# ईरानी नाकेबंदी में 250 दिनों से समंदर में तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन के सैनिकों में बढ़ा खुदकुशी का खतरा, परिजनों ने सैन डिएगो में जताया विरोध

> पश्चिम एशिया में 9 महीनों से तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर सवार करीब 5,000 सैनिक भयंकर मानसिक तनाव और बुनियादी सुविधाओं के अकाल का सामना कर रहे हैं, जिससे जहाज पर आत्महत्या की कोशिशें बढ़ गई हैं।

**Type:** article · **Category:** अमेरिका · **Published:** 2026-08-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/america/irani-nakebndi-men-250-dinon-se-samndara-men-tainata-uss-abraham-lincoln-ke-sainikon-men-barha-khudakushi-ka-khatara-parijanon-ne--16099 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूएसएस अब्राहम लिंकन, अमेरिकी नौसेना, ईरान अमेरिका तनाव, सैन डिएगो, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय, माइक लेविन, पीट हेगसेथ

पश्चिम एशिया में ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी में जुटे अमेरिकी नौसेना के सबसे शक्तिशाली विमानवाहक पोतों में से एक यूएसएस अब्राहम लिंकन पर हालात बेहद विस्फोटक हो चुके हैं। पिछले 9 महीनों से लगातार समंदर में गश्त लगा रहे इस युद्धपोत पर तैनात करीब 5,000 अमेरिकी सैनिक भयंकर डिप्रेशन और मानसिक बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। बिना जमीन पर कदम रखे लगातार 250 दिन पूरे कर चुके इस जहाज पर तैनानी की अवधि बार-बार बढ़ाई जाने से सैनिकों का धैर्य जवाब दे चुका है। नौसेना के आंतरिक सूत्रों और अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, जहाज पर डिप्रेशन का स्तर इस हद तक बढ़ गया है कि कई जांबाज सैनिकों ने समंदर में छलांग लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की है। आधुनिक नौसैनिक इतिहास में किसी भी अमेरिकी युद्धपोत का बिना बंदरगाह पर रुके इतने लंबे समय तक समंदर में रहना एक खौफनाक रिकॉर्ड बन चुका है।

## सैन डिएगो में परिजनों की टाउन हॉल बैठक और दिल दहलाने वाले संदेश
नौसेना के अधिकारियों ने जब सैन डिएगो में परेशान सैनिकों के परिवारों के साथ एक टाउन हॉल बैठक आयोजित की, तो वहां का माहौल बेहद गमगीन और तनावपूर्ण हो गया। इस बैठक में पहुंचे करीब 200 परिजनों ने आला अधिकारियों के सामने अपनी भड़ास निकाली और अपनों की जान बचाने की गुहार लगाई। परिजनों ने आरोप लगाया कि नौसेना प्रशासन अपने ही सैनिकों के जीवन और मानसिक स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा है।

टाउन हॉल बैठक के दौरान एक सैनिक की पत्नी ने रोते हुए बताया कि उसके पति ने जहाज से एक दर्दनाक मैसेज भेजा था। सैनिक ने अपने संदेश में लिखा था कि अब और बर्दाश्त नहीं होता, दुआ करो कि कल सुबह मेरी आंख न खुले। वहीं एक अन्य महिला ने सीधे एक्टिंग नेवी सेक्रेटरी हंग काओ के मुंह पर कहा कि नौसेना ने अपने सैनिकों और उनके परिवारों का भरोसा पूरी तरह से तोड़ दिया है।

नेवी टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एनाबेले लोमा नाम की महिला ने खुलासा किया कि लगातार ड्यूटी अवधि बढ़ाए जाने के कारण उनके पति मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं। इसी भयंकर तनाव के बीच उनके पति ने समंदर में कूदकर जान देने की कोशिश की थी। एनाबेले ने बताया कि उनके पति बुरी तरह डरे हुए हैं और उन्हें खौफ है कि इस मानसिक स्थिति के कारण उनका 13 साल का नौसैनिक करियर पल भर में तबाह न हो जाए। बैठक में एक अन्य महिला ने बताया कि उनके पति ने जहाज पर अपने एक साथी जवान को समंदर में छलांग लगाने से ठीक पहले पकड़कर बचा लिया।

