जब नरेंद्र मोदी के हैंडशेक के आगे लाचार हो गए डोनाल्ड ट्रंप, जॉन बोल्टन ने खोली कूटनीति की पोल डोनाल्ड ट्रंप के मशहूर 'डोमिनेंस गेम' और इनवर्ड यांक हैंडशेक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मजबूत पकड़ से मात दी थी। पूर्व एनएसए जॉन बोल्टन ने एक साक्षात्कार में इस वाकये को याद करते हुए बताया कि कैसे पीएम मोदी की मजबूत ग्रिप से अमेरिकी राष्ट्रपति की सांसें फूल गई थीं। कूटनीति केवल बंद कमरों की गंभीर वार्ताओं, संधियों या बयानों तक सीमित नहीं होती है, बल्कि वैश्विक राजनीति के कई बड़े मुकाबले केवल एक साधारण हैंडशेक से ही जीत लिए जाते हैं। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक ऐसी शैली थी जिससे दुनिया भर के दिग्गज नेता असहज हो जाते थे। जब भी वह किसी राष्ट्राध्यक्ष से हाथ मिलाते थे, तो उसे अपनी ओर जोरदार तरीके से खींच लेते थे, जिसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ‘ट्रंपशेक’ या ‘डोमिनेंस गेम’ का नाम दिया गया था। हालांकि, जब डोनाल्ड ट्रंप का सामना भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुआ, तो यह पूरा माइंड गेम उल्टा पड़ गया और अमेरिका की यह रणनीति फेल हो गई। ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने इस बात का खुलासा किया है कि किस प्रकार पीएम मोदी ने इस तकनीक को उनके ही अंदाज में करारा जवाब दिया। जॉन बोल्टन का बड़ा खुलासा और पुराना वाकया एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया चैनल के विशेष कार्यक्रम ‘न्यू ऑर्डर’ के दौरान चर्चा करते हुए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने एक बेहद पुराना और दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार डोनाल्ड ट्रंप से इतनी मजबूती के साथ हाथ मिलाया था कि ट्रंप की सांसें तक फूलने लगी थीं। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि पीएम मोदी शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्तरों पर कितने दृढ़ और मजबूत हैं। बोल्टन का यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आते ही पूरी दुनिया में तेजी से वायरल हो गया। जो डोनाल्ड ट्रंप अपनी आक्रामक बॉडी लैंग्वेज और सख्त ग्रिप के बल पर बड़े-बड़े वैश्विक नेताओं को भी असहज स्थिति में डाल देते थे, वह पीएम मोदी के एक ही मजबूत हैंडशेक के सामने पूरी तरह बेबस नजर आए। क्या था डोनाल्ड ट्रंप का इनवर्ड यांक और डोमिनेंस गेम? जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका की सत्ता में आए, तब उनकी शारीरिक भाषा और अभिवादन के तरीके को लेकर पश्चिमी मीडिया और विशेषज्ञों के बीच लंबी चर्चाएं शुरू हुई थीं। ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने उनकी इस हाथ मिलाने की कला को ‘ट्रंपशेक’ की संज्ञा दी, जबकि ‘टाइम’ पत्रिका ने इसे वर्चस्व की जंग करार दिया। सीएनएन के साथ एक बातचीत के दौरान बॉडी लैंग्वेज विशेषज्ञ क्रिस उलरिच ने यह स्पष्ट किया था कि ट्रंप की यह चाल सामने वाले व्यक्ति का संतुलन पूरी तरह से बिगाड़ देती थी। सीबीएस न्यूज को दिए गए साक्षात्कार में एक अन्य विशेषज्ञ डॉन खोरी ने इसे एक पावर-मूव बताया था। जब आप किसी व्यक्ति को अपनी तरफ खींच लेते हैं, तो आप उसके व्यक्तिगत दायरे में जबरन घुसपैठ करते हैं और उसे यह महसूस कराते हैं कि इस कमरे के असली बॉस आप ही हैं। जब दुनिया के दिग्गज नेता भी पड़े ट्रंप के आगे फीके वर्ष 2017 और उसके बाद के समय में डोनाल्ड ट्रंप के इन हैंडशेक्स से जुड़े कई वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुए थे, जहां दुनिया के तमाम ताकतवर नेता उनके सामने बेबस नजर आए थे। साल 2017 में जब जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे व्हाइट हाउस पहुंचे थे, तब ट्रंप ने पूरे 19 सेकंड तक उनका हाथ पकड़कर खींचे रखा था। हाथ छूटने के बाद शिंजो आबे के चेहरे के भाव और उनकी आंखें यह साफ बयां कर रही थीं कि वह कितने असहज हो चुके थे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस और सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस नील गोर्सच को भी ट्रंप ने अपनी इस हरकत से कई बार हैरान किया था। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ट्रंप के कंधे पर हाथ रखकर उनकी इस खींचतान का मुकाबला करने की कोशिश की थी। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप की ग्रिप का डटकर सामना किया और उनके हाथ को इतनी ताकत से दबाया कि ट्रंप के अंगूठे पर सफेद निशान तक उभर आए थे। पीएम मोदी की आयरन ग्रिप और भारत का पावर-मूव लेकिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बारी आई, तो डोनाल्ड ट्रंप का यह डोमिनेंस गेम पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ। प्रधानमंत्री मोदी अपनी दृढ़ और आक्रामक कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, चाहे वह वैश्विक नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत करना हो या फिर बेहद मजबूती के साथ हाथ मिलाना हो। जब ट्रंप ने पीएम मोदी के साथ अपना पुराना इनवर्ड यांक वाला दांव आजमाने का प्रयास किया, तो पीएम मोदी ने न केवल अपनी स्थिति को पूरी तरह संभाले रखा, बल्कि ऐसी लोहे जैसी मजबूत पकड़ यानी आयरन ग्रिप दिखाई कि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति की सांसें फूल गईं। यह केवल दो शीर्ष नेताओं के बीच हाथ मिलाने भर का मामला नहीं था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर भारत के स्वाभिमान और उसकी बढ़ती ताकत का एक मजबूत प्रदर्शन था। बॉडी लैंग्वेज से लेकर कूटनीति तक के मायने वैश्विक राजनीति में नेता हमेशा शब्दों से ज्यादा अपनी शारीरिक भाषा के जरिए बड़े संदेश देते हैं। जॉन बोल्टन की तरफ से किया गया यह खुलासा मुख्य रूप से तीन बड़े रणनीतिक संदेश दुनिया को देता है। पहला संदेश यह है कि महाशक्ति अमेरिका के सामने भारत अब किसी छोटे साझीदार के रूप में नहीं, बल्कि एक बराबरी की ताकत के तौर पर खड़ा है। दूसरा संदेश मनोवैज्ञानिक नियंत्रण से जुड़ा है, जहां कूटनीति के मंच पर जब आप प्रतिद्वंद्वी के माइंड गेम को उसी के तरीके से हरा देते हैं, तो बातचीत की मेज पर आपकी स्थिति अपने आप सुदृढ़ हो जाती है। तीसरा संदेश मजबूत नेतृत्व को दर्शाता है, क्योंकि दुनिया हमेशा आत्मविश्वासी और सुदृढ़ नेताओं का सम्मान करती है। प्रधानमंत्री मोदी का यह हैंडशेक नए भारत की एक उभरती हुई वैश्विक ताकत और उसकी किसी के आगे न झुकने वाली विदेश नीति का प्रमाण है। जो ट्रंप अपने इनवर्ड यैंक के जरिए पूरी दुनिया को झुकाने की जुगत में रहते थे, पीएम मोदी के एक ही हैंडशेक ने यह स्पष्ट कर दिया कि नया भारत किसी भी प्रकार के दबाव में आने वाला नहीं है। इसका आप पर असर यह खबर भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक रिश्तों और वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद को दर्शाती है, जिसका आम नागरिकों के जीवन पर कूटनीतिक और रणनीतिक प्रभाव पड़ता है। • भारत में: यह घटना देशवासियों में राष्ट्रीय गौरव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के