हवाई के बिग आइलैंड पर समुद्र में समाई 90 फीट ऊंची होलेई चट्टानी मेहराब हवाई वोल्केनो नेशनल पार्क में लगभग 550 साल पुराना प्राकृतिक ढांचा ट्रॉपिकल स्टॉर्म नोलो के थपेड़े नहीं झेल सका और प्रशांत महासागर में समा गया। पार्क प्रशासन ने 27 सितंबर को निरीक्षण के बाद इस प्राचीन संरचना के नष्ट होने की पुष्टि की। प्रशांत महासागर की तूफानी लहरों के लगातार हमलों के बाद हवाई के प्रसिद्ध वोल्केनो नेशनल पार्क की सबसे मशहूर प्राकृतिक पहचान अब पूरी तरह विलीन हो चुकी है। ज्वालामुखी के प्राचीन लावे से बनी करीब 90 फीट ऊंची होलेई चट्टानी मेहराब समुद्री तूफान के प्रचंड दबाव के कारण ढहकर गहरे पानी में समा गई। बिग आइलैंड के इस इलाके में आने वाले अनगिनत पर्यटकों और फोटोग्राफरों के लिए यह स्थल दशकों से आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ था। निरीक्षण के दौरान गायब मिला सदियों पुराना ढांचा पार्क प्रशासन की ओर से साझा किए गए ब्योरे के अनुसार 23 सितंबर तक यह विशाल संरचना अपने स्थान पर सामान्य रूप से मौजूद थी। इसके बाद इलाके में ट्रॉपिकल स्टॉर्म नोलो की वजह से मौसम बेहद खराब हो गया। तेज हवाओं और समुद्री हलचल को देखते हुए नेशनल पार्क सर्विस ने पर्यटकों की सुरक्षा के मद्देनजर पूरे परिसर को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया था। जब कर्मचारी 27 सितंबर को हालात का जायजा लेने पहुंचे तो वहां का दृश्य बदल चुका था। जिस जगह पर सदियों पुरानी यह चट्टानी मेहराब खड़ी थी, वहां केवल महासागर की उठती लहरें नजर आ रही थीं। चूंकि आपदा के वक्त पार्क पूरी तरह खाली था, इसलिए इस घटना में कोई भी व्यक्ति हताहत नहीं हुआ। प्रकृति ने कैसे गढ़ा था यह दुर्लभ ढांचा यह मेहराब इंसानी कारीगरी का हिस्सा नहीं थी बल्कि प्रकृति ने इसे एक लंबी प्रक्रिया के तहत तैयार किया था। करीब 550 वर्ष पहले कीलाउए ज्वालामुखी में हुए उद्गार से पिघला हुआ गर्म लावा तेजी से बहकर समुद्र के ठंडे पानी में गिरा था। इस संपर्क से काले पत्थरों की एक बेहद मजबूत ढलान तैयार हुई। समय बीतने के साथ प्रशांत महासागर की ऊंची लहरें लगातार इस पथरीले किनारे से टकराती रहीं। पानी के अनवरत कटाव ने पहले पत्थर के निचले हिस्से को काटकर एक गुफा जैसी बनावट दी, जिसके बाद बीच का हिस्सा पूरी तरह कट जाने से यह एक विशाल प्राकृतिक मेहराब में बदल गई। चैन ऑफ क्रेटर्स रोड के मुहाने पर होने के कारण यह वर्षों तक लोगों को आकर्षित करती रही। कमजोर होती बुनियाद और तबाही की पृष्ठभूमि विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि इस चट्टान का गिरना केवल एक दिन की मौसमी हलचल का नतीजा नहीं था। दरअसल इसकी संरचना को कमजोर करने वाले कई बड़े कारण पिछले कुछ सालों में सामने आ चुके थे। साल 2018 में कीलाउए ज्वालामुखी में अत्यंत गंभीर विस्फोट हुआ था, जिसके दौरान उसका शिखर धंस गया था। इस हलचल ने जमीन के भीतर शक्तिशाली भूकंपीय झटके पैदा किए, जिसने तटीय इलाके में टिकी इस चट्टान की आंतरिक पकड़ को हिला दिया था। दरारों की निगरानी और अंतिम चेतावनी भूगर्भीय बदलावों का असर जल्द ही सामने आ गया जब जनवरी 2020 के नियमित मुआयने में अधिकारियों को मेहराब के पत्थरों में नई और चौड़ी दरारें मिलीं। पर्यटकों को खतरे से बचाने के लिए पुराने दर्शक क्षेत्र को उसी समय बंद कर दिया गया और देखने का एक नया सुरक्षित स्थान तय किया गया। उसी वर्ष समुद्री तूफानों ने इसके आधार को और अधिक खोखला बना दिया। नेशनल पार्क सर्विस ने 2021 के दौरान ही आगाह कर दिया था कि