## सड़ा हुआ खाना और बंद शौचालय: युद्धपोत पर बुनियादी सुविधाओं का अकाल
युद्धपोत पर केवल मानसिक स्वास्थ्य का संकट ही नहीं है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं का भी भयंकर अकाल पड़ा हुआ है। कैलिफोर्निया से अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य माइक लेविन ने सोशल मीडिया पर इस विशालकाय परमाणु संचालित जहाज की बदहाली का खुलासा करते हुए लिखा कि पिछले 5 महीनों से ईरान के खिलाफ मोर्चा संभाले इस युद्धपोत की स्थिति किसी नरक जैसी बन चुकी है।

माइक लेविन के मुताबिक, यूएसएस अब्राहम लिंकन पर शौचालय पूरी तरह टूट चुके हैं और काम नहीं कर रहे हैं। बाथरूमों में काई जम चुकी है और हफ्तों से गरम पानी की आपूर्ति बंद है। कपड़े धोने की मशीनें महीनों से ठप पड़ी हैं, जिससे सैनिक गंदे कपड़ों में रहने को मजबूर हैं। सैनिकों को भोजन के नाम पर सिर्फ आधा कप चावल और दो रोटियां दी जा रही हैं। इसके अलावा साबुन, टूथपेस्ट और डिओड्रेंट जैसी रोजमर्रा की बेहद जरूरी चीजों की भारी कमी हो गई है।

इराक और अफगानिस्तान युद्ध के अनुभवी पूर्व सैनिक तथा अमेरिकी सांसद जेसन क्रो ने भी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि यूएसएस अब्राहम लिंकन पर तैनात सैनिकों और उनके परिवारों पर मानसिक दबाव हर बीतते हफ्ते के साथ खतरनाक और विनाशकारी स्तर पर पहुंच रहा है।

## सैन डिएगो से रवाना होकर पश्चिम एशिया में कैसे फंसे ये सैनिक?
यूएसएस अब्राहम लिंकन पिछले साल 21 नवंबर को सैन डिएगो बंदरगाह से रवाना हुआ था। मूल योजना के अनुसार इसे प्रशांत महासागर के क्षेत्र में तैनात किया जाना था। हालांकि, जैसे ही पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजराइल की ईरान के साथ सैन्य तनातनी और जंग शुरू हुई, वाशिंगटन ने इस युद्धपोत का मार्ग बदलकर इसे तुरंत पश्चिम एशिया भेज दिया।

तभी से लेकर अब तक, यानी पिछले 9 महीनों के लंबे अंतराल में, इस जहाज पर मौजूद 5,000 से अधिक सैनिकों को जमीन पर पैर रखने का अवसर सिर्फ दो बार मिला। पहली बार दिसंबर में गुआम में और दूसरी बार जुलाई में ओमान में, वह भी केवल दो-दो दिनों के लिए। इस पूरे मिशन को मई के महीने में ही समाप्त होना था, लेकिन ईरान के साथ जारी गतिरोध के कारण वाशिंगटन में बैठे सैन्य रणनीतिकारों ने बार-बार सैनिकों की स्वदेश वापसी के आदेश को टाल दिया।

## रक्षा मंत्री का संवेदनहीन बयान और अमेरिकी सांसद का तीखा पलटवार
जब जहाज पर बदहाली, गंदगी और सड़ते हुए भोजन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, तो मीडिया ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से इस विषय पर तीखे सवाल पूछे। हालांकि, रक्षा मंत्री ने सैनिकों की इस गंभीर और अमानवीय स्थिति को संवेदनशीलता से लेने के बजाय पूरी रिपोर्ट को सीधे तौर पर फेक न्यूज बताकर खारिज कर दिया।