मजबूत होते रसूख को दर्शाती है। इससे वैश्विक मंच पर भारत की एक निडर और बराबरी की ताकत वाली छवि को बल मिलता है। • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर: दुनिया भर के देशों और नेताओं के बीच भारत के नेतृत्व की एक मजबूत और आत्मविश्वासी छवि स्थापित होती है। इससे कूटनीतिक वार्ताओं और समझौतों के दौरान देश का पलड़ा भारी रहता है। ऐसा क्यों हुआ यह घटना वैश्विक राजनीति में शारीरिक भाषा के महत्व और नेताओं के बीच मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने की प्रवृत्ति को उजागर करती है। ट्रंप द्वारा अपनाए जाने वाले आक्रामक तरीकों का मुकाबला करने के लिए भारत के नेतृत्व ने अपनी मजबूत और अडिग स्थिति का परिचय दिया। • डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति: अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी आक्रामक शारीरिक भाषा और इनवर्ड यांक तकनीक के जरिए दूसरे नेताओं को असहज कर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश करते थे। इस तकनीक का इस्तेमाल उन्होंने कई वैश्विक नेताओं के खिलाफ किया था। • नेतृत्व की शैली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ और मजबूत व्यक्तित्व शैली ने इस आक्रामक माइंड गेम को पूरी तरह से विफल कर दिया। मोदी ने अपनी मजबूत ग्रिप के जरिए यह साबित किया कि भारतीय नेतृत्व किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकता है। • कूटनीतिक संदेश: इस वाकये ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बराबरी के दर्जे और मानसिक नियंत्रण के महत्व को रेखांकित किया। बोल्टन के खुलासे ने यह स्पष्ट किया कि वैश्विक मंच पर भारत अब एक जूनियर पार्टनर नहीं बल्कि एक समान शक्ति है। सवाल-जवाब 1. डोनल्ड ट्रंप के हैंडशेक करने के तरीके को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में क्या कहा जाता था? डोनल्ड ट्रंप के हैंडशेक करने के तरीके को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ‘ट्रंपशेक’ या ‘डोमिनेंस गेम’ कहा जाता था। 2. जॉन बोल्टन कौन हैं और उन्होंने किस शो में यह वाकया याद किया? जॉन बोल्टन डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं और उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया चैनल के खास शो ‘न्यू ऑर्डर’ में इस वाकये को याद किया। 3. ट्रंप के हैंडशेक के दौरान किस जापानी प्रधानमंत्री को असहज होना पड़ा था? वर्ष 2017 में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे को ट्रंप के 19 सेकंड लंबे हैंडशेक के दौरान काफी असहज होना पड़ा था। 4. पीएम मोदी के साथ हैंडशेक को लेकर क्या खुलासा हुआ है? जॉन बोल्टन ने खुलासा किया कि पीएम मोदी ने ट्रंप से इतनी मजबूती से हाथ मिलाया कि ट्रंप की सांसें तक फूल गई थीं। 5. ट्रंप की इस खींचने वाली तकनीक को क्या नाम दिया गया था? ट्रंप की इस तकनीक को ‘इनवर्ड यांक’ (Inward Yank) कहा जाता था, जिससे वह सामने वाले का बैलेंस बिगाड़ देते थे। 6. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप के हैंडशेक का मुकाबला कैसे किया था? इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप की ग्रिप का कड़ा मुकाबला करते हुए उनके हाथ को इतनी जोर से दबाया था कि ट्रंप के अंगूठे पर सफेद निशान बन गए थे। https://trendkia.com/america/jaba-narendra-modi-ke-haindasheka-ke-age-lachara-ho-gae-donald-trump-john-bolton-ne-kholi-kutaniti-ki-pola-47075 TrendKia — Har trend, sabse pehle.