यह आकर्षक बनावट कभी भी ढह सकती है क्योंकि समुद्री कटाव इसकी उम्र सीमित कर चुका है। अंततः वर्ष 2026 के ट्रॉपिकल स्टॉर्म नोलो की मार ने इस जर्जर आधार को तोड़ दिया और यह ऐतिहासिक संरचना हमेशा के लिए जलमग्न हो गई। इसका आप पर असर प्राकृतिक धरोहरों के क्षरण और तटीय पर्यटन के नजरिए से यह घटना आगंतुकों के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव लाती है। • पर्यटन अनुभव पर असर: हवाई वोल्केनो नेशनल पार्क में चैन ऑफ क्रेटर्स रोड के अंतिम छोर पर जाने वाले सैलानी अब इस ऐतिहासिक मेहराब को नहीं देख सकेंगे। प्रशासन इस तटीय रास्ते पर भविष्य के लिए नए सुरक्षा दिशा-निर्देश और देखने के वैकल्पिक केंद्र तय कर रहा है। • तटीय सुरक्षा के नियम: समुद्र किनारे मौजूद अन्य लावे की चट्टानों के पास जाने पर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। पार्क प्रबंधन कमजोर चट्टानी किनारों पर पर्यटकों की आवाजाही को लेकर पाबंदियां और सख्त कर सकता है। • मौसम और आपदा प्रबंधन: उष्णकटिबंधीय तूफानों के दौरान तटीय राष्ट्रीय उद्यानों में समय पर की गई बंदी जान-माल की रक्षा करती है। यात्रियों को अपनी यात्रा योजना बनाते समय स्थानीय मौसमी चेतावनियों पर खास ध्यान देना होगा। • भूगर्भीय समझ: प्राकृतिक रूप से बनी संरचनाओं की सीमित उम्र को लेकर वैज्ञानिकों और पर्यटकों में जागरूकता बढ़ेगी। आगंतुकों को यह समझना होगा कि नाजुक प्राकृतिक ढांचों के करीब जाना कितना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसा क्यों हुआ होलेई सी आर्च का पतन किसी एक घटना का अचानक परिणाम नहीं था, बल्कि यह वर्षों से चल रहे भूगर्भीय झटकों, समुद्री कटाव और हालिया भीषण चक्रवाती तूफान का सम्मिलित नतीजा था। • शुरुआती ढांचागत दरारें: साल 2018 में कीलाउए ज्वालामुखी के विस्फोट और शिखर धंसने से लगातार आए भूकंपों ने इस प्राचीन मेहराब की अंदरूनी नींव को हिला दिया था। इसके बाद जनवरी 2020 में पत्थरों में गहरी दरारें साफ दिखने लगी थीं। • लगातार समुद्री कटाव: प्रशांत महासागर की ताकतवर लहरें दिन-रात बेसाल्ट पत्थर के आधार को खोखला कर रही थीं। वर्ष 2020 में आए समुद्री तूफान ने चट्टान के निचले हिस्से को और कमजोर बना दिया था, जिसके चलते नेशनल पार्क सर्विस ने 2021 में इसके ढहने की चेतावनी जारी की थी। • चक्रवाती तूफान का अंतिम प्रहार: वर्ष 2026 में इलाके में आए ट्रॉपिकल स्टॉर्म नोलो की विशाल लहरों और भीषण हवाओं ने इस जर्जर हो चुकी चट्टान पर अत्यधिक दबाव डाला, जिसके चलते 550 साल पुराना यह ढांचा पानी में समा गया। सवाल-जवाब 1. होलेई सी आर्च कब और कहां नष्ट हुआ? यह प्राकृतिक मेहराब हवाई के बिग आइलैंड स्थित हवाई वोल्केनो नेशनल पार्क में सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में प्रशांत महासागर में समा गया। 2. इस मेहराब की ऊंचाई और उम्र कितनी थी? यह कुदरती ढांचा लगभग 90 फीट ऊंचा था और करीब 550 साल पुराना माना जाता था। 3. यह ढांचा मूल रूप से कैसे बना था? लगभग 550 साल पहले कीलाउए ज्वालामुखी से निकले लावे के ठंडे होने और बाद में सैकड़ों वर्षों तक समुद्री लहरों के कटाव से यह मेहराब बनी थी। 4. क्या इस हादसे में किसी पर्यटक को चोट आई? नहीं, ट्रॉपिकल स्टॉर्म नोलो के चलते पार्क को पहले ही बंद कर दिया गया था, इसलिए हादसे के समय वहां कोई मौजूद नहीं था। https://trendkia.com/america/hawaii-ke-big-island-para-samudra-men-samai-90-phita-unchi-holei-chattani-meharaba-42442 TrendKia — Har trend, sabse pehle.