रक्षा मंत्री के इस रुख पर सांसद माइक लेविन ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि इन जवानों ने देश की रक्षा के लिए अपनी जान दांव पर लगाने की कसम खाई है। ऐसे में देश का प्राथमिक कर्तव्य है कि उन्हें कम से कम साफ पीने का पानी, चालू शौचालय और दो वक्त का सम्मानजनक भोजन उपलब्ध कराए। लेविन ने कहा कि रक्षा मंत्री बुनियादी व्यवस्थाएं संभालने में नाकाम रहे हैं और उल्टे सैनिकों के पीड़ित परिवारों को झूठा ठहरा रहे हैं।

## नौसेना जहाजों पर खुदकुशी के पीछे की वैज्ञानिक सच्चाई
समंदर में तैनात नौसैनिकों के बीच डिप्रेशन और खुदकुशी की बढ़ती दर पर पिछले साल एक वैज्ञानिक अध्ययन प्रकाशित हुआ था। इस अध्ययन में पाया गया कि युद्धपोतों पर चौबीसों घंटे बजने वाला भारी शोर, नींद की गंभीर कमी, प्राकृतिक धूप न मिलना और जहाज पर योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की अनुपस्थिति सैनिकों को आत्महत्या के मुहाने पर धकेल देती है।

उस सर्वे में शामिल लगभग 50 प्रतिशत सैनिकों ने स्वीकार किया था कि जब वे समंदर के बीच अत्यधिक मानसिक तनाव से गुजरते हैं, तो उन्हें नौसेना प्रशासन से कोई मदद नहीं मिलती। यूएसएस अब्राहम लिंकन का यह मामला अब केवल एक जहाज की समस्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि युद्ध जीतने की होड़ में कैसे सैन्य बल अपने ही सैनिकों के जीवन को जोखिम में डाल रहे हैं।

## इसका आप पर असर
**अंतरराष्ट्रीय स्तर पर:** पश्चिम एशिया में लंबे समय तक अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती और ईरानी पोर्ट्स की नाकेबंदी से क्षेत्रीय सैन्य तनाव और वैश्विक समुद्री व्यापार पर असर पड़ सकता है।

**सैन्य और मानवीय स्तर पर:** युद्ध के मोर्चे पर सैनिकों की लगातार तैनाती बढ़ाने से उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर और खतरनाक दुष्प्रभावों को उजागर करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. यूएसएस अब्राहम लिंकन के सैनिकों में डिप्रेशन क्यों बढ़ रहा है?
पिछले 9 महीनों से लगातार समंदर में तैनाती, 250 दिनों तक बिना जमीन पर पैर रखे रहने और वापसी टलने के कारण सैनिक भयंकर मानसिक तनाव और डिप्रेशन से जूझ रहे हैं।

### 2. युद्धपोत पर किस तरह की बुनियादी सुविधाओं की कमी है?
जहाज पर शौचालय टूटे हुए हैं, गर्म पानी बंद है, कपड़े धोने की मशीनें खराब हैं और सैनिकों को सिर्फ आधा कप चावल और दो रोटियां भोजन में मिल रही हैं।

### 3. सैन डिएगो में परिजनों की बैठक में क्या हुआ?
करीब 200 परिजनों ने नौसेना अधिकारियों के साथ टाउन हॉल बैठक में विरोध जताया और अपने परिजनों की मानसिक स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए उनकी सुरक्षित वापसी की मांग की।

### 4. अमेरिकी रक्षा मंत्री ने इन रिपोर्टों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने युद्धपोत पर खराब स्थिति और सड़ते खाने की रिपोर्टों को खारिज करते हुए उन्हें 'फेक न्यूज' करार दिया।

### 5. यूएसएस अब्राहम लिंकन को मूल रूप से कहां तैनात किया जाना था?
इस विमानवाहक पोत को 21 नवंबर को सैन डिएगो से प्रशांत महासागर में तैनाती के लिए भेजा गया था, लेकिन ईरान से तनाव के बाद इसे पश्चिम एशिया की तरफ मोड़ दिया गया।

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