# ईरान के गुप्त भूमिगत ठिकाने पर डोनाल्ड ट्रंप की नजर, नतांज के पास मौजूद पहाड़ ने बढ़ाई अमेरिकी चिंता

> फ्लोरिडा में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पिकएक्स माउंटेन स्थित गहरे भूमिगत ठिकाने को तेजी से निशाना बनाने का संकेत देकर पश्चिम एशिया में हलचल तेज कर दी है। नतांज के पास मजबूत ग्रेनाइट चट्टानों में बनी यह सुरंग संरचना अमेरिकी बंकर बस्टर बमों के सामने भी रणनीतिक चुनौती खड़ी करती है।

**Type:** article · **Category:** अमेरिका · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/america/iran-ke-gupta-bhumigata-thikane-para-donald-trump-ki-najara-natanz-ke-pasa-maujuda-pahara-ne-barhai-american-chinta-54545 · **Language:** Hindi
**Tags:** ईरान परमाणु कार्यक्रम, डोनाल्ड ट्रंप, पिकएक्स माउंटेन, नतांज, इस्फहान, यूरेनियम संवर्धन, बंकर बस्टर, अमेरिका ईरान तनाव

फ्लोरिडा में ईरान के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता की चर्चा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ताजा बयान में संकेत दिया है कि तेहरान के एक या दो परमाणु प्रतिष्ठानों से निपटना अभी बाकी है। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से पिकएक्स माउंटेन का उल्लेख किया और कहा कि इस ठिकाने को बेहद तेजी से निशाना बनाया जा सकता है। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में रणनीतिक खींचतान लगातार बनी हुई है। जिस ठिकाने की बात की जा रही है, वह ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्र नतांज से बमुश्किल दो किलोमीटर के फासले पर स्थित एक विशालकाय चट्टानी पहाड़ी है, जिसके गर्भ में गहरी सुरंगों का एक बेहद जटिल नेटवर्क तैयार किया गया है। अमेरिकी नेतृत्व की इस चेतावनी के बाद यह सवाल दोबारा चर्चा के केंद्र में आ गया है कि इस दुर्गम पहाड़ी के नीचे वास्तव में क्या चल रहा है और दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य महाशक्ति इसे लेकर इतनी असहज क्यों दिख रही है।

## भौगोलिक स्थिति और कूह-ए कोलांग गज ला का रणनीतिक महत्व
ईरान के इस्फहान प्रांत में फैली इस पहाड़ी को स्थानीय जुबान में कूह-ए कोलांग गज ला कहा जाता है। फारसी भाषा में कोलांग का आशय कुदाल या चट्टानों को खोदने वाले औजार से जुड़ता है, जिसके चलते इसे अंग्रेजी में पिकएक्स माउंटेन के नाम से जाना जाने लगा। अगर इसके नक्शे पर नजर डालें तो यह ठिकाना ईरान के सबसे संवेदनशील परमाणु केंद्र नतांज से लगभग दो किलोमीटर दक्षिण की दिशा में मौजूद है, जबकि देश की राजधानी तेहरान से इसकी दूरी करीब 220 किलोमीटर बैठती है।

इस संपूर्ण भौगोलिक रचना की सबसे अहम विशेषता इसके सीने में खोदी गई गहरी सुरंगें हैं। पहाड़ के अंदर एक व्यापक परिसर स्थापित किया गया है, जिसमें प्रवेश के लिए दो अलग-अलग सुरंग परिसरों के रास्ते बनाए गए हैं। इस पूरे ढांचे को जमीन के नीचे इस तरह ढाला गया है ताकि सतह पर होने वाले किसी भी भारी हवाई या मिसाइल प्रहार से भीतर संचालित होने वाली संभावित गतिविधियों को पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जा सके। रणनीतिक रूप से यह स्थान न केवल नतांज की मुख्य गतिविधियों के बेहद करीब है, बल्कि इसका दुर्गम परिवेश किसी भी बाहरी निगरानी या सीधी सैन्य कार्रवाई के लिए एक अत्यंत कठिन बाधा पेश करता है।

## सुरंगों के भीतर यूरेनियम संवर्धन की आशंका और तकनीकी पहलू
पश्चिमी रणनीतिकारों और परमाणु जानकारों की सबसे बड़ी बेचैनी इस बात को लेकर है कि इस भूमिगत तंत्र का असल मकसद क्या हो सकता है। जानकारों के एक तबके का आकलन है कि ईरान इस स्थल पर यूरेनियम संवर्धन का एक ऐसा सुरक्षित ठिकाना तैयार करने की दिशा में बढ़ रहा है, जिसे पारंपरिक हवाई हमलों से भेदना लगभग असंभव हो।

