होर्मुज जलमार्ग बंद करने से भारी आर्थिक संकट में फंसा ईरान, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा तेहरान तुरंत इसे खोलना चाहता है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का फैसला ईरान पर भारी पड़ा है और वह आर्थिक दबाव के कारण इसे जल्द से जल्द खोलना चाहता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान पर आर्थिक दबाव इस कदर बढ़ गया है कि वह सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत दोबारा खोलने के लिए छटपटा रहा है। ट्रंप के अनुसार, इस बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग को बंद करने का तेहरान का खुद का फैसला अब उसके लिए ही गले की फांस बन चुका है। ईरान इस समय चौतरफा आर्थिक संकट से जूझ रहा है और इस जलमार्ग के बंद रहने से उसकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, जिसके कारण वह भारी दबाव में आ गया है। आर्थिक तंगी से जूझ रहा है ईरान पत्रकारों से रूबरू होते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की वर्तमान स्थिति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि तेहरान इस वक्त बहुत बड़ी मुश्किलों से घिरा हुआ है और उनके पास धन का आगमन पूरी तरह से रुक गया है। ट्रंप ने दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाले व्यापार और गतिविधियों से ईरान को बड़ा आर्थिक फायदा मिलता था। लेकिन इस जलमार्ग को बंद करने के बाद उसकी कमाई का यह मुख्य जरिया पूरी तरह से ठप हो गया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान को अपनी इस गलती का अहसास हो चुका है और अब वह किसी भी तरह इस संकट से बाहर निकलना चाहता है। सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकाबंदी का दावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान ने पूरी दुनिया के व्यापारिक हितों को चोट पहुंचाने और वैश्विक स्तर पर मुश्किलें खड़ी करने के इरादे से ही होर्मुज जलमार्ग को अवरुद्ध किया था। इसके जवाब में अमेरिका ने भी सख्त रुख अपनाया। ट्रंप ने दावा किया कि उनके प्रशासन ने इतिहास की सबसे बड़ी नौसैनिक और सैन्य नाकाबंदी लागू कर दी है। इस असाधारण व्यवस्था के तहत दूसरे तमाम देशों को तो इस महत्वपूर्ण जलमार्ग का इस्तेमाल करने की छूट दी जा रही है, लेकिन ईरान पर चौतरफा शिकंजा कस दिया गया है ताकि उस पर दबाव को और अधिक बढ़ाया जा सके। ईरान के सात दिनों के प्रस्ताव को ट्रंप ने ठुकराया ट्रंप का यह तीखा बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ते तनाव के बीच आया है। यह घटनाक्रम ऐसे नाजुक मोड़ पर आया है जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से सक्रिय करने के लिए एक विस्तृत और समयबद्ध रूपरेखा तैयार की थी। तेहरान ने इस बेहद रणनीतिक समुद्री मार्ग को खोलने और अपने विवादित परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अमेरिकी प्रशासन के साथ नए सिरे से बातचीत शुरू करने के लिए सात दिनों का एक खास रोडमैप दुनिया के सामने पेश किया था। इस जटिल कूटनीतिक योजना के तहत ईरान ने अमेरिका के सामने तीन प्रमुख और कड़ी शर्तें रखी थीं। पहली शर्त यह थी कि अमेरिका को इस क्षेत्र में लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकाबंदी को तुरंत पूरी तरह से हटाना होगा। दूसरी बड़ी शर्त में ईरानी तेल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिक्री पर लगे सख्त प्रतिबंधों में बड़ी ढील देने की मांग की गई थी, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को ऑक्सीजन मिल सके। वहीं, तीसरी शर्त के रूप में लेबनान को भी शामिल करते हुए एक व्यापक युद्धविराम समझौते का ईमानदारी से पालन करने की बात कही गई थी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस पूरे प्रस्ताव और उसकी शर्तों को बिना किसी देरी के सीधे तौर पर खारिज कर दिया। ईरान का अपनी शर्तों पर अडिग रहने का एलान दूसरी तरफ, ईरान ने भी वैश्विक स्तर पर यह साफ कर दिया है कि वह इन प्रतिबंधों और दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है और अपनी शर्तों पर पूरी तरह अडिग रहेगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि तेहरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया को बारीकी से देखा है, लेकिन अभी तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका की ओर से कोई भी औपचारिक या आधिकारिक लिखित जवाब उन तक नहीं भेजा गया है। अराघची ने पूरी गंभीरता से जोर देकर कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए ईरान ने जो तीन शर्तें तय की हैं, वे पूरी तरह से स्पष्ट और गैर-परक्राम्य हैं। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण जलमार्ग को खोलने की दिशा में ईरान द्वारा कोई भी कदम तभी आगे बढ़ाया जाएगा, जब तेहरान की इन शर्तों को अमेरिका द्वारा पूरी तरह से स्वीकार कर लिया जाएगा। ईरान इस समय मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका के औपचारिक और अंतिम रुख का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही अगली रणनीति तय होगी। इसका आप पर असर यह खबर वैश्विक तेल बाजार और कच्चे तेल की कीमतों को सीधे प्रभावित करती है, जिसका सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है। • ईंधन की कीमतें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है और इसके बंद रहने से भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। यह आम जनता के मासिक बजट और परिवहन लागत को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। • महंगाई का खतरा: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने से माल ढुलाई महंगी हो जाएगी। इससे दैनिक उपभोग की वस्तुओं, सब्जियों और अन्य आवश्यक सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। • शेयर बाजार पर असर: ऊर्जा क्षेत्र में अनिश्चितता के कारण भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। तेल आयात करने वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट आ सकती है, जिससे निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। • रुपये की कमजोरी: भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, जिससे तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ेगा। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया और कमजोर हो सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह संकट अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे परमाणु विवाद और आर्थिक प्रतिबंधों का परिणाम है। • रणनीतिक जलमार्ग की नाकाबंदी: ईरान ने वैश्विक ध्यान आकर्षित करने और दबाव बनाने के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का प्रयास किया था। इसके जवाब में अमेरिका ने इस क्षेत्र में कड़ा नौसैनिक पहरा बैठा दिया। • आर्थिक प्रतिबंधों का दबाव: अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान की तेल बिक्री और वित्तीय प्रणालियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इसके कारण देश में नकदी का भारी संकट पैदा हो गया है और उसकी अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। • सशर्त समझौते की विफलता: ईरान ने प्रतिबंध हटाने की शर्त पर जलमार्ग खोलने का प्रस्ताव रखा था, जिसे अमेरिका ने उसकी परमाणु नीतियों में बदलाव न होने तक स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। सवाल-जवाब 1. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बारे में क्या दावा किया है? ट्रंप ने दावा किया कि ईरान भारी आर्थिक दबाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत फिर से खोलना चाहता है। 2. ईरान ने जलमार्ग खोलने के लिए क्या शर्तें रखी थीं? ईरान ने अमेरिका से नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, तेल प्रतिबंधों में ढील देने और लेबनान के साथ युद्धविराम लागू करने की मांग की थी। 3. इस मामले पर ट्रंप ने क्या फैसला लिया? राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस सशर्त 7 दिवसीय रोडमैप को पूरी तरह से खारिज कर दिया। 4. ईरानी विदेश मंत्री का इस गतिरोध पर क्या कहना है? विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान अपनी शर्तों पर कायम है और वह मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है। https://trendkia.com/america/hormuz-jalamarga-bnda-karane-se-bhari-arthika-snkata-men-phnsa-iran-donald-trump-ne-kaha-tehran-turnta-ise-kholana-chahata-hai-39309 TrendKia — Har trend, sabse pehle.