्तियों पर नियंत्रण की होड़: अमेरिकी शासन प्रणाली में राष्ट्रपति के पास कार्यकारी अधिकार होते हैं लेकिन बजट और नए कानूनों के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होती है. निचले सदन में बहुमत गंवाने से प्रशासन के प्रमुख प्रस्तावों पर संवैधानिक रोक लग जाती है. • पर्यावरण और स्वच्छ ऊर्जा नीतियों पर विवाद: कैलिफोर्निया प्रशासन सख्त उत्सर्जन नियमों और अक्षय ऊर्जा को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि संघीय स्तर पर इन पहलों को कानूनी रूप से चुनौती दी गई है. इस नीतिगत टकराव ने दोनों पक्षों के बीच कानूनी और राजनीतिक संघर्ष को बढ़ा दिया है. • 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की प्रारंभिक गोलबंदी: प्रमुख डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन नेता अभी से आगामी राष्ट्रीय चुनाव के लिए अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं. मार्को रुबियो, जेडी वेंस और अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेस जैसे चेहरों पर टिप्पणियां इसी व्यापक शक्ति परीक्षण का हिस्सा हैं. सवाल-जवाब 1. गैविन न्यूजसम ने नवंबर के मिडटर्म चुनावों को लेकर क्या दावा किया है? उन्होंने दावा किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रिजेंटेटिव में फिर से बहुमत हासिल कर लेगी, जिससे डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा प्रेसिडेंसी पूरी तरह कमजोर हो जाएगी. 2. निचले सदन में बहुमत खोने से राष्ट्रपति की ताकत पर क्या प्रभाव पड़ता है? संसद में बहुमत न होने पर राष्ट्रपति बजट पास कराने, नए कानून बनाने और टैक्स या आव्रजन नीतियों को मनमाने ढंग से लागू करने के लिए संसद की मंजूरी पर निर्भर हो जाते हैं. 3. कैलिफोर्निया की आर्थिक स्थिति और ऊर्जा रिकॉर्ड को लेकर क्या जानकारी दी गई? कैलिफोर्निया दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जहां 2019 के बाद जीडीपी में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई, और राज्य ने इस साल 90 फीसदी दिनों में दिन के कुछ हिस्सों में 100 प्रतिशत स्वच्छ बिजली का उपयोग किया. 4. गैविन न्यूजसम ने रिपब्लिकन नेताओं मार्को रुबियो और जेडी वेंस पर क्या आरोप लगाए? न्यूजसम ने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने व्यवस्था में मौजूद भ्रष्टाचार, संस्थाओं के अपमान और सच की अनदेखी का निरंतर समर्थन किया है. 5. 2028 की राष्ट्रपति रेस को लेकर किन नामों की चर्चा हो रही है? इस रेस में गैविन न्यूजसम, अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेस और जॉर्जिया के सीनेटर जॉन ओसॉफ के नामों की चर्चा सट्टेबाजी और राजनीतिक गलियारों में हो रही है. https://trendkia.com/america/gavin-newsom-ka-bara-dava-bole-navnbara-ke-midatarma-men-snsada-hatha-se-jate-hi-beasara-ho-jaegi-donald-trump-ki-satta-38010 TrendKia — Har trend, sabse pehle.