यूरेनियम संवर्धन मूलतः वह जटिल वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके जरिए यूरेनियम में एक विशिष्ट आइसोटोप की मात्रा को बढ़ाया जाता है। जब यूरेनियम को निचले स्तर तक संवर्धित किया जाता है, तब इसका उपयोग असैन्य परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में बिजली उत्पादन के ईंधन के रूप में होता है। इसके उलट, यदि संवर्धन की प्रक्रिया को बहुत ऊंचे स्तर तक पहुंचा दिया जाए, तो उसी संवर्धित सामग्री का इस्तेमाल परमाणु हथियारों के निर्माण में किया जा सकता है। यही मूलभूत तकनीकी विभाजन अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के लिए गहरी चिंता का सबब बना हुआ है। उनकी मुख्य आशंका यह है कि यदि जमीन के सैकड़ों फीट नीचे ऐसा संयंत्र पूरी तरह तैयार हो जाता है, तो ईरान बाहरी दबावों और हमलों की परवाह किए बिना अपनी परमाणु गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने में सक्षम हो जाएगा।

## उपग्रह विश्लेषण और खुफिया दावों के बीच अनसुलझे सवाल
पिकएक्स माउंटेन पर होने वाली हर हरकत को ट्रैक करने के लिए विशेषज्ञ लगातार उपग्रह तस्वीरों का बारीक विश्लेषण कर रहे हैं। इस संबंध में इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी की 16 अक्टूबर 2026 की विस्तृत रिपोर्ट बताती है कि सुरंगों के दोनों प्रवेश द्वारों पर मिट्टी के भारी अवरोध अब भी अपनी जगह बने हुए हैं। उपग्रह से प्राप्त इस साक्ष्य से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि वर्तमान समय में इस परिसर के भीतर न तो नियमित परिचालन शुरू हुआ है और न ही सतह पर बड़े पैमाने पर कोई नया निर्माण कार्य चलता दिखाई दे रहा है।

इसके बावजूद संस्थान की रिपोर्ट में एक अहम चेतावनी भी शामिल है कि इस परिसर के भीतर अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण या सामग्री पहले से जमा की गई हो सकती है। इससे पहले जुलाई के महीने में इजरायली खुफिया एजेंसियों के हवाले से कुछ मीडिया दावों में यह बात कही गई थी कि ईरान ने इस पहाड़ी ठिकाने के भीतर सेंट्रीफ्यूज और उनसे जुड़े कलपुर्जे पहुंचा दिए हैं। हालांकि, उस दावे की किसी भी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं की जा सकी है। जमीनी हकीकत यह है कि इन बंद सुरंगों के भीतर वास्तव में किस स्तर की सामग्री या मशीनें मौजूद हैं, यह रहस्य अब भी पूरी तरह अनसुलझा है।

## कठोर ग्रेनाइट की दीवारें और अमेरिकी बंकर बस्टर की सीमाएं
अमेरिकी सेना के रणनीतिक योजनाकारों के लिए पिकएक्स माउंटेन केवल इसलिए सिरदर्द नहीं है कि वहां परमाणु काम हो सकता है, बल्कि इसका प्राकृतिक ढांचा अपने आप में एक अभेद्य किले जैसा है। यह पूरा परिसर अत्यंत ठोस और कठोर ग्रेनाइट चट्टानों को काटकर बहुत गहराई में स्थापित किया गया है। प्रकृति की इस भारी सुरक्षा के कारण यह ठिकाना किसी भी सामान्य हवाई बमबारी के सामने पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है।

अमेरिकी वायुसेना के शस्त्रागार में जीबीयू-57 जैसा अत्यंत भारी और घातक बंकर बस्टर बम मौजूद है, जिसे दुनिया भर में जमीन के भीतर बेहद गहरे और कंक्रीट से मजबूत किए गए सैन्य ठिकानों को तबाह करने के लिए ही विशेष रूप से तैयार किया गया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ की तलहटी में ग्रेनाइट की मोटी परतों के बीच बने इस ठिकाने को सिर्फ बंकर बस्टर गिराकर जमींदोज करना कतई आसान नहीं होगा। यदि अमेरिका कोई सीधा हमला करता भी है, तो वह सुरंगों के बाहरी प्रवेश द्वारों, बिजली की आपूर्ति लाइनों, वायु संचार यानी वेंटिलेशन प्रणाली और बाहर बने सहायक ढांचों को भारी क्षति पहुंचा सकता है। लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि पहाड़ की गहराई में सुरक्षित बैठे मुख्य केंद्र पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे।

