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  "type": "article",
  "title": "आईडीपी एजुकेशन के ताजा सर्वे में खुलासा, भारतीय छात्र अब सिर्फ डिग्री नहीं बल्कि काम और एआई स्किल्स देखकर चुन रहे विदेश",
  "summary": "आईडीपी एजुकेशन की 'इमर्जिंग फ्यूचर्स' रिपोर्ट के अनुसार, 74 फीसदी भारतीय छात्र वीजा अनिश्चितता के चलते कई देशों का बैकअप रख रहे हैं, जबकि 22 फीसदी के लिए पढ़ाई के बाद काम के अवसर सबसे अहम प्राथमिकता बन गए हैं।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा हासिल करने की योजना बना रहे भारतीय युवाओं की प्राथमिकताओं में बड़ा रणनीतिक बदलाव देखा जा रहा है। अब छात्र सिर्फ किसी विदेशी विश्वविद्यालय के नाम या सामान्य डिग्री के भरोसे अपना भविष्य दांव पर लगाने को तैयार नहीं हैं। इंटरनेशनल एजुकेशन सर्विस प्रोवाइडर और आईईएलटीएस के सह-मालिक आईडीपी एजुकेशन के ताजा 'इमर्जिंग फ्यूचर्स: वॉयस ऑफ द इंटरनेशनल स्टूडेंट' अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय आवेदक अब कहीं अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। वे किसी भी संस्थान या देश का चयन करने से पहले करियर की सुरक्षा, उभरती तकनीकी दक्षता और सख्त होते आव्रजन नियमों के व्यावहारिक पहलुओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।\n\nकाम के अवसर और रोजगार पर सबसे ज्यादा ध्यान\nदुनियाभर के 106 देशों और क्षेत्रों के 4,800 से अधिक विद्यार्थियों पर किए गए इस व्यापक सर्वेक्षण में भारतीय छात्रों की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही, जिसमें 994 प्रतिभागियों ने अपनी राय साझा की। वैश्विक स्तर पर जहाँ 23 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई का निर्णय लेते समय 'रहने का खर्च' सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है, वहीं भारतीय आवेदकों का ध्यान पूरी तरह रोजगार की संभावनाओं पर टिका है।\n\nसर्वेक्षण के अनुसार, 22 प्रतिशत भारतीय विद्यार्थियों के लिए सबसे निर्णायक कारक यह है कि पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद उन्हें उस देश में काम करने के अवसर यानी पोस्ट-स्टडी वर्क अपॉर्चुनिटीज कितने मिल पाएंगे। छात्र अब डिग्री के औपचारिक महत्व की तुलना में इस बात की गहन समीक्षा कर रहे हैं कि उनकी उच्च शिक्षा उनके पेशेवर करियर और वित्तीय भविष्य को कितना सुरक्षित बना पाएगी।\n\nएआई और तकनीकी दक्षता की मांग में भारतीय आगे\nआधुनिक प्रौद्योगिकी के दौर में भारतीय छात्र अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी आगे की सोच लेकर चल रहे हैं। इस अध्ययन में शामिल 47 प्रतिशत भारतीय छात्रों ने स्पष्ट रूप से माना कि आने वाले समय में नौकरियों में कामयाबी पाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और आधुनिक टेक स्किल्स बेहद अनिवार्य हैं।\n\nयह आंकड़ा 42 प्रतिशत के वैश्विक औसत की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। इस स्पष्ट रुझान से संकेत मिलता है कि भारतीय युवा ऐसे विशेष पाठ्यक्रमों और वैश्विक संस्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो उन्हें अत्याधुनिक तकनीक और एआई-संचालित कार्यप्रणाली में पूरी तरह दक्ष बना सकें, ताकि वे भविष्य के जॉब मार्केट में मजबूती से टिक सकें।\n\nवीजा नीतियों के बदलाव और मल्टीपल देशों का विकल्प\nहाल के समय में कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे पारंपरिक रूप से पसंदीदा देशों में वीजा नियमों और आव्रजन नीतियों में लगातार कड़े संशोधन देखने को मिले हैं। इन अनपेक्षित नीतिगत बदलावों और वीजा जटिलताओं से अपने करियर को सुरक्षित रखने के लिए भारतीय छात्रों ने एक नई रणनीति तैयार की है।\n\nरिपोर्ट के आंकड़े दर्शाते हैं कि 74 प्रतिशत संभावित भारतीय छात्र अब एक ही समय में कई देशों के अध्ययन विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। इस तरह एक से अधिक देशों का बैकअप रखने से छात्रों को यह विश्वास मिलता है कि यदि किसी एक देश के आव्रजन नियम अचानक सख्त हो जाएं या वीजा मिलने में बाधा आए, तो उनका पूरा शैक्षणिक वर्ष और भविष्य खराब नहीं होगा।\n\nइसका आप पर असर\nयह रिपोर्ट विदेश में उच्च शिक्षा की योजना बना रहे भारतीय छात्रों और उनके परिवारों के लिए अपने फैसलों को अधिक व्यावहारिक और सुरक्षित बनाने का स्पष्ट मार्गदर्शन देती है।