इसके अलावा वाशिंगटन के सामने एक और गंभीर तकनीकी पेच यह होगा कि यदि वहां परमाणु उपकरण या संवर्धन सामग्री पहले से मौजूद है, तो उसे दोबारा सक्रिय होने से कैसे रोका जाए। सिर्फ प्रवेश द्वारों पर मिट्टी या मलबा गिरा देना इस खतरे को हमेशा के लिए समाप्त करने के मकसद को पूरा नहीं कर सकता।

## नतांज और फोर्दो के बाद नया भू-राजनीतिक केंद्र
ईरान का परमाणु इतिहास पहले भी नतांज और फोर्दो जैसे प्रमुख ठिकानों को लेकर भारी तनाव, तोड़फोड़ और हमलों का गवाह रहा है। इन पूर्ववर्ती केंद्रों पर हुए तमाम घटनाक्रमों के बाद अब सारा रणनीतिक ध्यान पिकएक्स माउंटेन पर आकर टिक गया है। यही प्रमुख कारण है कि ट्रंप प्रशासन इस स्थल को अपने संभावित सैन्य लक्ष्यों की सूची में प्रमुखता से शामिल बताता रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों से यह बात पूरी तरह साफ हो गई है कि अमेरिकी नजरें अब भी ईरान के उन सभी ठिकानों पर गड़ी हुई हैं, जिन्हें वह सामरिक दृष्टि से संवेदनशील मानता है।

हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि किसी दुर्गम ठिकाने को मिटाने की सार्वजनिक चेतावनी देना एक बात है और जमीन पर ठोस ग्रेनाइट के नीचे दबे परिसर को सैन्य रूप से पूरी तरह निष्प्रभावी करना बिल्कुल दूसरी बात है। पिकएक्स माउंटेन की अपार गहराई और चट्टानी मजबूती किसी भी संभावित सैन्य अभियान को दुनिया के सबसे जटिल ऑपरेशनों में बदल देती है।

इस पूरे मामले की सबसे गंभीर कड़ी यह है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को अब तक इस भूमिगत परिसर के भीतर जाने और इसकी वास्तविक जांच करने की अनुमति नहीं मिली है। इस स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण के अभाव में आज तक यह प्रमाणित नहीं हो सका है कि उन सुरंगों में कौन सी मशीनें रखी गई हैं, क्या वहां यूरेनियम संवर्धन की कोई सक्रिय प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, या फिर इस भारी-भरकम ढांचे को तैयार करने का अंतिम इरादा क्या है। ईरान लगातार यही दोहराता आया है कि उसकी संपूर्ण परमाणु गतिविधियां विशुद्ध रूप से नागरिक और शांतिपूर्ण उपयोग के लिए हैं, जबकि अमेरिका और उसके पश्चिमी साझीदार उसके भूमिगत निर्माणों को लेकर लगातार अविश्वास और आशंका जता रहे हैं।

## इसका आप पर असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते रणनीतिक तनाव और संभावित सैन्य टकराव के सीधे असर वैश्विक आपूर्ति और घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ते हैं।

- **भारत में प्रभाव:** खाड़ी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य अस्थिरता से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका सीधा असर भारत के घरेलू ईंधन बजट और माल ढुलाई की लागत पर पड़ेगा। आयात खर्च बढ़ने पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाती है।
- **वैश्विक बाजार में असर:** अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते गतिरोध से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जलमार्गों और ऊर्जा परिवहन में जोखिम पैदा होता है। इससे वैश्विक शेयर बाजारों में अनिश्चितता फैलती है और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की कीमतों में उछाल देखने को मिलता है।
- **प्रवासी भारतीयों पर प्रभाव:** पश्चिम एशिया में लाखों भारतीय कामगार और पेशेवर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। क्षेत्र में सैन्य टकराव की धमकियां सीधे तौर पर वहां काम कर रहे नागरिकों की सुरक्षा और सामान्य जीवन को प्रभावित करती हैं।
- **उड़ान मार्गों में बदलाव:** ईरान के हवाई क्षेत्र पर तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड़ानों के मार्गों को बदलना पड़ सकता है। उड़ानों का समय और ईंधन खर्च बढ़ने से भारत से यूरोप व पश्चिम के देशों के हवाई टिकटों की दरें महंगी हो सकती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
ईरान के पिकएक्स माउंटेन को लेकर ताजा तनाव अमेरिकी धमकियों, भूमिगत परमाणु संवर्धन की आशंकाओं और इस स्थल की अभेद्य भौगोलिक बनावट की वजह से सामने आया है।