\n\n• भारत में छात्रों के लिए: किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अब 74 प्रतिशत उम्मीदवारों की तरह कम से कम दो या तीन अलग-अलग देशों के विश्वविद्यालयों में समानांतर आवेदन तैयार रखें। इससे किसी एक देश की वीजा नीति सख्त होने पर आपका पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होने से बचेगा।\n• पाठ्यक्रम चयन पर: डिग्री का केवल नाम या सामान्य विषय चुनने के बजाय उन कोर्सेज को प्राथमिकता दें जिनमें व्यावहारिक एआई और तकनीकी कौशल सिखाए जाते हैं। अध्ययन के अनुसार 47 प्रतिशत भारतीय छात्र भविष्य की नौकरियों में बढ़त हासिल करने के लिए ऐसे ही आधुनिक तकनीकी कोर्स चुन रहे हैं।\n• बजट और वित्तीय योजना पर: केवल ट्यूशन फीस या विश्वविद्यालय रैंकिंग देखकर दाखिला न लें, बल्कि संबंधित देश के पोस्ट-स्टडी वर्क नियमों की पूरी जांच करें। करीब 22 प्रतिशत भारतीय छात्र अब पढ़ाई के तुरंत बाद मिलने वाले कार्य अनुभव और कानूनी वर्क परमिट को ही दाखिले का मुख्य पैमाना बना रहे हैं।\n• वीजा जोखिम प्रबंधन पर: कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में आव्रजन नीति में होने वाले हालिया बदलावों पर लगातार नजर रखें। आवेदन करने से पहले वर्क परमिट की अवधि और स्थानीय जॉब मार्केट में फ्रेश ग्रेजुएट्स की मांग का सटीक आकलन अवश्य करें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nभारतीय छात्रों की सोच में यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय शिक्षा बाजार में बढ़ते वित्तीय जोखिमों और प्रमुख देशों के कड़े होते आव्रजन कानूनों के सीधे परिणाम के रूप में सामने आया है।\n\n• सख्त आव्रजन नीतियां: कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे लोकप्रिय देशों ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए वीजा कोटे, वर्क परमिट की शर्तों और प्रवास नियमों को काफी कड़ा कर दिया है। इन अनपेक्षित नीतिगत बदलावों के कारण छात्रों को अचानक दाखिला या वीजा अटकने के जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।\n• करियर सुरक्षा और वित्तीय निवेश: विदेशी शिक्षा पर होने वाले भारी खर्च के कारण भारतीय परिवार अब डिग्री के केवल औपचारिक मान के बजाय वास्तविक नौकरी और वित्तीय वापसी को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। पढ़ाई के बाद काम करने का अधिकार न मिलने पर पढ़ाई का भारी खर्च निकालना कठिन हो जाता है।\n• एआई से जॉब मार्केट का रूपांतरण: वैश्विक कार्यस्थलों पर तेजी से बढ़ते ऑटोमेशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रसार ने पारंपरिक डिग्रियों की उपयोगिता घटा दी है। यही कारण है कि भारतीय छात्र उन तकनीकी विषयों और दक्षताओं की मांग कर रहे हैं जो आने वाले जॉब मार्केट में उनकी उपयोगिता बनाए रखें।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आईडीपी एजुकेशन के सर्वेक्षण में कितने छात्रों ने भाग लिया?\nइस सर्वेक्षण में 106 देशों और क्षेत्रों के 4,800 से अधिक छात्र शामिल हुए, जिनमें सबसे अधिक 994 भारतीय छात्र थे।\n\n2. भारतीय छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई का निर्णय लेते समय सबसे बड़ा कारक क्या है?\nलगभग 22 प्रतिशत भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद मिलने वाले काम के अवसर यानी पोस्ट-स्टडी वर्क अपॉर्चुनिटी सबसे महत्वपूर्ण कारक है।\n\n3. वैश्विक छात्रों की मुख्य चिंता भारतीय छात्रों से किस प्रकार भिन्न है?\nवैश्विक स्तर पर 23 प्रतिशत छात्रों के लिए रहने का खर्च सबसे बड़ा मुद्दा है, जबकि भारतीय छात्र रहने के खर्च से अधिक काम के अवसरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।\n\n4. एआई और तकनीकी दक्षता को लेकर कितने भारतीय छात्रों ने सहमति जताई?\nसर्वेक्षण में शामिल 47 प्रतिशत भारतीय छात्रों ने माना कि भविष्य की नौकरियों में सफलता के लिए एआई और तकनीकी कौशल आवश्यक हैं, जो कि 42 प्रतिशत के वैश्विक औसत से अधिक है।\n\n5. कितने प्रतिशत भारतीय छात्र एक से अधिक देशों के विकल्प तलाश रहे हैं?\nलगभग 74 प्रतिशत संभावित भारतीय छात्र वीजा और नियमों की अनिश्चितता से बचने के लिए एक साथ कई देशों के विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।",
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