- **डोनाल्ड ट्रंप की सीधी चेतावनी:** फ्लोरिडा में अप्रत्यक्ष वार्ता का जिक्र करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि ईरान के कुछ परमाणु ठिकानों से निपटना बाकी है और इस ठिकाने को तेजी से निशाना बनाया जा सकता है। इस सार्वजनिक बयान ने नतांज के पास स्थित इस पहाड़ी को सीधे वैश्विक चर्चा में ला दिया।
- **अभेद्य भूमिगत संरचना का निर्माण:** ईरान ने नतांज से दो किलोमीटर दूर स्थित इस पहाड़ के नीचे ठोस ग्रेनाइट को काटकर गहरी सुरंगें बनाई हैं। पश्चिमी विश्लेषकों का मानना है कि इसे यूरेनियम संवर्धन के ऐसे सुरक्षित केंद्र के रूप में ढाला जा रहा है जो हवाई हमलों से पूरी तरह सुरक्षित रह सके।
- **निरीक्षण और स्वतंत्र पुष्टि का अभाव:** अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने अब तक इन सुरंगों के भीतर का प्रत्यक्ष निरीक्षण नहीं किया है, जिससे यह साफ नहीं हो सका है कि अंदर सेंट्रीफ्यूज या संवर्धन सामग्री मौजूद है या नहीं। स्वतंत्र जानकारी की इसी कमी ने दोनों पक्षों के बीच अविश्वास और सैन्य आशंकाओं को और भड़का दिया है।

## सवाल-जवाब

### 1. पिकएक्स माउंटेन असल में कहां स्थित है?
यह पहाड़ी ईरान के इस्फहान प्रांत में स्थित है, जो नतांज परमाणु केंद्र से लगभग दो किलोमीटर दक्षिण और राजधानी तेहरान से करीब 220 किलोमीटर की दूरी पर है।

### 2. इस पहाड़ी को स्थानीय भाषा में किस नाम से जाना जाता है?
स्थानीय भाषा में इसे कूह-ए कोलांग गज ला कहा जाता है, जहां कोलांग का अर्थ कुदाल या पहाड़ खोदने वाले औजार से जुड़ा है।

### 3. डोनाल्ड ट्रंप ने इस पहाड़ी ठिकाने को लेकर क्या बयान दिया है?
डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में कहा कि ईरान के एक-दो परमाणु ठिकानों से अभी निपटना बाकी है और पिकएक्स माउंटेन को बहुत तेजी से निशाना बनाया जा सकता है।

### 4. पहाड़ के भीतर किस तरह का ढांचा तैयार किया गया है?
पहाड़ के भीतर मजबूत ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे गहरी सुरंगों का एक बड़ा परिसर बनाया गया है, जिसमें प्रवेश के लिए दो अलग-अलग रास्ते मौजूद हैं।

### 5. पश्चिमी देशों को इस ठिकाने से क्या मुख्य आशंका है?
पश्चिमी देशों को आशंका है कि ईरान यहां यूरेनियम संवर्धन का ऐसा सुरक्षित भूमिगत केंद्र बना रहा है जिसे सामान्य हवाई हमलों से नष्ट नहीं किया जा सकता।

### 6. उपग्रह तस्वीरों की 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में क्या देखा गया?
इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी की रिपोर्ट के अनुसार, सुरंगों के प्रवेश द्वारों पर मिट्टी के अवरोध मौजूद हैं और वहां फिलहाल नियमित परिचालन या बड़े निर्माण के संकेत नहीं हैं।

### 7. क्या जीबीयू-57 जैसे बंकर बस्टर बम इस ठिकाने को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारी बंकर बस्टर बम सुरंगों के प्रवेश द्वारों और वेंटिलेशन को नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन ग्रेनाइट की अत्यधिक गहराई में मौजूद ढांचे को पूरी तरह नष्ट करना बहुत कठिन है।

### 8. क्या अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने इस जगह की जांच की है?
नहीं, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने अब तक इस भूमिगत परिसर का कोई निरीक्षण नहीं किया है।

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